Dhirubhai Ambani 0₹ To 10000 Crore Success Story | Business Ideas - instathreads

Dhirubhai Ambani 0₹ To 10000 Crore Success Story | Business Ideas

यह साल है 1932 का यह है गुजरात का चोरवा
गांव इस गांव के अंदर यह छोटे से घर में
यह हीराचंद गोरधन भाई अंबानी नाम के इंसान
अपने दो बच्चों और अपनी बीवी के साथ में
रहते हैं अपनी रोजी रोटी चलाने के लिए यह

अपने पास के ही स्कूल के अंदर पढ़ाती हैं
आज 6 जुलाई 1932 को इनका तीसरा बच्चा पैदा
हुआ है और इसका नाम इन्होंने रखा है धीरू
भाई अंबानी और किसी को भी पता नहीं है कि
यही लड़का आने वाले समय में इंडिया का
सबसे अमीर इंसान बनेगा सभी लोग इस बच्चे

को धीरू बुलाते हैं अब धीरू 5 साल का हो
चुका है और अब इसकी ऐज हो चुकी है स्कूल
में पढ़ने वाली और इसीलिए हीराचंद जी धीरू
को लेकर अपने गांव के सबसे सस्ते स्कूल
बहादुर कांजी स्कूल के अंदर लेकर गई हैं

और इन्होंने धीरू का एडमिशन यहां पर करवा
दिया है अब स्कूल में पढ़ते-पढ़ते धीरू
भाई अंबानी हो चुके हैं 16 साल के और इनको
लीडरशिप करना बहुत पसंद है यह स्कूल की
फीस कम करवाना फार्मर्स को औरतों को
राइट्स दिलाना ऐसे प्रोटेस्ट में जाते

रहते ते हैं यह अच्छा काम तो कर रही हैं
लेकिन इससे घर तो नहीं चलता ना अब हीराचंद
जी के पांच बच्चे हो चुकी हैं और यह अपने
स्कूल की सैलरी से घर नहीं चला पा रहे हैं
और धीरू भाई अंबानी गरीबी की जिंदगी जीजी

करर परेशान हो चुकी हैं इसलिए धीरू भाई
अंबानी ने स्कूल के अंदर जाकर अपनी टीसी
ले ली है यानी कि वह अपने स्कूल से हट
चुकी हैं और यह करके वह अपने घर पर वापस आ
चुकी हैं धीरू भाई अंबानी के पिता को ये
चीज पता चल चुकी है और यह चीज सुनकर
उन्होंने धीरू भाई अंबानी को अच्छे से

डांट और मार लगाई है लेकिन धीरू भाई
अंबानी का कहना है कि मैं स्कूल के अंदर
नहीं पढ़ूंगा बल्कि मैं अपना धंधा करूंगा
धीरू भाई अंबानी जब स्कूल में पढ़ रहे थे
तब इनको हर महीने कुछ रुपए की पॉकेट मनी
इनके पिता दिया करते थे और धीरू भाई

अंबानी इसको खर्च नहीं करते थे बल्कि उसको
अपनी इस गुल्लक के अंदर डाल देते थे अब
इन्होंने पैसा निकालने के लिए अपनी इस
गुल्लक को तोड़ दिया है और ये पैसा लेकर
अपने घर से बाहर चले गए हैं अब ये ढूंढ

रही हैं कि कैसे पैसा कमा सकती हैं
चलते-चलते ये आ गई हैं अपने गांव के इस
मंदिर के पास इस मंदिर में पहले तो कोई
आता नहीं था लेकिन अब इसके बाहर कई स

लोगों की भीड़ लगी हुई है धीरू भाई अंबानी
जानते हैं कि अब चल रहा है फरवरी का महीना
और इस महीने के अंदर किसी प्राचीन मान्यता
की वजह से यहां पर कई स श्रद्धालु आते हैं
और धीरू भाई अंबानी यह भी जानते हैं कि इन

लोगों को लाइन में खड़े-खड़े बहुत भूख भी
लग जाती होगी इसलिए धीरू भाई अंबानी ने
अपने सारे पैसे से एक ठेला खरीद लिया है
और उसको इस मंदिर के पास में लगा लिया है

अब इनको ठेला लगाकर पकौड़े बेचते हुए 10
दिन हो गए हैं और इससे इन्होंने अच्छा
मुनाफा कमाना स्टार्ट कर दिया है आज सुबह
इनके पास में यह इंसान आ चुका है जो कि
इनके पापा का दोस्त है इस इंसान का धीरू

भाई अंबानी को कहना है कि बेटा तुम्हारे
पापा टीचर हैं ये क्या छोटा काम कर रहे हो
धीरू भाई अंबानी ने जवाब दिया धंधा कोई भी
छोटा नहीं होता अब इस काम को करते हुए 15
दिन हो चुके हैं और लोगों ने मंदिर में

