“EVM से छेड़छाड़ संभव है” वो इंटरव्यू जो चुनाव आयोग को सुनना ज़रूरी है | EVM | EC | BJP | Congress - instathreads

“EVM से छेड़छाड़ संभव है” वो इंटरव्यू जो चुनाव आयोग को सुनना ज़रूरी है | EVM | EC | BJP | Congress

नमस्कार  आपका स्वागत है

जैसे-जैसे चुनाव का
समय नजदीक आ रहा है बहुत बड़ी बहस एक ये
शेप ले रही है वो यह कि क्या हमारी ईवीएम
मशीनें राजनीति से आजाद हैं क्या ईवीएम
मशीनों को हैक किया जा सकता है क्या उनमें

धांधली की जा सकती है क्या अपनी मनपसंद
वोट दिए जा सकते हैं और खासकर जो सत्ता उट
पार्टी है बीजेपी लगातार उस पर अपोजिशन की
तरफ से और आम जो मैं कहूंगी मतदाता उसकी

तरफ से भी लगातार इस तरह के जो संदेह हैं
वो जाहिर किए जा रहे हैं शक जाहिर किया जा
रहा है आप देखिए किसी भी मेरी पॉलिटिकल
डिबेट के कमेंट सेक्शन में आप देखें
ज्यादातर बहुत सारे व्यूवर्स आकर यह कहते

हैं हमारे दर्शक कि इस सब से कुछ नहीं
होगा इस बहस से जब तक आप ईवीएम को ठीक
नहीं करते इस सब से कोई फायदा नहीं है
क्योंकि हमारा वोट वहां नहीं जा रहा है
जहां हम भेज रहे हैं मैं यहां ये कहना

चाहती हूं कि ईवीएम मशीनें ठीक हैं या
नहीं है क्या उन्हें हैक किया जाता है जा
सकता है क्या उसमें धांधली हो सकती है इन
सब सवालों के मेरे पास जवाब नहीं है लेकिन

मेरे पास एक जवाब जरूर है वो यह कि अगर आम
जनता के एक वर्ग में भी इस तरह का संदेह
पैदा हुआ है कि उनका वोट वहां नहीं जा रहा
है जहां वह भेज रहे हैं उस पॉलिटिकल
पार्टी या उस प्रतिनिधि को तो यह हमारे

पूरे लोकतंत्र के ऊपर एक बहुत बड़ा सवाल
लोकतांत्रिक प्रक्रिया के स्वच्छ और
स्वस्थ होने के ऊपर बहुत बड़ा सवाल पैदा
करता है और मैं ये समझती हूं कि एक ऐसा

बुनियादी मुद्दा है जो लोकतंत्र की
बिल्कुल एक तरह से नीव हिला सकता है भारत
के लोकतंत्र में सिर्फ दो ही चीजें मैं
समझती हूं कि आम आदमी को मिली हैं बोलने

का अधिकार और वोट देने का अधिकार बोलने का
अधिकार लगातार हमसे छीना जा रहा है अगर
वोट देने में भी अगर ये संदेह पैदा होता
है तो अपने आप में बहुत ज्यादा दुखदाई बात

है और हर उस शक शुभा और संदेह को मिटा
देने की जरूरत है कि जो ईवीएम मशीनों के
इर्द-गिर्द घूम रहा है इसी मुद्दे पर
बातचीत करने के लिए एक बेहतरीन मेहमान
मेरे साथ मौजूद हैं मेरे साथ हैं फिलहाल

माधव देशपांडे जो कि सीईओ रह चुके हैं
ट्यूलिप सॉफ्टवेयर के और साथ ही सलाहकार
रह चुके हैं बराक ओबामा के ओबामा प्रशासन
के यूएस में यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका

में इससे पहले करण थापर के साथ आपने उनकी
बातचीत सुनी थी और काफी उस बातचीत को लेकर
मैं कहूंगी एक नई डिबेट पैदा हो गई थी उसी
डिबेट को आगे बढ़ाना चाहती हूं और अच्छी
बात यह है कि देशपांडे जी हिंदी में हमसे

बातचीत करेंगे बहुत-बहुत स्वागत है आपका
सर नमस्ते धन्यवाद अरफ मुझे बुलाने के लिए
कुछ सवाल जो आपकी उस उस बातचीत से और
पिछले आपके जो इंटरव्यूज हैं उससे पैदा हो
रहे हैं मैं वो तो आपके सामने रखूंगी

मैंने जो समझा है वह यह कि आपने यह कहा है
कि जो हैकिंग या मैनिपुलेशन पहली बात तो
यह दो अलग-अलग अंग्रेजी के शब्द हैं अगर
इसमें कहे कि ईवीएम पर कब्जा पाया जा सकता

है य ईवीएम में धांधली की जा सकती है सबसे
पहला सवाल मैं आपसे य पूछना चाहती हूं कि
क्या हैकिंग या मैनिपुलेशन यानी ईवीएम के
ऊपर कब्जा होना या ईवीएम में धांधली करना
क्या यह मुमकिन

है हैकिंग तो जैसे मैं हमेशा कहता हूं है
तो भारतीय ई ईवीएम में मुमकिन ही नहीं
क्योंकि भारतीय हैकिंग करने के लिए हैकिंग
का मतलब यह होता है कि कहीं दूर से आप
किसी चीज पर कब्जा कर लो और व उस चीज को

जिस तरह से वह बर्ताव उसने करना चाहिए उसे
अलग बर्ताव करने के लिए मजबूर कर दो यह
हैकिंग का मतलब होता है दूर से कब्जा करने
के लिए भारतीय
ईवीएम ना तो इंटरनेट से ना वाईफाई से ना

ब्लूटूथ से कहीं जोड़ी जाती है जब चुनाव
चालू रहता है तब तो इसलिए उन परे दूर से
कब्जा नहीं हो सकता यानी जैसे लोग मैंने
सुना है लोग कहते हैं कि हा वहां बाहर से
मोबाइल से करते हैं यह कर तो वो तो भारतीय

