7000 साल पहले कैसे बना था राम सेतु? | Facts About Ancient Bridge between India and Sri Lanka - instathreads

7000 साल पहले कैसे बना था राम सेतु? | Facts About Ancient Bridge between India and Sri Lanka

हम सब ने राम सेतु के बारे में बचपन से ही
सुना होगा की भगवान राम ने देवी सीता को
रावण की लंका से वापस लाने के लिए बनवाया
था और जिसकी नव दो वानर भाई नील और नल ने
राखी थी लेकिन यहां हम आपको रामायण क्यों

सुना रहे हैं दरअसल आज जो टॉपिक पर हम बात
करने वाले हैं वो है रामसेतु हान हान वही
राम सेतु जिसे एडम्स ब्रिज के नाम से भी
जाना जाता है लेकिन क्यों तो आपको बता दें
एक दौर ऐसा था जब इसे अटल बिहारी वाजपेई
जी तुड़वाने वाले द क्यों और कैसे लिए

जानते हैं
आपको पहले राम सेतु के बारे में थोड़ा
ज्योग्राफी के लिए बता दे रामसेतु भारत के
रामेश्वरम से श्रीलंका के मन्नार आइलैंड
को जोड़ता है यह लगभग 50 किमी लंबा ब्रिज

है जिसके बारे में कहा जाता है की 15वीं
शताब्दी में आप इससे पैदल चलकर श्रीलंका
पहुंच सकते द यहीं तब ये पानी में डूबा
नहीं था आज ग्लोबल वार्मिंग के चलते
रामसेतु समुद्र में डूब चुका है लेकिन आप

इसे सैटेलाइट पिक्चर्स में साफ तौर पर देख
सकते हैं लेकिन इसके अलावा राम से तू
रिलिजियस और एक सिस्टम की नज़रिया से भी
भारत का एक बहुत जरूरी हिस्सा है साथ ही

भारत में मौजूद बहुत सारे धर्म में से
हिंदू और इस्लाम धर्म के लोगों के बीच एक
खास जगह बनाता है बताने की हिंदू
माइथोलॉजी के मुताबिक इस पुल को विष्णु के
साथ में अवतार भगवान राम ने दुष्ट रक्षा

रावण को मरने और देवी सीता को लंका वापस
लाने के लिए अपनी वानर सी द्वारा बनवाया
था वही इस्लाम आने वाले लोगों के बीच की
कहानी प्रसिद्ध है की आदम ने ये ब्रिज

बनाया और लंका के एडम्स पॉइंट पर जाकर
करीब 1000 सालों तक तौबा यानी पश्चाताप
किया इसलिए दोनों ही धर्म के लिए ये बुल
काफी मायने रखता है लेकिन इसको तुड़वाने

की कोशिश क्यों की गई चिंता नहीं कीजिए हम
राम से तू फिल्म की तरह आपका वक्त बिल्कुल
बर्बाद नहीं करेंगे और ना ही विज्ञान की
धज्जियां उड़ाएंगे तो लिए जानते हैं की
उसे दौर में मुद्दा आखिर क्या था लिए

थोड़ा शुरू से शुरू करते हैं नहीं त्रेता
युग से नहीं दरअसल भारत के साउथ में धनुष
कोटि और श्रीलंका के नॉर्थ वेस्ट में पंबन
के बीच समुद्र में 48 किमी चौड़ी पट्टी के

तौर में उभरे एक जमीनी हिस्से के सैटेलाइट
से खींचे गए पिक्चर्स को अमेरिकन स्पेस
रिसर्च इंस्टिट्यूट नासा ने जब साल 1993
में दुनिया भर में जारी किया तो भारत में
इसे लेकर पॉलिटिकल और रिलिजियस विभाग पैदा

हो गया था अब यह जान लेते हैं की
साइंटिफिक तौर पर आखिर राम से तू है क्या
तो बता देंगे नासा और भारतीय सैटेलाइट से
क्लिक किए गए पिक्चर्स में धनुषकोडी से
श्रीलंका तक जो एक पतली सी जमीन की रेखा

दिखती है उसे ही आज रामसेतु माना जाता है
भारत के साउथ इसमें रामेश्वरम और श्रीलंका
के नॉर्थ ईस्ट में मनारा आइलैंड के बीच
उतनी चट्टानों की एक चैन है जो ब्रिज की
तरह दिखाई देती है और समुद्र में इन

चट्टानों की गहराई सिर्फ 3 फुट से लेकर 30
फुट के बीच है साथ ही ढांचा मन्नार की
खड़ी और पाक पाक स्टेट को एक दूसरे से अलग
करता है और इस इलाके में बेहद उठाना है
इसके बारे में यह भी कहा जाता है की 15वीं