आना बंद कर दिया है इसलिए धीरू भाई अमानी
ने अपने ठेले को बेच दिया है और सारे पैसे
को अपने बैंक में रख दिया है अब यह पैसा
कमाने का कोई और तरीका ढूंढ रही हैं अब
इनको पता चल चुका है कि यमन के अंदर

इंडिया से कई गुना ज्यादा पैसा बनता है और
धीरू भाई अंबानी ने कई स लोगों से जिनकी
फैमिली के लोग यमन गए हैं उनसे इस चीज को
कंफर्म भी कर लिया है अब धीरू भाई अंबानी
ने अपने पिता को कन्वेंस करके उनकी सारी

जिंदगी की सेविंग को यूज करके यमन जाने के
लिए टिकट और वीजा खरीद लिया है और अब धीरू
भाई अंबानी 16 साल की उम्र में यमन आ चुके
हैं और इन्होंने इस शेल कंपनी के पेट्रोल
पंप प काम करना स्टार्ट कर दिया है अब इस
पेट्रोल पंप प कोई भी इंसान अगर अपनी

गाड़ी लेकर 100 का पेट्रोल भी भरवाने आ
रहा है ना तो धीरू भाई अंबानी उस इंसान को
कह रहे हैं कि सर आपके पास में इतनी बड़ी
गाड़ी है इत बड़े आप इंसान हो 00 का
पेट्रोल भरवा होगे यह तो जल्दी खत्म हो

जाएगा फिर आपको वापस आना पड़ेगा इसलिए आप
000 का पेट्रोल भरवा लो इसलिए इन्होंने इस
पेट्रोल पंप का प्रॉफिट कई गुना बढ़ा दिया
है और इस चीज से खुश होके पेट्रोल पंप के
मालिक ने इनको पेट्रोल पंप का मैनेजर बना
दिया है यह शाम तक पेट्रोल पंप पर काम

करते हैं और बाद में इनके पास में टाइम बच
जाता है इस टाइम में भी काम करने के लिए
इनको काम पसंद आया है क्लर्क का इसलिए यह
इस कंपनी के अंदर चले गए हैं क्लर्क का
काम करने के लिए इंटरव्यूअर ने धीरू भाई
अमानी से कहा कि तुम तो 16 साल की हो तुम

क्या काम करोगे धीरू भाई अमानी ने कहा कि
16 साल का हूं लेकिन अकल मुझे 60 साल के
लोगों से भी ज्यादा है इंटरव्यूअर ने पूछा
कि तुम्हारे पास में तो डिग्री भी नहीं है
धीरू भाई अंबानी ने कहा कि मुझे डिग्री की

जरूरत ही नहीं है मैं क्यों अपना टाइम
स्कूल के अंदर यूनिवर्सिटी के अंदर वेस्ट
करूं और उस टाइम में पैसा ना कमाऊं मैं
यहां पर नौकरी लेने आया हूं क्योंकि मैं
बेस्ट हूं मैं आपके लिए एक हफ्ता फ्री में

काम करूंगा और मैं आपको गारंटी देता हूं
कि छ महीने के अंदर
आप जो भी सेल्स टारगेट सेट करोगे वह मैं
तोड़ दूंगा मैं यहां पर पैसा कमाने आया
हूं आप मुझे नौकरी दो मैं खुद अमीर बनूंगा

आपको अमीर बनाऊंगा और हम दोनों मजे करेंगे
यह कहने पर तुरंत ही धीरू भाई अंबानी को
क्लर्क की जॉब भी मिल गई और इन्होंने एक
दिन में दो जॉब्स करनी स्टार्ट कर दी अब
दोस्तों काम करते हुए चाय पीने की भी
जरूरत पड़ती है धीरू भाई अंबानी के पास

में दो ऑप्शन है या तो व ठेले पर 10 पैसे
की चाय पिए या फिर फाइव स्टार होटल में
जाकर ₹1 की चाय पिए धीरू भाई अंबानी रोज
₹1 खर्च र्च करके फाइव स्टार होटल के अंदर

चाय पीते हैं यह सुनने के लिए कि वहां पे
अमीर लोग काम क्या करते हैं आज भी सेम ही
दिन है आज भी ये उसी फाइव स्टार होटल में
बैठकर ₹1 की चाय पी रही हैं इनके साइड में
बैठे हुए दो लोग बात कर रहे हैं कि यार जो
हमारी यमन कंट्री के अंदर यह चांदी का

