Airports से कैसे होती है कमाई ? | How Airports Earn Money ? - instathreads

Airports से कैसे होती है कमाई ? | How Airports Earn Money ?

दोस्तों भारत में एयर ट्रैवल का मार्केट
हर साल 7 पर की दर से बढ़ रहा है यही वजह
है कि हम नए-नए डोमेस्टिक और इंटरनेशनल
एयरपोर्ट्स को भी देश भर में खुलते हुए
देख रहे हैं इन एयरपोर्ट्स को बनाने में

हजारों करोड़ों का खर्चा आता है और सरकार
ही नहीं प्राइवेट कंपनीज भी इसमें
इन्वेस्ट करती हैं जी हां लेकिन फिर इस
इन्वेस्टमेंट का होता क्या है आखिर यह
एयरपोर्ट्स कैसे अपनी कॉस्ट को रिकवर करते

हैं भारत के लगभग सभी एयरपोर्ट्स
प्रॉफिटेबल हैं इसका मतलब है कहीं ना कहीं
से तो पैसा आ रहा है पर क्या है एयरपोर्ट
के कमाई के साधन आइए जानने की कोशिश करते
हैं आज के इस वीडियो में इससे पहले कि हम

एयरपोर्ट की कमाई पर जाएं पहले यह देख
लेते हैं कि भाई आखिर एक एयरपोर्ट को
कितना पैसा खर्च करना पड़ता है इससे हमें
यह तो अंदाजा हो ही जाएगा कि प्रॉफिटेबल

होने के लिए एक एयरपोर्ट को कितना पैसा
कमाना पड़ता है एयरपोर्ट की कॉस्ट तभी से
शुरू हो जाती है जब उसे बनाने का प्लान
शुरू होता है इसमें सबसे बड़ा खर्च लैंड
एक्विजिशन का है इसके बाद यहां पर

इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करना भी एक
चैलेंज रहता है इस तरह से हम अगर देखें तो
रिसेंटली बने नवी मुंबई इंटरनेशनल
एयरपोर्ट की कॉस्ट 167000 करोड़ आकी गई थी

लेकिन जब तक वो बनकर तैयार हुआ तब तक यह
कॉस्ट तकरीबन 225000 करोड़ तक पहुंच गई थी
इसके अलावा यूपी के जेवर में एशिया का
सबसे बड़ा एयरपोर्ट नोयडा इंटरनेशनल
एयरपोर्ट बनाया जा रहा है और इसकी कॉस्ट

भी अभी के लिए 0000 करोड़ आंकी गई है अब
एक एयरपोर्ट को यह कॉस्ट अपने लाइफ टाइम
में ही रिकवर करनी होती है ताकि वह
प्रॉफिट के बारे में सोच सके अब इसके बाद

एयरपोर्ट के दूसरे खर्चे आ जाते हैं इन
खर्चों में एंप्लॉयज की सैलरी रनवेज की
मेंटेनेंस मार्केटिंग एडमिनिस्ट्रेशन
सिक्योरिटी और मैनेजमेंट एक्सपेंसेस समेत

इलेक्ट्रिसिटी और वाटर सप्लाई जैसे बिल्स
भी शामिल होते हैं इसके अलावा सभी
एयरपोर्ट्स को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया
यानी एएआई को भी पैसा देना होता है जी हां

क्योंकि एयर ट्रैफिक कंट्रोल और नेविगेशन
सर्विसेस जैसे की कंपोट ट्स के लिए यह सभी
एयरपोर्ट्स एएआई पर ही डिपेंडेंट हैं अगर
एयरपोर्ट्स के एक्सपेंसेस को उनके

एक्सपेंसेस के साथ देखा जाए तो हमारे लिए
आंकड़ा ज्यादा क्लियर हो जाएगा अगर हम
दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट की बात करें तो
साल 2020 पिछले चार से 5 सालों में

रेवेन्यू के मामले में सबसे बड़ा साल रहा
है जहां 2023 में आईजीआई एयरपोर्ट का
रेवेन्यू करीब 3000 करोड़ था वहीं 2020
में यह रेवेन्यू
4.24 हज करोड़ था इन 4.24 हज करोड़ में से
एयरपोर्ट का टोटल प्रॉफिट करीब 13.1 करोड़

था जो कि इसके टोटल एक्सपेंसेस को 4.23
करोड़ के करीब ले जाता है हर साल दिल्ली
एयरपोर्ट पर ती से 4 करोड़ पैसेंजर्स आते
हैं जो दर्शाता है कि भाई उनकी पर पैसेंजर
कॉस्ट करीब 2000 है अब अगर एयरपोर्ट को

