Electoral Bond का बड़ा खेल | क्या जेटली ने फंसाया ? | या मास्टरमाईंड कोई और है ?| - instathreads

Electoral Bond का बड़ा खेल | क्या जेटली ने फंसाया ? | या मास्टरमाईंड कोई और है ?|

नमस्कार

दोस्तों कभी-कभी शिकारी खुद ही शिकार
हो जाता है अपने ही जाल में फंस जाता है
और आज कुछ ऐसा ही देखने को मिला मोदी
सरकार का जो सबसे बड़ा चंदा प्रोजेक्ट
इलेक्टोरल बंड उसको आज सुप्रीम कोर्ट ने
एक बेहद ऐतिहासिक फैसले में जैसे ही गैर
कानूनी बताया
अनकंटेंड

पूरे बीजेपी में खलबली मच गई आप कह सकते
हैं कि पूरी पार्टी को जैसे सांप सूंघ गया
हो मोदी जी ने कोई ट्वीट नहीं किया
निर्मला सीतारमन वित्त मंत्री वह खामोश
रही उनका ट्विटर इस मुद्दे पर चुप रहा एक

शब्द नहीं बोला इस देश की वित्त मंत्री ने
इतने बड़े स्कैंडल पर अमित शाह खामोश है
राजनाथ खामोश पूरी
पार्टी चुप्पी साथ ली अब दोस्तों जो सबसे

बड़ा सवाल है वो यह है कि जो इलेक्टोरल
बंड स्कीम है मोदी गवर्नमेंट की या यूं कह
लीजिए कि ये जो 165 हज करोड़ एगजैक्टली
कहूं तो
16518 करोड़ रुपए उसका ये जो चुनावी चंदे

का खेल है यानी जो चंदा कांड है ये इसमें
सरकार उलझ गई है जिसे आज सुप्रीम कोर्ट ने
कहा कि यह जो चंदा कांड है ये एक्चुअली एक
स्कैम है ये करप्शन से कहीं ना कहीं जुड़ा
हुआ है कॉरपोरेट और सरकार के बीच का गटच

है यह जो चंदा कांड है जो गलत है
असंवैधानिक
करप्शन की जिससे एक बू आती है इस चंदे
कांड का देश के सबसे बड़े चंदे कांड का
मास्टर माइंड कौन है हु इज द मास्टर माइंड

इसका मास्टर माइंड कौन है इस चंदे कांड का
अब आज बीजेपी की तरफ से इस तरह की कोशिशें
हुई गोदी मीडिया में खबरें प्लांट कराने
की कि साहब यह जो चंदा कांड है ये दरअसल
उस वक्त के उस वक्त के जो वित्त मंत्री थे

अरुण जेटली साहब मरहूम अरुण जेटली यह
प्लानिंग इनकी थी अरुण जेटली ने इसको
प्लान किया एक तिगड़म के साथ मोदी जी को
लाइज करने के लिए इन्होंने य पूरा का पूरा
एक योजना बनाया प्रोजेक्ट तैयार किया और

मोदी जी को कन्वेंस किया और 2018 में बजट
में फाइनेंस बिल के तहत ये इलेक्टोरल बंड
स्कीम लेके आए और मोदी जी जो उस वक्त नए
नए थे उनको अरुण जेटली ने कविंस कर दिया
यानी सारा जो खेल था सारा जो प्लानिंग थी
जो मास्टर माइंड थे ऐसा आज भाजपा के

नेताओं का कहना है जो गुजरात लबी के करीब
है कि अरुण जेटली का खेल था मोदी बचारे तो
बेकसूर थे वह तो गुजरात से आए थे देश की
सेवा करने के लिए वो तो प्रधान सेवक थे
खेल तो जेटली ने खेला और जेटली मोदी को
फसा के चले गए

अब सच्चाई तो यह है कि अरुण जेटली भले ही
आज व इस दुनिया में नहीं है लेकिन
जानकारों का कहना है कि अरुण जेटली की कोई
हैसियत ही नहीं थी भले वह वित्त मंत्री थे
वह भले ही मोदी जी के दोस्त थे उनकी

हैसियत नहीं थी इस सरकार में एक फाइल भी व
बिना मोदी से पूछे दस्तखत नहीं करते थे और
जहां तक नोटबंदी का सवाल डी मोनेटाइजेशन
का सवाल है जेटली वित्त मंत्री थे उनको उस
शाम तक पता नहीं था कि नोट ब होने जा रही
हकीकत यह तो क्या जेटली इस पोजीशन में थे

कि वह एक अपने दिमाग से एक अपनी प्लानिंग
से इतनी बड़ी स्कीम ले आए और मोदी को
कन्वेंस करते और मोदी जेटली की स्कीम को
बिना परखे उस पर दस्तखत करके कैबिनेट में
प्रस्ताव लाए और लागू कर दे वो बजट बन जाए

क्या ऐसा हो सकता है या फिर हकीकत यह है
कि कॉर्पोरेट से पैसा लेना और वो भी
इलेक्टोरल बंड के बहाने लेना चुपचाप पिछली
खिड़की से चंदा लेना ये सारा खेल
कॉर्पोरेट से पैसा लेने का मोटा पैसा
लाखों में नहीं करोड़ों में नहीं अरबों
में ये पैसे लेने का खेल इसके पीछे गुजरात

