Elon Musk से पहले भारत ने बना दी Hyperloop Train? | India to Start Its Fastest Hyperloop Train - instathreads

Elon Musk से पहले भारत ने बना दी Hyperloop Train? | India to Start Its Fastest Hyperloop Train

एक बार को सोचिए की आप एक कब के अंदर खड़े
हुए पॉट में कदम रखते हैं अंदर घुसते ही
आपको एक ऐसी फुल आती है की आप किसी
फ्यूचरिस्टिक मूवी के सीन में पहुंच चुके

हैं आप अंदर बैठे हैं और पलक झपकते ही आप
एक स्टेट से दूसरे स्टेट पर पहुंच जाते
हैं आपको कैसा लगेगा अगर यह आपकी हकीकत बन
जाती है तो जब भी तेज ट्रांसपोर्ट की बात
होती है तो लोग हवाई जहाज का सारा लेते
हैं या फिर बुलेट ट्रेन को भी इसका ऑप्शन

मैन लेते हैं ऐसा कहा जाता है की दोनों
ट्रांसपोर्ट मोड से काफी कम समय में लंबी
दूरी की यात्रा तय की जा सकती है लेकिन अब
ऐसे सिस्टम पर कम चल रहा है जिससे हवाई

जहाज और बुलेट ट्रेन से भी काफी कम समय
में ट्रेवल करना पॉसिबल हो सकेगा इस
ट्रांसपोर्ट की स्पीड की मदद से आप सिर्फ
कुछ ही मिनट्स में कई स्टेट पार कर सकते

हैं आप भी सोच रहे होंगे की आखिर यह कैसे
हो सकता है और फिर उसे ट्रांसपोर्ट की
स्पीड कितनी होगी तो चलिए इसका जवाब हम
आपको आज के इस वीडियो में बताते हैं

दोस्तों अभी जिस बात से इस ट्रेन की हम
इतनी तारीफ कर रहे हैं वो दरअसल हाइपरलूप
ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत बनाई जा रही है और
यह जल्दी भारत में दौड़ती हुई नज़र ए सकती
है फिलहाल ये ट्रेन दुनिया में अभी पर भी

उपलब्ध नहीं दो राज्यों महाराष्ट्र और
आंध्र प्रदेश में इस प्रोजेक्ट पर तेजी से
कम चल रहा है इस ट्रेन की खासियत ये होगी
की ये हवाई जहाज से भी पास होगी पुणे और

मुंबई के बीच जहां भी 30 से 4 घंटे का सफर
होता है वहीं इसके बाद 20 से 25 मिनट में
वो सफर आसानी से पूरा हो सकेगा हालांकि
आपको ये बता दें की ये कॉन्सेप्ट ओरिजनली

इंडिया का नहीं बल्कि इस तकनीक को सबसे
पहले लाने वाले दुनिया के सबसे अमीर इंसान
ऐलान मस्क है इनकी बोरिंग कंपनी हाइपरलूप
प्रोजेक्ट पर कम कर रही है इनका मानना ये

आने वाले कुछ सालों में ये हाइपरलूप
कॉन्सेप्ट को लोगों के इस्तेमाल के लिए
हमारी जिंदगी में ला सकें एक बार को ऐसा
हो भी सकता है की मार्वल की सीक्रेट वॉर्स

मूवीज के आने से पहले आपको ये ट्रेन हवा
में उड़ती हुई दिख जाए आपको हम यह भी बता
देते हैं की अलोन मास्क का यह आइडिया एक
ओपन सोच टेक्नोलॉजी है जिसका मतलब होता है
की सिर्फ मस्त ही इस टेक्नोलॉजी को नहीं
बनाएंगे बल्कि इस कॉन्सेप्ट को कोई भी

अडॉप्ट कर सकता है इसका यह फायदा भी है की
हाइपोट लोभ को पुरी दुनिया में इंप्लीमेंट
करने का कम और भी तेजी से हो पाएगा जब हर
एक देश हाइपरलूप ट्रेन को बनाएंगे तो
उनमें से हर कोई अपनी टेक्नोलॉजी में एक

अलग ट्विस लाने की कोशिश करेंगे गौर करने
वाली बात ये है की ऐलान मस्क ने अपना
फायदा ना देखते हुए दूसरी कंपनी को भी
अपना विज़न पूरा करने का मौका दिया है
मास्क और चाहते तो वो इसका पेटेंट कर कर
अपना और भी फायदा करवा सकते द लेकिन ऐसा

