हर तरफ धुआँ-धुआँ, Sambhu Border Kisan Andolan Live, CJI DY Chandrachud Farmer Protest पर क्या बोले? - instathreads

हर तरफ धुआँ-धुआँ, Sambhu Border Kisan Andolan Live, CJI DY Chandrachud Farmer Protest पर क्या बोले?

एमएसपी है एमएसपी था एमएसपी रहेगा आज पूरा
हिंदुस्तान जानता है अरे पूरी दुनिया भी
मानती है कि मोदी की गारंटी मतलब गारंटी
पूरा होने की भी
गारंटी नमस्कार मैं हूं प्रवीण गौतम जिन

किसानों के बेटे देश की रक्षा के लिए सीमा
पर दुश्मन के गोलों का सामना करते हैं उन
किसानों पर आंसू गैस के गोले बरसाने की
शुरुआत हो गई है पीएम मोदी कहते हैं कि

ड्रोन के इस्तेमाल से खेती में एक क्रांति
आएगी यहां पर ड्रोन से खेती करने वालों पर
गोले बरसाए जा रहे हैं हरियाणा के अंबाला
में शंभू बॉर्डर पर धुआं धुआं हो गया
किसान दिल्ली कुछ कर रहे थे तो किसानों पर

किस तरह की कार्रवाई की गई है तस्वीरें आप
देख सकते हैं ड्रोन से आंसू गैस के गोले
छोड़े गए हैं भारी संख्या में एक के बाद
एक गोले छोड़े गए तो देखिए कैसा मंजर हुआ

है शंभू बॉर्डर पर जहां पर किसानों को
रोकने के लिए आंसू गैस के गोलों का
इस्तेमाल कि किया गया है अब सवाल यह उठता
है कि सरकार को जब आंसू गैस के गोले

बरसाने हैं तो फिर किसानों के साथ मीटिंग
क्यों की जा रही है कल किसानों के साथ
मीटिंग हुई उसमें भी किसानों ने यह मुद्दा
उठाया था कि एक तरफ आप मीटिंग करते हैं
दूसरी तरफ आप हमारे साथ ऐसा व्यवहार कर

रहे हैं कई जिलों में इंटरनेट बंद कर देते
हैं किसानों को रोकने के लिए सड़कों पर
कीले बिछाई जाती हैं किसानों को रोकने के
लिए उनके

है दूसरी तरफ आप कहते हैं कि हम किसानों
को सुनने के लिए तैयार हैं तो किसानों ने
मांग की थी कि सड़कों पर सामान्य हालात
किए जाएं लेकिन सरकार ने और ज्यादा पुख्ता

बंदोबस्त कर दिए दोस्तों इस तरह की
तस्वीरें पिछले किसान आंदोलन की यादों को
ताजा कर देती हैं जब पिछली बार भी किसानों
को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने इसी तरह

के हथकंडे अपनाए थे कई किसानों पर केस
दर्ज किए गए लाठी चार्ज किया गया पानी की
बो छारे छोड़ी गई और अब एक बार फिर इसकी
शुरुआत हो गई है एक तरफ पुलिस बल से
किसानों को रोकने की कोशिश की जा रही है

तो कुछ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में चीफ
जस्टिस के नाम भी एक चिट्ठी लिखी जिस पर
चीफ जस्टिस का भी एक बयान सामने आया है उस
चिट्ठी में क्या लिखा गया सुप्रीम कोर्ट
बार एसोसिएशन ने चिट्ठी में क्या लिखा जरा

वो देखिए आप सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन
ने कहा कि अगर किसानों की सारी मांग सही
है तो भी उन्हें आम पब्लिक की जिंदगी
मुश्किल में डालने का कोई अधिकार नहीं है
यह सही समय है कि सुप्रीम कोर्ट इसका

स्वयं संज्ञान ले और किसानों को अराजकता
फैलाने और पब्लिक को परेशानी में डालने से
रोके उनके विरोध करने का अधिकार इस बात की
इजाजत नहीं देता कि आम आदमी की जिंदगी को
मुश्किल में डाला

जाए बार एसोसिएशन ने किसानों के दिल्ली
चलो मार्च को स्वतः संज्ञान लेकर एक्शन
लेने का अनुरोध किया था बार एसोसिएशन ने
सीजीआई चंद्रचूर से अनुरोध किया कि

किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण जो
वकील कोर्ट में पेश ना हो पाएं अगर कोई
वकील नाकेबंदी की वजह से अदा अदालत नहीं
पहुंच पाता है तो उसे गैर हाजिर नहीं माना
जाना चाहिए यानी सुप्रीम कोर्ट बार

एसोसिएशन के वकील कहते हैं कि किसान
आंदोलन की वजह से पब्लिक को परेशानी का
सामना करना पड़ रहा है और भविष्य में और
भी ज्यादा करना पड़ेगा इसीलिए चीफ जस्टिस
को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए लेकिन

दोस्तों सवाल यह उठता है कि सड़कें रोकने
का काम कौन कर रहा है क्या किसानों ने
कहीं पर सड़कें जाम करने का काम किया है
किसानों के ट्रैक्टर जहां से भी आ रहे हैं
एक लाइन में चलने का काम कर रहे हैं है

ताकि पब्लिक को परेशानी ना हो सड़कें
रोकने का काम कौन कर रहा है दिल्ली से
लेकर हरियाणा के तमाम शहरों में सड़कें
रोकने का काम हरियाणा पुलिस कर रही है

हरियाणा सरकार कर रही है सड़कों पर रास्ते
बंद पुलिस प्रशासन ने किए हैं किसानों ने
कहीं भी सड़क जाम करने का अब तक कोई काम
नहीं किया है दोस्तों पिछले आंदोलन में भी
सड़कें बंद करने का काम दिल्ली पुलिस ने