लॉबी ही मास्टर माइंड थी क्या थी हकीकत
क्या थी सच्चाई क्या थी और एक बड़ी सच्चाई
इस पूरे खेल में आज एक्सपर्ट के साथ इस
सवाल का जवाब दोस्तों मैं आपको जरूर दूंगा
हु वाज द मास्टर माइंड सारी प्लानिंग
किसकी

थी अब दोस्तों अरुण जेटली क्या मोदी जी को
फंसा गए या फिर यह खेल किसी और का था अब
अरुण जेटली तो इस दुनिया में नहीं है और
ना ही उनका कोई पक्ष रखने वाला आज है
बीजेपी में पक्ष रखेगा कौन जब सारा का
सारा ठीकरा ही जेटली प फोड़ा जा रहा है कि

साब वो फसा गए थे उन्हीं का प्लान था
उन्हीं का ये तिगड़म दिमाग था मोदी जी तो
बेचारे बेकसूर हैं वो तो प्रधान सेवक है
वह तो सेवा करने आए मेवा तो अरुण जेटली ने
खाया इस तरह की जो बातें हो रही हैं मुझे
लगता है कि इसके तथ्यों में मैं जाऊंगा

इसकी सच्चाई आपके सामने आज मैं रखूंगा हु
वाज एट फॉल्ट हु वाज द मास्टर माइंड
मास्टर माइंड कौन था प्लानिंग किसकी थी
खेल किसका था कि कॉर्पोरेट से हमें इस तरह
से पैसा लेना है और उस पैसे को पूरी तरह

से ढक देना है उसको सीक्रेट कर देना है
नंबर दो को नंबर एक कर देना है जो सुप्रीम
कोर्ट ने कहा इस पर मैं आऊंगा लेकिन जरा
आंकड़े देख लेते हैं अब सारे आंकड़े तो
अभी उपलब्ध नहीं है लेकिन जितने भी उपलब्ध
आंकड़े

बीजेपी को इस मोटी रकम में
6566 करोड़ रुपए मिले और कांग्रेस को 113
करोड़ मिले और भी रीजनल पार्टीज को पैसे
मिले लेकिन मैं कांग्रेस और बीजेपी को ही
कंपेयर कर रहा हूं दो नेशनल पार्टीज को

आपको अंदाजा लग सकता है कि बंदर बाट में
मोटा पैसा मोटा हिस्सा किसकी जेब में गया
प्लानिंग किसकी थी फायदा किसको पहुंचा ये
आप इस आंकड़ों से आप समझ सकते
हैं सवाल इस इस बात का है कि मार्च 13 आने

वाली मार्च 13 एक महीने से कम का वक्त है
और मार्च 13 को यह सारे आंकड़े स्टेट बैंक
से लेकर इलेक्शन कमीशन को अपनी वेबसाइट
में डालने यानी मार्च 13 को हमें आपको इस
पूरे मुल्क को देश को पता लग जाएगा किसका

पैसा था कितना पैसा था किसकी जेब में गया
और बाद में यह भी हिसाब होगा कि उसके बदले
उसको मिला क्या क्या मिला उसको उसके बदले
में तो मार्च 13 को सारा डेट इलेक्शन
कमीशन की वेबसाइट पर अपलोड होगा आप देख
सकते हैं यहां पर भी सवाल है सवाल यह है

कि क्या जो आंकड़े रखे जाएंगे कंपनियों के
नाम सामने आएंगे क्या उसमें कुछ विदेशी
कंपनियां होंगी क्या विदेशी कंपनियों से
भी पैसा बीजेपी या पॉलिटिकल पार्टीज के
खाते में गया है फॉरेन अकाउंट से पैसा आया
विदेश से पैसा आया है और फिर यहां
हिंदुस्तान की कंपनी के थ्रू वो पैसा गया

है क्या इस तरह का ट्रांजैक्शंस है है
क्या चाइनीज कंपनी चीन की कंपनी जी हां
मोदी जी ने कई लोगों पर आरोप लगाए कि ये
चीन के दलाल हैं कई पत्रकारों तक को जो है
उन्होंने जेल भेज दिया है कई नेताओं पर भी
आरोप लगाए लेकिन सवाल है कि क्या मोदी जी
की पार्टी ने चाइनीज कंपनियों से चुनावी

चंदा लिया है कि चाइना से पैसा आया है
बीजेपी में यह भी मार्च 13 को क्लियर होगा
और सबसे बड़ी चीज जो पैसा लिया गया है
कॉरपोरेट कंपनियों से चाहे वो चाइना की हो
अमेरिका की हो हो ना हो वी डोंट नो 13

मार्च को पता लगेगा अगर पैसा लिया है जैसा
कि आंकड़े बता रहे हैं अगर यह हजारों
करोड़ रुपए लिए हैं तो क्या उस कंपनी को
चंदे के बदले काम भी दिया है चंदे के बदले
ठेका भी दिया है और क्या यह योजना चंदे के
बदले ठेका थी इससे भी पर्दा हटने जा रहा

