AAP के प्रदर्शन से घबराई बीजेपी?सुप्रीम कोर्ट का सोरेन को राहत से इंकार ! - instathreads

AAP के प्रदर्शन से घबराई बीजेपी?सुप्रीम कोर्ट का सोरेन को राहत से इंकार !

एक पत्रकार ने सुप्रीम कोर्ट को खूब याद
दिलाई है कि आप अर्णव गोस्वामी जो कि
सत्ता का चाटुकार पत्रकार है उसके मामले
को तुरंत सुन लेते हैं और उसे राहत दे
देते हैं मगर हेमंत सोरेन का मामला जो साफ

तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध नजर आ रहा है
सुप्रीम कोर्ट ने वह मामला सुनने से ही
इंकार कर दिया और यह बावजूद उसके कि चीफ
जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई चंद्रचूड़ अभिषेक
मनु सिंघवी से कह चुके हैं कि जब भी

राजनेताओं पर इस तरह से ज्यादती होगी तो
हम इंडिविजुअल मेरिटस पर केसेस को सुनेंगे
यह मामला बहुत पेचीदा हो चला है दोस्तों
सुप्रीम कोर्ट का रवैया और विपक्ष उसकी
मैं चर्चा करूंगा और साथ ही इस चेहरे को

याद कीजिए जस्टिस बेला त्रिवेदी मैं इसकी
बात क्यों कर रहा हूं कुछ लहो बाद मगर
बीजेपी से एक सवाल अब क्या इस देश में
प्रदर्शन करना भी गुनाह हो
गया दोस्तों चंडीगढ के मेयर चुनावों में

जो कथित धांधली हुई है आपको याद होगा कि
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक साथ आए थे
दोनों के वोट्स मिलाकर हो रहे थे 20 मगर
फिर प्रेइंग ऑफिसर अनिल मसीह जो कि भाजपा
का एक सदस्य भी है उसने आम आदमी पार्टी और

कांग्रेस के साझा उम्मीदवार के आठ वोट काट
दिए उनकी संख्या 12 हो गई और भाजपा की
संख्या थी 16 और भाजपा को जिता दिया गया
एकएक नियम की धज्जियां उड़ाई गई हैं
दोस्तों क्योंकि जब आप वोट काटते हैं तो

आपको दोनों ही पॉलिटिकल पार्टीज के
इलेक्शन एजेंट्स को बताना होता है अनिल
मसीह ने ऐसा नहीं किया आज आम आदमी पार्टी
सड़क पर उतरी या सड़क पर उतरने की कोशिश
की क्या आप जानते हैं दोस्तों आम आदमी

पार्टी के एक एक विधायक को दिल्ली पुलिस
ने उनके घर में नजर बंद कर दिया सबसे बड़ी
बात जब वह भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय
के बाहर पहुंचे तो नजारा देखिए इस पूरे

इलाके को दीनदयाल उपाध्याय मार्ग को पुलिस
छावनी में बदल दिया गया था वह नजारा कैसा
था और क्या कह रहे हैं आम आदमी पार्टी के
कार्यकर्ता कि जब जब बीजेपी डरती है तो
दिल्ली पुलिस को आगे करती है सुनते हैं

भारत माता की जय जब जब मोदी डरता
है जब जब मोदी र
है जब जब मोदी डरता
है जब जब मोदी डरता
है दोस्तों मामला बहुत हास्यास्पद है

दोस्तों मैं आपको बतलाना चाहूंगा कि सभी
अलग-अलग जो आम आदमी पार्टी के विधायक हैं
उनके घर के वहां क्या लम्हा था यह देखिए
आम आदमी पार्टी के ट्विटर हैंडल से बताया

जा रहा है कि क्या अब देश में इमरजेंसी लग
गई है शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी नहीं कर
सकते मोदी इतने डरपोक और काय हैं कि अब
जनता की आवाज खामोश करने के लिए उनके

प्रतिनिधियों को अरेस्ट करना शुरू कर चुका
है इसमें आप देख सकते हैं कि अलग-अलग
विधायकों के घर में पुलिस पहुंची है
किन-किन विधायकों के घर पर एक-एक करके मैं
आपको बला रहा हूं दोस्तों सबसे पहले आपके

स्क्रीन पर यह विधायक हैं प्रोमिला गुप्ता
आप देख सकते हैं कि प्रोमिला गुप्ता के घर
पर पुलिस पहुंच गई है उन्हें डिटेन कर
लिया गया है यहां पर तस्वीर में आप देख