रियाल सिक्का चलता है इसमें जो चांदी होती
है वो इस सिक्के से भी महंगी होती है यह
₹1 के सिक्के में ₹10 की चांदी है कोई
इसको पिघलाने लग जाए तो उसको मजा आ जाए ये
दो लोग तो इस चीज के बारे में मजाक में

बात कर रहे थे लेकिन धीरू भाई अंबानी ने
इस चीज को सीरियस ले लिया है और अपनी सारी
यमन की कमाई से चीजों को पिघलाने के लिए
यह मशीन खरीद ली है और इससे धड़ाधड़
सिक्कों को पिघलाकर उनको चांदी में
कन्वर्ट करना स्टार्ट कर दिया है और इस

चांदी को सुनारों को बेचना स्टार्ट कर
दिया है और देखते देखते इन्होंने यमन के
लाखों सिक्के पिघला दिए हैं क्योंकि लाखों
रुप के सिक्के पिघलाने पर ₹1000000 का
प्रॉफिट होता है लेकिन वहीं पर दूसरी तरफ

यमन की सरकार यह सोचकर परेशान हो गई है कि
हमारे सारे सिक्के कहां पर गए इन्होंने यह
जानने के लिए इन्वेस्टिगेशन करनी स्टार्ट
कर दी है और कई कई महीनों की
इन्वेस्टिगेशन के बाद में इनको पता चला है
कि लड़का यह काम कर रहा है क्योंकि तब तक

धीरू भाई अंबानी की उम्र 18 साल की हो
चुकी थी इसलिए जब धीरू भाई अंबानी के
अड्डे पर पुलिस इन्हें पकड़ने के लिए
पहुंची तब उन्हें पता चला कि यह लड़का तो
यहां से फरार हो चुका है और अब धीरू भाई
अंबानी सारे पैसे को लेकर इंडिया आ चुकी

हैं अब धीरू भाई अंबानी 26 साल की उम्र
में यमन से फ्लाइट पकड़कर आ चुके हैं
मुंबई के अंदर और यहां से गुजरात जाने
वाली लोकल ट्रेन के डब्बे में बैठकर आ
चुके हैं अपने गुजरात के चोर वा गांव में

वापस इनका स्वागत करने के लिए इनकी पूरी
फैमिली और गांव के कई स लोग आए हैं और
इनके स्वागत के लिए ढोल बजाए जा रहे हैं
और इनको मालाएं पहनाई जा रही हैं इसी शोर
शराबे के बीच धीरू भाई अंबानी के पिता आ

गए हैं और इन्होंने सारा ढोल धमका बंद
करवा दिया है और इनके पिता पूछ रहे हैं कि
तू यमन से इंडिया आ गया बहुत बढ़िया बात
है लेकिन कहीं तू वहां की नौकरी तो नहीं
छोड़ आया धीरू भाई अंबानी ने कहा कि मैं
नौकरी छोड़ आया हूं यह सुनते ही भीड़ में

खड़े सभी लोगों के चेहरे उतर गए और और
इनके पिता ने इनके थप्पड़ मारा फिर धीरू
भाई अंबानी उठे और धीरू भाई अंबानी ने कहा
कि अगर मैं यमन में नौकरी करके अपनी
जिंदगी बदल सकता हूं तो मैं भारत के अंदर

अपना धंधा करके भी आप सभी लोगों की जिंदगी
बदल सकता हूं और यह चीज मैं करूंगा इसकी
मैं गारंटी देता हूं इनके दोस्तों और
रिश्तेदारों ने इनको कहा कि तू धंधा करके
महीने के ₹1 नहीं कमा पाएगा यह सुनके सभी

लोग चले गए अपने-अपने घर पे अब धीरू भाई
अंबानी ने गांव के अंदर रहना स्टार्ट कर
दिया है गांव के अंदर इनकी एक ग फ्रेंड
कुकीला बहन भी रहती है यह 18 साल से इनकी
गर्लफ्रेंड है और अब ये 28 साल की हो चुकी

हैं यह बेचारी पिछले 10 सालों से कुवारी
बैठी हैं और इन्होंने पिछले 10 सालों में
किसी और लड़के के साथ में बात तक नहीं की
धीरू भाई अंबानी ने अपने अच्छे पल इनके
साथ में बिताने स्टार्ट कर दिए हैं और आज
इनका पांचवां दिन है गांव के अंदर रहते
हुए आज सुबह भी ये अपनी गर्लफ्रेंड कोकिला

बहन के साथ में हैं धीरू भाई अंबानी ने
कहा कि मैं जा रहा हूं मुंबई धंधा करने
कोकला बहन ने कहा कि क्या तुम मुझे पहले
की तरह ही छोड़कर चले जाओगे धीरू भाई
अंबानी ने कहा नहीं धीरू भाई अंबानी ने
दोपहर के अंदर कुकीला बहन से शादी कर ली