है जिसको लेकर बीजेपी में खलबली है
दोस्तों यह बात सही है कि देश का सबसे
बड़ा चुनावी चंदे का यह स्कैम है और
सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया
गलत बताया और यह भी कहा है यह भी शक जाहिर

किया सुप्रीम कोर्ट ने कि कहीं ना कहीं
इसमें काम के बदले जैसे अनाज देने की
योजना है तो ऐसा तो नहीं है कि यह योजना
चंदे के बदले ठेका देने की इस पर भी जांच
होगी आगे लेकिन मैं बुनियादी सवाल पर आता

हूं असली सवाल पर आता हूं द बिग क्वेश्चन
कि क्या इस पूरे खेल के मास्टर माइंड अरुण
जेटली थे या फिर मास्टर माइंड कोई और था
ऐसा शख्स था जो इसका सारा लाभ खुद ले गया

उठाकर कौन था मास्टरमाइंड इस पर भी आज मैं
आपको जवाब देने जा रहा हूं दो एक्सपर्ट
हैं हमारे साथ प्रोफेसर रविकांत हैं
पॉलिटिकल एनालिस्ट हैं और आज संदीप मनोदय
शिक्षा विद होंगे संदीप साहब जो हैं वह
अर्थ पे और राजनीति पर दोनों पर बहुत

जबरदस्त पकड़ रखते हैं और इस इलेक्टोरल
बंड्स की स्टडी व पिछले दो-तीन साल से कर
रहे हैं वाकई आपको एक नया एक एक तस्वीर
देखने को एक नई तस्वीर देखने को मिल
मिलेगी कई सवालों के जवाब और भी होंगे कि

चंदा किसका था कहां-कहां ब्रीच हुआ और
क्या पीएम केयर फंड इलेक्टोरल बंड के बाद
प्रधानमंत्री के पीएम केयर फंड जिसमें खूब
सारा चंदा आया हजारों करोड़ का क्या अब
उसको भी खोल के सामने मुल्क के रखा जाएगा

क्या हमारे और आपके सामने जो इस देश के
नागरिक हैं हमें पता लगेगा कि
प्रधानमंत्री ने कहां-कहां से चंदा लिया व
भी पता लगेगा अगर बंड हमें पता लगना जा
रहा है बहुत से सवाल हैं आखिर तक देखिएगा

सारे सवाल पता लगेंगे और आपको यह भी पता
लगेगा हु इज द मास्टर माइंड डॉक्टर साहब
क्या लग रहा है आपको कि क्या मोदी जी
अल्टीमेटली आखिरकार अपने जब उनका सत्र
खत्म हो चुका है जब चुनाव की तैयारी कर

रहे हैं आखिरी पड़ाव में आखिरी मोड़ में
कहीं ना कहीं भैंस पानी में जाती हुई दिख
रही कहीं ना कहीं मोदी डॉक्टर साहब आपको
भारी मुसीबत में गिरते दिख रहे हैं
मोदी हा निश्चित रूप से और वो भी बिल्कुल
चुनाव

के अंतिम पड़ाव पर जब पूरा देश खड़ा हुआ
है ऐसे में जब नरेंद्र मोदी अपनी पूरी
इमेज को फिर से डेवलप करने की कोशिश कर
रहे हैं मंदिर के जरिए कार्पोरेट मीडिया
के जरिए और ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह

फैसला कि जिसने दूध का दूध पानी का पानी
कर दिया जो मोदी जी यह कहते थे कि मैं धन
के खिलाफ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई
लडूंगा जो यह कहते थे कि ना खाऊंगा ना
खाने दूंगा आज सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला

दिया है और दीपक जी जी जब यह आंकड़े जारी
होंगे कि किसने किसने इलेक्टोरल बंड दिया
है किस पार्टी को दिया है और कहां कहा से
मिला है तो उसके बाद जो एक्सपोज होंगे
नरेंद्र मोदी उन्हें कोई बचा नहीं सकता

उसके बाद जनता की आंखों में वो धूल झकते
रहे वो जनता उस चीज को समझ लेगी कि
आखिरकार 10 साल में मोदी जी ने अपने आप को
महामानव कैसे बनाया था और उसके पीछे की
सच्चाई क्या है कि जिन चोरों के खिलाफ वो

लड़ रहे थे यहां तो सारे चोर अपने साथ
इकट्ठे कर लिए और इसीलिए जो कहानी है ना
अली बाबा 40 चोर वाली जी अब ऐसे लगता है
कि मोदी जी अली बाबा है और सारे 40 चोर
उनके साथ आप पूरी फेरि उठा करके देख लीजिए

प्रफुल पटेल से लेकर के हेमंत विश्वा
शर्मा होते हुए अजीत पवार तक 14 हज करोड़
का घोटाला अजीत दादा चक्की पीसिंग देवद फस
ने कहा था खुद नरेंद्र मोदी कह रहे थे और

फिर अजत पवार वही आते हैं डिप्टी सीएम हो
जाते हैं इससे तो बढ़िया कुछ हो ही नहीं
सकता लेकिन यह जो प्रोजेक्ट है वो चल नहीं
पाया और सुप्रीम कोर्ट ने उसको ध्वस्त कर
दिया