उन्होंने नहीं किया इसका नतीजा ये निकाला
की हाइपरलूप वैन जो की अमेरिकन
ट्रांसपोर्टेशन कंपनी है और अरे वो एक
स्टार्टअप कंपनी जो हाइपरलूप ट्रेन को
बनाने के लिए बनाई गई है इस तरह की कंपनी

फिलहाल इस ट्रेन के कौन से पर कम कर रही
हैं वैसे कुछ लोगों को मानना है की असल
में hypollo का कॉन्सेप्ट आज से लगभग 200
साल पहले आया था 1799 में ब्रिटिश
इन्वेंटर डोर मेडल ने ट्रांसपोर्टेशन को

और बेहतर बनाने के लिए एक आइडिया प्रपोज
किया था इसके लिए उन्होंने एक एयर
प्रोपल्शन ट्यूब का पेटेंट कराया था खैर
उसे समय तो इस बारे में कुछ नहीं किया जा
सकता लेकिन अब हम उसे आइडिया को हकीकत में

बदलने जा रहे हैं हाल ही में महाराष्ट्र
की सरकार ने इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट
यानी डीपीआर के लिए सजेशन और ऑब्जेक्शंस
bulvaye हैं सरकार कहे तो यह रही है की
इसी साल के अंत तक वो इसकी टेस्टिंग कर

लेगी लेकिन फिलहाल के हालत को देखकर यही
लगता है की यह प्रोजेक्ट अगले साल ही
फ्लोर पर ए पाएगा इसका हाल कुछ इस तरह उन
प्रोजेक्ट्स के हाल जैसा है जो पेपर्स पर
आसानी से चढ़ जाते हैं लेकिन कभी पूरे
नहीं हो पाते जैसे की 2022 में आने वाली

बुलेट ट्रेन खैर ये सब बातें तो बात की है
पर आज इस वीडियो में हम ये जाने की कोशिश
करते हैं की आखिर हाइपरलूप सिस्टम क्या है
और उससे किस तरह बुलेट ट्रेन की तरह
लाइटिंग बेस में ट्रेवल करने का सपना पूरा
हो सकता है इस ट्रेन की फिलहाल की अपोजिशन

है इसके बारे में हम आपको थोड़ा सा डिटेल
में बता देते हैं सबसे पहले तो यह जान
लीजिए की हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन
टेक्नोलॉजी और वर्जिन हाइपर लूप इस
प्रोजेक्ट पर आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र

में कम कर रहे हैं आंध्र प्रदेश में
अनंतपुरा अमरावती और विजयवाड़ा और विशाखा
पटना से जुड़ेंगे जहां तक बात रही मुंबई
की तो महाराष्ट्र में मुंबई पुणे से
जुड़ेंगे और इसी के साथ महाराष्ट्र सरकार
ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए

अमेरिका के वर्जिन ग्रुप के साथ एक
एग्रीमेंट भी बनाया है इतना ही नहीं
महाराष्ट्र में अभी से इसके लिए ट्रैक
बनाया जा रहा है जिसकी वजह से इस ट्रेन की
टेस्टिंग पॉसिबल होगी वैसे यहां आपको बता

दें की हाइपरलूप आम ट्रेन और मेट्रो की
तरह रेल की पटरी पर नहीं होगी इस तकनीक
में कामों के ऊपर ट्रांसपेरेंट ट्यूब
बिछाई जाती है जिसके अंदर सभी बोगी हवा
में तैरते हुए चलेंगी यह तो हो गई ट्रेन
की ओंगोइंग प्रक्रिया चलिए अब इसके पीछे

छुपी हुई टेक्नोलॉजी की बात करते हैं
जिसकी वजह से ये इतनी स्पीड से ट्रेवल कर
पाती है
क्योंकि इसमें ट्रैवलिंग एक लूप के जरिए

होती है और हवाई जहाज की स्पीड से चीजों
को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचा जा सकता
है इस ट्रेन की टेक्नोलॉजी एक खास तरह की
तकनीक है जो दिखने में ट्रेन की तरह है