सकते हैं कि पुलिस वाले बैठे हैं सामने
प्रोमिला गुप्ता है आम आदमी पार्टी की
पार्षद है ये ठीक है इसके बाद आम आदमी
पार्टी कार्यकर्ता अंतुलय के घर के बाहर
का नजारा उन्हें भी अरेस्ट कर लिया गया है

आम आदमी पार्टी का
का कहना है ऊपर से आदेश है नहीं जाने
देंगे प्रोटेस्ट करने और मैंने आपको
दीनदयाल उपाध्याय मार्ग का नजारा दिखाया

था दोस्तों आपने वहां पर भी देखा था कि
किस तरह से पुलिस ने पूरे इलाके को छावनी
में तब्दील कर दिया है सीधी सी बात है
दोस्तों चंडीगढ़ मेयर चुनावों में जो हुआ

वह लोकतंत्र का मजाक
था सुप्रीम कोर्ट ने एहसान जत लाते हुए
माननीय चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई
चंद्रचूड़ ने कहा कि हम इस मुद्दे को

सुनेंगे
दोस्तों इसी मंच पर मैंने न जाने कितनी
बार डी वाय चंद्रचूड़ साहब के साहसी
बयानों के लिए उनकी तारीफ की है मगर दुख

की बात यह है कि कथनी और करनी का फर्क अब
धीरे-धीरे नजर आ रहा है मगर पहले मैं आपको
बतलाना चाहूंगा कि आम आदमी पार्टी किस तरह
से इस मुद्दे पर उग्र हो गई है आपकी

स्क्रीन पर प्रियंका कक्कड़ जो कि आम आदमी
पार्टी की प्रवक्ता है वो कह रही हैं जो
पार्टी सत्ता पाने के लिए चोरी करेगी वह
सत्ता पाकर भी चोरी करेगी सुनिए वो क्या

कह रही है आपने कहावत सुनी होगी चोर चोरी
से तो जाए पर हेराफेरी से ना जाए वही आज
दिल्ली में हो रहा है आपने देखा कैसे
भाजपा सत्ता पाने के लिए लगातार ऑपरेशन

लोटस करती है खरीद फरोक की राजनीति करती
है अब तो वोट चोरी भी करती है जिसका
प्रमाण हम सबके सामने एक के जरिए चंडीगढ़
मेयर इलेक्शन में आया अब कभी-कभी ईडी का
रूप धारण कर लेती है और आज तो हदी हो गई

हमारा कॉन्स्टिट्यूशन प्रोटेक्टेड राइट है
एक पीसफुल प्रोटेस्ट करने का पर भाजपा ने
पूरी दिल्ली को एक छावनी में कन्वर्ट कर
दिया है उसी तरह से दोस्तों सौरव भारद्वाज

जो कि आम आदमी पार्टी के विधायक हैं वो कह
रहे हैं कि पूरे देश ने देखा कैसे बीजेपी
ने चंडीगढ़ मेयर इलेक्शंस में वोटों की
चोरी की अब बसों को रोका जा रहा है बसों
को आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा आप इन

तस्वीरों में देख सकते हैं जिन बसों में
भर भर के आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं
को दिल्ली के दफ्तर के बाहर ले जाया जा
रहा था उन्हें पहले ही रोक दिया गया

है मैं समझ नहीं पा रहा हूं अगर कोई
पार्टी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है तो
उन्हें इस तरह से रोका कैसे जा सकता
है भाई भारतीय जनता पार्टी ने भी तो
प्रदर्शन किया है प्रदर्शन करना कोई गुनाह

नहीं है सुनिए क्या कह रहे हैं सौरव
भारद्वाज सारा देश यह बात जानता है और
सबने वीडियो पर देखा किस तरीके से चंडीगढ़
के मेयर के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी

द्वारा बेवानी की गई वोटों की चोरी की गई
सब देख सकते हैं आज उस चीज के
खिलाफ भारत के दो राज्यों के चुने हुए
मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी और
भगवंत मान

साहब भारतीय जनता पार्टी के यहां पर एक
शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने जा रहे हैं जनता
और आम आदमी पार्टी के
कार्यकर्ता अपनी पार्टी के आम आदमी पार्टी
के आईटीओ स्थित ऑफिस पहुंच रहे हैं मगर

जगह जगह पर मैं देख रहा हूं कई साथियों का
फोन आया कि हमारे विधायकों को डिटेन किया
जा रहा है हमारे पार्षदों को डिटेन किया
जा रहा है हमारे कार्यकर्ताओं को संगठन के