किया था ना कि किसानों ने किया था इस बार
भी किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात कर
रहे रहे हैं लेकिन उन पर आंसू गैस के गोले
छोड़े जा रहे हैं और आम पब्लिक में यह

सेंटीमेंट है कि दिल्ली एनसीआर में जो
परेशानी हो रही है वह किसानों की वजह से
हो रही है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में जब
यह मामला पहुंचा चिट्ठी सामने आई तो
सीजीआई का भी एक बयान सामने आया है सीजेआई

ने वकीलों को जवाब देते हुए कहा कि अगर
किसी भी वकील को आवाजाही की वजह से दिक्कत
हो रही है तो हम उस हिसाब से समय में
बदलाव करेंगे अगर ट्रैफिक की समस्या आती
है तो आप मुझे बताइए सुप्रीम कोर्ट में

कामकाज उसी हिसाब से किया जाएगा किसान
आंदोलन के बारे में चीफ जस्टिस ने अभी कोई
टिप्पणी नहीं की है दोस्तों अब सवाल यह
उठता है कि जिस बात को लेकर पब्लिक को
परेशान करने का आरोप लगाया जा रहा है क्या

किसानों की वह मांग गैर वाजिब है किसान
मुख्य रूप से एमएसपी को अनिवार्य करने की
मांग कर रहे हैं कानून बनाने की मांग कर
रहे हैं बीजेपी नेताओं ने प्रचार शुरू कर

दिया है कि विपक्षी नेताओं के बहकावे में
आकर इस तरह आंदोलन करने पर उतारो हैं
किसान लेकिन एमएसपी की जो मांग है मुख्य
रूप से किस बड़े नेता ने इसको सबसे पुरजोर
तरीके से उठाया उसका चेहरा हम आपको दिखाते

हैं जरा देखिए दोस्तों यह तस्वीर आप देख
सकते हैं उसमें वह चेहरे हैं जिन्होंने
एमएसपी को लेकर पुरजोर तरीके से आवाज उठाई
2011 की तस्वीर है इधर प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह है इधर मुख्यमंत्री नरेंद्र

मोदी हैं तब के गुजरात के मुख्यमंत्री और
एमएसपी को लेकर आवाज उठाने वाले मनमोहन
सिंह नहीं है खुद मुख्यमंत्री नरेंद्र
मोदी ने य आवाज उठाई थी 2011 की यह खबर है
कंज्यूमर अफेयर्स वर्किंग ग्रुप के

चेयरमैन और गुजरात के तब के मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी ने यह अपनी सिफारिश की
रिपोर्ट तब के प्रधानमंत्री को सोपी थी और
उसमें कहा था कि एमएसपी को देश में

अनिवार्य करना चाहिए किसानों को खुशहाल
बनाने के लिए एमएसपी को लेकर कानून बनाकर
उसे अनिवार्य करना चाहिए तो सबसे पुरजोर
तरीके से आवाज उठाई थी नरेंद्र मोदी ने जो
आज देश के प्रधानमंत्री

हैं पीएम मोदी दावा करते हैं कि उनकी
गारंटी की दुनिया में चर्चा होती है देश
दुनिया में विदेशों में भारतीय इसकी चर्चा
करते हैं तो तब आप एक रिपोर्ट बनाकर तब के

प्रधानमंत्री को सौंपते हैं एमएसपी की बात
करते हैं तो आज अपने वादे को अपनी सिफारिश
को क्यों भूल गए किसानों से आपने कई
मीटिंग का दौर किया अनेकों मंत्रियों ने

मीटिंग की पीएम नरेंद्र मोदी को छोड़कर
सबने मीटिंग कर डाली उस मीटिंग का आखिरकार
नतीजा क्या निकला जब पीएम मोदी कहा करते
थे कि एमएसपी का कानून होना चाहिए तो

आखिरकार सरकार को बनाने से रोक कौन सकता
है पीएम मोदी ने कई ऐतिहासिक फैसले किए
हैं तो अपनी विचारधारा के मुताबिक ही तो
फैसला लेना है ऐसे में नरेंद्र मोदी जिस

बात को सही मानते थे अगर उसको कानून का
रूप दे देते हैं तो फिर किसानों को आंदोलन
की जरूरत ही क्या है दोस्तों आप इस पूरे
मुद्दे पर क्या सोचते हैं मुख्यम मंत्री
नरेंद्र मोदी की जो सोच थी जो मुख्यमंत्री

नरेंद्र मोदी मनमोहन सिंह से उम्मीद करते
थे कि एमएसपी को लेकर कानून बनाया जाए
प्रधानमंत्री बनने के बाद वह नरेंद्र मोदी
आखिरकार अपनी मांग को अपने वादे को क्यों

भूल गए आप इस पूरे मुद्दे पर क्या सोचते
हैं कि क्या किसानों के साथ ऐसा व्यवहार
करना चाहिए क्या देश के किसानों पर आंसू
गैस के गोले बरसाने चाहिए ड्रोन का

इस्तेमाल पीएम मोदी ने कहा था कि खेती
करने के लिए किया जाएगा लेकिन आज किसानों
पर ही न से गोले बरसाए जा रहे हैं तो
लोकतंत्र के लिए अच्छी तस्वीर नहीं है और
देश के नागरिकों को भी समझना चाहिए कि

इससे पहले भी किसान आंदोलन हुए हैं देश की
संसद तक महेंद्र सिंह तकत पहुंच गए थे
लेकिन क्या तब की सरकारों ने ऐसा व्यवहार
किया था आप इस पूरे मुद्दे पर क्या सोचते

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