Exclusive: जब पवन खेड़ा ने बताया मोदी कैसे हारेंगे लोकसभा चुनाव | | Pawan Khera | Modi - instathreads

Exclusive: जब पवन खेड़ा ने बताया मोदी कैसे हारेंगे लोकसभा चुनाव | | Pawan Khera | Modi

नमस्कार आपका स्वागत है

अभी फिलहाल छ हफ्ते
के आसपास का वक्त बाकी है जबकि आम चुनावों
की घोषणा हो जाएगी नरेंद्र मोदी कह रहे
हैं कि 3.0 के लिए तैयार हैं वो नरेंद्र
मोदी थ 3.0 किसी मार्केटिंग एजेंसी या
किसी तरह के जो स्पोक्स पर्सन है उनकी

जरूरत नहीं है खुद नरेंद्र मोदी ही
प्रोडक्ट है और खुद नरेंद्र मोदी ही
मार्केटिंग मैनेजर हैं फिलहाल मैं मानूंगी
कि अब से लगभग 100 दिनों के बाद देश में
एक नई लोकसभा तो होगी लेकिन क्या नया

प्रधानमंत्री होगा या नहीं इस पर सबकी नजर
है मेरी भी नजर है सबसे बड़ा सवाल यह है
कि इंडिया अलायंस वाकई अलायंस बाकी है या
नहीं नरेंद्र मोदी को चैलेंज करने के लिए
अब बिहार के बाद झारखंड की बारी थी झारखंड
में औंधे मुगरा जो बीजेपी और बीजेपी की जो
केंद्रीय एजेंसियां हैं वोह लेकिन उसके

बाद उत्तर प्रदेश से खबर यह आ रही है कि
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आरएलडी जो
पार्टी है वह बीजेपी के साथ जाने की तेज
संभावनाएं हैं अभी इसको कंफर्म तो नहीं कर
सकते लेकिन लगभग कमोबेश लगता है कि ये बात

सही हो रही है साबित मेरे साथ कांग्रेस
पार्टी की रणनीति क्या होगी यह जानने के
लिए देश का राजनीतिक भविष्य क्या होगा यह
जानने के लिए जानेमाने नेता कांग्रेस
पार्टी के पवन खेड़ा इस वक्त मौजूद हैं

पवन खेड़ा चेयरमैन हैं मीडिया और
पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के और ऑल इंडिया
कांग्रेस कमेटी के मेंबर भी हैं अ
टेलीविजन की दुनिया का वो जानामाना चेहरा
हैं जिनकी एक आवाज से मैं कहूंगी कि जो

रूलिंग पार्टी है और रूलिंग पार्टी से जो
अटैच एंकर्स हैं उनकी आवाज बंद हो जाती है
पवन खेड़ा बहुत-बहुत स्वागत है आपका सबसे
पहले तो मैं आपसे ये जानना चाहती हूं की

जो खबरें आ रही हैं खासकर आरएलडी से जुड़ी
हुई आप भी सुन रहे हैं मीडिया के मार्फत
या सोशल मीडिया के मार्फत सुन रहा हूं
अधिकृत रूप से आधिकारिक तौर पर कोई ऐसी
बात सुनाई नहीं दी लेकिन अगर आरएलडी जाती
है आपके लिए धक्का होगा मुझे लगता नहीं है

कि ऐसा कुछ हो रहा है कि आरएलडी कहीं जा
रही है चौधरी साहब जब थे वह
भी उनके जो आखिरी दिन थे उनमें मेरी एक दो
बार उनसे मुलाकात हुई थी चौधरी अजी जी से
तो

वो एक तरह से भरे हुए थे भारतीय जनता
पार्टी के खिलाफ तो मुझे लगता नहीं है कि
जयंत जी इस तरह से कुछ करेंगे अभी आप मुझे
बताइए मैं आपसे उन दिनों में बात कर रही
हूं जब बिहार कामयाब हो चुका नरेंद्र मोदी

के लिए झारखंड नाकाम हो चुका उनके लिए ऐसे
वक्त में अभी इंडिया अलायंस के भीतर
कांग्रेस पार्टी के भीतर सोच क्या है
नरेंद्र मोदी तो कह रहे हैं अबकी बार 400

तैयार हो जाइए राज्यसभा के भाषण में भी
उन्होंने यह बात कह दी है क्या कांग्रेस
पार्टी 3.0 के लिए तैयार हो रही है
नरेंद्र मोदी की व वो एक ऐसा शख्स है जो

अपने आप को इस देश से भी ऊपर मानता है
अपनी पार्टी से भी ऊपर मानता है अपने
संगठन से भी ऊपर मानता है मुझे लगता है वह
वाकई अपने आप को विश्व गुरु मानने लग गए
हैं तो यह कोई नरेंद्र मोदी 3.0 नहीं होने

वाला यह इंडिया 1.0 होने वाला है देखिए
नरेंद्र मोदी के राम मंदिर बना देने के
बाद मैं अपने को फिर से दुरुस्त कर रही
हूं आम जनता यह समझती है कि नरेंद्र मोदी
ने ही मंदिर बनाया है आप और मैं कहते रहे

हैं कि कोर्ट के आदेश पर बना है वो अपने
आप को अब नेता तो नहीं मानते उनके जो
फॉलोअर्स हैं वो भी देवता मानते हैं तो
अगर वो खुद भी अपने को मान ले तो क्या

हर्ज है जब कोई इंसान अपने आप को देवता
मानने लग जाता है उसका डाउनफॉल उस दिन से
शुरू हो जाता है यह इतिहास इस बात का की

गवाही देता है आप अपने आप को इंसान तो
बनाइए पहले देवता बनने चले हो और इंसान वो
नहीं होता जो कहता है कि साहब गाड़ी के
नीचे कोई पिल्ले मर भी जाए तो दुख होता है

वो इंसान नहीं हो सकता तो पहले इंसान बनने
की उनकी जो यात्रा है बहुत लंबी है अभी
मुझे ये बताइए पवन खेड़ा जी कि जो मंदिर
के इर्दगिर्द पूरी राजनीति है इस राजनीति

