Electoral Bonds Verdicts in Supreme Court | CJI Chandrachud ने Modi Sarkar को बड़ा झटका - instathreads

Electoral Bonds Verdicts in Supreme Court | CJI Chandrachud ने Modi Sarkar को बड़ा झटका

नमस्कार दोस्तों यह बिग ब्रेकिंग लेकर आ
रहे हैं हम और इस वक्त जो बहुत बड़ी खबर
आप तक हम पहुंचाने जा रहे हैं वह है
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से रिलेटेड

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला दे दिया है
जिससे मोदी सरकार बैकफुट पर आ सकती है जी
हां आप बिल्कुल सही सुन रहे हैं सुप्रीम
कोर्ट ने चुनावी बंड यानी इलेक्टोरल बंड

पर एक जबरदस्त झटका देते हुए सुप्रीम
कोर्ट ने आप बिल्कुल सही सुन रहे हैं
दोस्तों सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बंड
यानी चुनावी बंड पर मोदी सरकार को झटका

देते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया
है बिल्कुल सही सुना आपने सुना चुनावी बंड
जो है वह असंवैधानिक है और यहां से अब एक
मुसीबत मोदी सरकार के लिए शुरू होती है जो

अभी तक सबसे अमीर पार्टी कहलाती थी क्या व
वो सबसे गरीब पार्टी होने की कगार पर चली
जाएगी यह बात यहां इसलिए कह रहा हूं
क्योंकि 2019 से लेकर अब तक का पूरा

ब्यौरा यानी पूरी जानकारी सुप्रीम कोर्ट
ने एसबीआई से मांगी है एसबीआई चुनावी बंड
जारी करता था आपको पता है ना और पांच जजों
की पीठ उन पांच जजों की पीठ में यह सब कुछ

बताऊंगा आपको कि यह मामला क्या है और कैसे
यहां मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है एक
तरफ आप जान रहे हैं कि अ किसान जो हैं वह
सड़कों पर हैं और झटके पे झटका दे रहे हैं

लेकिन यह ब्रेकिंग आप देखिए असंवैधानिक है
इलेक्टोरल बंड्स सुप्रीम कोर्ट ने कहा है
चुनावी बंड जो है वह असंवैधानिक है जो
चुनावी चंदे मिलते हैं पार्टियों को वह
असंवैधानिक है जो इलेक्टोरल बंड की तरह की

तरफ से दिया जाता है इलेक्टोरल बंड सूचना
के अधिकार का उल्लंघन है वोटर को
पार्टियों की फंडिंग के बारे में जानने का
हक है किस पार्टी को कितना पैसा मिल रहा

है यह वोटर को जानना चाहिए इलेक्टोरल
बंड्स पर तत्काल रोक लगाए यह बात सही ये
बात कही है अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट
ने पांच जजों की पीठ जिसमें चंद्र सीजेआई

यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई
चंद्रचूड़ के अलावा अ न्यायमूर्ति संजीव
खन्ना न्यायमूर्ति बी आर गवई न्यायमूर्ति
जेबी पारदी वाला और न्यायमूर्ति मनोज

मिश्रा यह पांच की जो संवैधानिक पीठ थी
पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने एक अहम
फैसला सुनाया है और इस फैसले से अब बैकफुट
पर नजर आने वाली है मोदी सरकार क्योंकि

सबसे ज्यादा चुनावी चंदे इन्हीं को मिलते
रहे हैं और इतना ही नहीं अब आपको यह भी
बताना पड़ेगा कि किस-किस ने आपको चंदे दिए
चुनाव आयोग को भी यहां पर एक डायरेक्टिव
यहां से भेजा गया है जारी किया गया है

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कि आप अपनी
वेबसाइट पर जिन-जिन पार्टियों को जितने
जितने पैसे मिले हैं व सब वहां पे जारी
करेंगे और अभी तक तक जितने भी हैं हो सकता

है कि ये पैसे जो हैं वो लौटाने भी पड़े
तो ये असंवैधानिक और इस फैसले के पीछे की
कहानी क्या है यह जरा आप तक हम पहुंचाना