जी तो जो भी बनाया था मोदी जी ने एक झटके
में सब का सब समाप्त होने जा रहा है वो भी
बिल्कुल किनारे पर खड़े हैं मोदी जी ऐसे
लगता है ना जैसे गई भैस पानी में जिसको
कहा जाता है ना तो अब तो मोदी जी की गई

भैस पानी में दीपक जी नहीं नहीं वो सही
बात है कि पायदान पर चढ़ रहे थे आखिरी
पायदान की किसी ने दरी खींच ली सीढ़ी नीचे
खींच ली हुई कुछ इस तरह का इफेक्ट है और
शायद इसीलिए मुझे ऐसा लगता है कि बीजेपी

आज पूरी तरह से खामोश है वो जो लाखों की
ट्रोल सेना है वो जो करोड़ों रुपए खर्च
होते हैं मोदी जी के मीडिया प सोशल मीडिया
सब खामोश है एक भी बयान निर्मला सीतारमन
का नहीं एक भी बयान अमित शाह का नहीं कोई

बोल नहीं रहा रवि शंकर ने डरते डरते कहा
कि पार्टी इस पर बोलेगी मैं इंडिविजुअली
बोल सकता हूं तो रवि शंकर भी कुछ नहीं बोल
रहे मैं देख रहा हूं टीवी चैनल पर कहीं

डिबेट नहीं हो रहा है और अगर कहीं डिबेट
हो भी रहा है खुदाना खस्ता वहां बीजेपी का
प्रवक्ता नहीं बैठा बीजेपी के पास शब्द
नहीं है इस वक्त बहरहाल संदीप जी जी एक

नरेशन एक नरेशन यह बनाया जा रहा है कहानी
गड़ी जा रही है कि साहब मोदी जी तो सच्चे
आदमी है अमित शाह उनके सच्चे भक्त है राम
लक्ष्मण की जोड़ी जोड़ी है ये यह सारा खेल

तो शकम मामा ने कर दिया इन विचारों से कोई
लेना देना नहीं था यह तो गुजराती थे यह तो
एक बहुत ही पाक साफ दामन लेकर दिल्ली
पहुंचे थे अरुण जेटली ने फसवाल जेटली का

ये सारा खेल था अरुण जेटली ने जो
इलेक्टोरल बंड ले आ गए वो उन्होंने एक
मैकेनिज्म तैयार कर दिया और अरुण जेटली उस
वक्त फाइनेंस मिनिस्टर थे और अरुण जेटली
ने ही बजट में इसकी घोषणा कर दी तो यह कह

रहे कि साहब अरुण जेटली जो मरहूम अरुण
जेटली उन्होंने मोदी और शाह को
फसवाल खाने जो गुजरात लॉबी के लोग है वो
कह कि जेटली साहब ने
फस कैसे देखते संदीप जी क्या वाकई जेटली
सा ने फस दी अरुण जेटली साहब की अगर इतनी

ताकत होती कि वह प्रधानमंत्री और तत्कालीन
बीजेपी अध्यक्ष बाद के गृहमंत्री को बिना
बताए ऐसी योजना ले आते तो तो मैं उनको

पचमा सलूट करता हूं पिछले 10 सालों में
प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी की कार्यशैली
को देखकर पीएमओ की ताकत को देखकर सब लोग
यह समझ चुके हैं कि सारे निर्णय वहां से
होते हैं और लगभग सभी मंत्रालय

एग्जीक्यूटिव एजेंसी की तरह काम करते हैं
बजट
बनाया जी जेटली का रोल क्या था जी जी जी
मैं आ रहा हूं बजट बनाया अरुण जेटली जी ने
उसको अप्रूवल मिला मोदी जी का यह पूरा का
पूरा जो आपका इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम एक

मनी बिल के रूप में पार्लियामेंट से पारित
कराने का विचार था अरुण जेटली जी का उसको
पूरी अप्रूवल मिली मोदी जी से यह पूरी
स्कीम ऐसी आएगी और इससे हम पूरी फंडिंग

लेंगे यह विचार को प्रतिपादित करने का
क्रियान्वित करने का सारा जिम्मा टेक्निकल
रूप से एक बहुत ही काबिल वकील साहब ने
लिया अरुण जेटली जी ने लेकिन उनको वरद
हस्त प्राप्त था प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी

जी
का आरबीआई की तमाम ऑब्जेक्शन के बावजूद लॉ
मिनिस्ट्री के तमाम ऑब्जेक्शन के बावजूद
इलेक्टोरल बंड की स्कीम का ढांचा और उसको
मनी बिल के रूप में प्रस्तुत करने का
विचार अंततः एग्जीक्यूट किया गया यह कहना

कि यह पूरी जिम्मेदारी अरुण जेटली साहब की
है तो जिन्हें सच्चाई नहीं पता है जो
सिर्फ टेलीविजन स्क्रीन देखते हैं वह तो
इस तर्क को मान लेंगे लेकिन जिन्हें इसकी
वर्किंग का अंदाजा है जो पढ़ते हैं समझते