को 30 साल से ज्यादा गुजर गए अक्सर ये कहा
जाता था कि मस्जिद तोड़ने के लिए वोट
मिलता है मंदिर बनाने के लिए वोट नहीं
मिलता लेकिन जिस तरह से हम देख रहे हैं
राम भक्तों की जो पूरी भीड़ उमड़ रही है
अयोध्या में अयोध्या केंद्रित पूरा एक तरह

से अ यह पूरा इलेक्शन कैंपेन होने जा रहा
है एक तरह की स्पिरिचुअल कैपिटल एक
आध्यात्मिक राजधानी बनाने की बात हो रही
है फ्लाइट्स वहां पर जा रही हैं पहले रोज

5 लाख लोग गए और अी लगातार दो तीन दोती
लाख लोग सिर्फ उत्तर भारत नहीं पूरी पूरे
भारत से जा रहे हैं क्या आपने इसको इस तरह
से इसका तसव्वुर किया था इमेजिन किया था

कि मंदिर का इस तरह का इंपैक्ट होगा सवाल
का एक हिस्सा यह है दूसरा हिस्सा ये है कि
क्या ये लोग जो मंदिर दर्शन के लिए जा रहे
हैं आपको लगता है इनमें सभी नरेंद्र मोदी

के वोटर बन जाएंगे इसमें कई लोग ऐसे भी
हैं जो कांग्रेस के ऑफिस बेरस हैं जा रहे
हैं उसमें क्या हो गया अपनी श्रद्धा के
हिसाब से जा रहे हैं इसका मतलब थोड़े कि

वो बाहर निकल के मोदी को वोट देने लग
जाएंगे ये एक ऐसे आदमी की हम बात कर रहे
हैं जो एक काबिल इवेंट मैनेजर है मैं नहीं
कहता य लाल कृष्ण अडवाणी जी कहते हैं जो
पार्लियामेंट तक को एक इवेंट बना देता है

पार्लियामेंट की स्पीच को एक इवेंट बना
देता है पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री आ
जाए वो एक इवेंट हो जाता है जैसे कि पिछले
70 75 साल में पार्लियामेंट में किसी
प्रधानमंत्री ने बोला ही ना हो इनको लगता

है इनके मुंह से एक एक जो शब्द निकलता है
वो मोती बिखर रहे हैं और सबको देखना चाहिए
पूरे विश्व को देखना चाहिए कि साहब मोती आ
रहे हैं अरे क्या बात कर रहे हो साहब आप

भी उसी ढंग से जीत कर आए हो जैसे हम लोग
सब जीत कर आते थे आगे भी जो प्रधानमंत्री
बनेंगे आप ही की तरह वोट लेकर आएंगे ईवीएम
हो या ना हो लेकिन आप अपने आप को क्या

समझने लग गए यह सोचकर हंसी आती है आप
सोचते हो कि कांग्रेस में हम लोग सब
व्याकुल हो रहे होंगे यह मनोरंजन दे रहे
हैं हम सबको इस तरह का प्रधानमंत्री कभी

देखा है आपने जो ऐसे लगता है कि परेश रावल
से ट्रेनिंग लेकर बैठे हैं पार्लियामेंट
में भाषण देने आप कभी आंख बंद करके परेश
रावल को सुनिए और आंख बंद करके नरेंद्र
मोदी को सुनिए ज्यादा अंतर नहीं होगा मुझे
लगता है विश्व गुरु के जो गुरु हैं वो

परेश रावल है परेश रावल का ही नाम क्यों
लिया आपने ऐसे क्या स मैंने कई बार आंख
बंद करके सुना दोनों की टोन एक जैसी मुझे
लगता है पूरी ट्रेनिंग परेश रावल से लेकर
बैठे हैं ये साहब लेकिन लोगों को बिजी तो

रख रहे हैं मनोरंजन तो कर रहे हैं अब
देखिए पहले कोविड हुआ तो उन्होंने कहा कि
आप जो है वो थालियां बजाइए फिर उन्होंने
कहा कि फूल ब बर साइए फिर वह कहते हैं कि
दिया

जलाइमा मनाई जाएगी तो हर कुछ दिन बाद जनता
को काम तो दे देते हैं नरेंद्र मोदी
उन्हें यह लगता है कि काठ की हांडी एक बार
चढ़ गई दो बार चढ़ गई बारबार चढ़ाएंगे लोग
क्या मूर्ख हैं लोग समझते नहीं है क्या कर

रहे हैं ठीक है वो वक्त ऐसा था कि जिसको
अंग्रेजी में कहते हैं हम सब वल्नरेबल थे
हम सबके परिवारों में कोई ना कोई अस्पताल
में था ऑक्सीजन के लिए मारा मारा फिर रहा

था मर भी रहे थे हमारे कई लोग गए परिवार
के भी लोग गए तो उस वक्त जब आदमी
एकदम मुझे लगता है आत्मविश्वास खत्म हो
चुका होता है किस पर विश्वास करें कोई

सहारा डूबते को तिनके का सहारा चाहिए होता
उस वक्त उन्होने कहा थाली बजाओ लोग थाली
बजाने लग गए तो इनको लगता है ये जो कहेंगे
वो हो जाएगा इस देश में 36 पर से ज्यादा
वोट इनको अभी भी नहीं मिलते आज भी 60 से

ऊपर परसेंट लोग हैं जो इनके खिलाफ है जो
इनकी इनकी बातों के खिलाफ है वो अलग बात
है कि सुनाई सिर्फ ये देते हैं क्योंकि
सुनाने के जो यंत्र है जो जिसको हम मेन

स्स्टस रूप से यह भी कहूंगी आपने कहा कि
जो वह कहते हैं क्या वह हो जाएगा ऐसा
समझते हैं ऐसा होते हुए तो हम देख रहे हैं
ज वो कहते हैं डीपी बदल दो तो लोग डीपी