ईवे में नहीं हो सकता वो हैक नहीं हो सकती
लेकिन जिसे गड़बड़ी कहते हैं मैनिपुलेशन
कहते हैं वो जरूर कर सकते हैं क्योंकि
उनमें कुछ चीजें ऐसी है कि जो

जिसके लिए दूर से कब्जा करने की जरूरत
नहीं है एक चीज तो यह है कि उनने बटन है
तो बटन कुछ कॉमिनेशन में दबाए जा सकते हैं

थरेट और उससे धांधली हो सकती है दूसरा यह
है कि कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट यह जो
दो है यह हम जिसको लोकल लोकली एग्नोर कहते
हैं लोकेशन एग्नोर यानी वो कहां है उससे
उन्हें फर्क नहीं पड़ता चाहे वह मणिपुर

में हो चाहे वह जम्मू कश्मीर में हो या
चाहे
वो महाराष्ट्र में हो या तमिलनाडु में हो
उनसे कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट को
फर्क नहीं पड़ता लेकिन वीवीपैट जो है वो
लोकलाइज डाटा रखता है वीवीपैट में

उम्मीदवारों की लिस्ट रहती है और उनके
सिंबल रहते हैं वो लिस्ट में जो जो वोट
आता है उसे मैच करके उसे देख करके आपको
रिसीव स्लिप में प्रिंट करके दिखाते हैं
तो यह अच्छा खासा प्रोग्राम होता है और यह

प्रोग्राम 10 या 15 दिन पहले
ही डाटा इस प्रोग्राम के लिए भरा जाता है
वीवीपैट में तो वीवीपैट तो लोकली एग्नोर
नहीं है व पैड बिल्कुल जानता है कि किस
बटन पर कौन सा उम्मीदवार है और दूसरी चीज

यह है कि विवी पैट ने हमें स्लिप दिखाने
के बाद फिर कंट्रोल यूनिट को वो रिस्पांस
देता है वह थोड़ा स्ट्रक्चर कैसा है कि जो
कंट्रोल यूनिट है वह मास्टर है और बैलेट
यूनिट और वीवी पैड जो है

यह स्लेव्स है तो इसका मतलब यह होता है और
यह जानकारी
भी इलेक्शन कमीशन ने अभी हमारे कुछ सवालों
के बाद अभी के 30 जनवरी और 7 फेब्रुअरी के
उनके जो एफ क्यू आए हैं उनमें दी है जी

हां मैं मैं एक ही ल में मैं आपकी तरफ आती
हूं मैं यहां इसको दोहराना चाहती हूं कि
आपने मेरे पहले सवाल का जवाब यह दिया है
कि हैकिंग तो रिमोट से तो पॉसिबल नहीं है
कि आप कहीं भी बैठे हो रिमोट का बटन दबाएं

और हैकिंग कर लें यह संभव नहीं है लेकिन
मशीनों में धांधली फिर भी संभव है आपने इस
जवाब का सीधे-सीधे जवाब दिया है क्योंकि
बार-बार इस बात को कहा जाता है कि धांधली
नामुमकिन है और ये एक तरह से पूरा वाटर

टाइट सिस्टम है इससे पहले कि मैं अगले
सवाल की तरफ बढूं मैं चाहती हूं कि आप एक
जरा बुनियादी भाषा में एक आम वोटर को यह
समझा दीजिए कि जब वह पहुंचता है पोलिंग
बूथ पर और जो वह बटन दबाता है वहां से जो

प्रोसेस और जहां तक उसका वोट जा रहा है यह
पूरी प्रक्रिया कैसे अंजाम लेती है तब तक
जब तक कि उसका वोट गिना जाता
है
बढ़िया क्या होता है हम जैसे ही आम आदमी

जाता है और एक बटन दबाता है समझो उसको एपल
का सिंबल पर बटन दबाना है उसको एल को वोट
देना है तो वो जब बटन दबाता है तो उसके
बटन के बाजू का जो एक एलईडी होता है छोटा
इलेक्ट्रॉनिक दिया होता है वह जल जाता है

वहां से व इलेक्ट्रॉनिक वोट तैयार हो जाता
है जिसकी कीमत यूजुअली नंबर्स में होती है
एक दो तीन चार ऐसे और वो वोट जाता है
कंट्रोल यूनिट पर कंट्रोल यूनिट को अभी
समझो मैंने दो नंबर का बटन दबाया तो
कंट्रोल यूनिट को दो नंबर मिल जाएगा फिर

कंट्रोल यूनिट उसको आगे बढ़ाता है वीवी की
तरफ और वि पट को बोलता है यह दो नंबर मेरे
पास आया है अब इसका जो सिंबल है उसका
स्लिप प्रिंट करो और मुझे बताओ प्रिंट
किया क्या फिर व पैट जो है यह दो नंबर जो

है उसको मैच कर देता है उसके पास जो लिस्ट
होती है उम्मीदवारों की और
उनके चिन्हों की और जो मैच होता है वह
चिन्ह प्रिंट करके
व वोटर को दिखा देता है फिर कंट्रोल यूनिट

को बोलता है मैंने छाप दिया है फिर
कंट्रोल ट उसको बोलता है कि अब उसको
काटो फिर वह स्लिप को काटता है व पैट और
फिर बोलता है मैंने काट दिया तब यह जब सब

होता है तब कंट्रोल यूनिट यह जो वोट है वह
सेव कर देता है एक बीप आता है बीप ऐसा
आवाज आता है ऐसी और वो वोट सेव हो जाता है
यह पूरी प्रक्रिया है अभी इसमें धांधली कब
कहां हो स है बीयू और सीयू के बीच में नली