हैं जानते हैं देखते हैं बात करते हैं
उन्हें यह भी पता है कि इसके पीछे ब्रेन
किसका लगा हुआ था मास्टर माइंड मास्टर
माइंड आप कह सकते हैं और निश्चित तौर पर
पॉलिटिक्स के इतने बड़े गेम में जहां आप

पूरी फ फंडिंग पर काला पर्दा डाल रहे हैं
जिस पर्दे पर आप लिख रहे हैं पारदर्शिता
का पर्दा और वो है एक इंच मोटा काला पर्दा
और नाम है पारदर्शिता का पर्दा ये अरुण
जेटली के बस की बात नहीं थी प्रभ उनकी

आत्मा को शांति द स्वर्गीय अ जेटली जी
लेकिन मैं ये बिल्कुल नहीं मान सकता कि
इसके लिए 100% स्वर्गीय जेटली जी अकेले
जिम्मेदार है ये संभव ही नहीं है यह एक
पूरा मिलाजुला प्रयास था विचार कहीं और से
आया एग्जीक्यूट किसी और ने किया उसके फल

सात सालों तक कोई और उठाता रहा और आज
फाइनली सुप्रीम कोर्ट ने उस ब्लफ को कॉल
कर दिया और यह कहा कि यह तो पूरा पूरा हनन
है हर परी पार्टी का हनन है हर अधिकार का
हनन है संविधान का हनन है आरटीआई का हनन
है इनकम टैक्स और जितने आपने परिवर्तन किए

हैं सारे रिवर्स कीजिए ये बहुत बड़ी बात
है कांस्टिट्यूशन बच का यमस
निर्णय प्रोफेसर रविकांत जी से पूछ लू
क्योंकि ये सवाल बहुत बड़ा है कि भाई
जेटली साहब का ब्रेन चाइल्ड था या मोदी का

खेल था गुजरात लॉबी ने खेल किया या जेटली
ने क्योंकि भाजपा के लोग त कह रहे हैं कि
जेटली साब फसा गए थे गलती तो थी नहीं तो
रविकांत साहब आपको क्या लगता है कि जैसे
नोट बंदी है या जीएसटी है या और बहुत सी

चीजें हैं लॉकडाउन है या
फिर य इलेक्टोरल बंड का मामला है क्या यह
सारा
खेल मोदी जी और उनकी टीम करती है और
मंत्री का काम होता है उसको एग्जीक्यूट
करो

भाई निश्चित रूप से अरुण जेटली हो या
निर्मला सीतारमन
इनकी कितनी हैसियत है मोदी जी के सामने यह
सब जानते हैं ओबवियस है कि बिना मोदी जी
के इशारे के कुछ नहीं हो सकता है एजुकेट

करने वाले अरुण जेटली हो सकते हैं लेकिन
मैं थोड़ा और पहले ले चलता हूं वही
नरेंद्र मोदी हैं जो गुजरात के
मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्होंने
दिल्ली की ओर मन बनाया तो व समझ चुके थे

कि बिना कारपोरेट के वो दिल्ली की सत्ता
पर नहीं पहुंच सकते इसलिए 2007 में
वाइब्रेंट गुजरात के नाम पर वो तमाम
कार्पोरेट जुटाए गए और वहां से उनकी जो
यात्रा शुरू होती है व 2012 13 14 में जब

व अडानी के पर्सनल हवाई जहाज से दिल्ली
पहुंचते हैं किसी भी सर्व हया को उन्होंने
छोड़ दिया था और तब अरुण जेटली तो नहीं थे
उन्होंने तो नहीं कहा था कि साब आप अंबानी
के जहाज से अडानी के जहाज से आप पहुंचे और

उसके बाद फिर जिस तरह से उन्होंने पूरे
कार्पोरेट मीडिया पर कब्जा किया और उसे
अपना गुलाम बनाया वो तो अरुण जेटली ने
नहीं कहा था तो चाहे नोटबंदी हो जीएसटी हो
या इलेक्टोरल बंड हो यह सारे फैसले

नरेंद्र मोदी के खुद अपने और इसीलिए आप
अरुण जेटली पर जिम्मेदारी डाल करके आप
उसको भूल नहीं सकते या उससे अपने आपको को
बचा नहीं सकते हैं और अभी तो दीपक जीय
शुरुआत है सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर में है

कि आपको वो कंपनियों के नाम जारी करने हैं
कितना कितना चंदा मिला यह तो पता है लेकिन
किसने दिया है और फिर उसके बदले में सरकार
ने क्या किया है ये वो एक योजना चलती थी
ना काम के बदले अनाज यही तो आरोप विपक्ष

लगाता रहा था बराबर कि भाई ये जो आपको मिल
रहा है चंदा इसके बदले में आप क्या दे रहे
हैं आपका क्या कमिटमेंट है तो अभी तो जब
निकल कर के आएगा कि साहब कितने आपने
सड़कों के एक्सप्रेसवे के ठेके दिए हैं

जिन कंपनियों को अगर उन्हीं कंपनियों ने
पैसा दिया है आपको तो तो देश की आंखों में
फिर आप धूल नहीं झोक पाएंगे और दीपक जी एक
और बात जी अभी तो चाइनीज कंपनियों की भी
बात हो रही है ओ तमाम चाइनीज कंपनियों का