बदलने लगते हैं वो कहते हैं झंडे लगाओ लोग
अपने घरों पर सोसाइटी में झंडे लगाने लगते
हैं लोग दिए जलाने लगते हैं उन्होंने
दिवाली की तारीख बदल दी कि राम आ गए हैं
वापस और अब जो है आप दिवाली मनाइए तो

नरेंद्र मोदी शंकरा चारों से ऊपर हो गए
हैं शंकराचार्य ने यह कहा कि भाई नहीं इस
तरह से अधूरे मंदिर का उद्घाटन नहीं होना
चाहिए उनकी बातों को लोग कह रहे हैं कि भा

ये झूठे शंकराचार्य हैं यह सब बातें ना
मानकर अगर आम जनता और मैं अगर आपकी बात को
मान भी लूं कि 40 फीसद लोग भी यह मानने को
तैयार हैं जो भी नरेंद्र मोदी कहते हैं और

हमेशा अगर इनको 40 फीस वोट भी मिलता रहे
तो हमेशा पावर में रहेंगे नहीं ऐसा नहीं
होता कि हमेशा 40 फीसद वोट ही मिलता रहेगा
लोगों को भी अपनी हकीकत अपनी जिंदगी की

हकीकत दिखने लगती है कि साहब मेरी जेब में
महीने ने के 10 तारीख को ही पैसे खत्म
होने लग गए मेरे बच्चे की फीस मुझे जमा
करानी है और मेरे पास पैसे नहीं है मेरे

को पेट्रोल गैस सिलेंडर कितना महंगा है
मेरे बेटे की या बेटी की नौकरी नहीं लग
रही यह जो जमीनी हकीकत है जब इससे वो
वाबस्ता होते हैं तो उन्हें समझ में आ आता

है कि साहब मैं मूर्ख बना और वह कई लोगों
को समझ में आने लग गया है हमें क्या होता
है सोशल मीडिया और मीडिया पर जो दिखता है
वोह लगता है कि यही हिंदुस्तान है असली
हिंदुस्तान वो नहीं आप भारत जोड़ो न्याय

यात्रा में आप कभी जाइए आपको दिखेगा जैसे
कि भारत जोड़ो यात्रा में भी दिखा था असली
हिंदुस्तान की कंसर्न्स अलग है उसकी दुख

अलग है उसकी अपेक्षाएं अलग हैं उसको इस
सरकार से या नरेंद्र मोदी के नारों से दूर
दूर तक कोई वास्ता नहीं आपकी बात प मैं
दोबारा वापस लौटती हूं कि आप जिक्र कर रहे

हैं कि इधर 38 40 फीसद लोग मिल रहे हैं
वोट मिल रहे हैं लेकिन क्या जो 60 फीसद है
उसमें तो आपको वोट नहीं मिल रहा आपको 60
फस तो नहीं मिल रहा आप तो वही 1820 प टिके

हुए हैं तो आपका क्या प्लान है और मैं
इसीलिए अलायंस प आना चाहती हूं उसके बाद
में भारत जोड़ो यात्रा के बारे में भी
जिक्र करूंगी जो यह आपका दूसरा वर्जन है
भारत जोड़ो यात्रा का सबसे पहले मुझे

बताइए कि जो अलायंस की फिलहाल तस्वीर है
माइनस नीतीश कुमार या माइनस मान लेते हैं
जयंत चौधरी अ अब जो दिख रही है तस्वीर
मुझे ये बताइए कि आपका किस तरह से उस मैप

को देख रहे हैं आप देखिए नीतीश कुमार जी
कोई ऐसा नहीं था कि हमें हमारे तमाम
सदस्यों को जानकारी नहीं थी या शक नहीं था
कि ये जाएंगे क्योंकि इनकी जो रुख था वो

बदला बदला सा सुनाई दे रहा था आ रहा था
लेकिन एक आदमी जब लगातार कई बार यू टर्न्स
ले लेता है दो यूटर्न से एक शून्य बनता है
आप सोचिए चार यू टर्न्स ले चुके हैं तो
इनकी अपनी क्रेडिबिलिटी पर भी एक बहुत

बड़ा सवाल या निशान बिहार में भी लग गया
है तो जो वोट नीतीश कुमार जी को 2019 में
मिलता था वही 24 में मिलेगा मैं नहीं
मानता कोई नहीं मानेगा यह बात क्योंकि वो

अपनी छवि को बहुत नुकसान पहुंचा चुके हैं
लगातार पहुंचा रहे हैं लेकिन इंडिया के
सबसे बड़े सूत्रधार अगर उस वक्त चले गए वह
दूर उस पार चले गए तो आपको नहीं लगता आपको

नुकसान हुआ है अब वो तमाम अपने जो वोटर्स
है जो उनका सपोर्ट है वो भी उनके साथ चला
जाए मैं यह नहीं मानता कितना चला जाएगा
मुझे नहीं लगता कि कोई बहुत बड़ा कोई डेंट

इंडिया एलायंस को उनके जाने से होगा
क्योंकि लोगों मीडिया की वजह से भी और
सोशल मीडिया की वजह से भी इतना भी लोगों
को समझ में आ रहा है कि साहब पूरे देश में

नहीं पूरे विश्व में उनके नेता की हंसी
उड़ रही है किब कितनी बार
पलटोला हैं जितने भी दो-चार बचे हैं उनमें
भी बीजेपी समर्थित या बीजेपी की सरकारें
इंस्टॉल कर दी जाए ताकि एडमिनिस्ट्रेशन

उनके हाथ में आ जाए लोकसभा चुनाव के लिए
आपको नहीं लगता कि बिहार हाथ से जाना यह
आपके लिए नुकसानदेह हुआ कि अलायंस के पास
नहीं है अब बिहार जो शासन प्रशासन है वह
चला गया बीजेपी के हाथों अभी तो यह अपने

अपने खुद के विधायक बचाते हुए घूम रहे हैं
नितीश कुमार जी देखिए विधायकों में भी अब
रोश है जेडीयू के विधायकों में बहुत भारी
रोश है कि साहब आप हमसे तो बिना पूछे आप
निर्णय ले लेते हो रही बात हर राज्य में