प्रॉफिटेबल होना है तो उन्हें यह
₹2000000 रेवेन्यू एरोनॉटिकल रेवेन्यू की
कॉस्ट का एक बड़ा हिस्सा है तो डायरेक्टली
आपकी फ्लाइट टिकट्स के अंदर ही इंक्लूडेड
होता है हर एयरलाइन को एक प्लेन के लिए
लैंडिंग चार्जेस देने होते हैं यह लैंडिंग

चार्जेस एक प्लेन के वेट से डिटरमाइंड
किया जाता है अगर लैंडिंग कॉस्ट की बात की
जाए तो फिर से एक बार आईजीआई एयरपोर्ट का
ही उदाहरण लेते हैं देखिए उनके रूल्स में
ये साफ मेंशन है कि कोई भी डोमेस्टिक
फ्लाइट जिसका वेट 100 मेट्रिक टन तक है

उसे पर एमटी
99.2 देने होंगे इसके बाद जो एयरक्राफ्ट
100 एमटी से ज्यादा के हैं उन्हें
9952 के अलावा पर मेट्रिक टन वेट पर
8369 अलग से देने होंगे इंटरनेशनल
फ्लाइट्स के लिए यह कॉस्ट और भी ज्यादा

बढ़ जाती है इसके अलावा लैंडिंग और टेक ऑफ
के बीच में जितना भी समय एक एयरक्राफ्ट
एयरपोर्ट के अंदर बिताता है एयरलाइन को
उसके लिए भी पार्किंग फीस भी देनी पड़ती

है अगर एक एयरक्राफ्ट रात भर किसी
एयरपोर्ट पर ही खड़ा रहता है तो कुछ
एक्स्ट्रा चार्जेस भी इसमें ऐड हो जाते
हैं यह पार्किंग फीज भी एयरक्राफ्ट की
साइज और एयरपोर्ट की लोकेशन के हिसाब से

चेंज होती रहती है इसके बाद अगला चार्ज
होता है पैसेंजर सर्विस फीज का यह फीस सभी
एयरपोर्ट्स पर पैसेंजर बेसिस पर चार्ज
करते हैं इस फीस के अंदर ही एयरपोर्ट

सिक्योरिटी फीज टर्मिनल सर्विस फीज और
पैसेंजर्स को दी जाने वाली दूसरी फैसिलिटी
के चार्जेस इंक्लूड होते हैं इन सबके
अलावा फ्यूल सरचार्जेस और यूजर डेवलपमेंट
फीस जैसी चीजों से भी एयरपोर्ट्स अपना

एरोनॉटिकल रेवेन्यू अर्न करते हैं अब इसे
एक उदाहरण से देखें तो एक बोइंग 787 प्लेन
का वेट करीब 115 मेट्रिक टन होता है जिसके
अंदर 250 पैसेंजर्स के बैठने की व्यवस्था
होती है इसकी लैंडिंग कॉस्ट करीब 1.32 लाख

है और एयरलाइन को इस प्लेन के लिए
₹2500000
₹ चार्ज करेगा इसके अलावा एयरलाइन को पर
पैसेंजर ₹ भी एयरपोर्ट को देने होंगे अब
इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि 250 सीट्स
में से कितनी सीट्स ऑक्यूपाइड है क्योंकि

एयरलाइन को सभी सीट्स के लिए पैसा पे करना
होगा फिर चाहे उस पर कोई पैसेंजर हो या
फिर ना हो इस तरह से 250 सीट्स के लिए
तकरीबन 1.35 लाख उन्हें और भी पे करने पड़

जाते हैं इसके बाद यूजर डेवलपमेंट फी के
तौर पर भी एयरपोर्ट्स पर पैसेंजर 100 से
00 चार्ज करते हैं इसके अलावा हर एयरपोर्ट
के अंदर एक एविएशन सिक्योरिटी फीस भी होती
है पर पैसेंजर इसके लिए एक एयरपोर्ट करीब

₹2000000 क्लास की सीट्स भर नहीं पाती हैं
तो कई पैसेंजर्स को अपग्रेड कर दिया जाता
है क्योंकि एयरलाइन को तो सभी पैसेंजर्स
के लिए सेम ही पैसा खर्च करना पड़ता है इस
तरह के सभी एक्सपेंसेस एयरलाइन कंपनीज