लोगों को डिटेन किया जा रहा है
बसों को रोका जा रहा है बसों की चाबी छीनी
जा रही है अब प्रदर्शन करना गुनाह हो गया
है और जब विपक्ष आपातकाल की बात करती है
तो फिर भारतीय जनता पार्टी को मिर्ची लगती

है आप मुझे बताइए ना क्या यह देश अब
लोकतंत्र नहीं रहा क्या संगोल युग में
क्या अमृत काल में प्रदर्शन करने का किसी
को अधिकार नहीं है अगर वह प्रदर्शन कर रहे

हैं तो उन्हें पूरा अधिकार है आखिर क्या
वजह है कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं
को रोका जा रहा है आमद आमी पार्टी और
कांग्रेस सिर्फ यही कह रही है कि अगर आपने

चंडीगढ़ के मेयर चुनावों में जो एक छोटा
सा चुनाव है वहां पर यह हालत की है और वह
भी कैमरे के सामने सबने कैमरे के सामने
अनिल मसीह की हरकत देखी थी तो सोचिए बंद
कमरे में जहां ईवीएम बंद रहती हैं वह

ईवीएम जो कि पैरामिलिट्री फोर्सेस की
निगरानी में होती हैं उनके साथ क्या होता
होगा यह सवाल तो उठाया जाएगा ना मैं
स्पष्ट कर दूं भी मेरे पास कोई प्रमाण

नहीं है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है
मगर गड़बड़ झाला तो किया ही जा सकता है ना
तो ऐसे में जब विपक्ष सवाल पूछ रहा है तो
चुनाव आयोग उसका जवाब देने को तैयार नहीं

है वह जब सड़क पर उतरते हैं उन्हो
प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं है मैं समझ
नहीं पा रहा हूं इस देश में हो क्या रहा
है जांच एजेंसीज सिर्फ और सिर्फ विपक्ष पर
निशाना साती

है कल कपिल सिब्बल हेमंत सोरेन के लिए
सुप्रीम कोर्ट गए थे उनकी गुजारिश सिर्फ
इतनी थी उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट से
पूछा कि अब राजनीतिक प्रतिशोध के चलते एक
एक विपक्ष के नेता को जेल में डाला जा रहा

है और उस वक्त केंद्र सरकार के नुमाइंदे
सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि दर्जनों लोग
जेल में हैं मगर भ्रष्टाचार के आरोपों में
क्या वो लोग जेल में हैं जो भाजपा की गोद

में बैठ जाते हैं चाहे अजीत पंवार हो
नारायण राणे हो छगन भुजबल हो हेमंत विश्व
शर्मा जिन पर आरोप थे वो तो गोद क्या वो
तो मुख्यमंत्री बन गए

भाई मगर जब हेमंत सोरेन का मामला आज
सुप्रीम कोर्ट के सामने आया ना दोस्तों तो
कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा था सबसे पहले
यह मामला आया जस्टिस बेला त्रिवेदी के
बेंच के सामने जस्टिस बेला त्रिवेदी अब आप

कहेंगे कौन है जस्टिस बेला त्रिवेदी तो
मैं इनका परिचय देना चाहता हूं जस्टिस
बेला त्रिवेदी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे

मैं आपको बताऊंगा 2001 से 2014 के बीच जब
वह मुख्यमंत्री थे तब जस्टिस बेला
त्रिवेदी उनकी लॉ सेक्रेटरी थी यही नहीं
फिर 2016 से 2021 के बीच वह गुजरात हाई

कोर्ट की जज थी वो राजस्थान कोर्ट में
अतिरिक्त जज भी रह चुकी हैं यानी कि एक
तरह से कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के सत्ता के बेहद करीबी रही

अब मैं आपको बतलाना चाहूंगा कि आर्टिकल 14
के लिए पत्रकार सौरव दास ने यह रिपोर्ट की
है और सरल शब्दों में मैं आपको बताना
चाहूंगा यह रिपोर्ट क्या कहती है पहली बात
जितने भी राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मामले

हैं वह जस्टिस बेला त्रिवेदी के पास ही
जाते हैं जो 2001 से 2014 के बीच में लॉ
सेक्रेटरी थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
जब मुख्यम मंत्री हुआ करते थे कम से कम आठ
केसेस जस्टिस बेला त्रिवेदी के पास गए और

सौरव दास की इस रिपोर्ट के मुताबिक जो
नियम कानून है जो दिशा निर्देश है उसकी
धज्जियां उड़ाई जा रही हैं साल 2017 को
सुप्रीम कोर्ट के अपने दिशा निर्देश हैं

उसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं सबसे बड़ी
बात मास्टर ऑफ रोस्टर्स कौन है यानी कि
कौन तय करते हैं कि किस जज के पास कौन सा
केस जाए वो है चीफ जस्टिस इंडिया डी वाय

चंद्रचूर मगर तमाम जो राजनीतिक तौर पर
संवेदनशील मामले हैं वह जस्टिस बेला
त्रिवेदी के पास ही जाते हैं दोस्तों मैं

आपको बतलाना चाहूंगा कि सौरव दास की
रिपोर्ट दरअसल कहती क्या है आवर एनालिसिस
ऑफ एट पॉलिटिकली सेंसिटिव केसेस बिफोर
बेंचेज आइर कंसिस्टिंग ऑफ जस्टिस बेला

माधुर्य त्रिवेदी और प्रिजाइंड ओवर बाय हर
रिवील्स वायलेशन ऑफ द
2017 सुप्रीम कोर्ट कन्वेंशन एंड रूल्स
20177 के के सुप्रीम कोर्ट के नियम कानून
हैं उसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं जिस तरह

से हर मामला हर संवेदनशील मामला उनको दिया
जा रहा है इस तारीख पर गौर कीजिए दोस्तों
5 दिसंबर 2023 उस वक्त जस्टिस संजय किशन

की जो बेंच है सुप्रीम कोर्ट का कोर्ट
नंबर दो एक मामले की सुनवाई कर रहा था और
मामला क्या था केंद्र सरकार जजों के
ट्रांसफर में जो देरी कर रही है वो मामला
था मगर रहस्यमय तरीके से उस मामले को उस

बेंच से हटा दिया जाता है उस मामले में जो
याचिका करता थे उन्होंने कहा ये तो बहुत
ही अजीबोगरीब बात है मामले को अचानक इस
बेंच से ट्रांसफर करके स्थानांतरित करके

कहीं और क्यों भेज दिया गया तब खुद जस्टिस
संजय किशन कॉल ने क्या कहा था मैं आपको
पढ़ के सुनाना चाहता हूं आई विल जस्ट से
वन थिंग आई हैव नॉट डिलीटेड द मैटर जस्टिस

कॉल सेड इन कोर्ट आई एम शोर द चीफ जस्टिस
ऑफ इंडिया नोज अबाउट इट सम थिंग्स आर
बेस्ट लेफ्ट अन
सेड उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ एक ही चीज

कहना चाहता हूं मैंने मामले को नहीं हटाया
मैंने मामले को डिलीट नहीं किया इस बात का
जवाब खुद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई
चंद्रचूर दे सकते हैं कुछ मामलों के बारे

में जितना कम कहा जाए उतना अच्छा सुप्रीम
कोर्ट का एक जज कह रहा है कि कुछ मामलों
के बारे में किस रहस्यमय तरीके से कुछ
मामलों को एक अदालत से दूसरी अदालत में एक

बेंच से दूसरी बेंच में एक जज से दूसरे जज
को भेज दिया जाता है इस पर मैं कुछ नहीं
कहना चाहता जितना कम कहा जाए उतना
सही मैंने आपसे कहा कि 2017 का सुप्रीम

कोर्ट का अपना दिशा निर्देश है उसका
उल्लंघन किया गया है कौन सा दिशा निर्देश
आपकी स्क्रीन पर आर्टिकल 14 की रिपोर्ट
कहती है अंग्रेजी में है और फिर मैं उसका

हिंदी में अनुवाद करूंगा रूल नंबर सिक्स
अंडर केसेस कोरम एंड लिस्टिंग ऑफ द
सुप्रीम कोर्ट हैंडबुक ऑन प्रैक्टिस एंड
प्रोसीजर एंड ऑफिस प्रोसीजर मैंडेट्स दैट

इफ द फर्स्ट कोरम द प्रिजाइंड जज इज नॉट
अवेलेबल ऑन अ पर्टिकुलर डे ऑन अकाउंट ऑफ
रिटायरमेंट द केस शैल बी लिस्टेड बिफोर द
जज कॉन्स्टिट्यूशन कोरम व्हिच इज द

नेक्स्ट सीनियर मोस्ट अंपन जज ऑफ द बेंच
इफ द सेकंड कोरम इज आल्सो अनअवेलेबल द केस
शैल नॉट बी लिस्टेड ऑन दैट डे हिंदी में