भी पैसा मिला है और अगर उनका खुलासा हो
गया तो मोदी जी कहां जाएंगे फिर अपने आप
को बचाने बहुत झूला झुलाया मोदी जी ने तो
कौन एजेंट होगा चाइना का यह भी तो पूछा
जाएगा विपक्ष के जरिए और फिर जनता भी

जानेगी आप तो आज डरा ही देंगे लेकिन एक
चीज मुझे याद आ रही है जो आपने कहा काम के
बदले अनाज यानी जैसे सुभाष चंद्र बोस ने
कहा था कि भाई आप हमें खून दे हम आपको

आजादी देंगे क्या संदीप जी आपको लगता है
यह उसी तर्ज पर है नया नारा है कि तुम
हमें चंदा दो तुम हमें बंड दो हम तुम्हें
कांट्रैक्ट देंगे तुम हमें चंदा दो हम
तुम्हें एयरपोर्ट देंगे हम पा पा हज सड़क

के ठेके देंगे रेल के ठेके देंगे क्या
आपको लगता है जो अभी प्रोफेसर साहब ने कहा
कि अगर चाइनीज कंपनी आती क्योंकि 13 तारीख
को तो देश के सामने सारा हिसाब किताब रखना
है सुप्रीम कोर्ट के कहने पर इलेक्शन

कमीशन को अगर चाइनीज कंपनी अगर सो कॉल्ड
चाइनीज कंपनी जो युद्ध जैसी स्थिति के
बावजूद तमाम शोडाउन के बावजूद चाइना के
साथ आज भी सक्रिय हैं जी अगर यह कंपनी यो
का नाम आता है इसका आप इंपैक्ट क्या देखते

मोदी जी की क्रेडिबिलिटी को आप फिर कैसे
देखेंगे अगर वाकई चाइनीज कंपनी चंदा दे
रही है बीजेपी को बहुत नकारात्मक बहुत
खतरनाक और बहुत ही विस्फोटक प्रभाव होने
वाला है इसमें किसी को कोई मन में संशय

नहीं रखना चाहिए देखिए सिर्फ चाइना की
कंपनियां नहीं होंगी दुनिया के अनेक देशों
की कंपनियां अब आपको एक एक करके पता चलने
वाली है हालांकि चाइना के साथ का मामला
बहुत विस्फोटक इसलिए है क्योंकि चाइना ने

हमारे साथ एक एक तरह का मिनी युद्ध छेड़
रखा है अप्रैल मई 2020 से जिसके बाद पूरे
भारत में भाई चाइना का बॉयकॉट करो हमने ये
150 प बैन कर दिए टिकटॉक बंद कर दिया तो
लोगों के साथ भावनात्मक मुद्दा बहुत गहरे

तक जुड़ा हुआ है तो जब चाइना की कंपनियों
के नाम आएंगे कि बीजेपी को इतने करोड़ दिए
कांग्रेस को इतने करोड़ दिए बीएसपी को
इतना दिया टीएमसी को वगैरह वगैरह वगैरह तो
लोग कहीं ना कहीं सोचने पर मजबूर तो होंगे

कि यह चल क्या रहा है एक तरफ बैनिंग की
बात हो रही है दूसरी तरफ चंदे लिए जा रहे
हैं तीसरी तरफ आपका व्यापार घट साल का 100
अरब डॉलर का चल रहा है जबकि वहां आपकी एक
मिनी युद्ध की स्थिति लगातार बनी हुई है
आर्मी का डिप्लॉयड बना हुआ है आपके

फॉरवर्ड पेट्रोलिंग पॉइंट आपके हाथों से
खोते जा रहे हैं लेकिन मैं थोड़ा सा आपको
इसमें गहराई में ले जाना चाहूंगा बात
सिर्फ चाइना की नहीं है यह खेल इतना

खतरनाक है इसको थोड़ा सा टेक्निकली 30
सेकंड में समझ लेते हैं जी पले के कानून
में अगर कोई कंपनी आपको चंदा देना चाहती
थी इनकॉरपोरेटेड कंपनी भारत की तो उसके
लिए कानून यह था कि आपका तीन साल का

अस्तित्व होना आवश्यक था और आप अपने औसत
नेट प्रॉफिट के 75 पर से ज्यादा चंदा नहीं
दे सकते
थे जब यह इलेक्टोरल बॉन्ड की स्कीम 2
जनवरी 2018 को अधिनियमित हुई अधिसूचित हुई

नोटिफाई हुई तो इसमें कानून यह बना दिया
गया कि अब इस सब की कोई जरूरत नहीं है तो
मान लीजिए मैं चाइना की अमेरिका की या
रोमानिया बुल्गारिया इंग्लैंड की कोई
कंपनी हूं मैं भारत में आती हूं मैं कंपनी

इनकॉरपोरेट करती हूं अगले दिन एसबीआई में
अकाउंट खोलूंगी केवाईसी करूंगी और उसके
अगले दिन 500 करोड़ कर का चंदा सीधे
इलेक्टोरल बंड से किसी को दे सकती हो मेरे
तीन साल की रिक्वायरमेंट खत्म तो कोई भी
विदेशी कंपनी बना ले सब्सिडरी बना ले कुछ