नहीं हो सकती क्योंकि उन दोनों को दो का
मतलब किस कौन सा उम्मीदवार है क्या है यह
मालूम नहीं है लेकिन वीवीपैट को व मालूम
है और यह जो कंप्यूटर में जिसको
कम्युनिकेशन कहते हैं वोह द तरफा होता है
नॉर्मली तो यह मैं जो बता रहा था कि

मास्टर और स्लेव है तो यह सब कमांड जो है
वो कंट्रोल यूनिट पहले ब को बताता है कि
अब तुम तैयार हो जाओ कोई आएगा बटन दबाए
फिर वो बटन दबाया तो उसका जो रिस्पांस है
वो कंट्रोल यूनिट को बैलेट यूनिट दे देगा

अभी यह जो आप देख रहे हैं कि स्लेव यूनिट
जो है जो बैलट यूनिट है और वीवी पैट है वह
सिर्फ उनसे उनसे जो कहा जाता है वही कर
रहे हैं और उन्होंने यह किया है यह बता
रहे हैं सो दे ओनली जिसको हम इंग्लिश

अंग्रेजी में कहते हैं कि वो रिस्प करते
हैं वो खुद
बखुदा मुमकिन है देशपांडे जी यह मुमकिन है
कि अगर मैंने आपने कहा कि एल को वोट डाला
लेकिन मेरा वोट चला गया बनाना को यह संभव
है कि इसमें मैनिपुलेशन किया जा सके कि

मेरे एप्ल का वोट बनाना को चला गया यह
संभव है
क्या बिल्कुल है अभी क्या होता है कि
जैसे कंट्रोल यूनिट ने बोला मेरे पास दो
आया है इसका सिंबल प्रिंट करो मान चलो कि

ये उसका सिंबल एल
है अभी इसने एल तो छाप दिया वीवी पट ने
लेकिन जब वो रिस्पांडस देता है जब वह बात
करता है सीयू से और कह देता है कि मैंने

छाप दिया उस समय अगर उसने यह बोला कि
छापा दो कॉमा
तीन समझ लो छापा इतना ही डायलॉग हो ऐसे
हमें मालूम नहीं है कि वोह क्या उसको
रिस्पांस देता है हम मान चलते हैं कि उस
वो सिर्फ ये बोलता है छापा या छापा दो यह

बोलता है कि मैंने दो नंबर छापा अभी अगर
यह ऐसा बोल रहा है कि छापा दो कमा तीन और
कमांड यूनिट में अगर प्रोग्राम ऐसा लिखा
गया है कि दो कमा तीन आया तो इसका मतलब यह
है कि मैंने दो छापा है लेकिन तुम तीन तीन
सेव

करो अभी समझ लो कि तीन में केला है तो
आपको तो दिखेगा कि एप्पल प छप गया है
कंट्रोल यट अंदर सेव करेगा तीन जो केला
है तो यह जो प्रोग्राम मम है जो जैसे मैं
बोल रहा हूं कि व जो लो लोकेशन एग्नोर

नहीं है जो लोकेशन से के बराबर उसका डाटा
बदल जाता है प्रोग्राम नहीं बदलता
प्रोग्राम वही है लेकिन डाटा बदलता है जी
हां तो देशपांडे जी आप ये कह रहे हैं कि
प्रोग्राम तो वही यानी मुझे ये दिखेगा कि
मैंने एल को ही वोट दिया लेकिन जा सकता है

वो बनाना को दूसरी बड़ी बात आपसे ये
पूछूंगी चूंकि लाखों मशीनें यहां पर लग
रही हैं तो क्या यह संभव है अगर पहली बात
तो मुझे ये बताइए कि ये मशीने डायरेक्टली

इलेक्शन कमीशन में होती हैं इलेक्शन कमीशन
के जो जो अधिकारी हैं उनके तहत होती हैं
इन मशीनों को जो जो कंट्रोल होता है वह
कितने बड़े अधिकारी के हाथ होता है क्या
हर मशीन उस प्रोसेस से होकर गुजरती है

यानी मान लेते हैं कि अगर उत्तर प्रदेश
में में चुनाव हो रहा है तो उत्तर प्रदेश
के चुनाव में कितने इलेक्शन कमीशन
कमिश्नर्स लगेंगे यानी कितने इलेक्शन
कमीशन के अधिकारी लगेंगे उसमें कितनी

मशीनें लगेंगी कितने लोग लगेंगे और अगर एक
प्रदेश में चुनाव में धांधली कर हो तो
क्या यह संभव
है संभव तो है पहला यह है कि जो उनका
मैनुअल है इलेक्शन कमीशन का उसमें

उन्होंने साफ कह दिया है कि डिस्ट्रिक्ट
इलेक्शन ऑफिसर जो होता है उसके अंदर यह सब
उसकी निगरानी में यह सब रहते हैं और जो
जिस जगह उसको स्टोर किया जाता है वह काफी
सुरक्षा से मजबूत होती है अर्ध सैनिक के

पुलिस के बहुत सारे लोग वहां रहते हैं तो
उनकी चोरी करना मुझे लगता है मुश्किल है
नामुमकिन तो है नहीं नामुमकिन तो होता
नहीं है कुछ लेकिन मुश्किल तो जरूर है

लेकिन वही जो मैं बारबार कह रहा हूं कि
इसीलिए इ क्या है ना एक हम जब सिस्टम
बनाते हैं कभी कभी भी कहीं भी तो वो जब
बनती है तब

वो जैसी चाहिए वैसी है कि नहीं उसके कुछ
निकष जो क्राइटेरिया बोलते हैं हम लोग वह
हम तय करते हैं यह सिस्टम बनी थी 1977 में
तब हमारे पास ना इलेक्ट्रॉनिक्स एडवांस था

