Chandigarh Mayor Election और Electoral Bond पर SC के फैसले से टूटा BJP का गुरूर। SDR EP39 | - instathreads

Chandigarh Mayor Election और Electoral Bond पर SC के फैसले से टूटा BJP का गुरूर। SDR EP39 |

लोकसभा चुनाव से पहले ही मोदी सरकार हार
गई एक बार नहीं दो बार हारी है लेकिन यह
हार विपक्ष से नहीं मिली है बल्कि देश के
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जोरदार झटका
दिया है चुनावी भाषा में बोले तो जमानत

जबत हो गई है पहला झटका इलेक्टोरल बॉन्ड
को असंवैधानिक करार देना दूसरा झटका
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के
प्रत्याशी को विजय घोषित करना अब इन दोनों
ही मामलों में दो बात कॉमन है झटका देने

वाली सुप्रीम कोर्ट और झटका खाने वाली
सरकार नमस्कार मैं हूं सुधांशु महेश्वरी
और शुद्ध देसी राजनीति में आप सभी का
स्वागत है पिछले कुछ सालों में सुप्रीम
कोर्ट में विपक्षी नैरेटिव की हार हुई है

सरकार को घेरने के लिए जब भी मुद्दा उठाया
गया सर्वोच्च अदालत ने क्लीन चिट देकर
विपक्ष के अरमानों पर पानी फेर दिया याद
कीजिए राहुल गांधी ने किस तरह से राफेल का
मुद्दा उठाया था हर रैली में जनता के

सामने बोलते चौकीदार चोर है अब इन आरोपों
में दम लगता अगर सुप्रीम कोर्ट भी ऐसा
मानता लेकिन हुआ क्या राफेल खरीदने की जिस
प्रक्रिया पर बवाल था उसी पर कोर्ट ने कोई
डाउट नहीं किया एंड सरकार को मिल गई क्लीन

चिट यानी कि जिस राफेल मुद्दे पर राहुल
पूरे अपोजिशन को एकजुट करना चाहते थे उनकी
कोशिश हो गई पता नहीं ऐसे डेंजरस सिचुएशन
में मैं ऑटोमेटिक आगे कैसे आ जाता हूं सेम
गोज विद अडानी केस वही करप्शन का आरोप

संसद को घेरने की कोशिश बट सुप्रीम कोर्ट
जाते ही सब कुछ ठंडा लेकिन लेकिन अब गेम
पलट गया है इंडिया गठबंधन को मोदी सरकार
के खिलाफ इम्युनिटी मिल चुकी है इम्युनिटी
उस परसेप्शन की जहां कहा गया मोदी सरकार

ने कोई करप्शन नहीं किया अब जरा इस
परसेप्शन वर्ड पर थोड़ा गौर फरमाइए ऐसा
नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी या
मोदी को भ्रष्टाचारी कह दिया हो बट
अपोजिशन ने काफी चालाकी के साथ यह माहौल
सेट कर दिया है मोदी सरकार कोई सर्वगुण

संपन्न नहीं है दाग तो यहां भी लगे हैं यह
अलग बात है अगर बीजेपी बोल दे दाग अच्छे
हैं चलिए अब सबसे पहले इलेक्टोरल बॉन्ड की
बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन
पहले ही इस स्कीम को रोक लगा दी थी रोक
लगाने का सबसे बड़ा आधार यह था कि

पार्टियों को पैसे देने वाले लोगों की कोई
जानकारी नहीं थी उनकी आइडेंटिटी को
डिस्क्लोज नहीं किया जा रहा था अब सरकार
का लॉजिक था हम तो डोनर्स को प्रोटेक्ट कर
रहे थे एग्जांपल तक दिया गया अगर दूसरी

पार्टी को पता चल जाता कि फलाना पार्टी को
कहां से पैसा मिला है तो उस पर हमला कर
देते ऐसे में डोनर्स की आइडेंटिटी ही मत
बताओ बट हमारे सुप्रीम कोर्ट ने काफी बुरी
तरह इस लॉजिक को धो डाला कोर्ट ने साफ कहा
किसी कॉरपोरेट के चंदा देने में और आम

आदमी के चंदा देने में फर्क होता है कोई
कंपनी अगर चंदा दे रही है वह इन रिटर्न
अपने लिए कुछ ना कुछ फेवर जरूर मांगेगी
ऐसे में आम जनता को पता होना चाहिए कहां
से पैसा आ रहा है कितना पैसा आ रहा है

सरकार तो यह भी कह रही थी हम इलेक्शन
प्रोसेस में कैश फ्लो को कम करना चाह रहे
थे जो पहले काले धन का इस्तेमाल हो जाता
था उस पर रोक लगानी थी बट फिर सुप्रीम
कोर्ट ने काउंटर किया और दो टूक बोला

