11 राज्यों में खाता नहीं खुला, सीट के लिए कटोरा लेकर खड़ी । - instathreads

11 राज्यों में खाता नहीं खुला, सीट के लिए कटोरा लेकर खड़ी ।

नमस्कार

मोदी ने जब से
2024 के चुनाव में 400 सीटें जीतने की बात
की है तभी से ईवीएम को लेकर लोगों के मन
में शक और सुभ और बढ़ गया है कहा जा रहा
है कि यह टारगेट पार्टी और गठबंधन से
ज्यादा ईवीएम के लिए सेट किया जा रहा है
लेकिन अंदर ही अंदर भाजपा की हालत पतली है

आप में से कुछ लोगों को यह बात अजीब लग
सकती है लेकिन भाजपा को चलाने वाले जानते
हैं कि अयोध्या के राम मंदिर का आशीर्वाद
वोट में बदलने नहीं जा रहा है इसीलिए
भाजपा नीतीश कुमार के सामने हाथ जोड़कर

खड़ी हो गई जयंत चौधरी के सामने हाथ
जोड़कर खड़ी हो गई और अब सुन रहे हैं कि
उद्धव ठाकरे से लेकर राज ठाकरे तक पर डोरे
डाल रही है नरेंद्र मोदी निर्विवाद रूप से
इस समय सबसे लोकप्रिय नेता है यह बात सच

है लेकिन बावजूद इसके उनकी लोकप्रियता
निर्विवाद नहीं है यह बात भाजपा भी जानती
है और मोदी भी जानते हैं कि रोजगार महंगाई
काला धन लोगों को राहत देने में वह बुरी

तरह नाकाम रहे और इसका खौफ उसे भीतर ही
भीतर खाए जा रहा है इससे उभरने के लिए
उसने एक प्लान तैयार किया है इसका नाम
दिया गया है मिशन 144 अब आप सोच रहे होंगे

कि मोदी तो 400 सीटें जीतने की बात करते
हैं तो यह मिशन 144 कहां से आया चलिए इसको
जरा समझते हैं कि चक्कर क्या है दरअसल इस
बार मोदी किसी भी तरह का कोई जोखिम लेने

को तैयार नहीं है उन्हें हर हाल में तीसरा
कार्यकाल चाहिए ही चाहिए जिससे जवाहरलाल
नेहरू के विराट व्यक्तित्व को लेकर अपनी
कुंठा उं से वोह उभर सके और इससे वह उभर

कैसे उनसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री
रहकर आपको पता ही होगा कि नेहरू 15 अगस्त
1947 से लेकर 27 मई 1964 यानी अपने निधन
के दिन तक भारत के प्रधानमंत्री थे मतलब
लगभग 17 साल हालांकि इस उपलब्धि को हासिल

करने के लिए मोदी को चौथे कार्यकाल की
जरूरत पड़ेगी लेकिन फिर वह निर्वाचित पर आ
जाएंगे 1950 51 में पहले आम चुनाव हुए थे
इस लिहाज से नेहरू 14 ही साल निर्वाचित

प्रधान मंत्री रहे तो मोदी का सपना है कि
वह 15 साल प्रधानमंत्री रहे नेहरू का
रिकॉर्ड तोड़े खैर मिशन 144 पर आते हैं यह
वो सीटें हैं जिन पर भाजपा के उम्मीदवारों

को 2019 के चुनाव में हार मिली थी इसीलिए
पार्टी चाहती है कि इस बार इन्हें हासिल
करने के लिए कील कांठे दुरुस्त किए जाए
लिहाजा उसने शुरुआत यहीं से की है सूत्रों

का कहना है कि भाजपा ने पिछले चुनाव में
हारी हुई इन 144 सीटों पर उम्मीदवार वार
तय कर लिए हैं सबसे पहले इन्हीं सीटों पर

उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी कहा जा
रहा है कि इसी महीने यह सूची जारी की जा
सकती है इसके पीछे मकसद है विपक्षी गठबंधन
पर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करना देखिए कि
दिल्ली में 17 और 18 फरवरी को भाजपा

राष्ट्रीय कार्यकारिणी और परिषद की बैठक
होनी है इसी बैठक में 2024 के चुनाव का
एजेंडा और सूची दोनों को तय किया जाना है
बिहार महाराष्ट्र पंजाब और आंध्र प्रदेश

की कुछ सीटों को छोड़कर बाकी सभी सीटों के
लिए उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार किया
गया है राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के
बाद चुनाव समिति इसी पैनल से उम्मीदवारों
का चयन करेगी लेकिन मोदी शाह की धड़कन कुछ

वजहों से बढ़ी हुई है क्योंकि 2019 में
भाजपा ने गुजरात और राजस्थान समेत 10
राज्यों की सभी 82 सीटें जीत ली थी मध्य
प्रदेश छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में
पार्टी की जीत का प्रतिशत 80 से 90 था इस

बार इसे दोहराना नामुमकिन से कुछ ही कम है
इसीलिए तय हुआ है कि इन राज्यों में होने
वाले संभावित नुकसान की भरपाई के लिए जिन
144 सीटों पर पार्टी हारी थी उनमें से कुछ
सीटों को जीतने के लिए पूरी ताकत झो की

जाए 10 राज्यों की बंपर जीत तो सबको नजर
आती है लेकिन लोग गौर नहीं करते कि पिछले
चुनाव में तमिलनाडु केरल और आंध्र प्रदेश
समेत 11 राज्य ऐसे थे जहां की सभी 93
सीटें भाजपा हार गई थी खाता भी नहीं खुला