ना कंप्यूटर साइंस था ना नेटवर्किंग था
कम्युनिकेशन बहुत वीक था लैंडलाइन बिल्कुल
चलती थी वह भी कहीं कहीं जगह तो जब यह
डिजाइन की ग सिस्टम तो 77 में जो एडिक्ट
था उस तरह से की गई तो सब जो एनफोर्समेंट

के जो उसके डायरेक्टिव है उसका जो आउटलुक
है वह सब 77 का है कि फिजिकल इंफोर्समेंट
करो लेकिन बाद में इलेक्ट्रॉनिक्स और
कंप्यूटर साइंस और यह सब बहुत आगे चला गया
और फिर हमने अपग्रेड नहीं किया लेकिन इस

दौरान जो हमें अपग्रेड करना था हा वो नहीं
किया हमने करना चाहिए था 20 साल पहले ही
करना चाहिए था जब यह सब उपलब्धियां थी तब
यह करना चाहिए था जी हा देशवा जी यहां मैं
कुछ आपके सामने ऐसी दलीले रखूंगी हो सकता

है आप आपको कुछ उनमें से कमजोर लगे और कुछ
हो सकता है हास्यास्पद भी लगे लेकिन वो
पूछे जाने जरूरी है क्योंकि आम वोटर के
संदेह हैं जो मैं आपके सामने रख रही हूं
आप एक एक्सपर्ट हैं और मैं मान के चल रही
हूं कि हम जो यहां बहस कर रहे हैं राजनीति

से अछूती नहीं है क्योंकि ईवीएम की पूरी
डिबेट ही राजनीति और चुनाव के इर्दगिर्द
है और लोकतंत्र में चुनाव ही एक तरह से
फाउंडेशन है बल्कि पूरे तरीके से फाउंडेशन

है एक लोकतंत्र की तो मुझे ये बताइए कि
अक्सर दलील दी जाती है कि यह तो संभव है
कि एक एक माइक्रो लेवल पर एक बारीक सतह पर
चुनाव में धांधली की जा सके यानी कुछ
मशीनों को मैनिपुलेट किया जा सके यानी मान

लेते हैं कि अगर किसी पॉलिटिकल पार्टी की
सीटें आ रही थी 50 तो वह उन्हें बढ़ाकर 75
कर सकता है लेकिन यह नहीं हो सकता कि पूरा
का पूरा चुनाव आप धांधली पर बुनियाद कर
दें मैं मान लेती हूं अगले लोकसभा चुनाव

में अगर मान लेते हैं एक पॉलिटिकल पार्टी
को 25 सीटें कम पड़ रही है तो वो इतनी
धांधली कम से कम कर सकती है कि उन 25
सीटों या कम से कम 50 सीटों को धांधली
करके हासिल कर सके लेकिन पूरा का पूरा
चुनाव मैनेज हो जाए यह असंभव है क्या इस
दलील में कोई दम

है दो चीज है एक तो पहले मैं यह बताऊंगा
कि कहना चाहूंगा कि ईवीएम का जो यह सब
प्रश्न है
इसका आ फॉल आउट यानी अभी हिंदी शब्द मुझे
नहीं आ रहा इसका इंप्लीकेशन राजनीतिक है

लेकिन यह प्रश्न राजनीतिक नहीं य प्रश्न
मेरे ख्याल से मेरे मन में राष्ट्रीय
सब राजनीतिक दलों ने साथ चलकर इसको सुधरना
चाहिए इसको ठीक करना चाहिए क्योंकि आज जो
सत्ता में है वह कल सत्ता में रहेंगे ऐसे
नहीं है और आज जो सत्ता में नहीं है वह कल

सत्ता में आएंगे नहीं ऐसा भी नहीं है तो
यह सब और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि
हर एक भारतीय के वोट का यह सवाल है जो
लोकस हमारी पूरी बुनियादी डेमक जो बुनियाद

जिसकी है वह हर
एक भारतीय का हर एक सिटीजन का वोट यह है
तो
उसको पूरी तरह से सुरक्षित करना यह हर
राजकीय राजनीतिक दल का काम है हर राजनीतिक
दल का

इसमें सत्ता में कौन है और विरोधी कौन है
यह मेरे ख्याल से कुछ माइना नहीं रखता
लेकिन बात ऐसी हो गई है कि दो प बन गए हैं
तो वो तो वहां छोड़ देंगे हम आप जो कह रही
है कि पूरी इलेक्शन मैनिपुलेट हो सकती है

क्या तो अभी एक समझना चाहिए हमें कि यह जो
प्रोसेस है जिसमें 10 या 15 दिन
पहले इलेक्शन कमीशन के और भारत
इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स
कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के कुछ ऑथराइज्ड लोग

आते हैं सिंबल अपलोड यूनिट और सिंबल
लोडिंग यूनिट एसएल यू ऐसा एक यूनिट उनके
पास रहता है और लैपटॉप रहता है वह इलेक्शन
कमीशन के वेबसाइट को इंटरनेट से जुड़ जाते
हैं वहां से जिस कंसीट स का काम उनको दिया

गया है उसका जो डाटा है उम्मीदवारों की
लिस्ट और
उनके नाम पक्ष के नाम और
उनकी साइंस यह सब डाटा वह डाउनलोड कर लेते
हैं उनके लैपटॉप में लैपटॉप से वोह सिंबल
लोडिंग यूनिट में आ जाता है और फिर सिंबल
लोडिंग यूनिट वीवी पैड को जोड़ा जाता है

और अपलोड किया जाता है अब यह मान के चलिए
यह
तो इलेक्शन कमीशन यह तो बोलता है कि
उम्मीदवार का नाम पक्ष का नाम और चिन्ह यह
सब एक इमेज इसका फोटो निकाल के इमेज की
तरह स्टोर किया जाता है अभी यह जो स्टोर