किस तरह से भारतीय जनता पार्टी अपने यह
प्रयोग कर रही है उसकी तो जिस व्यक्ति को
इतना आत्मविश्वास होता है कि अबकी बार 400
पार वो इस तरह के हथकंडे तो नहीं अपनाता

अरे आप तो जीत ही रहे हो तो फिर आपको यह
इस तरह के हथकंडे क्यों अपनाने पड़ रहे
हैं मैं आपकी इस बात से सहमत हूं और मैं
आज भी थोड़ी देर पहले यही बात सोच रही थी
कि जिस कॉन्फिडेंस का वह जिक्र कर रहे हैं

जो छोटी-छोटी बातें करनी पड़ रही हैं
उन्हें बिहार मैनेज करना पड़ रहा है
झारखंड मैनेज करना पड़ रहा है लेकिन एक
बात मैंने नोटिस की कि आपने भी इसको नोटिस
किया क्योंकि आप जाहिर है अब आपको उसके

हिसाब से रणनीति बनानी होगी कि अब चाहे वह
गोवा का हम जिक्र कर ले या अभी राज्यसभा
के हम बयान का जिक्र कर ले उससे पहले
लोकसभा की स्पीच का हम जिक्र कर लें
नरेंद्र मोदी मंदिर की बात नहीं कर रहे

हैं अ शायद वह समझते होंगे कि मंदिर एक
आस्था का का विषय है जिन लोगों की उस
मंदिर में आस्था है किसी भी मंदिर में
आस्था है उनके लिए वो मंदिर एक आस्था का
केंद्र हो सकता है वहां से आप राजनीति

चलाएंगे तो आपकी राजनीति नहीं चल पाएगी
लेकिन आरोप तो यही है कि मंदिर को लेकर
राजनीति कर रहे व चलाए कोशिश करें कोशिश
करके देख ले लेकिन लोग समझते हैं कि एक
विवाद था दो कमों के बीच में विवाद था

कांग्रेस पार्टी शुरू से कहती आई कि जो
अदालत कहेगी वह स्वीकार्य होगा और अदालत
ने अपना फैसला सुनाया
आप उसके स उसके उससे सहमत है या सहमत है
वो अलग बात है लेकिन अदालत के फैसले के

बाद जिस तरह से कांग्रेस ने हमेशा एक
स्टैंड रखा था कि साहब अदालत कहेगी तभी
वही निर्णय होगा भारतीय जनता पार्टी तब
कहती थी साहब आस्था में अदालत का क्या काम
आडवाणी जी को मैंने खुद सुना है यह बोलते
हुए ये तो आस्था का विषय इसमें अदालत का

क्या काम फिर इनको भी इस बात पर आना पड़ा
नहीं साहब अदालत जो कहेगी क्या अदालत
बताएगी कि राम कहां पैदा हुए हैं ये उनका
बयान था आपने भी सुना था तो अदालत ने

निर्णय लिया और मंदिर बना और उस निर्णय को
किसी कौम ने चैलेंज नहीं किया किसी ने
चैलेंज नहीं किया और मंदिर बना उसमें उसके
बाद राजनीति करना तो यह दर्शाता है कि

आपके मन में ना श्रद्धा थी ना आस्था थी
भगवान राम के प्रति आपके मन में सिर्फ और
सिर्फ राजनीतिक रोटी सखना था लेकिन पवन जी
ये समझ में नहीं आता चलिए बीजेपी जो कर
रही है वो तो कर रही है लेकिन कांग्रेस
पार्टी क्या कर रही है इस पूरे मंदिर के

मुद्दे पर भी आखिरी लमहे तक आपके तमाम
प्रवक्ताओं में इसको लेकर कोई क्लेरिटी
नहीं थी कि स्टैंड क्या लेना है एक तरफ आप
ये देखिए यहां प्राण प्रतिष्ठा हो रही है
राहुल गांधी एक तरह का स्टैंड ले रहे हैं

आखिर में जाके पता चला कि पार्टी आला कमान
से यह मैसेज आया है कि भ हम जो जिसको मैं
कहूंगी एक तरह का पॉलिटिकल करेज दिखाया
पार्टी ने बहुत देर से दिखाया कि यह
राजनीतिक कार्यक्रम है हम इसमें भाग नहीं

लेंगे इंडिया अलायंस में भी इसको लेकर एक
राय नहीं थी अखिलेश यादव कुछ और कह रहे थे
कि हां पहले प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी
इसके बाद में परिवार के साथ पहुंच उनकी
पत्नी तस्वीरें लगा रही थी भगवान राम की
अपने ट्वीट कर रही थी मध्य प्रदेश में

हमने देखा कि वहां पर आपके नेता कहते पाए
गए कि देखिए ताला खुलवाने का काम तो राजीव
गांधी ने किया इसको लेकर इतनी असमंजस की
स्थिति थी क्या वाकई कांग्रेस पार्टी को

समझ में नहीं आ रहा था क्या किया जाए आपको
नहीं लगता कि वह लम्हा आपने मिस कर दिया
जहां देश को यह बताना था कि आप बीजेपी की
राजनीति के खिलाफ खड़े हुए हैं आपको लगता

है कि हिंदुत्व की राजनीति ने कांग्रेस
पार्टी के ऊपर भी इतना दबाव डाला है कि
उनके लिए भी स्टैंड लेना आसान नहीं है मैं
नहीं मानता कि हम लास्ट मोमेंट तक रुके

रहे हमने यह निर्णय लगभग 22 तारीख से 12
दिन पहले लिया और सार्वजनिक किया यह जो
जिस प्रेस स्टेटमेंट की आप बात कर रहे हैं
जिसमें हमारे जो तीन नेता थे जिनको
आमंत्रण गया था

वो 22 तारीख से 10 या 12 दिन पहले हम
लोगों ने इसको घोषणा किया था तो कहीं
असमंजस था नहीं और एज अ पॉलिटिकल पार्टी
मेरा यह काम नहीं है कि मैं बोलूं कि आप