लेकिन ट्रेन से काफी अलग है हाइपर लूप
टेक्नोलॉजी में स्पेशली डिजाइन किए हुए
कैप्सूल या पॉड्स का इस्तेमाल किया जाता
है इस कैप्सूल में पैसेंजर को बैठक या
कारकों को लोड करके जमीन से ऊंचाई पर बड़े

आकर के ट्रांसपेरेंट पाइप्स पर दौड़ी जाता
है इसके हवा में उड़ने की वजह से ये ट्रेन
पाइप्स में इलेक्ट्रिक मैग्नेट की फिक्स
के चलते ये ट्रैक से थोड़ा ऊपर उठकर चलती
है जिससे इसको ज्यादा गति मिलती है और इसी

वजह से इसे ज्यादा फ्रिक्शन का सामना नहीं
करना पड़ता इस फिल्म के ऊपर 16 पैनल लगाने
की भी कोशिश की जा रही है ताकि इसे
रिचार्ज करने की जरूरत भी ना पड़े यह
पोर्ट जिसमें पैसेंजर बैठे होते हैं इसको

कम दबाव यूट्यूब में इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन
के जरिए हाई स्पीड दी जाती है यह अल्ट्रा
लो एयरोडायनेमिक ट्रैक के चलते लंबी दूरी
तक हवाई जहाज की स्पीड के बराबर दौड़ती है

यह पोर्ट्स इन पाइपों में दौड़ती हैं उनके
अंदर वैक्यूम जैसा वातावरण होता है और हवा
की गैर मौजूदगी में पोर्ट्स को 1000 से
लेकर 1300 किमी प्रति घंटे की स्पीड से

चलाया जाता है इस हाइपरलूप का फायदा यह है
की इसमें पायलट की गलती या मौसम की खराबी
जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता
ये प्रक्रिया पुरी तरह से ऑटोमेटिक है

इसके जरिए किसी तरह का कोई कार्बोनाइजेशन
नहीं होता और ये एक क्लीन सिस्टम है इसी
के साथ हाइपरलूप का उपयोग ग्रिडलॉक सड़कों
से दबाव कम करने शहरों के बीच यात्रा को
आसान बनाने और संभावित रूप से मैनली
फाइनेंशियल बेनिफिट्स को अनलॉक करने के

लिए किया जा सकता है इसी वजह से
करवा सकती है हालांकि इसके नेगेटिव
पॉइंट्स यह है की अभी इसमें सुरक्षा को
लेकर काफी कम किया जाना बाकी है दरअसल इस

में थोड़ी सी भी चुप होती है तो कई लोगों
की जान जा सकती है जिसकी स्पीड के लिए
बेसिक ढांचा तैयार करना जरूरी है क्योंकि
अगर गलती से भी पोर्ट लिख करता है तो आपकी
जान कुछ ही सेकेंड्स में जा सकती है इसी

के साथ ऐसा हो सकता है की जब आप पहली बार
इस ट्रेन में ट्रेवल करते हैं तो ऐसा हो
सकता है की आपको थोड़ा देसी फुल हो सकता
है यानी की आपका सर चक्र सकता है अगर आपको

भी इसकी एफिशिएंसी पर सवाल हो तो हम आपको
हाइपरलूप पर कम कर रही स्वोर्ड कंपनी का
एक कोड बता देते हैं उनके मुताबिक ये
ट्रेन यात्रियों या समान को बिजली की
रफ्तार से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा

सकेगी कंपनी के मुताबिक जिनेवा से यूरिक
के करीब 277 किमी की दूरी महेश 17 मिनट
में तय हो सकती है इसी तरह न्यू यॉर्क
सिटी से वॉशिंगटन डीसी की दूरी सिर्फ 30
मिनट में तय हो जाएगी कंपनी का यह भी कहना

है की अगले 9 महीना में मेरी टेस्ट साइट
पर कम करके हमें यह पता चल जाएगा की तकनीक
को कैसे इस्तेमाल करना है इतना सब सुनने
के बाद आपके मैन में यह सवाल जरूर आया
होगा की कहीं इसमें ट्रेवल करने का सुख

सिर्फ अमीर लोगों के पास तो नहीं होगा तो
आपकी समस्या को हम अभी दूर कर देते हैं
जहां तक बात हो रही है इसमें सफर करने की
किराए की तो इसमें आपको किराया साधारण
ट्रेनों के मुकाबला थोड़ा ज्यादा देना