चाहेंगे बहुत ही अहम बात यहां हम आप तक
पहुंचा रहे हैं एक ऐसी जानकारी आप तक
पहुंचा रहे हैं जहां से आने वाले समय में
दोस्तों यह तय मानिए कि मोदी सरकार की

बीजेपी की मु मुश्किलें जो हैं वह और बढ़
जाएंगी एक तरफ किसान सड़कों पे हैं शंभू
बॉर्डर पर क्या कुछ है वह हम आप तक लगातार

पहुंचा रहे हैं आज भी पहुंचाएंगे वहां की
पलपल की रिपोर्ट लेकिन उससे पहले हम तो
तैयारी कर रहे थे किसानों के आंदोलन पे
अभी चर्चा जारी रखने की लेकिन यहां पर एक
इतनी बड़ी खबर आ गई कि यह खबर आप तक

पहुंचाना बहुत जरूरी है चुनावी बो बंड आप
जानते हैं वोटर को पार्टियों की फंडिंग के
बारे में जानने का अधिकार है आप जिसको
जिन-जिन पार्टियों को वोट देते हैं तो
वोटर कहलाते हैं आप मतदाता कहलाते हैं और

आपको यह बात जानने का अधिकार है कि उस
पार्टी को कौन पैसा दे रहा है कहां से
पैसा दे रहा है कितना पैसा दे रहा है यह

जानना बहुत जरूरी है और यह एक अहम फैसला
आज सुना दिया है सुप्रीम कोर्ट ने पांच
जजों की पीठ जिसमें जिसको लीड करते हुए
सीजेआई डी वाई चंद्रचूर डी वाई चंद्रचूर
के बारे में कहा जा रहा था कि वह पता नहीं

क्या-क्या क्योंकि 370 पे एक अलग तरह का
फैसला आया और उसके बाद जितनी भी चीजें हुई
हैं उन सबको आपने देखा है मगर इलेक्टोरल
बंड पे जो फैसला है यह अपने आप में चौकाने

वाला फैसला है एसबीआई यानी स्टेट बैंक ऑफ
इंडिया को तीन हफ्तों में देनी होगी
रिपोर्ट तीन हफ्तों में पूरी रिपोर्ट
एसबीआई ऑफ इंडिया दे दे कि आखिर ये पैसे
कहां-कहां से आए हैं इससे आप ये जानिए कि

ना सिर्फ बीजेपी की चुनौतियां बीजेपी की
परेशानियां बढ़ गई हैं बल्कि परेशानी
अदानी की भी बढ़ जाएगी और अदानी जैसे और
भी कई व्यापारियों की परेशानी इसलिए बढ़

जाएगी क्योंकि अब सबका नाम सामने होगा कि
किसने किस व्यापारी ने किस पार्टी को
कितने पैसे दिए कितने पैसे चंदे में दिए
यह सब कुछ सामने होगा इलेक्टोरल बॉन्ड

सूचना के अधिकार का उल्लंघन है इलेक्टोरल
बॉन्ड जो है वह सूचना के अधिकार का
उल्लंघन है वोटर को पार्टियों की फंडिंग
के बारे में जानने का पूरा हक है यह सब कह

रहे हैं और इसीलिए इलेक्टोरल बंड्स पर
तत्काल रोक का आदेश देता है सुप्रीम कोर्ट
पांच जजों की संवैधानिक पीठ का यह बड़ा

फैसला और फैसले से आगे आप जानिए कि
परिस्थितियां बिल्कुल बदलती हुई नजर आएंगी
बहुत बड़ी खबर दोस्तों अपने आप में चौकाने

वाली खबर इसलिए यह चौकाने वाली खबर
क्योंकि अभी तक किसी ने सोचा नहीं था कि
मोदी सरकार के खिलाफ इतना बड़ा फैसला आ
जाएगा यह चुनावी बंड चुनावी चंदे जिसको
कहते हैं चुनावी चंदा और इस चुनावी चंदे