होता है वो पहले स्थान पर जो पहले बटन का
है दूसरे स्थान पर दूसरे बटन का तीसरे
स्थान पर तीसरे बटन का इस तरह से उसका
रेलगाड़ी जैसा स्टोरेज होता है
अभी ये हम ऐसा मानते हैं कि ये सिर्फ इमेज
ही स्टोर हो जाए अगर उस इमेज के साथ समझो

मुझे पांचवे उम्मीदवार को जिताना है और
मैं कहीं बैठा हूं जिस जिसे ये डाटा का
एक्सेस
है तो उस इमेज के बाद अगर मैं स्टार डाल
दूं या कुछ और डाल दूं जिससे वीवीपैट के
प्रोग्राम को पता चले कि इसको फेवर करने

का है इसको हमें फेवर करना है अभी जो
इंजीनियर वह डाटा डाउनलोड करेगा और अपलोड
करेगा उसको यह पता भी नहीं होगा कि ऐसा
कुछ हो रहा है क्योंकि वह तो कुछ देख नहीं
सकता उसे इमेजेस दिखती है वो स्टार तो उसे

दिखेगा नहीं और वो अपलोड हो जाएगा यह
थियोरेटिक ली पूरा पूरा पॉसिबल
है तो अगर यह ऐसे हो गया और वीवीपैट का
प्रोग्राम हमने ऐसा लिखा है समझो पहले से
ही कि तीसरा वोट या चौथा वोट या पांचवा

वोट जिसके सामने स्टार है उसको देना है
चाहे कुछ भी वोट आ जाए इसलिए मैंने आपको
पहले उदाहरण दिया था कि मैंने अगर बोल
दिया छपा दो कमा तीन तीन के सामने स्टार
है इसलिए और यह तीसरा वोट है समझो या चौथा

वोट है क्योंकि वो गिनती भी कर सकता है
उसमें बहुत पट पावरफुल यूनिट जी तो माधव
देशपांडे जी आप यह कह रहे हैं कि न सिर्फ
के बारीकी से माइक्रो लेवल पर यह
मैनिपुलेशन संभव है बल्कि मैक्रो लेवल पर

भी संभव है यानी कि पूरा का पूरा चुनाव भी
धांधली पर आधारित हो सकता है क्या मेरे
सवाल का जवाब हां है हा है बहुत ली पक्का
पॉसिबल है यह होगा कि नहीं यह मैं नहीं कह
सकता थरेट टिकली पॉसिबल है कि नहीं

बिल्कुल है बहुत ही चौकाने वाला ये जवाब
है अब मैं मशीन के बाद आ जाती हूं मैन पर
अब यह बताइए जितने लोग शामिल हैं इस पूरी
प्रक्रिया में चाहे हम इलेक्शन कमीशन के
अधिकारियों का जिक्र करें हम वहां पर जो

डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन जिला
अधिकारियों का जिक्र करें उसके अलावा जो व
राजनीतिक कार्यकर्ता हैं तमाम पॉलिटिकल
पार्टियों के यह तमाम लोग इस पूरी चुनावी

प्रक्रिया के इर्दगिर्द घिरे रहते हैं
इनमें आप पहली बात तो रोल बताइए उन लोगों
का और खासकर अगर पॉलिटिकल पार्टी जिसका
दबदबा है उस इलाके में जहां हम समझते हैं
कि होना चाहिए संवैधानिक हिसाब से कि जो
हमारा एडमिनिस्ट्रेशन है जो हमारे

ब्यूरोक्रेट्स हैं वो सीधे तौर पर संविधान
के लिए जवाबदेह हैं लेकिन हम जानते हैं कि
जो सियासी आका हैं उनके लिए कितने सारे
डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर से लेकर उससे ऊंचे
अधिकारी से लेकर उससे नीचे अधिकारी तक
तमाम लोग ऐसे पाए गए हैं जो कि अपने

सियासी आकाओं के लिए काम कर रहे हैं तो
इसमें जो तीन तरह की अलग-अलग जो लेयर्स
हैं उन लोगों की जो इस पूरी प्रक्रिया में
शामिल हैं उनके जरिए भी ये नली संभव

है हां क्यों यानी संभव तो है कैसे है ना
दो चीज है यह सिस्टम इसलिए मैं बोल रहा था
कि जो सिस्टम तैयार की जाती है वह एक अपने
कांटेक्ट में रहती है और इसीलिए सिस्टम
ऐसी डिजाइन होनी चाहिए कि लोगों लोगों ने

कुछ भी चाहे करें सिस्टम सिस्टम का काम
पूरी नेकी से
करेगी ऐसी सिस्टम ब बननी चाहिए
अभी की सिस्टम ऐसे नहीं है क्योंकि अभी
समझो देखिए अभी इलेक्शन कमीशन बोलता है
कि

ताकि बाजार में से कोई कंट्रोल यूनिट या
बैलेट यूनिट या वीवीपैट लाके खरीद के कोई
बिठा दे किसी इलेक्शन के जहां पोलिंग हो
रहा है वहां यह ना हो इसलिए उन्होंने
डिजिटल सर्टिफिकेट हर एक बीयू और सीयू और
वीवीपैट में डाला है यह बहुत ही अच्छी चीज

है बहुत ही अच्छी चीज है आवश्यक भी है
डिजिटल सर्टिफिकेट क्या होता है जैसे अगर
हम एयरपोर्ट पर जाते हैं तो हमारे पास हम
समझ लीजिए कि हम ऐसे हवाई जहाज से जा रहे
हैं जिसमें 200 सीट है तो 200 बोर्डिंग

पास 200 लोगों के पास एक एक ऐसा रहेगा
बोर्डिंग पास क्या करता है आपको इजाजत
देता है कि आप हवाई जहाज में बैठे लेकिन
आप अगर सिर्फ बोर्डिंग पास लेकर एयरपोर्ट
पहुंच गए तो आपको उधर एंट्री नहीं मिलेगी