जा सकते हैं आप नहीं जा सकते जिसको जाना
है वो जाए पार्टी थोड़ी निर्णय लेगी कि
कौन मंदिर जाएगा और कौन नहीं जाएगा ये तो
राजनीतिक कार्यक्रम था हम ये मानते हैं
जिनको बुलाया गया उनका ये मानना था कि ये

राजनीतिक कार्यक्रम था मेरा यह मानना है
राजनीतिक कार्यक्रम था लेकिन अब हिमाचल के
हमारे कुछ नेता है उनको आमंत्रण आया वो
जाना चाहते थे उनको किसी ने रोका तो नहीं

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी 15 तारीख को
ही जाना चाहती थी उनको किसी ने रोका तो
नहीं ना यह काम किसी राजनीतिक दल का है वह
भले भाजपा हो साहब आप आमंत्रण दे रहे हैं
भगवान के दरवाजे पर किसी को जाना है वह

किसी से अनुमति लेकर जाएगा व किसी के
निमंत्रण से जाएगा यह तो कमाल का
प्रोग्राम था साहब जिसको जाना है वो जाएगा
और जब जाना है वो जाएगा यह निर्णय लेने

वाले नरेंद्र मोदी तो हो नहीं सकते
सरसंघचालक या जो भी वो कहलाते हैं मोहन
भागवत तो ले नहीं सकते ये निर्णय कांग्रेस
पार्टी भी नहीं ले सकती कि साहब आप जाएंगे
आप नहीं जाएंगे ऐी दिन जाएंगे इस दिन नहीं

जाएंगे दावत तो व ऐसे ही दे रहे थे नेवता
तो दे रहे थे कि वो कोई खास लोग हैं वो
भगवान श्री राम ने उनको इस बात का मैंडेट
दिया है कि आप बुलाइए कि वो राम लौट आए
हैं तो वो बताएंगे कैसे नहीं राम लौट आए

हैं तो अच्छी बात है लेकिन राम को लाने
वाले कौन है नरेंद्र मोदी उंगली पकड़ के
ला रहे हैं अरे साहब हम सब तो बचपन से
दादी नानी की कहानियां सुनते थे कि भाई

भगवान राम की उंगली पकड़कर हम ये नैया पार
करेंगे और यहां तो है साहब इतने बड़े आदमी
हैं विश्व गुरु जी हमारे कि भगवान राम की
उंगली पकड़ के ला रहे हैं ऐसा पोस्टर हम
देखकर तो आश्चर्य चकित रह गए नहीं तो लोग

वो तो कह रहे हैं कि भाई जो राम को लाए
हैं हम उनको लेकर आएंगे और जनता ये कह रही
है कि हम वोट उन्हीं को देंगे जो राम को
लेकर आए हैं जो बताया जा रहा है अगर सोशल
मीडिया को एक तरह से एक आईना मान ले कि

समाज में अभी क्या हो रहा है तो बताया य
जा रहा है कि देखिए 500 साल की जो
नाइंसाफी है उसको नरेंद्र मोदी ने सही
किया है ऐतिहासिक जो गलतियां थी जो
ऐतिहासिक गुनाह थे उनको नरेंद्र मोदी ने

सही किया है और हिंदुओं को वाकई उनका वह
अधिकार दिलवा दिया मुसलमानों के पास मक्का
है ईसाइयों के पास वैटिकन है अब जो है वह
हिंदुओं के पास भी अयोध्या है इस पूरी बहस
में तो मैं नहीं पढ़ूंगा अभी क्योंकि इसकी

कई सत हैं कई तह कई लेयर्स है इसमें तो
इसम मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा लेकिन
नरेंद्र मोदी जी किसी बात का श्रेय लेते
हैं तो वैसे ही आपको संशय हो जाना चाहिए

सबके सामने है पूरा इतिहास इस राम मंदिर
के बनने से पहले का इतिहास भी सबके सामने
है उसमें किसको क्या योगदान है अदालत का
क्या निर्णय आया उसकी क्या भूमिका है उसके

बाद अगर कोई श्रेय लेने के लिए आगे आ रहा
है तो समझ लीजिए वो कोरी राजनीति कर रहा
है आप इस पर स्टैंड नहीं लेना चाहते नहीं
स्टैंड क्लियर है हमारा स्टैंड में तो

हमेशा तो आपको कह रहा था जब अडवाणी जी
बोलते थे कि आस्था में अदालत का क्या काम
है तब भी हमारा सैन था अदालत भाई दो लोगों
की लड़ाई होती मेरी आपकी आज लड़ाई हो जाती

है और समझौता यह कराने आ जाते हैं और नहीं
करा पाते अदालत में ही जाएंगे ना आपको लग
रहा है यह इलेक्शन आइडियो कल है या यह
इलेक्शन आम लोगों के रोजमर्रा के मुद्दे

पर होगा क्या यह आपको लगता है विचारधारा
का चुनाव है ये रोजमर्रा की जो मुसीबतें
लोग झेल रहे हैं आप सोचिए अरफात जी जिस
देश में एक घंटे में दो नौजवान आत्महत्या
कर रहे हो जिस देश में एक घंटे में एक

किसान आत्महत्या कर रहा हो वहां आप और
क्या मुद्दा ला सकते हैं कोशिश कर लीजिए
मोदी जी कर रहे हैं कोशिश आज से नहीं कर
रहे लगातार 10 साल से रोज नया इवेंट करने
की क्यों जरूरत पड़ती है रोज नए विवाद
पैदा करने की जरूरत क्यों पड़ती है

क्योंकि उन्हें मालूम है अगर यह मनोरंजन
नहीं करेंगे अगर लोगों को व्यस्त नहीं
रखेंगे तो सब लोग मिलक इन्हें व्यस्त कर
देंगे ये व्यस्त नहीं रहना चाहते जिस काम