शताब्दी तक इस पुल पर चलकर रामेश्वरम से
मन्नार द्वीप तक जया जा सकता था लेकिन
तूफानों ने यहां समुद्र को कुछ गहरा कर
दिया 1480 ई में ये साइक्लोन के कारण टूट

गया और समुद्र का वाटर लेवल बढ़ाने के
कारण ये डूब गया दूसरी ओर पुल की
प्राचीनता पर रिसर्च का भी अलग-अलग बयान
है कुछ इसे 350 साल पुराना बताते हैं तो

कुछ इसे आज से 7000 साल पुराना बताते हैं
और कुछ का तो ये भी मानना है की ये
1700000 साल पुराना है लेकिन जब यह पुल
इतना पुराना है और लोगों की भावनाएं से
इतनी जुड़ी हैं तो अटल सरकार इसे तुड़वाना

क्यों चाहती थी यह सवाल के जवाब के लिए हम
आपको पहले उसे योजना के बारे में बता दें
जिसके तहत यह पुल टोडा जाना था दरअसल 2005
में तत्कालीन अटल बिहारी सरकार ने सेतु
समुद्रम प्रोजेक्ट का ऐलान किया था और इस

प्रोजेक्ट के जरिए भारत सरकार तमिलनाडु को
श्रीलंका से जोड़ने की योजना पर कम कर रही
थी तो कैसे पहले तमिलनाडु और श्रीलंका में
ट्रेडिंग नहीं होती थी तो आपको बता दें की

होती तो थी लेकिन कान सीधे पकड़ने के बजाय
बिल्कुल आज ही की तरह घूमर पकड़ा जा रहा
था यानी घूम कर ट्रेडिंग है अब इस पर अटल
सरकार ने फैसला लिया की रामसेतु के एक
हिस्से को tudwakar वहां टोडा गहरा

समुद्री लें बना दिया जाए ताकि भारी समान
वाले जहाज वहां से पास हो सकें और फ्यूल
के साथ वक्त भी बचे बेशक आप थोड़ा हैरान
होते होंगे की आखिर कैसे जिया यह सारा
किस्सा हुआ था सर में क्योंकि उसे दौर में

ना ही सोशल मीडिया थी ना ही आज की तरह
ज्ञान बढ़ाने वाली व्हाट्सएप यूनिवर्स थी
और जैसा की हमने आपको बताया इसके तहत राम

सेतु के कुछ इलाके को गहरा कर समुद्री
जहाज के आने जाने लायक बनाया जाएगा तो
इसके लिए सेतु की चट्टानों को तोड़ना
जरूरी था और इस पर योजना के बाद से

रामेश्वरम देश का सबसे बड़ा शिपिंग हर बार
बन जाता कहा तो ये भी ज्यादा था की
स्टेच्यू समुद्रम प्रोजेक्ट पूरा होने के
बाद सारे इंटरनेशनल शिप कोलंबो पोर्ट का
नंबर रास्ता छोड़कर इसीलिए से गुजरेंगे

औरत और 2080 अधिक शिप हर साल इस नहर का
इस्तेमाल करेंगे अगर ये प्रोजेक्ट पूरा हो
गया होता तो आज बंगाल की खड़ी और अरब सागर
के बीच समुद्री रास्ते को सीधी आवाजाही के
लिए खोल दिया गया होता और इस लें की शुरू

होने से जहाज को लगभग 400 समुद्री मिल की
यात्रा कम करनी होती जिससे लगभग 36 घंटे
की समय की बचत होती है और आज इसके लिए
जहाज को श्रीलंका पूरा चक्कर लगाकर जाना

होता है इससे होता ये की ये रास्ता छोटा
होने की वजह से सफर का वक्त और लंबाई तो
छोटी होती उम्मीद थी की शिप का 22000
करोड़ का तेल बचत बता दें की उसे वक्त अगर

ये प्रोजेक्ट शुरू होता तो इसमें लगभग
2000 करोड़ खर्च होने द लेकिन अगर इस
प्रोजेक्ट के इतने फायदे द तो आखिरी शेर
रोका क्यों गया तो जिस दौर में ये

प्रोजेक्ट शुरू हुआ था उसी दौर में भी इस
प्रोजेक्ट के खिलाफ कई प्रोडक्ट हुए द कुछ
रिलिजियस ग्रुप ने तो कुछ एनवायरनमेंट
लिस्ट ने लेकिन सामने सरकार भी थी यहां