है और अब ये शाम को दोनों सभी लोगों को
विदा कहकर चले गए हैं मुंबई धीरू भाई
अंबानी को क्लियर है कि उन्हें कपड़ा
बेचने का व्यापार करना है यानी कि सस्ते
दाम पर कपड़े को खरीदेंगे उससे चीजें
बनाएंगे और उसको महंगे दाम पे बेचेंगे

धीरू भाई अंबानी की फैमिली पहले बहुत ही
अमीर हुआ करती थी लेकिन बाद में बहुत ही
गरीब हो गए यह कैसे हुआ यह समझाने के लिए
मैं अभ आपको लेके आ चुका हूं 1925 में यह
मुंबई के अंदर रहने वाले हीराचंद गोवर्धन
भाई अंबानी यह करोड़पति बिजनेसमैन है इनको

19 साल की उम्र में इनको मुंबई के एक बहुत
ही अमीर घराने की लड़की यह जिम्ना बेन से
प्यार हो गया है और 20 साल की उम्र में
इनकी जिम्ना बेन के साथ में शादी हो गई है
लेकिन इसके एक साल बाद कुछ ऐसा हुआ जिससे
धीरू भाई अंबानी के पिता का बिजनेस बर्बाद

हो गया और इन दोनों को गुजरात के चोर
वार्ड में जाकर बसना पड़ा यानी कि धीरू
भाई अंबानी के भले माता और पिता गरीब हैं
लेकिन इन दोनों के ही रिश्तेदार बहुत ही
अमीर हैं और मुंबई के अंदर रहती हैं अगर
कपड़े का व्यापार करना है तो उसके लिए
पैसा भी तो चाहिए लेकिन धीरू भाई अंबानी

के पास में पैसा नहीं है इसीलिए इन्होंने
अपनी मम्मी के साइड से कजिन चंपक लाल
दमानी के साथ में पार्टनरशिप करके बिजनेस
करने का प्लान बनाया है सबसे पहले जरूरी
है सिंथेटिक कपड़े को खरीदना और ये कपड़ा
बिकता है इस फैक्ट्री के अंदर अब धीरू भाई
अंबानी फैक्ट्री के अंदर आ चुकी हैं और

यहां पर इनको पता चल चुका है कि यहां पर
कपड़ा खरीदने वालों की यूनियन है और ये
किसी भी नए इंसान को एंटर नहीं करने देते
इसलिए धीरू भाई अंबानी को फैक्ट्री से
धक्के मार के बाहर निकाल दिया गया है और

कहा गया है कि पहले यूनियन के हेड अजान को
लाखों रुपए देकर तुम्हें यहां पर कपड़ा
खरीदने की परमिशन लेनी पड़ेगी ऐसा करना है
तो कल शाम को 6:00 बजे पास के गोल्फ फील्ड
के अंदर जाना और अजान से जाके मिल लेना अब
आ गया है अगला दिन और बज गई हैं 6:00 और

धीरू भाई अंबानी गोल्फ फील्ड के अंदर आ
चुकी हैं धीरू भाई अंबानी ने अजन को बताया
कि मैं आपसे परमिशन लेना चाहता हूं यहां
से कपड़ा खरीदने के लिए अजान ने टोटल करके
बता दिया कि इतने लाख रुपए लगेंगे यह
सुनके धीरू भाई अंबानी अब इसको समझा रहे

हैं कि आप ये इतने लाख रुपए भी तो कमाई
करने के लिए ले रहे हो आप मेरे को एक बार
कपड़ा खरीदने की परमिशन दे दो मैं इन पांच
तरीकों से यूनियन की कमाई बढ़ा दूंगा और
आपको लाखों नहीं करोड़ों रुपए मिल जाएंगे
अजन ने कहा ये ले धीरू गोल्फ स्टिक पकड़

यहां से 100 फुट आगे वो एक छोटा सा खड्डा
है सिर्फ एक बारी के अंदर इस बॉल को उस
खड्डे के अंदर डाल दे डील पक्की धीरू भाई
अंबानी ने अपने हाथ से बॉल उठा ली है और
100 फुट आगे जाकर अपने हाथ से इस छोटे से

खड्डे के अंदर बॉल को डाल दिया है क्योंकि
अजान ने यह नहीं कहा था कि बॉल को स्टिक
से ही खड्डे के अंदर डालना है और यह करते
ही इनको परमिशन मिल गई है अब धीरू भाई
अंबानी कपड़ा खरीदकर आगे भी बेच रहे हैं
और अपना प्रॉमिस भी निभा रहे हैं धीरू भाई
अंबानी ने सारी यूनियन वालों को समझाया है