भी बना ले उसम बाहर से पैसा डाले और अगले
दिन चंदे में दे दे आपके सारे चेक्स एंड
बैलेंसस खत्म अब यह बात कानून बनाने वालों
को पता थी तो उन्होंने क्या किया इनकम
टैक्स में से बात लीक नहीं हो जाए इसलिए

आईटी एक्ट को अमेंड कर
दिया लीक हो जाए इसलिए उन्होंने आरटीआई से
इसको बाहर कर दिया कंपनी लॉ में कोई इसको
पकड़ नहीं ले तो कंपनी लॉ में भी संशोधन
कर दिए मतलब वो हर जगह जहां आप पकड़े जा

सकते थे वो सब आपने संशोधित कर दिए
अंब्रेला लेजिसलेशन लेकर आए कि एक भी लूप
होल नहीं बचे यही बात आज सुप्रीम कोर्ट ने
कही कि ये सारे संशोधन इप्स फैक्टो नल एंड

वॉइड ये सारे खारिज किए जा रहे हैं ये सब
पुरानी सूची पर आ जाओ पुराने र सर संदीप
सर समझ गया आपकी समझ गया मैं दोस्तों को
एक बार फिर बता दूं आप क्या कह रहे हैं
मैं गलत हूं तो मुझे सही कर दीजिएगा आपने
यह कहा कि भैया कहीं इनकम टैक्स ना पकड़

ले आरटीआई से जानकारी ना निकल आए कहीं
कंपनी लॉ से जानकारी ना नि कलाए तो जो
आदमी मोदी जी को चंदा दे रहा है या
पॉलिटिकल पार्टी को चंदा दे रहा है जेब
गर्म कर रहा है उसका डाटा उसकी जानकारी ना

इनकम टैक्स के पास ना आरटीआई के जरिए ना
कंपनी लॉ के जरिए ना किसी कानून के जरिए
सब कुछ ढक दिया आप ये कहना चाह रहे हैं
मतलब कुल मिला के कुल मिला के इतनी
एहतियात ड्रग के डीलर नहीं रखते जो ड्रग
डीलर होते हैं वो भी नहीं

रखते मैं दूसरा दूसरा दूसरे उस पर आ रहा
हूं क्वेश्चन प आ रहा हूं आपको लगता है
प्रोफेसर साहब कहीं ना
कहीं मोदी जी को जो लोग कहते थे कि भाई
पुरुषोत्तम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम
की छवि है है ना विष्णु के अवतार है य मैं

नहीं कह रहा हूं विष्णु के अवतार इनको
चंपत राय जी ने कहा था जिन्होंने मंदिर का
निर्माण कराया ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी
विष्णु के

अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम है ईमानदार है
चिमटे से भी एक चवन्नी नहीं छूते छूते
नहीं दूर रहते हैं है ना नारियल का पानी
पीते हैं नौन दिन काट देते हैं महाव्रत
रखते हैं और एक तरह से हरिश्चंद्र का भी

एक
अवतार द क्लीने मैन इन इंडिया सिंस
1947 गांधी को टक्कर दे सकता है नेहरू तो
है नहीं आपको लगता है वो जो एक ईमानदार
छवि गड़ी गई थी ल सेना से क्या आपको लगता

है उसका बैंड बज गया बाजा बज गया क्या
ईमानदारी का चंद्रचूर ने बाजा बजा दिया
है निश्चित रूप से और यह छवि गढ़ी किसने
खुद वही कार्पोरेट मीडिया के जरिए छवि गढी

गई रात दिन वहां वो जो बैंड बज रहा था
मोदी जी की धुन पर और लोग डांस कर रहे थे
जो जो छमिया उनको दी जा रही थी आज क्या
हुआ च बहुत स्पष्ट कर दिया है और अभी हम

लोग चाइनीज कंपनी की बात कर रहे थे मुझे
याद आया मेक इन इंडिया प्रोग्राम चल रहा
था लेकिन सरदार पटेल की मूर्ति जब बनी
स्टेचू ऑफ यूनिटी
2989 करोड़ रुपए की लागत से कहां से बनके
आई थी चाइना से आप चाइना के विरोध में

केवल क्या करते हैं झालर का बहिष्कार कर
देंगे या एकद प का बहिष्कार कर देंगे
लेकिन सारी जो दोस्ती चल रही है वो क्यों
चल रही ये तो पूछा जाएगा जो व्यापार घाटा

है भारत का लगातार बढ़ रहा है चाइना के
साथ ये क्यों यह तो लोग पूछेंगे ना और
गलवान घाटी में क्या हो रहा है कहां कहा
समझौता कर रहे और क्यों कर रहे हैं तो जो
मोदी जी की छवि बनी थी ना खाऊंगा ना खाने

दूंगा और विपक्ष को वो बराबर कह रहे थे कि
भ्रष्टाचारी है और जब यह सब चीजें खुलेगी
और वैसे भी जो लोग उनके साथ आकर के जुड़े
हैं तो मोदी जी गंगा तो है नहीं हा ये
जरूर उन्होने कहा था कि मां गंगा ने