बताते चलें की भले ही इस प्रोजेक्ट का
सपना अटल बिहारी जी का था लेकिन इसका
उद्घाटन मनमोहन सरकार ने किया क्योंकि तब
केंद्र में कांग्रेस सरकार ए गई थी अब

यहां आपको यह जानने की जरूरत इच्छा होगी
की आखिर जीत किसकी हुई बृजेश ग्रुप की या
एनवायरनमेंट लिस्ट की तो बता दें की यहां
प्रॉपर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में
एक एफिडेविट दर्ज की थी जिसमें कहा गया था

की रामसेतु को खुद भगवान राम ने अपने
जादुई वार्ड से तोड़ दिया था इसके सबूत के

तौर पर सरकार ने कंबल रामायण और पदम पुराण
को पेश किया इतना ही नहीं सरकार ने राम
सेतु के आज के बचे हुए हिस्से के बारे में
कहा की ये हिस्सा किसी भी तरह से मैन मेड
है ये क्या arcologist को कहीं नहीं मिला

और इस हिसाब से ये पुल ज्योग्राफी के लिए
प्रकृति द्वारा निर्मित है और इसमें
रामसेतु नाम की कोई चीज नहीं है अब यहीं
से पूरे विवाद ने आग पकड़ ली जिसके बाद
सुप्रीम कोर्ट ने आर्कियोलॉजिस्ट के
एफिडेविट को हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचने

वाला माना बता देंगे जैसे ही ये एफिडेविट
सामने आया था देश में इसके खिलाफ काफी
विरोध प्रदर्शन भी हुए द लेकिन सरकार के
मुताबिक यह वजह नहीं थी जिसके लिए इतना

बड़ा प्रोजेक्ट रोक दिया जाए साथ ही साथ
कोई देश में शांति भी नहीं चाहता था अब
यही अगर एनवायरनमेंट लिस्ट के मुद्दे पर
ध्यान दें तो उनकी बात में ज्यादा वजन था

उनके मुताबिक अगर रामसेतु को तोड़ दिया
जाता है तो इसका काफी बुरा इंपैक्ट आस-पास
की कोस्टलाइन पर मौजूद जगह को होगा और अगर
आगे सुनामी से केरल में तबाही का जो मंजर
होगा उससे बचाना मुश्किल हो जाएगा इसके

साथ ही हजारों मछुआरे भी बेरोजगार हो
जाएंगे क्योंकि वो इन इलाकों से जो दुर्लभ
शंकर और समुद्री मछलियां निकलती हैं उनसे
ही इनको लगभग 150 करोड़ की वार्षिक आय

होती है तो आगे यह बड़ा सवाल बन जाएगा की
आखिर उनका क्या होगा इसके साथ ही जो राम
सेतु वाला इलाका है वो पूरा एरिया ही एक
ही सिस्टम है जो पुरी की पुरी समुद्री जीव

की एक खास इस स्पीशीज को से करता है अगर
यहां के एरिया को जाए तो jaljivon की कई
दुर्लभ प्रजातियां नष्ट हो जाएंगी इतना ही
नहीं इसी की बदौलत भारत के पास यूरेनियम
के बेहतरीन ऑप्शंस थोरियम का दुनिया में

सबसे बड़ा भंडार है अगर हम सेतु को तोड़
दिया जाता है तो भारत को थोरियम के इस
अमूल्य भंडार से हाथ धोना पद सकता है अब
यही सब वजह थी की उसे दौर में से तू

समुद्रम का कम रोक दिया गया अब हाल ही में
सुनने में ए रहा है की इसका कम वापस शुरू
होने वाला है नई मोदी जी रामसेतु नहीं
tudwayenge बल्कि उसकी बगल में एक लें

बनवाने वाले हैं हम किसी भी हालत में
जिसको आप रामसेतु करके हम मानते हैं वो
किसी भी हालत में उसको हम तोड़ेंगे नहीं
प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार ने
सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना रोक साफ कर
दिया है मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से
कहा की वो सेतु समुद्रम परियोजना को पूरा

करने के लिए देशों से समझौता नहीं किया
जाएगा और इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के
लिए रामसेतु को कोई नुकसान नहीं पहुंचा
जाएगा इस बारे में केंद्र सरकार ने

सुप्रीम कोर्ट में कैविटी भी दायर किया यह
तो ही देश के हिट की बात लेकिन यही कई
महानुभावों का यह भी कहना है की रामसेतु
को नेशनल हेरिटेज घोषित कर देना चाहिए

नेशनल हेरिटेज मॉन्यूमेंट एंड डी
गवर्नमेंट विल मेक इट पॉसिबल फॉर यूट्यूब
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