Electrol Bonds पर CJI DY Chandrachud ने लगाई रोक, किन लोगों ने उठाए थे सवाल | - instathreads

Electrol Bonds पर CJI DY Chandrachud ने लगाई रोक, किन लोगों ने उठाए थे सवाल |

इलेक्टोरल बंड कहीं या चुनावी चंदा उसकी
वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम
कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है कोर्ट ने
चुनावी बंड पर रोक लगा दी है देश की

सर्वोच्च अदालत ने इसे असंवैधानिक बताया
और सरकार को किसी अन्य विकल्प को तलाशने
के लिए कहा कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड
योजना की आलोचना की और कहा कि नेताओं की

फंडिंग के बारे में खुलासा होना बहुत
जरूरी है तो चलिए अब जरा उन लोगों के बारे
में जान लेते हैं जिन्होंने ने इलेक्टोरल
बॉन्ड पर सवाल उठाए थे और मामला सुप्रीम

कोर्ट पहुंचा था इलेक्टोरल बॉन्ड पर जिन
लोगों ने सवाल उठाया था उनमें कांग्रेस
नेता जया ठाकुर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट
पार्टी और एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक
रिफॉर्म एडीआर समेत चार लोगों ने याचिकाएं

दाखिल की थी याचिकाकर्ताओं का कहना था कि
इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए गुपचुप फंडिंग
में पारदर्शिता को प्रभावित करती है यह
सूचना के अधिकार का भी उल्लंघन करती है

उनका कहना है कि इसमें शेल कंपनियों की
तरह से भी दान देने की अनुमति दी गई है
इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुनवाई पिछले साल 31
अक्टूबर को शुरू हुई थी सुनवाई के लिए चीफ
जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच में

जस्टिस संजीव खन्ना जस्टिस वीआर गवई
जस्टिस जेवी पदवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा
शामिल है इस पूरे मामले पर याचिकाकर्ता
जया ठाकुर ने क्या कुछ कहा वह सुनिए एक

ट्रांसपेरेंसी नहीं है इसमें आप किसी भी
किसी का नाम डिस्क्लोज नहीं हो रहा इसके
पहले नाम डिस्क्लोज होता था और एक निश्चित
₹ से ज्यादा आप अगर नहीं दे सकते थे कैश
में अब इन्होंने कितने भी रुपए आप जो है

बॉन्ड खरीदिए बैंक में जाके और पार्टी को
डोनेट कर दीजिए इससे ट्रांसपेरेंसी तो
पूरी तरीके से खत्म हो गई और निश्चित रूप

से कहीं ना कहीं डेमोक्रेसी के लिए बहुत
बड़ा खतरा है तो मैंने इसमें पिटीशन दायर
करी थी कि इस स्कीम को रद्द किया जाए इट
शुड बी ट्रांसपेरेंट लेकिन सुप्रीम कोर्ट

ने ये भी कहा है कि जो जानने का अधिकार है
आरटीआई के तहत वो नागरिकों को मिलना ही
चाहिए उ निश्चित रूप से देखिए ये तो
इंपॉर्टेंट है ही जब तक नाम डिस्क्लोज

नहीं होगा तब तक काफी सारे मुद्दे हैं जो
सामने आएंगे और काफी सारी परेशानियों को
साथ लेके आएंगे जितना भी ब्लैक मनी है या
मनी लरिंग है व एक बहुत बड़ा मुद्दा है जो

इस चीज से जुड़ सकता है इन फ्यूचर जिसमें
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 19 का भी हवाला
दिया है कि जो 19 दो के तहत अगर रोक नहीं
है तो जानने के अधिकार से नहीं रोका जाना

चाहिए नहीं बिल्कुल देखिए राइट टू
इंफॉर्मेशन तो हमारे देश में हमें अधिकार
दिया ही गया है और यह बहुत इंपॉर्टेंट है
एक नाम डिस्क्लोज होना चाहिए कि आखिर

कितनी धनराशि किसने दी है आपको बता दें कि
जनवरी 2018 में लॉन्च किए गए चुनावी बंड
वह वित्तीय उपकरण है जिन्हें व्यक्ति या
कॉरपोरेट संस्थाएं बैंक से खरीद सकते हैं

और एक राजनीतिक दल को पेश कर सकते हैं जो
बाद में उन्हें धन के लिए बुना सकता है इस
योजना को राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता
लाने के प्रयास के रूप में देश की

राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नगद दान
के विकल्प के रूप में पेश किया गया था
शीर्ष अदालत ने कई याचिकाओं पर 3 दिन की
सुनवाई के बाद 2 नवंबर को फैसला सुरक्षित
रख लिया था इस खबर में फिलहाल इतना ही

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