भ्रष्टाचार को रोकने के लिए और बेहतर
विकल्प हो सकते हैं अभी जो स्कीम थी उसमें
पारदर्शिता की कमी थी इस बात पर भी जोर
दिया गया इलेक्टोरल बॉन्ड की वजह से समान
प्लेइंग फील्ड नहीं बन पा रही थी इसके

पीछे का लॉजिक भी सिंपल था जो पार्टी
सत्ता में उसे आसानी से फंडिंग मिल रही थी
जो विपक्ष में उसे उतना चंदा नहीं मिल पा
रहा था एडीआर की रिपोर्ट कहती है पिछले 6
सालों में बीजेपी को इलेक्टोरल बॉन्ड के

जरिए 6000 करोड़ से ज्यादा का चंदा मिला
वहीं दूसरी सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी
कांग्रेस को सिर्फ हजार करोड़ के करीब
चंदा मिल पाया इतने सालों से बेचारा
अपोजिशन चीक चक कर बोल रहा था ऐसा क्या
गुनाह किया तो लुट गए हां लुट गए अब

सुप्रीम कोर्ट ने पुकार को सुन लिया है और
पूरी तरह बैक फुट पर आ गई है सरकार वैसे
बैकफुट पर तो एक और मामले में सरकार है
किसने सोचा था विपक्ष की भाषा में सुप्रीम

कोर्ट में सुनाई देगा बिना लाग लपेटे के
बोल दिया यह तो लोकतंत्र की हत्या है
लोकतंत्र का मजाक बना बना करर रख दिया हम
ऐसा होने नहीं दे सकते अगर हम आपको यह
मामला नहीं बताते एक बार तो लगेगा कि

विपक्ष का कोई नेता ही आरोप लगा रहा है
लेकिन ना मैंने कहा था गेम पलट गया है यह
सारी बातें कोर्ट ने कही हैं चंडीगढ़ मेयर
चुनाव को लेकर कहीं है बिल्कुल सिंपल भाषा
में बताते हैं चंडीगढ़ का जो मेयर चुनाव

हुआ दो पार्टियां थी बीजेपी और इंडिया
गठबंधन वोटिंग हुई और इंडिया गठबंधन के
नेता को मिले 20 वोट बीजेपी उम्मीदवार के
पास गए 16 वोट अब सिंपल गणित कहता है
इंडिया वालों के पास ज्यादा वोट थे जीत

उनकी हो चुकी थी मेयर भी उनका बनना चाहिए
लेकिन यहां हुआ खेल यह चुनाव बैलेट पेपर
से हुआ था एक रिटर्निंग ऑफिसर था जो वोटों
की काउंटिंग कर रहा था अब उस बंदे ने
इंडिया गठबंधन को मिले आठ वोट रद्द कर दिए
यानी कि 20 – 8 = इक्ट 12 वोट बीजेपी को

मिले थे 16 तो बस बीजेपी का पार्षद जीत
गया और इंडिया वाले चले गए सुप्रीम कोर्ट
जानते हैं सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
लोकतंत्र का मजाक बनाकर रख दिया हत्या कर
दी हम तुम्हें छोड़ेंगे नहीं यह सारी तर्क

टिप्पणी उस रिटर्निंग ऑफिसर के लिए की गई
थी जिसने वोट रद्द करने का काम किया फाइनल
वर्डिक्ट यह रहा कि कोर्ट ने आप प्रत्याशी
को विनर घोषित कर दिया और पार्षद पद भी
उनके पास गया मजे की बात देखिए सुप्रीम

कोर्ट ने एक बार भी बीजेपी का नाम नहीं
लिया मोदी सरकार का जिक्र नहीं किया लेकिन
सोशल मीडिया पर माहौल क्या बना बीजेपी की
धांधली हो गई एक्सपोज मोदी सरकार के झूठ
का पर्दाफाश यह सिर्फ कैची हेडलाइन नहीं
है वोटर के मन पर इसका असर पड़ता है वैसे

भी विपक्ष पिछले कई सालों से इसी मुद्दे
को भुनाना चाहता है वो तो दिखाना चाहता है
कि जनता ने नहीं धांधली ने बीजेपी को
चुनाव जिताया है अब हमारा विपक्ष तो इस
काम में ज्यादा सफल नहीं हो पाया लेकिन
सुप्रीम कोर्ट ने उसकी बहुत बड़ी मदद कर

दी है पिच तो तैयार कर दी गई है अब सियासी
खाद समय रहते दूसरे मुद्दों की फसल इंडिया
गठबंधन को उगानी है लेकिन समय रहते बिकॉज
बीजेपी की सियासी बारिश विपक्ष की फसल को
खराब भी कर सकती है इसी को कहते हैं शुद्ध
देसी राजनीति
नमस्कार

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