कि यह पूरे एरिया की सिर्फ एक लती
सिंथेटिक फाइबर बनाने वाली फैक्ट्री है हम
सिर्फ नाम की यूनियन होने की वजह से
अलग-अलग रेट पर इस फैक्ट्री से कपड़ा
खरीदती हैं और आगे अलग-अलग रेट पर बेचती
हैं लेकिन हम कई से लोग मिल करर भी यह 15

बड़े लोगों की यूनियन को ही बेचती हैं जो
कि हमसे सस्ते में कपड़ा खरीदती है यानी
कि फैक्ट्री वाले अपनी यूनियन बनाकर हमें
महंगा कपड़ा बेच रहे हैं और खरीददार
यूनियन बनाकर हमसे सस्ते में कपड़ा खरीद
रहे हैं और हम सबसे ज्यादा मेहनत करते हैं

लेकिन तब भी हम सब गरीब हैं तो चलो एक
असली यूनियन बनाते हैं अब इन सभी लोगों ने
मिलकर फैक्ट्री वालों को कह दिया है कि अब
से हम आधे रेट के अंदर कपड़ा खरीदेंगे
फैक्ट्री को ऐसा करना भी पड़ रहा है और
फैक्ट्री से आधे रेट में कपड़ा खरीदकर यह

खरीददारों को कपड़े को दो गुना रेट में
बेच रही हैं इससे इन सभी लोगों की कमाई
चार-पांच गुना बढ़ गई है और धीरू भाई
अंबानी पूरी यूनियन के मसीहा बन गई हैं
लेकिन इस चीज का मुंबई के सभी बड़े लोगों
को पता चल चुका है और इस सरपति ने यह

आईएएस ऑफिसर को पैसा देकर जिस जगह पर बोली
लगती है वहां पर ताला लगा दिया है और
आईएएस ऑफिसर ने सभी को कह दिया कि तुम सभी
लोग सट्टा लगाते हो और यह इल्लीगल है
लेकिन पर्दे के पीछे यह अर्पी इस फैक्ट्री

से डायरेक्ट कपड़े को खरीद रहा है और आगे
ग्राहकों को बेच रहा है और और ऐसा होने की
वजह से सारे यूनियन वाले गरीब हो गए हैं
लेकिन धीरू भाई अंबानी को पता है कि यह
चीज सट्टा नहीं है और यह आईएएस ऑफिसर झूठ
बोल रहा है धीरू भाई अंबानी ने सारी
यूनियन वालों को कहा कि चलो अब इसका इलाज

करते हैं और अब ये सभी लोग अपने सारे
कपड़े को इस आईएस ऑफिसर के घर पे छोड़ आई
हैं इसका पूरा घर इन बोरियों से भर गया है
दो घंटे में इस आईएस ऑफिसर के घर पे इसके
बड़े साहब आने वाले हैं आते ही उनको इसकी
करतूत का पता लग जाएगा और इसकी नौकरी
जाएगी इसलिए सिर्फ 10 मिनट में धीरू भाई

अंबानी के सामने हाथ जोड़ के इसने बोली
लगने वाली जगह का ताला खोल दिया है अब
अपने कपड़े की बोरियां वापस लाकर यह लोग
गेम के अंदर वापस उतर गई हैं और अब इस चीज
को करते हुए इनको 8 साल हो गए हैं और इन
आठ सालों के अंदर जिन कपड़ा खरीदने वाले

गरीब लोगों के पास साइकिल का पैसा नहीं
होता था वो आज मर्सडीज के अंदर घूम रहे
हैं और इसी चीज का सेलिब्रेशन करने के लिए
धीरू भाई अंबानी इनको पार्टी दे रही हैं
और इन्होंने स्टेज भी लगवाया है स्पीच

देने के लिए अब दो घंटे बाद बाद धीरू भाई
अंबानी स्टेज के ऊपर चढ़ गई हैं और
इन्होंने सबको बोल दिया है कि पहले हम
दूसरे की फैक्ट्री से कपड़ा खरीद रहे थे
अब खुद की फैक्ट्री लगाएंगे गुजरात के
अंदर यह सुनते ही सारे यूनियन वाले लोग
नाचने लग गई हैं पागल हो गई हैं और अब एक

घंटे की स्पीच देने के बाद धीरू भाई
अंबानी स्टेज से उतर आए हैं स्टेज से
उतरते ही इनके बिजनेस पार्टनर चंपकलाल
दमानी इनको कह र हैं कि तू बर्बाद हो