था इन राज्यों में अपनी पहुंच बनाने के
लिए भाजपा ने कुछ सीटें चिन्हित की हैं
उनकी पहचान की है आंध्र प्रदेश में टीडीपी
से गठबंधन की बातचीत अंतिम दौर में है

वहीं मोदी शाह ने केरल की तीन तमिलनाडु की
आठ और मेघालय की एक सीट पर जोर देने को
कहा है खास तौर पर इन राज्यों में अपनी
पहुंच बनाने के लिए भाजपा रजनीकांत जैसी
बड़ी हस्तियों के सहारे नैया पार लगाना

चाहती है लेकिन भाजपा का डर इतना ही नहीं
है कई सांसद पिछले कुछ सालों में जनता की
नजरों में साख खो चुके हैं उन्हें लेकर
तरह-तरह के सवाल और शंकाएं हैं इसलिए इस

बार इन राज्यों में 30 से 40 फीसद सांसदों
के टिकट कटने लगभग तय हैं आपको याद हो तो
2 फरवरी को समाजवादी पार्टी के मुखिया
अखिलेश यादव ने भी एक लंबा ट्वीट करके ऐसी
ही बात कही थी उन्होंने लिखा था ब्रेकिंग
न्यूज़ सूत्रों के हवाले से पता चला है कि

भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने सभी वर्तमान
सांसदों का टिकट काटने जा रही है सिवाय एक
को छोड़कर लेकिन सुनने में आया है कि वह
भी अपनी सीट बदल रहे हैं या फिर किसी
सुदूर प्रदेश में एक अतिरिक्त सुरक्षित

सीट ढूंढ रहे हैं इसीलिए भाजपा उत्तर
प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपने
प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करने की
स्थिति में नहीं है क्योंकि उनके वर्तमान
सांसद ने अपनी जेबें भरने के अलावा कोई भी

काम नहीं किया है इसी वजह से जनता में
भाजपा और भाजपाई सांसदों के खिलाफ बहुत
गुस्सा है इन विपरीत हालात को देखते हुए
भाजपा में नए प्रत्याशियों की खोज जारी है

लेकिन कोई भी हारने के लिए नहीं लड़ना
चाहता है इसी कारण भाजपा की तरफ से एक भी
प्रत्याशी का नाम सामने नहीं आ पा रहा है
इस ट्वीट के बाद भारी खलबली मची थी

क्योंकि अखिलेश ने इशारों ही इशारों में
बिना नाम लिए हुए यह कह दिया था कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छोड़कर
ज्यादातर सीटों के लिए नए उम्मीदवार खोजे

जा रहे हैं और मोदी भी खुद बनारस के अलावा
दक्षिण भारत में एक सुरक्षित सीट की तलाश
कर रहे हैं देखिए पिछले चुनाव में भाजपा
का 190 सीटों पर कांग्रेस से सीधा मुकाबला

हुआ था इनमें से 175 सीटों पर भाजपा को
जीत मिली थी केवल 15 हारी थी पार्टी नहीं
चाहती कि ऐसी सीटों पर सांसदों की
लोकप्रियता जीत में बाधक बने मुश्किल पैदा

करें इसलिए बेहतर होगा कि चेहरे ही बदल
दिए जाए भाजपा के अंदरूनी सूत्र भी बता
रहे हैं कि लगभग आधे सांसदों को इस बार
खुद चुनाव लड़ने की बजाय नए उम्मीदवारों

का चुनाव प्रचार करना होगा लोगों की
नाराजगी दूर करने के लिए राज्यसभा से आने
वाले 90 फीसद मंत्रियों को उतारने की
योजना है यह बहुत बड़ी बात है क्योंकि
उन्हें जनता से सीधे ना जुड़े होने का लाभ

मिल सकता ऐसा भाजपा को लगता है सूत्रों का
कहना है कि दो को छोड़कर राज्यसभा से
जुड़े सभी मंत्रियों का चुनाव लड़ना लगभग
तय है अब वह दो मंत्री कौन है जरा अंदाजा

लगाइए अब आइए अगली रणनीति पर यह रणनीति है
पीढ़ियों का बदलाव पार्टी में कई ऐसे नेता
हैं जिनकी दो पीढ़ियां भाजपा से सांसद
विधायक मंत्री पार्टी पदाधिकारी हैं मोदी

जब वंशवाद की बात करते हैं तो उनके सामने
राजनाथ सिंह पंकज सिंह वसुंधरा राजे
दुष्यंत सिंह मेनका गांधी वरुण गांधी
एकनाथ खडसे रक्षा खडसे ऐसे पोस्टर को टांग
दिया जाता है इस बार लोकसभा में जब मोदी

वंशवाद पर बोल रहे तो बुरी तरह लड़खड़ा गए
थे इसलिए पार्टी की कोशिश है कि समय रहते
संगठन ही नहीं संसद में भी पीढ़ियों के
परिवर्तन को अमली जामा पहना दिया जाए सबसे
ज्यादा अगर भाजपा कहीं डरी हुई है गौर

कीजिएगा तो महाराष्ट्र है राज्य के दो
सबसे बड़े नेताओं शरद पवार और बाल ठाकरे
की पार्टी व छीनकर उनके बागियों के हवाले
कर चुकी है इससे पैदा हुई सहानुभूति उसे

ले ना डूबे इसलिए उसकी कोशिश है कि शरद
पवार के अलावा बाल ठाकरे के बेटे उद्धव
ठाकरे और भतीजे राज ठाकरे को भी अपने साथ

पवार अजीत पंवार को और उद्धव ठाकरे एकनाथ
शिंदे को अपना नेता मानने को तैयार होंगे
लगता तो तो नहीं है नमस्कार

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