में आप जानिए कि कहीं ना कहीं जो छुपे हुए
पैसे जो काला धन इस पर भी उन्होंने अपनी
बात रखी है लेकिन सबसे पहले आपको यह भी
बताऊं कि यह मसला है क्या

दरअसल दो पार्टियों
ने एडीआर आप जानते हैं और दूसरा जो है वो
एडीआर जो है वो एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक
रिफॉर्म है और उसके अलावा सीपीआई एम
सीपीआई एम ने इन दोनों ने यानी भारतीय

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने
या कह कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी
ने इन दोनों ने एक याचिका दाखिल की थी कि
चुनावी बंड में गड़बड़ झाला है गड़बड़ी है

और इस पर तत्काल रोक लगना चाहिए इसमें पता
होना चाहिए कि किसके पास किस पार्टी के
पास किसके थ्रू कितना पैसा आ रहा है
पार्टियां जो हैं वो चंदे का हिसाब पूरा

का पूरा दे देती थी अभी-अभी कल ही एडीआर
की एक रिपोर्ट आई है जिसमें अ 800 लगभग
800 करोड़ रुपए चंदे के रूप में एक साल
में बीजेपी को मिले हैं लेकिन वहीं पर

कांग्रेस के पैसे कम हो गए हैं लगभग 80
करोड़ रपए मात्र मिले हैं कांग्रेस को
कहां 80 करोड़ कहां लगभग 800 करोड़ तो 90
प्र ज्यादा पैसे जो बीजेपी को मिल रहे हैं
यह पैसे कौन दे रहा है यह जानने का अधिकार

यहां की जनता का है अगर सूचना का अधिकार
हमारे यहां लागू है हमारे यहां आर्टिकल
191 लागू है तो यह भी संविधान में तो यह
भी जानने का हक है और इसलिए एक यहां

याचिका दाखिल की गई थी याचिका दायर करने
के बाद इस पर सुनवाई हुई नवंबर महीने में
पांच जजों की पीठ ने ती दिनों तक लगातार
इस पर सुनवाई की थी और इस सुनवाई के बाद

अब जो फैसला आज 15 अगस्त माफी चाहूंगा 15
अप्रैल 2024 को ये जो फैसला आया है अपने
आप में एक अहम फैसला है और इस फैसले के
तहत पांच जजों की पीठ ने जो सुनवाई की

जिसमें डी वाई चंद्रचूर हैं संजीव खन्ना
है बीआर गवई है जेवी पारदी वाला हैं और
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा हैं इन पांच जजों

की खंडपीठ ने लगातार तीन दिनों तक दलीलें
सुनने के बाद इस मामले में आज अपना फैसला
सुना दिया है उस समय फैसला सुरक्षित रख
लिया था सुना दिया है फैसला और उस फैसले

में जो कहा जा रहा है उसमें यही कि यह
इलेक्टोरल बंड असंवैधानिक है इलेक्टोरल
बॉन्ड सूचना के अधिकार का उल्लंघन है वोटर
को पार्टियों की फंडिंग के बारे में जानने
का हक है इलेक्टोरल बंड्स पर तत्काल रोक

लगना चाहिए इसके अलावा ये आप देख रहे हैं
कि सीजेआई चंद्रचूर न्यायमूर्ति संजीव
खन्ना बीआर गवई जेबी पार दीवाला और
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने यह

पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने आज यह बहुत
बड़ा फैसला सुना दिया है और इस फैसले के
तहत यह भी कहा गया है कि एसबीआई तीन हफ्ते
के तहत क्योंकि एसबीआई में ही ये पैसे जमा
होते थे एसबीआई यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

में वही इलेक्टोरल बंड जारी करता था आपको
अगर किसी पार्टी को पैसा देना है तो जाके
उतने रुपए का बॉन्ड खरीद लीजिए और उनकी
अकाउंट में पैसा चला जाएगा और यह गुप्त

रखा जाएगा यह सरकार ने ऐसी व्यवस्था की थी
मोदी सरकार ने ऐसी व्यवस्था की थी

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