जाएगा यह फैक्ट्री तुझे ले डूबेगी और यह
बोलकर चंपकलाल दमानी ने ये पार्टनरशिप
खत्म कर दी है और अब फैक्ट्री सेटअप करने
से पहले इन्होंने हर पॉलिटिकल पार्टी के
हर तगड़े पॉलिटिशियन के साथ में कनेक्शंस
बना लिए हैं ताकि इनकी पावर बढ़ जाए और जो
चीजें चाहते हैं वही हो धीरू भाई अंबानी

ने इसके बावजूद गुजरात के नरोदा में यह
फैक्ट्री खड़ी कर दी है और सारे यूनियन
वाले मुंबई को छोड़कर धीरू भाई अंबानी के
साथ काम करने के लिए गुजरात आ गई हैं धीरू
भाई अंबानी ने अपने गांव के लोगों को कहा
था कि मैं धंधा करके तुम्हारी जिंदगी

बदलूंगा इसी चीज को पूरा करने के लिए
इन्होंने अपनी कपड़ा बनाने की फैक्ट्री को
को बिल्कुल अपने गांव के पास में बनाया है
और इससे इनके गांव के जो लोग बेरोजगार थे
अब इनकी फैक्ट्री के अंदर काम करके लाखों
की कमाई कर रहे हैं लेकिन जैसा होना चाहिए

था वैसा हुआ नहीं सभी फैक्ट्री वालों को
पता था कि यह अगर हमारी गेम में आ गया तो
यह हमें बर्बाद करके रख देगा इसलिए दूसरी
फैक्ट्री वालों ने इनको मिलकर महंगा कपड़ा
बेचना स्टार्ट कर दिया और इससे इनकी
फैक्ट्री और ये खुद बर्बाद होने लग गए
लेकिन फिर सरकार ने लाया रिप्लेनिशमेंट

लाइसेंस पहले अगर कोई कंपनी बाहर के देशों
से कपड़ा मंगाती थी तो इंडिया की
गवर्नमेंट उसके ऊपर बहुत ज्यादा टैक्स
लगाती थी जिससे वोह बहुत ही महंगा पड़ता
था लेकिन इस लाइसेंस के अंदर यह कहा गया
कि आप बाहर के देशों से बहुत ही सस्ते दाम
पर कपड़ा मंगा सकते हो लेकिन आपको उस

कपड़े से कुछ बनाकर वापस बाकी देशों के
अंदर बेचना पड़ेगा और सभी लोगों ने यह चीज
को करना स्टार्ट कर दिया अब धीरू भाई
अंबानी को भी एक आईडिया आ गया है और
इन्होंने अपने सारे पैसे से बाहर के देशों
से बहुत ही सस्ते दामों पर कपड़ा खरीद
लिया है और इस कपड़े से इन्होंने डेली

शर्ट्स टीशर्ट्स और सारियां रानी स्टार्ट
कर दी है और इन सारे कपड़ों को ये स्टॉक
के अंदर रखते जा रहे हैं कंपनी वाले इनको
कह रहे हैं कि कपड़ों को बेचो भी तो सही
धीरू भाई अंबानी कह रहे हैं कि इस चीज के
बारे में किसी को भी बताओ मत और वेट करो

जैसे-जैसे कपड़े छपते जा रहे हैं और धीरू
भाई अंबानी ट्रकों वालों के साथ में डील
करके ट्रकों को किराए पर लेते जा रहे हैं
और यह डेली ट्रक्स को खरीद भी रहे हैं यह
करते ही सभी लोगों ने इनको कहा कि जब
अमीरों की बात होती है तब लोग टाटा बिरला

का नाम लेते हैं अंबानी का कोई नहीं लेता
तुझे कोई जानता नहीं है तो तेरे कपड़े भी
नहीं बिकेंगे धीरू भाई अंबानी ने सामने से
कहा कि एक ऐसा टाइम आएगा जब टाटा बिरला से
भी पहले मेरा नाम लिया जाएगा अब इनकी
फैक्ट्री के अंदर हो गई हैं लाखों कपड़े
इन्होंने अपने ब्रांड का नाम रखा है विमल

और इन्होंने अपने सारे कपड़ों को ट्रकों
के अंदर डालकर इंडिया के कपड़ों को
व्यापारियों के पास में पहुंचा दिया है यह
इन कपड़ों को कौड़ियों के दाम पर बेच र
हैं और इनकी क्वालिटी नॉर्मल कपड़ों से कई

 

गुना अच्छी है अब हो चुकी है सुबह और सभी
कपड़ों की दुकान वालों ने विमल के कपड़े
बेचने स्टार्ट कर दिए हैं यह कपड़े इतने
सस्ते और अच्छी क्वालिटी की है कि कपड़ा
बेचने वाले लोगों की दुकानों के बाहर कई स