द्वारा एयरपोर्ट को पे किए जाते हैं और इन
चार्जेस का एक बड़ा हिस्सा वो आपकी फ्लाइट
टिकट्स में इंक्लूड कर देते हैं लेकिन
एरोनॉटिकल रेवेन्यू के मुकाबले देखिए किसी
भी एयरपोर्ट का नॉन एरोनॉटिकल रेवेन्यू
ज्यादा होता है दिल्ली के आईटीआई एयरपोर्ट

को ही फिर से उदाहरण के तौर पर लिया जाए
तो जहां उनका टोटल रेवेन्यू दो 2023 में
3000 करोड़ था इसमें से . 17000 करोड़
उन्होंने नॉन एरोनॉटिकल रेवेन्यू से कमाए

थे नॉन एरोनॉटिकल रेवेन्यू में कई तरह के
सोर्सेस से कमाई होती है इसमें सबसे पहले
तो है पार्किंग चार्जेस एयरपोर्ट तक जाने
और वहां से घर आने के लिए फिर चाहे आप

किसी प्राइवेट व्हीकल का इस्तेमाल करें या
फिर किसी कैब या शटल सर्विस का सभी को
पार्किंग चार्जेस पे करने पड़ते हैं
एयरपोर्ट्स के अंदर स्पेसिफिक पिकअप एंड
ड्रॉप ऑफ जोनस होते हैं जहां तैनात बसेस

और कैब्स भी इसके लिए चार्जेस पे करती हैं
अगर हम आईजीआई एयरपोर्ट को देखें तो वहां
एक फोर व्हीलर को आधा घंटा पार्क करने के
लिए ₹10 देने होते हैं और एक घंटे के लिए
₹10 इसके बाद हर एक्स्ट्रा घंटे के हिसाब

से इसमें ₹1 और भी ऐड कर दिए जाते हैं अगर
कोई 5 से 24 घंटे तक वहां अपनी गाड़ी
पार्क करना चाहता है तो उसके लिए उन्हें ₹
6600 तक देने पड़ते हैं दूसरी ओर टू
व्हीलर्स के लिए एयरपोर्ट पर पहले घंटे

में ₹10 चार्ज है और उसके बाद हर
एक्स्ट्रा घंटे के लिए उसमें ₹10 ऐड कर
दिए जाते हैं इसके अलावा कैब सर्विसेस को
भी यहां पर ₹1 तक का सरचार्ज पे करना
पड़ता है इस तरह सिर्फ पार्किंग चार्जेस

से ही नॉन एरोनॉटिकल रेवेन्यू का 20 से 30
पर हिस्सा कमाया जाता है इसके साथ-साथ
एयरपोर्ट्स जब लैंड
अक्वायर्ड से ज्यादा लैंड एक्वायर कर लेते
हैं इसका एक मकसद तो यह होता है कि भाई

फ्यूचर में एयर एयरपोर्ट को एक्सपेंड करने
का ऑप्शन खुला रहे लेकिन इसके साथ-साथ वो
लोग यह बात भी समझते हैं कि एयरपोर्ट के
बनने से रियल स्टेट मार्केट में इस जमीन

के दाम काफी बढ़ जाएंगे समय-समय पर
एयरपोर्ट इस जमीन को बड़े होटल्स और दूसरे
बिजनेसेस को ऊंचे दामों पर बेचकर पैसा
कमाता रहता है इसके अलावा एयरपोर्ट
पहुंचने से पहले भी आप कई सारे बिलबोर्ड्स

डिजिटल स्क्रीन्स और दूसरे तरह के
प्रमोशनल मटेरियल को देखते हैं जनरली इन
पर भी एयरपोर्ट का ही कंट्रोल होता है
एयरपोर्ट के अंदर भी आपको इसी तरह की

एडवर्टाइजमेंट दिख जाएंगी साथ ही एयरपोर्ट
पर आने वाले लोग ज्यादातर हाई इनकम
कैटेगरी से होते हैं जिसका मतलब है कि भाई

उनकी परचेसिंग पावर भी ज्यादा है यही वजह
है कि एयरपोर्ट के आसपास और उसके अंदर के
एडवर्टाइजमेंट स्पेसेस नॉर्मल मार्केट रेट
से ज्यादा महंगे बिकते हैं अब एयरपोर्ट के

अंदर बाकी चीजों को देखा जाए तो उसमें
आपको कई सारे रिटेल स्टोर्स और
रेस्टोरेंट्स भी मिल जाएंगे इनसे या तो
एयरपोर्ट्स काफी हाई रेंट वसूल करता है या

फिर इनकी की सेल्स में एयरपोर्ट्स का भी
15 से 25 पर तक का हिस्सा होता है यही वजह
है भाई कि इन जगहों पर एक नॉर्मल पानी की
बोतल या समोसे की कॉस्ट भी बाहर के