बुलाया है अजीत पवार डुबकी लगाए तो वो
क्लीन निकले प्रफुल पटेल डुबकी लगा ले वो
क्लीन निकले अरे साहब मोदी जी क्या हो गए
कहीं ऐसा तो नहीं है राम तेरी गंगा मैली
हो गई दीपक जी जी जी जी पापियों के पाप

धोते धोते मोदी जी जिसम डुबकी लगा रहे हैं
वो सारा कुछ काला है यह भी तो अब सामने
आएगा तो जिको मुहावरे में कहते कि नाई के
बाल अब सामने आएंगे खुलने भर की देर है ना

कहां से लिया कितना लिया क्या दिया ये गिव
एंड टेक वाला जो फार्मूला है और मोदी जी
तो अपने आप को कहते ही है कि वो व्यापारी
है तो जो जो
व्यापारी सोच के व्यक्ति हैं उनके व्यापार

में घाटा और लाभ क्या कहां हुआ है और क्या
छवि बनाई गई है मुझे लगता है कि जो उसके
पीछे स्याह छवि है
वो अब सामने आएगी और लोग कहीं ऐसा ना कहने
लगे जो मैंने कहा था ना अलीबाबा और 40 चोर
वाली कहानी भारत में पिछले एक दशक से चल

रही वो एक्सपोज होने वाली एक्सपोज होने वा
यही सवाल संदीप जी मैं आपसे पूछूंगा बहुत
कम समय है मैं सिर्फ इतना पूछना चाह रहा
हूं कि पीएम केयर फंड ये प्रधानमंत्री
मोदी का प्राइवेट फंड नहीं है निजी फंड

नहीं सबने पैसा दिया आपने भी दिया होगा
बहुत से हमारे दोस्त देख रहे उन्होंने भी
पैसा दिया होगा गरीबों को पैसा बटे प्राइम
मिनिस्टर ने जब एक देश के नाम पर एक फंड
बनाया केयर के नाम पर फंड बनाया क्यों डर

रहे हैं क्यों नहीं उसके वो दस्तावेज
सामने रखते भाई खाते सामने रख दे जी तो
अपनी त भी नहीं छूते बकुल देखिए ऐसा है यह
सरकार एक अपारदर्शी सरकार है जो केवल
अधिकार अपने संग्रहण में यकीन करती है

बाटने में यकीन नहीं करती पीएम केयर फंड
मैंने उसम कभी भी कंट्रीब्यूट नहीं किया
मैंने अलग ढंग से से कोविड के पीड़ितों की
बहुत मदद की पर पहले ही दिन से मैंने पीएम

केयर का जो पूरा ढांचा देखा और समझा और
उनके ट्रस्टीस के नाम देखे और सरकार की
अप्रोच देखी तो मैं समझ गया कि इसमें तो
कंट्रीब्यूट बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए

और फाइनली वो सारे के सारे अप्र हेशन एकदम
सच साबित हुए हैं जिस तरह
से भारत सरकार के वेबसाइट डोमेन का नाम
यूज करके प्राइवेट तरीके से उस चीज को

चलाने की कोशिशें की गई है वो तो बहुत ही
निंदा के काबिल बात है कड़ी निंदा की जानी
चाहिए जैसा कहते हैं इतना समझ लीजिए दीपक
जी कई बार निराशावादी हो तो जाते हैं 10
में से नौ हिंदुस्तानी देख रहा है समझ रहा

है क्या चल रहा है और कहीं ना कहीं
लोकतंत्र इसी तरह जिंदा है और जिंदा रहेगा
जिंदा रहेगा और कहीं ना कहीं किसी का जमीर
जाग जाता है और फिर एक रोशनी हमको दिखती

है आप दोनों लोग आए और एक चीज आपने कही कि
भाई अब क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने
हस्तक्षेप किया है और राइट टू इंफॉर्मेशन
पारदर्शिता के नाम पर इलेक्टोरल बंड को
खारिज किया हो सकता है अगले दिन यही नजीर

पीएम केयर फंड पर भी लागू हो और हो सकता
है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है दिन
बदन नजदीक आ रहा है मोदी जी के लिए अचानक
पता नहीं कहां से मुसीबत बढ़ रही है कहीं

पर किसान जो है वो आंदोलित है कहीं पर
बेरोजगार बच्चे आंदोलित है कहीं पर महंगाई
के मुद्दे हो रहे हैं और कहीं ये गाज गिर
गई बिजली की तरह आप कह सकते हैं इलेक्टोरल

बॉन्ड प जिसने नीति और नियत दोनों को
एक्सपोज कर दिया आप दोनों लोग आए और खुलकर
बातचीत हुई आज के दौर में ऐसी बात सुनना
बड़ा मुश्किल है आप जैसे लोग मुझे लगता है
कि अगर कहीं चंद्रचूड़ कोई बैठा है तो

कैमरे के सामने कोई रविकांत और संदीप मनो
धनी भी बैठे बहुत बहुत शुक्रिया आपका मैं
अपने दोस्तों की तरफ से आपका शुक्रिया फिर
से अदा करूंगा सो नाइस ऑफ यू

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