हैरान रह जाएंगे जब देखेंगे कैसे बनते हैं पानी पर पुल! | How are Bridges built on Water? - instathreads

हैरान रह जाएंगे जब देखेंगे कैसे बनते हैं पानी पर पुल! | How are Bridges built on Water?

कर दो
हेलो दोस्तों क्या आप भी उन्हें जिज्ञासु
लोगों में से है जो किसी कमाल के
इंजीनियरिंग मार्वल को देखकर यह सोचने पर
मजबूर हो जाते हैं कि एंजीनियर्स और
साइंटिस्ट यह मुमकिन कैसे कर दिखाया अगर

हां तो पानी पर बने यह शानदार कुल तो आपका
ध्यान पक्का ही हिस्से होंगे कभी नदी पर
तो कभी समुंदर के बीच जैसे सैकड़ों चैलेंज
से पाकर इन नया विशालकाय पुतलों को बनाया
जाता है जाने के मिलकर आज के इस वीडियो

में नमस्कार और स्वागत है आपका समिति का
लाइन पर एक बार फिर
हेलो दोस्तों हम तब यह तो जानते ही है कि
पानी पर बने यह फूल हमारी जीवन का एक अहम
हिस्सा है क्योंकि अगर यह ब्रिज न होते तो
शायद कई गांव कस्बे और शहर एक दूसरे से

कटे ही रहते इन ब्रिटिश की मदद से हम पानी
के ऊपर से निकल कर अपना समय और इन दोनों
ही बचा लेते हैं लेकिन इतना काम आने के
अलावा दुनिया भर में चलती नदी पर बने ऐसे
कई वृद्ध है जो मशहूर है कुछ अपनी

इंजीनियरिंग के लिए तो कुछ उनके आकार और
कुछ अपनी हिस्टॉरिकल इंर्पोटेंस के चलते
मेहंदी डिजाइन के आधार पर पानी पर बनने
वाले यह फूल कई तरह के हो सकते हैं किसी
भी ब्रिज का निर्माण जगह के आधार पर किया
जाता है एक प्रकार का वृक्ष सभी जगह बनाना

संभव नहीं इसीलिए ब्रिज भी जगह के आधार पर
ही बनाए जाते हैं प्रिटी सस्पेंशन ब्रिज
आर्षप्रीत आदि यह कुछ टाइप से पानी पर
बनने वाले इन पुलों के कोई भी पुल तक भार
सहन कर सकता है जो तक उस पर पड़ने वाला
भारत डायरेक्ट या फिर android तरीके से

ज़मीन में ट्रांसफर होता रहे एक ब्रिज पर
लाखों टन का बार हो सकता है लेकिन फिर भी
मजबूती से खड़ा रहता है कि सारा भार खंभों
पर टिका होता है और गमों से होता हुआ तमिल
में चला जाता है जिससे ब्रिज को कोई
नुकसान नहीं होता लेकिन दोस्तों पानी पर

बनने वाले किसी भी ब्रिज की सबसे बड़ी
चुनौतियों में उसकी फाऊंडेशन बनाना ही
होता है और पानी इतना गहरा हो यह चैलेंज
भी उतना ही बड़ा होता है नॉमिनेशन मजबूत
होना बहुत ज्यादा जरूरी है कि आखिर यह

अफेयर भी तो होते हैं जिनके दम पर इस
ब्रिज को स्थिर रखा जाता है तो कैसे की
जाती है इस फाउंडेशन को बनाने की शुरुआत
आप यह समझते हैं तेज वाले नदियों के ऊपर
पिलर खड़ा करने के लिए इंजीनियर सबसे पहले

एक स्ट्रक्चर बनाते हैं और उसको बनाते समय
पानी के अधिकतम और न्यूनतम गहराई पानी के
बहाव की गति पानी के नीचे की मिट्टी उनका
धार खुलकर चलने वाले वाहनों का बाग आदि
बारीक से बारीक चीजों का हिसाब रखा जाता

है इसके बाद पुल की नींव का प्रकार टाइट
किया जाता है जिसके हिसाब से नहीं बनाई
जाती है इस मीट को कॉल
कहते हैं पिलर बनाने के तरीके के हिसाब से
कभी कॉन्फिडेंस का स्ट्रक्चर सर्कल में
होता है तो कभी स्क्वायर में अब सवाल यह

है कि आखिर यह पॉइंट नेम बनता कैसे हैं
कॉन्फिडेंस को बनाने के लिए चीन के
लंबे-लंबे पीछे एक स्ट्रक्चर पर फिट किए
जाते हैं जिसमें सरकार या फिर एक स्क्वायर
शेप दी जाती है और जो यह बनकर तैयार हो