लोगों की लाइनें लग गई हैं और कई-कई
दुकानदारों के एक ही दिन के अंदर हजारों
कपड़े बिक गए हैं इसका रिस्पांस देखते हुए
शाम तक ही धीरू भाई अंबानी ने इन दुकानों
में और कपड़े भिजवा दिए हैं और दुकान
वालों ने भी तुरंत ही खरीद ली हैं अब

सिर्फ दो दिनों के अंदर ही विमल इतना बड़ा
ब्रांड बन गया है कि कोई इंसान बाकी
कंपनीज के कपड़ों को हाथ भी नहीं लगा रहा
धीरू भाई अंबानी ने अपने दोस्तों और
रिश्तेदारों को जवाब देने के लिए जो जो कि

कहते थे कि इसका बाप धंधा करके बर्बाद हो
गया यह धंधा करके महीने के ₹1 नहीं कमा
पाएगा यह 122 करोड़ रपए की रोल्स रॉय
फैंटम खरीदी है सभी फैक्ट्रियों के मालिक
मिलकर बात कर रहे हैं कि हम जो पढ़े लिखे
और समझदार लोग जो काम 80 साल में नहीं कर

पाए वो काम ये पकौड़े बेचने वाले देसी से
लड़के ने 2 साल के अंदर कर दिया और सभी
कपड़ा बनाने वाली फैक्ट्रीज की हालत खराब
हो गई है क्योंकि ये सभी लोग मिलकर लोगों
को और गंदी क्वालिटी के कपड़े बेचते थे और

अब अब जब लोगों की दुकानें धीरू भाई
अंबानी के हजारों कपड़ों से भर गई हैं तब
इनको पता चला है कि धीरू भाई अंबानी
रिपनिक मेंट लाइसेंस का फायदा उठा रहे हैं
यह सभी कंपनी वालों ने धीरू भाई अंबानी के
ऊपर केस कर दिया है यह कहते हुए कि रूल के

हिसाब से बाहर की कंट्री से सस्ता कपड़ा
मंगाना तो था लेकिन उससे कपड़े बनाकर बाहर
की कंट्रीज के अंदर बेचने भी थे लेकिन इन
लल्लू पंजू से हमारा देसी छोरा धीरू भाई
अंबानी कैसे रुकने वाला है धीरू भाई
अंबानी ने कहा कि रूल के अंदर यह कब लिखा
हुआ है कि बाहर की कंट्री से जितना भी
कपड़ा मंगाया उससे 100% जितने भी कपड़े

बने वो बाहर के देशों के अंदर भेजनी हैं
दो-तीन टीशर्ट हैं डेली तो भेज रहा हूं
मैं बाहर की कंट्रीज के अंदर अब मेरा
उखाड़ दो क्या उखाड़ सकते हो और अब धीरू
भाई अंबानी हफ्तों के अंदर ही वापस नंबर
वन बन गई हैं जिन अरबपतियों के धंधे धीरू

भाई अंबानी ने ठप कर दिए उन्होंने जब पैसा
कमाया था तब उन्होंने सिर्फ अपनी और अपने
घरवालों की जेब में भरी लेकिन अब जब धीरू
भाई अंबानी का टाइम आया है तब धीरू भाई
अंबानी लोगों की जेबें भर रही हैं
इन्होंने अपने गांव के अंदर रहने वाले

लोगों की और अपनी कंपनी के एंप्लॉयज की तो
जिंदगी बदली ही और अब ये उन बच्चों की
जिंदगी बदल रही हैं जो कि पैसे की वजह से
पढ़ाई नहीं कर पा रहे जो कि डिसेबल्ड हैं
कोई लंगड़ा है तो कोई अंधा जो कि अनाथ है
और गरीब लोगों की भी हेल्प करने के लिए यह
करोड़ों की डोनेशंस कर रही हैं अब आ गया

है
1977 धीरू भाई अंबानी ने स्टॉक मार्केट के
अंदर अपनी रिलायस कंपनी का आईपीओ लिस्ट कर
दिया है धीरू भाई अंबानी के कपड़े इतने
ज्यादा बिकते हैं इसलिए लोगों को इनके ऊपर
बहुत ज्यादा ट्रस्ट है और इसीलिए यह 58000
लोगों ने धीरू भाई अंबानी की कंपनी के

अंदर पैसा लगा दिया है ऐसा करते ही यह
इंडिया के सबसे फेमस बिजनेसमैन बन गई और
टाटा बिरला से भी ज्यादा नाम गांव से आए
लड़के धीरू भाई अंबानी का चलने लग गया
धीरू भाई अंबानी का प्लान है पेट्रोल का
बिजनेस करने का लेकिन यह करने का आसानी से