इसका अनुवाद यह है कि रूल नंबर छ के
मुताबिक अगर एक मामला एक सुप्रीम कोर्ट की
बेंच के सामने आता है और जज मौजूद नहीं है
अगर सीनियर मोस्ट जज नहीं है तो उनके बाद
सीनियरिटी में जो अगले व्यक्ति हैं वो

उसकी सुनवाई करेंगे अगर वो भी नहीं है तो
मामले को लिस्ट नहीं किया जाएगा यह रूल
नंबर सिक्स कहता है सुप्रीम कोर्ट
का और फिर तमाम जो संवेदनशील मामले हैं
सिर्फ और सिर्फ एक ही जज के पास जा रहे
हैं वह है सम्मानित जज जस्टिस बेला

त्रिवेदी जो कि प्रधानमंत्री के कार्यकाल
के दौरान बतौर मुख्यमंत्री वह लॉ
सेक्रेटरी हुआ करती थी मैं यहां पर जस्टिस
बेला त्रिवेदी की विश्वसनीयता पर सवाल
नहीं उठा रहा हूं मैं आपके सामने सिर्फ

तर्क रख रहा हूं वही तर्क जो सौरव दास रख
रहे हैं मैं आपके सामने रखना चाहता हूं व
मुद्दा कि खुद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी
वाय चूर ने कहा था कि अगर विपक्ष के साथ
नाइंसाफी होगी तो हम उस मामले को सुनेंगे

जब आप अर्नव गोस्वामी को आजाद कर सकते
हैं तो हेमंत सोरेन के मामले में तो साफ
तौर पर दिखाई दे रहा है कि राजनीतिक
प्रतिशोध
है मैं सम्मानित जजेस से यह भी कहना चाहता

हूं कि मनीष सिसोदिया के मामले की सुनवाई
के दौरान आपने खुद कहा था कि इस मामले में
जांच एजेंसीज का जो केस है जो सबूत है वह
एक मिनट अदालत में नहीं टिकेगा और फिर

सम्मानित जजेस ने खुद मनीष सिसोदिया की
बेल को रिजेक्ट कर
दिया यह सवाल है पूछे जाने चाहिए नहीं
पूछे जाने चाहिए मेरे मन में सुप्रीम

कोर्ट के लिए बेतहाशा सम्मान है मगर यह
सवाल है नियमों की अनदेखी की जा रही है कब
तक चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाय चंद्रचूड़
खामोश रहेंगे चंद्रचूड़ साहब आप तो बहुत
ही साहसी बयान देते हैं ना फिर क्या वजह

है कि आप जो कि मास्टर ऑफ रोस्टर्स हैं आप
जोक ये तय करते हैं कि किस जज के पास कौन
सा केस जाए हर राजनीतिक तौर पर संवेदनशील
मामला जस्टिस बेला त्रिवेदी के पास जाता

है यह सवाल है यह किए जाएंगे ईडी के
पक्षपात पूर्ण रवैए पर सवाल किए जाएंगे
अगर ईडी 100 केसेस करती है 100 छापे
मरियां करती है तो 100 में से 97 100 में
से 97 केसेस विपक्ष के होते हैं मैं आपको

एक और चीज बताता हूं जाते जाते पेटीएम को
लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कड़े तेवर
अपनाए हैं मैं आपको बतलाना चाहूंगा कि
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मनी

लरिंग का भी दिखाई दे रहा है मगर क्या ईडी
ने पेटीएम पर छापा मारा क्योंकि मैं नहीं
भूला हूं कि उनका जो मालिक है विजय शेखर
शर्मा वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का
परम भक्त है उनके गुणगान किया करता था

क्योंकि जब कैशलेस इंडिया की बात की जा
रही थी तब यह व्यक्ति सबसे आगे हुआ करता
था आज पेटीएम के खिलाफ रिजर्व बैंक ऑफ
इंडिया ने सख्ती की है मगर जांच एजेंसीज
ईडी इनकम टैक्स अब तक विजय शेखर शर्मा या

पेटीएम के दफ्तर नहीं पहुंची है अब भी आप
मुझसे उम्मीद करते हैं कि मैं इस बात पर
विश्वास करूं कि जांच एजेंसियां निष्पक्ष
है और हेमंत सोरेन को जो टारगेट किया जा
रहा है वो मामला भ्रष्टाचार का है वो एक

पुराना विज्ञापन है ना नो उल्लू बनांग नो
उल्लू
बनाओ उल्लू बनाना छोड़िए मुद्दे पर आइए
लोकतंत्र का नाम बदनाम मत कीजिए

नमस्कार

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