जाते हैं तब इन्हें पानी के अंदर डाल दिया
जाता है दोस्तों इस फ्रिल के स्ट्रक्चर को
मशीन की मदद से धीरे-धीरे पूरी एहतियात से
पानी के अंदर डाला जाता है ताकि उसमें
अच्छी तरह से सेट हो जाए इसके बाद मोटर और
पंप के जरिए इस पूरे स्ट्रक्चर के अंदर के
पानी को बाहर निकाल दिया जाता है जिस वजह

से यहां पर एक सूखी खाली जगह बन जाती है
इसी सूखी खाली जगह पर फिर पिलर बनाने का
काम शुरू किया जाता है जहां कई सारे वर्कर
लगाकर इस जगह पर बनाते हैं हालांकि हर जगह
इस तरह से काम नहीं किया जा सकता अगर पानी

बहुत गहरा हो तो ज्यादा गहरे पानी में यह
कॉटन बनाकर नहीं डाल सकते जैसे समुद्र में
बनाने के लिए समुद्र के तल में सबसे
ब्लुटूथ जगह देखते हैं उसकी गहराई मानते
हैं इसके बाद उस जगह पर बड़ी-बड़ी मशीनों

के द्वारा किया जाता है जैसे बनाते समय
करते हैं फिर में या फिर लोहे के पाइप
डाले फिर के अंदर का सारा पानी बाहर
निकाला जाता है कि सीमेंट और का मिक्सचर
जरूरत के हिसाब से तैयार करके आपस में

जोड़ सकते हैं जिससे एक मजबूत खबर तैयार
हो जाता है जैसे-जैसे बढ़ जाते हैं
वैसे-वैसे उनके ऊपर भी तैयार की जाती है
जब बनकर तैयार हो जाते हैं तब सबसे पहले
बड़ी-बड़ी मशीनों के द्वारा बड़े-बड़े को
जोड़ा जाता है और यह किसी दूसरी जगह पर

तैयार होते हैं जिसका आधा काम बाहर
कारखाने में किया जाता है और समुद्र या
नदी जहां पर पुल बनाया जा रहा है
कि बड़े-बड़े सीमेंट के ब्लॉक को समुद्र
में ले जाने के लिए बड़ी-बड़ी टिप्स को

काम में लिया जाता है वहां पहुंचने के बाद
प्रेम के द्वारा इनबॉक्स को ऊपर उठाया
जाता है और फिर स्टेप बाय स्टेप ब्रिज का
निर्माण किया जाता है वहीं दोस्तों कई
एक्ट्रेसेस में प्रोटीन कॉन्फिडेंस भी
बनाए जाते हैं जिसमें या तो उसके नीचे कुछ

ऐसी मशीने फिट कर दी जाती हैं जो पानी के
ऊपर तैरती रहती हैं या फिर जहाज की मदद से
इन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता
है जिसके बाद इन्हें रोटेटर के पानी के
अंदर डाल दिया जाता है दोस्तों इस पूरी
प्रक्रिया में काफी समय लगता है और यह काम

थोड़ा खतरनाक होता है लेकिन दोस्तों जितने
भी लोग इस तरह के काम में लगे होते हैं वह
काफी प्रोफेशनल होते हैं चाहे वह बराबर हो
या फिर इन सीरियल सभी को इन कामों का काफी
अनुभव होता है जिसके बाद ही उन्हें ऐसे

जटिल प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए भेजा
जाता है क्योंकि अगर यह ब्रिज किसी
नौसिखिए द्वारा बनाई जाए तो उसे था मिल
जाएगा कई लोगों की मौत से भुगतना पड़ सकता
है अब हमारे अपने ही देश के मुंबई शहर
स्थित बांद्रा-वर्ली सीलिंक को ही ले

लीजिए इस 5.6 किलोमीटर लंबे थिस स्ट्रक्चर
को इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना कहा जाता
है लेकिन पानी के ऊपर इसे बनाना आसान नहीं
था यह एक बहुत ही लंबा और चुनौती भरा सफर
था जिसे 11 साल की अथक मेहनत और लगभग पौने
दो लाख करोड़ के खर्च के बाद हमारे
इंजीनियर्स ने पूरा कर दिखाया तो दोस्तों

अब तक तो आप समझ चुके होंगे कि इस तरह के
ब्रिज बनाने में इतने पैसे क्यों खर्च
होते हैं ऐसे में ब्रिज बनाने में खर्च के
साथ काफी समय भी लग जाता है लेकिन इसके
बावजूद भी कई बार भेज फेल हो जाते हैं इस
चीज से बचने के लिए प्रॉपर तरीके से ब्रिज
बनाना बहुत जरूरी होता है और ऐसे में वह

सभी इतिहास पढ़ते जाते हैं जो जरूरी है तो
दोस्तों आज की इस विडियो को देखने के बाद
आपने पानी पर बनने वाले इनक्रीज के बारे
में कुछ नया और इंट्रस्टिंग तो जरूर जाना
होगा.

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