वह आपको बोलेंगे कि आपका आईडी
दिखाओ क्यों क्योंकि जिसके पास बोर्डिंग
पास है वह अंदर जा सकता है लेकिन मेरा
बोर्डिंग पास अगर किसी और ने लिया तो वह

दूसरा आदमी अंदर जाएगा इसलिए मेरा टिकट
अगर मेरा है तो वह जांच करते हैं कि मैं
वही हूं कि नहीं हूं जिसके पास बोर्डिंग
पास है वो वही है कि नहीं है जिस जिसको हम
कंप्यूटर साइंस या मैथमेटिक्स में नेसेसरी

एंड सफिशिएंट कंडीशन कहते हैं कि नेसेसरी
क्या है जरूरी क्या है कि बोर्डिंग पास
रहे लेकिन उतना काफी है क्या नहीं है वोह
सफिशिएंट नहीं है वह काफी नहीं है आपका
आईडी होना जरूरी है हमारे यह ईवीएम के

इसमें जरूरी कंडीशन तो हम सेटिस्फाई करते
हैं कि हां सबके पास डिजिटल सर्टिफिकेट है
लेकिन जिस जो तीन चीज एक पोलिंग बूथ पर
थी क्या वही तीन चीजें काउंटिंग के समय भी

यूज की जाती है या नहीं जाती इसके लिए कुछ
आइडेंटिफिकेशन है
नहीं इसका य अगर यह ऐसा होता कि यह जो तीन
चीजें हैं उनको जिसके जिसको हम पेयरिंग
कहते हैं पेयरिंग यानी क्या जैसे हम अगर

मॉडर्न कार्स देखते हैं जो कीलेस एंट्री
वाली होती है हम हमारे पास चाबी रखते हैं
लेकिन चाबी दरवाजे को लगाते नहीं हमारे
खिसे में चाबी होती है पॉकेट में हम चलते
जाते हैं हैंडल को हाथ लगाते हैं या बटन

दबाते हैं हैंडल के ऊपर और का कार खुल
जाती है लेकिन मेरी चाबी लेकर अगर मैं
आपकी कार के पास आ जाऊं तो वह कार खुलेगी
नहीं क्योंकि मेरे कार की और मेरे कार की
चाबी की पेयरिंग फैक्ट्री में हुई है तो
वही दोनों एक में एक के साथ बात करेंगे
ऐसी पेयरिंग ये सीयू बीयू और वीवी पैट में

अगर होती है तो भले कोई भी दूसरा ऑथराइज्ड
भी अगर कंट्रोल यूनिट रिप्लेस करना
चाहे तो होगा नहीं आज की तारीख में ऐसा है
कि समझिए 10 लाख कंट्रोल यूनिट्स है अपने

पास और उसमें से पा ही लाख यूज होने वाले
हैं मैं ऐसे ही कुछ नंबर ले रहा हूं ऐसा
मतलब नहीं है कि इतना होगा उदाहरण के तौर
पर और वो 5 लाख तो बाजू में रखे हैं जो
स्पेयर है अगर समझो किसी
एंटी सोशल एलिमेंट ने उ उन 5 लाखों पर

कब्जा कर लिया या ऐसा समझिए कि हमारे
शत्रु राष्ट्र ने जिनके पास माल जिनको
मालूम है कि यहां है उन्होंने कब्जा कर

लिया क्योंकि उनको हमारी सरकार बदलनी है
यह राष्ट्रीय सुरक्षा का भी प्रश्न होता
है फिर जी हां देशवा जी यहां दो चीजें आगे
सामने आ रही है पहली बात तो इंटरव्यू के
बाद ही लगता है कि इलेक्शन कमीशन ने भी एक

तरह से कोशिश तो की है कि अपना रुख साफ
करें जिसका जिक्र आप भी कर रहे थे जो
सवालों के जवाब देने की कोशिश की है उसमें
एक तो यह है कि उन्होंने सिग्नल कैसे
रिसीव किया जाता है और ईवीएम को कैसे भेजा

जाता है यह तो एक तो उन्होंने खास बात कही
है दूसरी बात उन्होंने वीवीपैट को लेकर भी
यह सवाल भेजा है कि अ ईवीएम और वीवीपैट के
बीच कैसा हुआ लेकिन यहां पर कांग्रेस
पार्टी का जो बार-बार यह कहना है कि हम

इलेक्शन कमीशन से मिलना चाहते हैं व हमसे
मिलते नहीं है एक तो उनकी यह बात है दूसरी
बात क्योंकि वोह सबसे बड़ी राष्ट्रीय
पार्टी है जो विपक्ष में है अभी जो चैलेंज

करेगी जो हमारी सत्ता रूट पार्टी है उसको
दूसरी बात वो यह कहते हैं कि हमें जो वीवी
पैट है उसम उसमें से निकाल के रसीद दी जाए
हमारे वोटर को इसका क्या मतलब है रसीद अगर

मिल जाती है तो उससे क्या हासिल होगा क्या
उससे निष्पक्षता कुछ एक तरह से सुनिश्चित
की जा सकेगी
इसका मेरे हिसाब से दो इसके जवाब है एक तो
यह है ये शायद
इस कैसा है कि जैसे जब हम वोट देते हैं ना

तो हमारा वोटिंग का जो अधिकार है वो
डायरेक्ट वोटिंग का है मैंने मेरा वोट
देना है खुद ऐसा नहीं है कि मैं मेरा वोट
स्टैंप लगा दूं और आपके हाथ दे दूं और आप

उसको डाल देगी अभी जो हो रहा है वह ऐसे हो
रहा है कि मैं बीयू पर बटन दबाता हूं वह
सीयू के पास जाता है सीयू व पैट की रिसी
मुझे दिखाता है वह मैं वेरीफाई नहीं करता
मैं व्यू करता हूं उसमें फर्क है