के लिए बने हैं वो काम नहीं करना चाहते हो
या आता नहीं है करना मुझे तो पूरा भरोसा
है नरेंद्र मोदी को ना मुख्यमंत्री जब थे
तब काम करना आता था ना आप जब प्रधानमंत्री
हैं तब काम करना आता है इवेंट्स आते हैं

इवेंट्स में सबको बिजी रखते हैं भाजपा की
जो आइडियो जीी है भाजपा जिस तरह से अपने
को पेश कर रही है इस चुनाव में जो होने
वाले हैं आपसे मैंने कहा कि 100 दिनों बाद

नई पार्लियामेंट होगी छ हफ्ते के भीतर जो
है वो शुरू हो जाएगा पूरा चुनाव का
कार्यक्रम वो ये कह रहे हैं कि भाई देखिए
एक सेकुलर लिबरल कंट्री हुआ करता था जिससे
आप सबको नुकसान पहुंचा हम जो है सत्ता में

आ गए हैं 10 साल हो गए हैं पा साल और
दीजिए हम धीरे-धीरे हिंदू राष्ट्र बनाएंगे
एक एक ऐसा इलेक्टरेट है जो उनकी इस बात को
पसंद करता है आकर्षित होता है उन्हें वोट
देता है कांग्रेस पार्टी के पास अल्टरनेट

मॉडल क्या है हिंदू राष्ट्र के जवाब में
आप जनता को क्या देना चाहते हैं मुझे लगता
है मीडिया ज्यादा किसी दबाव की वजह से
शायद नहीं कवर कर रहा लेकिन सोशल मीडिया
पर फिर भी सुनाई देता है कुछ ू चैनल्स

दिखाते हैं जो नैरेटिव राहुल गांधी की
भारत जोड़ो न्याय यात्रा सामने रख रही है
वो एक बहुत सशक्त बहुत मजबूत अल्टरनेटिव
नैरेटिव है इस देश के लिए न्याय की बात
करना हर वर्ग के लिए न्याय की बात करना

खास तौर पर उस वर्ग के लिए जो वाकई पिछड़ा
है जिसको पिछले 75 साल नहीं पिछले सैकड़ों
सालों से वह दबा हुआ है शोषित है उसकी बात
करना और उसकी बात कैसे करोगे आप उसको आप
गिनो ही नहीं तो आप उसके लिए क्या नीतियां

बनाओगे तो पहली मांग हमारी जाति जनगणना की
है आपको पहले संख्या तो मालूम हो जिस
किसकी बात कर रहे हैं आप कितने ओबीसी हैं
कितने एबीसीज हैं कितने बैकवर्ड्स हैं
कितने दलित हैं कितने एसटी हैं कितनी

माइनॉरिटी है सबकी चर्चा तो
हो लेकिन यह बताइए कि आपकी भावना अच्छी है
पहली भारत जोड़ो यात्रा उसमें मैंने भी कई
राज्यों में सफर किया राहुल गांधी के साथ
और मैंने देखा उत्तर प्रदेश से लेकर

हरियाणा से लेकर मैं कश्मीर तक गई जब
उन्होंने रात यात्रा वहां प खत्म की अपनी
और ये मैं अपने दर्शकों के साथ भी बांट
चुकी हूं और आपको भी बताना चाहती हूं कि
वाकई ट्रिमेंडस इंपैक्ट था और मैंने शायद

किसी दूसरी कोई पॉलिटिकल एक्टिविटी का
इतना असर भारत में नहीं देखा जितना भारत
जोड़ो यात्रा में इससे एक उम्मीद भी पैदा

भारत को खासकर उन लोगों के लिए जो अभी भी
पुराने भारत जो मिलाजुला संस्कृति का भारत
था उसमें यकीन रखना चाहते थे पहली बार
मैंने देखा आर्टिकल 370 के हटाए जाने के

बाद कश्मीर का जो आम आवाम था वह सड़कों पर
निकला और उसने किसी पॉलिटिकल एक्टिविटी
में हिस्सा लिया यह इतनी इससे ज्यादा
शानदार बात नहीं हो सकती यहां राहुल गांधी
एक उम्मीद बनाते हैं दूसरी तरफ आप ये

देखिए भारत जोड़ो ये जो न्याय यात्रा है
समझ में नहीं आता यह यात्रा आप किस लिए कर
रहे हैं आप क्यों कर रहे हैं न्याय के
मायने क्या हैं यह कोई खला में यह कोई
विचार है एब्स्ट्रेक्ट कोई विचार है

जिसमें खुद कांग्रेस पार्टी के
कार्यकर्ताओं को भी पता नहीं है कि न्याय
का मतलब क्या है आप बताने में बिल्कुल
नाकाम रहे हैं कि आखिर यह दूसरी यात्रा आप
क्यों कर रहे हैं देखिए हर दूसरे तीसरे

दिन राहुल गांधी उसको और एक आयाम उसका
बताते हैं जैसे कल उन्होंने एक बहुत
महत्त्वपूर्ण घोषणा की कि 50 प्रतिशत का
जो कैप है आरक्षण पर वो कैप कांग्रेस

पार्टी और इंडिया अलायंस हटाएगा जब हम
सरकार में आएंगे ये एक मुझे नहीं लगता कोई
एब्स्ट्रेक्ट बात है ये तो बड़ी क्लियर
बड़ी स्पष्ट बात है ये वो आरक्षण है जिसके

खिलाफ मोहन भागवत जी आज से नहीं लगे हुए
आरएसएस शुरू से लगी हुई है कि सब आरक्षण
नहीं होना चाहिए इस देश में राहुल गांधी
ने कहा 50 पर का जो सीलिंग है वो भी टूटनी

चाहिए इससे ज्यादा क्लियर और क्या हो सकता
है आप इसको एब्स्ट्रेक्ट कैसे कह रहे इस
बयान के अलावा मुझे बताइए कोई चीज इस बयान
के अलावा आप मुझे बताइए मैं कह रही हूं आप
जिन राज्यों में जा रहे हैं आप देखिए अभी