मुकाबले काफी हाई रहती है एयरपोर्ट्स यह
भी इंश्योर करते हैं कि लोग यहां पर जरूर
आएं यही वजह है कि पैसेंजर से कहा जाता है
कि वह अपनी फ्लाइट से डेढ़ या दो घंटा

पहले एयरपोर्ट पहुंच जाएं एयरपोर्ट्स वैसे
तो यह लॉजिक देते हैं कि इससे लगे चेकइन
और दूसरे कामों में होने वाले डिले को
काउंटर किया जा सकता है लेकिन आज

एयरपोर्ट्स के पास इतनी टेक्नोलॉजी और
स्टाफ है कि वो यह सारा काम तकरीबन 30
मिनट के अंदर-अंदर निपटा सकते हैं लेकिन
वह ऐसा करना नहीं चाहते क्योंकि अगर
पैसेंजर्स अपनी फ्लाइट से सिर्फ 30 मिनट

पहले एयरपोर्ट आने लगे तो भाई उनके पास
एयरपोर्ट में घूमने का वक्त ही नहीं होगा
और वो कुछ खरीद भी नहीं पाएंगे इसके अलावा
एयरपोर्ट के अंदर सीटिंग को भी जानबूझकर
मिनिमम रखा जाता है ताकि लोग इन

रेस्टोरेंट्स में बैठने के लिए चले जाएं
यहां जाकर वो कुछ ना कुछ तो जरूर खरीदेंगे
और उससे भी एयरपोर्ट को प्रॉफिट होगा अब
एयरपोर्ट की यह पूरी कोशिश रहती है कि एक
पैसेंजर अपनी फ्लाइट पर चढ़ने से पहले

ज्यादा से ज्यादा समय एयरपोर्ट पर बिता
सके ताकि उनके कमाई के चांसेस भी उतने ही
ज्यादा बढ़ जाए एयरपोर्ट्स के अंदर हर तरह
की शॉप को बहुत ही स्ट्रेटजिकली प्लेस

किया जाता है ताकि वहां से उसी वक्त और
उसी तरह के कस्टमर्स गुजरे जो वो सामान
खरीदने में इंटरेस्टेड हो जैसे कि
रेस्टोरेंट्स को ज्यादातर बैगेज काउंटर से
लेकर सिक्योरिटी के मेन एरिया में प्लेस

किया जाता है यहां पर लोगों को वेट करना
पड़ता है और उनके लिए इनफ सीट्स भी
अवेलेबल नहीं होती अब ऐसे समय में वह ओपन
रेस्टोरेंट्स में बैठने के लिए मजबूर हो

जाते हैं इस तरह सिर्फ फूड और ड्रिंक्स के
जरिए ही एक एयरपोर्ट अपने नॉन एरोनॉटिकल
रेवेन्यू का 10 से 20 पर हिस्सा कमा लेते
हैं अब इसके बाद आती है ड्यूटी फ्री शॉप्स
यह व शॉप्स हैं जहां पर आपको किसी भी आइटम
पर कोई टैक्स नहीं पे करना पड़ता यह

कांसेप्ट सबसे पहले 1947 में आयरलैंड के
एक एयरपोर्ट ने अपने इंटरनेशनल पैसेंजर्स
के लिए शुरू किया था इसकी सक्सेस को देखते
हुए आज दुनिया के सभी इंटरनेशनल
एयरपोर्ट्स ने इस मेथड को अडॉप्ट कर लिया

है ड्यूटी फ्री शॉप्स में क्योंकि
पैसेंजर्स को किसी भी तरह का कोई भी टैक्स
पे नहीं करना पड़ता इसलिए ज्यादातर लोग
यहां से शॉपिंग करना पसंद करते हैं एक
नॉर्मल शॉप के मुकाबले यहां पर कोई भी

आइटम 20 से 30 पर तक सस्ती होती है जो कि
कस्टमर्स डिमांड को बढ़ाने में
कंट्रीब्यूट करती है ड्यूटी फ्री जॉस का
75 से 80 पर रिवेन्यू सिर्फ सिगरेट्स और
अल्कोहल की शॉपिंग से ही आता है जो कैरी

करनी भी आसान होती है और अगर आप कहीं जा
रहे हैं तो अल्कोहल को गिफ्ट के तौर पर भी
ले जा सकते हैं हालांकि यहां से अनलिमिटेड
शॉपिंग नहीं की जा सकती ड्यूटी फ्री शॉप्स