पड़ेगा ऐसा माना जाता है की इसका किराया
हवाई सफर के बराबर भी हो सकता है
जिसकी वजह से एक आम इंसान भी इसमें आसानी
से ट्रेवल कर पाएगा अभी तक हमने आपको जो

प्रोजेक्ट इस वीडियो की शुरुआत में बताए द
उसके अलावा भारत में ही एक तीसरा
प्रोजेक्ट बिना किसी की नजरों में आए
धीरे-धीरे प्रोग्रेस कर रहा है इस साल
मार्च में आईआईटी मद्रास ने कॉन्टैक्ट लेस
बेड protocrack के विकास के लिए रेल

मंत्रालय से संपर्क किया था अब आईआईटी में
hyperlove वैक्यूम ट्यूब तैयार किया जा
रहा है इसका भारतीय रेलवे द्वारा हाइपरलूप
पर आगे की रिसर्च के लिए टेस्ट वेट के रूप

में इस्तेमाल किया जा सकता है इस
प्रोजेक्ट पर ऐस्टीमेटेड कॉस्ट 8.34 करोड़
है आपको बता दें की स्वदेशी तकनीक प्रकार
करने वाली आविष्कार हाइपरलूप की टीम ने

स्पेस एक्स हाइपरलूप प्रतियोगिता 2019 में
टॉप टेन वर्ल्ड वाइड रैंकिंग हासिल की थी
ऐसा करने वाली टीम थी आविष्कार हाइपरलूप
परियोजना को यूरोपी हाइपरलूप बैक 2021 में
मोस्ट स्क्रिबल डिजाइन का अवार्ड भी मिला
था बात करें की ये टीम आखिर है क्या तो हम

आपको बता देते हैं की आविष्कार हाइपरलूप
आईआईटी छात्रों की एक टीम है जिसमें 70
सदस्य हैं ये छात्र इंजीनियरिंग के 11 अलग
बच्चों से जुड़े हैं आईआईटी मदरसे की दवा

किया है की टीम आविष्कार द्वारा प्रपोज्ड
हाइपरलूप मॉडल ₹1200 किमी प्रति घंटे से
अधिक की टॉप स्पीड प्राप्त कर सकती है
संस्थान ने कहा की टीम भारत में हाइपरलूप
ट्यूब रिसर्च की लीडरशिप कर रही है और
पहले से ट्यूब डिज़ाइन पर अटेंड कर चुकी

है ये टीम 500 मीटर लंबी हाइपरलूप
टेस्टिंग फैसिलिटी का भी कंस्ट्रक्शन कर
रही है जिसे 2022 के अंत तक चेन्नई की
भारी इलाके में संस्थान के डिस्कवरी
प्रोवाइड में पूरा होने की उम्मीद है

वैक्यूम ट्यूब विकसित होने पर यह अमेरिका
में वर्जिन हाइपरलूप वैन की टेस्टिंग
फैसिलिटी के बराबर होगा इसी के साथ भारतीय
रेलवे अब आया है की मद्रास को हाइपरलूप

 

टेक्नोलॉजी के लिए एक्सीलेंट सेंटर
स्थापित करने में भी मदद करेगा दरअसल
मंत्रालय की दिलचस्पी स्वदेशी
hyperloopita बढ़ गई जब उसे पता चला की

आविष्कार हाइपरलूप नामक आईआईटी मद्रास के
70 छात्रों की एक टीम 2017 से ही
hyperloopad हरे ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पर
कम कर रही है रेलवे मंत्रालय ने कहा की
देश को कार्बन न्यूट्रल बनाने में ये
तकलीफ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है
क्योंकि इसके लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता
होती है स्वदेशी हाइपरलूप वर्किंग
कैपेसिटी के मामले में अमेरिका में वर्जिन
अनूप सुविधा के बराबर होगी लेकिन इसकी
कॉस्ट बेहद कम होगी आपका इस हाइपरलूप
ट्रेन के बारे में क्या कहना है क्या आप
इस ट्रेन में सफर करना पसंद करेंगे और

क्या आप चाहेंगे की ये ट्रेन आपके शहर में
आए अगर ऐसा है तो हमें कमेंट सेक्शन में
जरूर बताएं अगर आपको ये वीडियो पसंद आई हो
तो लाइक और शेयर का बटन दब

Leave a Comment