वेरिफिकेशन में रिजेक्शन का अधिकार होता
है अगर आप किसी गवर्नमेंट ऑफिसर के पास
जाते हो और बोलते हो कि डॉक्यूमेंट
वेरीफाई करो तो उस उन्होंने सिर्फ देख
देखा देख लिया इसलिए इसलिए वो वेरीफाई हो

गया ऐसा नहीं होता अगर उनमें उसको कुछ
गड़बड़ी नजर आती है तो व बोलते हैं कि
नहीं यह मैं वेरीफाई नहीं
करूंगा उनके पास रिजेक्शन का अधिकार

है जब आप बोलते हो वोटर वेरीफाइड तो
वेरिफिकेशन में रिजेक्शन का अधिकार है अगर
मुझे दिखता है कि मैंने एप्ल दबाया और
यहां केला आ गया तो मुझे वो रिजेक्ट करने
का अधिकार होना चाहिए जो अभी नहीं है अभी

सिर्फ व्यूइंग है तो इसका एक कारण यह हो
सकता है कि वोह उन्हें चाहिए उनको लगता है
कि यह अधिकार वापस वोटर के पास आ
जाए दूसरा कारण यह भी हो सकता है शायद
हमने एक डेमो देखा था जहां वह दिखाते हैं
कि वीवीपैट में पर्ची कट नहीं

जाती जब तक दूसरी पार्टी का वोट ना पड़े
समझो मैंने एक बार एल दबाया फिर आप आई
आपने भी एल दबाया फिर और कोई आया उसने भी
एल दबाया तो वो एक ही एल का वहां दिखेगा
छपे एक एक ही बार लेकिन वह काउंट करेगा दो

बार तीन बार हो गया और फिर जैसे ही तीन
चौथा टाइम कोई दूसरा आएगा और किसी
और सिंबल
पे प्रिंट करेगा तो बाकी के सब केले
प्रिंट होके आएगी जी तो आप ये कह रहे कि

अगर इलेक्शन कमीशन यह बात मान ले और इसको
लेकर एक आम सहमति बने तो इससे कोई एक तरह
से एक तरह की पारदर्शिता लाने की कोशिश हो
सकती है क्योंकि इतने अहम चुनाव से आम
चुनाव से ठीक पहले इतना गंभीर सवाल उठना

अब मेरे पास समय बहुत कम है लेकिन एक
जल्दी से एक दो सवाल पूछ लेती हूं आपसे कि
अक्सर हम देखते हैं इस तरह के वीडियोस आते
हैं कि देखिए फलां पॉलिटिकल पार्टी के
नेता के घर ईवीएम मशीनें पाई गई इसके
अलावा कुछ ऐसे कैंडिडेट्स पाए गए

जिन्होंने कहा कि उन्हें जीरो वोट मिले और
उस कैंडिडेट ने अपने लिए वोट डाला वो वोट
भी उसका नहीं मिला इसके अलावा हमें इस तरह
की भी खबरें सुनने को आती हैं कि ईवीएम

मशीनें गायब हो जाती हैं हम जा जानते हैं
सैकड़ों किलोमीटर ईवीएम मशीनों को सफर
करना होता है इनका आना जाना होता है बहुत
सारे अधिकारियों के हाथ में जब आप यह तमाम

खबरें सुनते हैं तो आम जनता के मन में तो
संदेह पैदा होता है लेकिन आप एक इंजीनियर
के तौर पर इसे किस तरह से देखते हैं इसमें
दो चीजें हैं एक तो यह सिस्टम अंडर

डिजाइंड है जैसे मैं बोलता हूं और उसी लिए
उसके सुधार होने चाहिए ताकि जब हजारों
किलोमीटर जाए तो उस परे जीपीएस ट्रैकर अगर
लगा हो तो आपको पूरा आप निश्चिंत हो कि वो

इधर उधर नहीं जाएगा ऐसे सिंपल सोल्यूशन है
जो आने चाहिए जो पहले नहीं थे पहले हमारे
पास जीपीएस था ही नहीं लेकिन अब है तो अब
ला दो उसको दूसरा चीज दूसरी चीज यह है कि
किसी भी सिस्टम के बारे में अगर स किसी को

भी संदेह आ जाए तो उसका मतलब यह होता है
कि उसमें ट्रांसपेरेंसी नहीं
है जैसा मैं अगर आपको आप समझ मैं हलवाई
हूं और आप मेरे पास पेढ़ा खरीदने आए हैं

और मैं आपको पेढ़ा देता हूं बक्से में
बंद आप क्या करती हैं आप खोल के देखती हैं
कि पेढ़ा ही है ना या कहीं दूसरी बर्फी है
या कुछ और ही है लेकिन अगर मैं बोलूं कि

हां य ये बक्सा बंद है बंद ही रखना इसमें
पड़ाई है तो आपको संदेह आ जाएगा कि ये
पड़ाई दे रहा है या कुछ और ही दे रहा है
मुझे शायद पेड़ा भी हो अंदर लेकिन जब तक

ट्रांसपेरेंसी नहीं है तब तक कॉन्फिडेंस
ट्रस्ट नहीं आ जाती तो अगर किसी को भी भले
वह चाहे दो आदमी हो या दो लाख हो अगर किसी
को संदेह आता है तो ट्रांसपेरेंसी से यह
दिखाना चाहिए कि देख लो भाई यह ऐसा होता

है और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में यह करना
मुमकिन
है और यह बाद में ही करना चाहिए क्या होता
है यह चैलेंज देते हैं करके दिखाओ करके
दिखाओ नहीं जैसे दिन हो गया जिस दिन
पोलिंग हो गया उस दिन कुछ गड़बड़ नहीं हुई

यह दिखाना है किसी भी फिलोसोफी कल अगर
थोड़ा बोलना है अपने को तो किसी का भी
पास्ट जो होता है ना भूतकाल वो भविष्य की
गारंटी नहीं होता अगर वैसा होता तो हम में
से कोई भी मरता नहीं कभी भी क्योंकि हम