को लेकर भी कुछ रूल्स काफी क्लियर हैं
जैसे कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड
कस्टम्स के लिमिट्स के अनुसार भारत में एक
पैसेंजर एक ड्यूटी फ्री शॉप से ₹2500000

सिर्फ 2 लीटर ड्यूटी फ्री अल्कोहल ही एक
पैसेंजर को कैरी करने की इजाजत है आखिर
में हम कुछ दूसरे कमाई के सोर्सेस की तरफ
आते हैं देखिए एयरपोर्ट के अंदर लांच भी
होते हैं यह एक सेपरेट एरिया होता है जहां
पैसेंजर्स को स्पेशल ट्रीटमेंट मिलता है

 

पैसेंजर्स को लांच एक्सेस के लिए भी काफी
पैसा पे करना पड़ता है जैसे कि आईजीआई
एयरपोर्ट में लाउज एक्सेस के लिए आपको
₹1000000 जो अपने कस्टमर्स को फ्री लाउच
एक्सेस देती हैं इस तरह की अरेंजमेंट में

क्रेडिट कार्ड कंपनी एयरपोर्ट को एक
सालाना फीस देती है और कस्टमर्स फ्री में
लाउच एक्सेस एंजॉय करते हैं यह अरेंजमेंट
एक क्रेडिट कार्ड कंपनी के लिए भी काफी
प्रॉफिटेबल है क्योंकि एयरपोर्ट पर आने

 

वाले कस्टमर्स हाई इनकम ग्रुप से होते हैं
और अगर वह उनका क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर
रहे हैं तो भैया यह कंपनी के लिए काफी
प्रॉफिटेबल है दूसरी तरफ इन क्रेडिट

कार्ड्स के लिए भी अब कंपनी ज्यादा एनुअल
चार्जेस अपने कस्ट कस्टमर से डिमांड कर
सकती हैं क्रेडिट कार्ड में लाउच एक्सेस
और दूसरे बेनिफिट्स को देखते हुए कस्टमर्स

भी यह पैसा आसानी से पे करते थे यानी एक
तरह से देखा जाए तो एयरपोर्ट लाउच को
क्रेडिट कार्ड कंपनीज अपने प्रमोशंस के
लिए इस्तेमाल करती हैं ताकि वह अपनी

सर्विसेस बेच सकें और यही वह कुछ जरिए हैं
जिससे एयरपोर्ट्स मुख्य तौर पर अपनी कमाई
करते हैं जहां एक तरफ एरोनॉटिकल रेवेन्यू
से उन्हें एयरलाइन कंपनी उन्हें लैंडिंग

चार्जेस पार्किंग फीज पैसेंजर यूटिलिटी फी
और दूसरे कई तरह की फीस पे करती है वहीं
दूसरी ओर नॉन एरोनॉटिकल चार्जेस में
डायरेक्टली पैसेंजर्स उन्हें पार्किंग फीस
और सेल्स के जरिए रेवेन्यू प्रोवाइड करते

हैं इसके अलावा एयरपोर्ट पर आने वाले
कार्गो और उसकी हैंडलिंग से भी एयरपोर्ट्स
पैसे कमाते हैं यह कमाई आईजीआई और मुंबई
के एयरपोर्ट्स के लिए और भी ज्यादा
सिग्निफिकेंट हो जाती है क्योंकि वहां पर

ज्यादातर ऐसे कार्गो शिपमेंट्स दुनिया भर
से पहुंचती हैं या फिर दुनिया भर में भेजी
जाती हैं भारत में आज एयरपोर्ट्स की गिनती
100 के भी पार चली गई है और हम देख रहे
हैं कि ज्यादा से ज्यादा प्राइवेट कंपनीज

के बीच इनके ऑपरेशंस हैंडल करने के लिए
कंपटीशन भी पड़ रहा है हमने देखा कि
एयरपोर्ट से कमाई का जो नंबर है वह हजारों
करोड़ों में जा सकता है इसलिए यह कंपनीज
कई बार तो काफी बड़े-बड़े लोंस लेकर भी इन

एयरपोर्ट्स के लिए बिड करने से भी नहीं
कतराती है खैर आपको क्या लगता है कि भारत
में एयर ट्रैवल का फ्यूचर कैसा है साथ ही
क्या आप चाहते हैं कि हम एयरलाइंस की कमाई
पर भी एक अलग से वीडियो बनाएं अपनी राय
हमें कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताना

 

उम्मीद करता हूं आज आपको इस वीडियो में
काफी कुछ नया मिला होगा अगर आपको यह
वीडियो पसंद आया है तो वीडियो को लाइक
करें

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