वेस्ट बंगाल में होके आए राहुल गांधी वहां
जो लोकल आपके अलायंस पार्टनर्स हैं वो तक
आपकी मदद करने को तैयार नहीं है लोकल जो
अलायंस पार्टनर्स हैं वो इसे खतरा मान रहे
हैं अपने लिए मुझे ये लगता है एक ऐसे

व्यक्ति के तौर पर जो कांग्रेस पार्टी की
राजनीति को बहुत नजदीक से देखती हूं कि
आपके दुश्मनों ने आपको इस बात का मशवरा
दिया कि ऐसे वक्त में जहां अलायंस को साथ
में बना के रखना था जहां एक आवाज में

इंडिया अलायंस को भेजना था ऐसे में राहुल
गांधी का एक तरह का यह वैनिटी प्रोजेक्ट
है यह दूस यात्रा मुझे एक बात बताइए
कांग्रेस पार्टी में सिर्फ एक राहुल गांधी

हैं क्या कि अगर वह यात्रा निकाले तो
दिल्ली में बैठे हुए मीडिया वालों को लगता
है कि साहब यात्रा पे क्यों निकल गए वो
दिल्ली में आकर मीटिंग्स ले अरे इन्हें तो
सड़क पर होना चाहिए दिल्ली में बैठे रहते

हैं तो राहुल गांधी क्या करें यह बता
दीजिए मुझे इस पार्टी में एक पूरी बड़ी
महत्त्वपूर्ण कमेटी बनी हुई है मुकुल
वासनिक जी अशोक गहलोत जी भूपेश बघेल जी
मोहन प्रकाश जी ये सब बड़े नेता हमारे

इसमें शामिल हैं जो अलायंस इस की बात कर
रहे हैं इस पार्टी के अध्यक्ष
मल्लिकार्जुन खड़गे साहब है जो लगातार
इंडिया की बैठकें जूम पर या वैसे बुलाते
रहते हैं तो राहुल गांधी एक अपनी न्याय

यात्रा निकाल रहे हैं तो लोगों को लगता है
राहुल गांधी वहां है तो इंडिया अलायंस कौन
कर रहा है अकेले राहुल गांधी नहीं है ना
इस पार्टी में सबको एक काम दे रखा है इस
पार्टी ने मेरा काम प्रवक्ता का है मीडिया
डिपार्टमेंट चलाने का है मैं वो चला नहीं

आपकी इस बात से मैं सहमत हूं कि राहुल
गांधी की जो आलोचना है कभी-कभी अन
जस्टिफाइड होती है जैसे आपने जब ये बात
आपने बोली है कि राहुल गांधी पे आते हैं
तो कहा जाता है दिल्ली में लेकिन चलिए मैं

दूसरी बात पे आती हूं इसी का दूसरा हिस्सा
है इस बातचीत का आप क्या इस बात को
मानेंगे कि आपका जो मैसेज है न्याय यात्रा
का उसे आप जमीन पर उतारने में नाकाम रहे

हैं यह मैं आपको बता सकती हूं एक पत्रकार
के तौर पर जिसकी जनता की नब्स पे जिसका
हाथ रहता है मैंने आपको बताया कि बहुत
शानदार रही आपकी पहली भारत जोड़ो यात्रा
और शायद इससे बेहतरीन काम मैं कहती हूं यह

देशभक्ति का काम था जो राहुल गांधी ने
किया लेकिन उतनी ही मेरी असहमति है इस बात
से कि जो दूसरी यात्रा निकाली गई ऐसा ऐसा
लगता है इसके पीछे कोई सोच नहीं थी इसका
समय गलत था इसका मैसेज भी ग्राउंड पर नहीं

उतर पाया है मैं इसमें सहमत इसलिए नहीं
हूं अरफ जी अभी 24 दिन हुए हैं इस यात्रा
भारत जोड़ो यात्रा भी पहले के एक महीना
लोगों ने उसको संशय की दृष्टि से देखा था

लोगों को शक था अरे ये राहुल गांधी यात्रा
पूरी भी करेंगे या नहीं करेंगे यह तो बीच
में ही चले जाएंगे यह सब बातें हम ही
सुनते थे रोज सुनते थे महीना गुजरा लोगों
ने सीरियसली लेना शुरू किया अरे साहब ये

तो चले जा रहा है पांव में छाले हो रहे
हैं घुटने में दर्द हो रहा है फ भी चले जा
रहा है यह तो मामला कुछ और है भारत जोड़ो
न्याय यात्रा में 24 दिन में आप अभी कोई

कहां है आपके पास मार्च 20 22 तक य यात्रा
चलेगी आप देखिएगा कैसे इस देश में नया
संवाद एक नए नैरेटिव जिसकी बहुत आवश्यकता
है वह इस देश के कोने कोने में गूंजेगा
आपके उस बयान प आ जाती हूं जहां राहुल

गांधी ने 50 फीसद जो उन्होंने कहा कि हम
वो कैप हटाकर और आरक्षण बढ़ाएंगे यही जो
कास्ट सेंसस की बात थी यह विधानसभा चुनाव
से पहले भी कही गई थी और ऐसा लगा कि एक
तरह से एक तुप का ऐसा पत्ता था जिससे
धराशाई हो जाएगी तमाम धर पर आधारित

राजनीति लेकिन जब मैंने सफर किया राजस्थान
मध्य प्रदेश में चुनाव के दौरान आपके
कांग्रेस पार्टी के नेता राज्य के नेता और
कार्यकर्ता वही
कन्विंस्ड जो आला कमान कहता है जो राहुल
गांधी कहते हैं जो सोनिया गांधी कहती हैं

जो प्रियंका गांधी कहते हैं कहती हैं जो
खड़गे साहब कहते हैं य मुकुल वासनिक कहते
आपके पार्टी के खुद के नेता राज्य के स्तर
के नेता और कार्यकर्ता तक ना तो बात
पहुंचती है ना खुद ही वो इस बात में यकीन

रखते हैं किसी ने नहीं कहा राजस्थान में
मध्य प्रदेश में कि हम कास्ट सेंसस
कराएंगे इसलिए आप देखिए कि उसका कोई
इंपैक्ट कोई असर हुआ ही नहीं चुनाव में तो
यह फिर जिन्होंने नहीं कहा उन्होंने नतीजा