लाइसेंस नहीं मिलता यह है धीरू भाई अंबानी
की फैक्ट्री इसके अंदर बनता है सिंथेटिक
फाइबर जैसे कि पॉलिस्टर और इसको बनाने के
लिए इसमें डाला जाता है है पॉली एथले टेली
पथले यानी कि एक तरीके का पेट्रोल धीरू

भाई अंबानी ने सरकार को यह बताया है कि
मुझे पेट्रोल का लाइसेंस अपने कपड़ों को
बनाने के लिए चाहिए और यह कहते ही इनको
लाइसेंस मिल गया है और अब पेट्रोल पंप पर
काम करने वाले लड़के ने पेट्रोल की
इंडस्ट्री के अंदर भी तहलका मचा दिया है

सस्ता पेट्रोल बेचकर अब साल आ गया है 1986
का और धीरू भाई अंबानी हो चुके हैं 54
इयर्स की आज भी एक नॉर्मल सा ही दिन लग
रहा है धीरू भाई अंबानी सुबह 9:00 बजे उठे
हैं उठते ही इनको दिमाग के अंदर थोड़ा सा
दर्द फील हो रहा है लेकिन इसको बुलाकर यह
चले गए हैं अपनी पोती ईशा अंबानी के कमरे

में क्योंकि यह अपने दिन की शुरुआत तब तक
नहीं करते हैं जब तक यह अपनी पोती ईशा
अंबानी का चेहरा ना देख ले अब ये आ चुके
हैं अपने ऑफिस के अंदर और इन्होंने काम
करना स्टार्ट कर दिया है लेकिन अब एकदम से

ही इनके दिमाग के अंदर खून जाना बंद हो
गया है इनको चक्कर आने लग गए हैं इनको
क्लियर दिखना बंद हो गया है और यह अपने
हाथ पैर को भी कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं
यह देखकर इनके ऑफिस के लोग इनके पास में
भाग कर आ गई हैं और इनको हॉस्पिटल ले आई

हैं डॉक्टर्स का कहना है कि इनको एक
स्ट्रोक आया था और अब ये कोमा के अंदर चले
गई हैं और इनका हाथ पैरालाइज हो गया है और
अब कोमा के 10वें दिन पे इनको होश आया है
डॉक्टर्स ने कह दिया है कि अब से आप
नॉर्मल जिंदगी जी नहीं पाओगे लेकिन धीरू

भाई अंबानी इनकी बात मानने वालों में से
कहां है धीरू भाई अंबानी ने तीन महीनों के
अंदर अपने लाइफ स्टाइल को चेंज कर लिया है
और ये वापस नॉर्मल हो गई हैं और अब धीरू
भाई अंबानी का एक ऐसा गोल्डन एरा आ गया है
कि इन्होंने कपड़े का पेट्रोल का टेलीकॉम
और रिटेल तक का व्यापार करने वाले हजारों

अरबपतियों की जो कि मिलकर लोगों को लूटते
थे बोलती बंद कर दी है और इंडिया का
बच्चा-बच्चा धीरू भाई अंबानी का फैन हो
गया है फोन टीवी और आर्टिकल से लेकर स्कूल
घर और ऑफिस तक हर जगह पे एक ही नाम चल रहा

है अंबानी यह इतने बड़े बन चुके हैं कि यह
जो स्टेडियम आपको दिख रहा है जो कि पूरा
लोगों से भरा हुआ है इसके स्टेज के ऊपर
कोई मूवी स्टार या फिर नाच गाना करने वाला
नहीं बल्कि की धीरू भाई अंबानी खड़े हैं
और यह लोगों से भरे हुए स्टेडियम के अंदर
यह जो आपको हजारों लोग देख रहे हैं यह सभी

धीरू भाई अंबानी की कंपनी
reliance1 आ गया है धीरू भाई अंबानी की
तबीयत खराब रहनी स्टार्ट हो गई है और इनका
हॉस्पिटल के अंदर फ्रीक्वेंसी
को आज भी एक बहुत ही डेडली स्ट्रोक आया है
और तुरंत ही इनको मुंबई के यह ब्रीच कैंडी
हॉस्पिटल के अंदर एडमिट करवा दिया गया है

धीरू भाई अंबानी चले गए हैं कोमा के अंदर
इंडिया के हर बच्चे से लेकर बूढ़े तक जॉब
करने वाले से लेकर बिजनेस करने वाले तक हर
इंसान यही दुआ कर रहा है कि धीरू भाई
अंबानी को कुछ ना हो कोमा के अंदर इनको
सात दिन हो गए हैं और दिन आ गया है 6
जुलाई 2002 का और आज धीरू भाई अंबानी जो
कि बहुत ही गरीब परिवार से थे लेकिन
इन्होंने पूरी दुनिया हिला के रख दी थी
उनकी मौत हो गई

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