पास्ट में मरे नहीं है कभी भूतकाल में
कहां मरे हैं मुझे लगता है आपने बहुत
महत्त्वपूर्ण यहां पर बात कही और आखिर में
सिर्फ मैं आपसे चाहती हूं उसको आप समप

कीजिए कि जिस तरह के संदेह और जिस तरह के
शक और शुबा जाहिर किया जा रहा है मैं इतना
कह सकती हूं कि भारत में ईवीएम को लेकर एक
वर्ग में काफी मजबूत यह संदेह पैदा हो गया
है और एक खामोश एक तरह की मैं कहूंगी एक

तरह का आंदोलन चलाया जा रहा है हम यह भी
जानते हैं कि काफी लोग पिछले दिनों सड़कों
पर भी आए लोग लगातार सोशल मीडिया पर ईवीएम
के खिलाफ लिख रहे हैं और पूरी दुनिया में
जो सबसे बड़ा चुनाव होता है जो इतनी बड़ी

चुनावी प्रक्रिया है कि पूरी दुनिया हैरान
होती है कि इतने सारे लोग एक साथ वोट
डालते हैं और यह सब कुछ अब तक हमारी यह
रेपुटेशन थी हमारी एक छवि ये थी कि स्वस्थ
और स्वच्छ चुनाव होता रहा है आखिर में

बिल्कुल संक्षेप में मैं आपसे जानना चाहती
हूं कि इलेक्शन कमीशन के लिए फिलहाल ऐसे
कौन से तीन बिंदु हैं जिन्हें आप सामने
रखना चाहते हैं आम चुनाव से पहले जिससे आम
आदमी का संदेह दूर हो जो अपोजिशन

पार्टियां हैं वोह भी खामोश हो जाएं
क्योंकि उनका भी राजनीतिक साहस इतना तो
नहीं है उनके पास कि वो यह कहें कि जब तक
हम ईवीएम को लेकर हम सुनिश्चित नहीं कर
लेते चीजें तब तक हम चुनाव नहीं लड़ेंगे

या ईवीएम से हम चुनाव नहीं लड़ेंगे एक
चुनाव में बात उठाते हैं दूसरे चुनाव में
बात रद्द कर देते हैं जब एक चुनाव जीत
जाते हैं तो खुश हो जाते हैं दूसरा चुनाव
हार जाते हैं तो कहते हैं ईवीएम है लेकिन

अपोजिशन पार्टी से भी ज्यादा सबसे ज्यादा
मेरा सरोकार है वो आम आदमी का उसके वोट
में विश्वास जिसको आपने नाम लिया कि अगर
मामूली मिठाई भी आप खरीदने जा रहे हैं तो
भी आप चाहते हैं कि मैं जो मिठाई खरीद रहा

हूं वही मिठाई मुझे मिले और यहां तो बहुत
बुनियादी अधिकार है वोट देने की बात तो
आपसे य माना चाहती जानना चाहती हूं कि तीन
ऐसी चीजें मुझे बताइए जो इलेक्शन कमीशन को
फौरी तौर पर टेक अप कर करना

चाहिए मुझे लगता है अभी चुनाव इतने नजदीक
है कि इलेक्शन कमीशन कुछ ज्यादा नहीं कर
सकता सिवाय इसके कि जो वीवीपैट में रसीद
है उसी का काउंटिंग करें और लेकिन आम आदमी
यह जरूर करना चाहिए आदमी ने कि जो जहां व

वोट देता है वही चिन्ह स्लिप पर छपा है कि
नहीं छपा है वह जरूर देख के उसकी
सुनिश्चित
करें सिर्फ बटन दबाने से काम नहीं होगा यह
लोगों को भी मानना चाहिए लोगों को भी यह
ध्यान देना चाहिए कि जिसका बटन मैंने

दबाया है उसी का चिन्ह मुझे दिख रहा है
साइन और इलेक्शन कमीशन को यह करना चाहिए
कि हां यह संदेह है यह सब टेक्निकली सब
पॉसिबल है तो इसलिए हम यह चुनाव में 100%
वीवीपैट के स्लिप का क्योंकि वो स्लिप

देखी है हर मतदाता ने वो स्लिप देखी है
जिसका आप गिनती कर रहे हैं कंट्रोल यूनिट
के वोट का वो किसी ने भी देखा नहीं
तो यह भले मैंने वेरीफाई ना की हो लेकिन
ये मैंने देखी तो है कि हां मैंने एल

दबाया था एल दिखा
मुझे तो उसी का काउंटिंग करें ये इलेक्शन
कमीशन ने करना चाहिए मेरे ख्याल से इस
चुनाव के पहले यही पॉसिबल है इसके बाद एक
साल का पूरा प्रोजेक्ट लेके यह सब ठीक कर
देना चाहिए जी बहुत-बहुत शुक्रिया आपका

माधव देशपांडे जी हालांकि उम्मीद ये की
जाती है और मैं सोचती कि शायद एक साल जो
आप बाद कह रहे हैं वो एक साल पहले
चुनाव आयोग और उसके अलावा आम जनता उनके

बीच इतनी जागरूकता होती कि यह काम पहले हम
करते बजाय इसके जिसके लिए बाद आप कह रहे
हैं हर चुनाव ऐसा है जो भारत का राजनीतिक
भविष्य तय कर रहा है और सबसे ज्यादा जो आम

आदमी गरीब आदमी जो वोट डालने इस लिए जाता
है सोचता है उसकी तकदीर बदल जाएगी अपने
लिए भविष्य का फैसला कर रहा है अगर उस पर
शक होता है तो यह पूरा शक हमारे पूरे
लोकतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था में

पैदा होता है बहुत-बहुत शुक्रिया आपका
अपना सम समय देने के लिए और अपने विचार
हमारे साथ रखने के लिए नमस्ते
हम

Leave a Comment