भी देख लिया कहना चाहिए था तो लोकसभा में
ऐसा ही होगा क्या नहीं अब देखिए आप
तेलंगाना में हमारी सरकार बनी और वहां
कास्ट सेंसस घोषणा कर दी गई कर्नाटका में

आप जानते हैं तो लगातार लोगों को भी हमारे
नेताओं को भी समझना पड़ेगा कि अगर
मल्लिकार्जुन खड़गे साहब राहुल जी सोनिया
जी बाकी नेता हमारे कुछ दिल्ली में बैठकर
अगर कह रहे हैं तो सिर्फ वो दिल्ली में

बैठकर नहीं कह रहे पूरे देश का अनुभव लेकर
कह रहे हैं 4000 किलोमीटर कोई व्यक्ति
चलकर अनुभव लेता है लोगों से मिलता है
इतने लोगों की बात सुनता है तो जाहिर सी

बात है कि उसने कुछ समझा इस देश को अगर वो
कुछ कह रहा है तो लोगों को गंभीरता से
हमारे बाकी नेताओं को लेना पड़ेगा कई बार
क्या होता है मैं अपने डिपार्टमेंट को
चलाता हूं तो मैं कूप मंडोप बन जाता हूं

मुझे लगता है कि मैं सब कुछ जानता हूं ऐसा
नहीं होता इसलिए सुनना चाहिए और सुनकर उस
पर अमल करना चाहिए मार्च तक क्या साबित कर
देना चाहते हैं राहुल गांधी इस देश की जो

आत्मा है वो वह नहीं है जो आपको भारतीय
जनता पार्टी दिखा रही है यह देश इस नफरत
से भरा हुआ नहीं है एक दूसरे के प्रति यह
मैं इसके प्रति मैं आश्वस्त हूं हमारी
पार्टी आश्वस्त है मेरे नेता आश्वस्त है
इस देश की भावना ही कुछ और है वह इस शोर

में सुनाई नहीं देती इस तड़क भड़क में जो
इवेंट्स की होती है उसमें दिखाई नहीं देती
वह आपको दिखने लगेगी वह आपको सुनाई देगी
ईवीएम को लेकर काफी तरह की चर्चाएं हो रही
है एक तरह का खामोश आंदोलन चल रहा है

ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर आप मुझे
बताइए कांग्रेस पार्टी का स्टैंड क्या है
ईवीएम को लेकर क्या अगर ईवीएम से ही चुनाव
हुआ तो क्या आप इस चुनाव में भाग लेंगे
क्या आप सैद्धांतिक रूप से इस बात से सहमत

हैं क्या आपके अंदर इतना राजनीतिक साहस है
कि अगर आपको ईवीएम पर शक है तो आप कहे कि
आप इस प्रोसेस में शामिल नहीं होंगे देखिए
य इसका जवाब तो मैं इस फिलहाल तो नहीं दे

पाऊंगा क्योंकि यह कठिन सवाल है और इसकी
मुझे लगता है सबसे बात करके ही इस पर कोई
अमल करना चाहिए या कोई निर्णय लेना चाहिए
लेकिन ईवीएम प जो संशय है लोगों को हमारे
नेताओं को भी है हमारे कई वर्कर्स को भी

है इंडिया अलायंस के कई नेताओं को भी है
और कई वोटर्स को भी है कि साहब सिंपल सी
मांग है कि जो ी पैट्स है उसको अलग
निकालकर उसको भी मत पेटी में डाला जाए और

दोनों की काउंटिंग हो सिर्फ इस मांग के
लिए चुनाव आयोग तैयार नहीं है चुनाव आयोग
हमें मिलने को तैयार नहीं इस मुद्दे पर तो
ऐसी क्या बात है फिर जब यह खुलासा हुआ कि
बीएल में जो डायरेक्टर्स है वह भारतीय

जनता पार्टी के हैं संशय बहुत बड़ा होता
चला जा रहा है लोकतंत्र पर लोकतांत्रिक
प्रक्रिया पर किसी एक व्यक्ति किसी एक
वोटर का भी शक हो तो को दूर करने का फर्ज

हम सबका है बिल्कुल सही बात है तो अब अगला
कदम क्या होगा आपका अभी लगातार आंदोलन तो
चल ही रहे हैं हम मांग भी कर रहे हैं
चुनाव आयोग से फिर से मांग कर रहे हैं साब
मिल लीजिए हमसे हमारी मांग पर जरा विचार

करिए फिर उसके बाद लोग हैं हमारे साथ लोग
जुड़ेंगे और का आपको लगता है कि आपको
बराबरी का एक तरह से जिसे अंग्रेजी में
लेवल प्लेइंग फील्ड कहते हैं वो मिल पा

रहा है जहां तक ईडी हम देखें सीबीआई देखें
आईटी देखें चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर
खतरा है जिस तरह से जुडिशरी इस बात को
पूरे मुद्दे को ले रही है अब ये देखिए

आपके फिर से एक के बाद एक लगातार जो है वो
इस भट्टी में कोयला डालना जारी है कि एक
तरफ रोजगार और आर्थिक समस्याएं उन मुंह
बाए खड़ी हुई है दूसरी तरफ देखिए

यूसीसी का बिल पास हो गया है वहां
उत्तराखंड में देखें तो लगातार वह जो
जॉम्बी वोटर है उनका उसको फीड कर रहे हैं
ये ऐसे में कांग्रेस पार्टी क्या यह मान

के चल रही है कि इस 40 फी वोट के अलावा
हमें 60 फ प काम करना है क्या आपने इनके
ऊपर उम्मीद छोड़ दी है कि 40 फीसद प हमें
बात नहीं कर बिल्कुल कोई उम्मीद नहीं

छोड़ी क्योंकि जैसा मैंने आपको कहा थोड़ी
देर पहले कि इस देश की आत्मा और भावना पर
भरोसा है यह देश हम में से कुछ लोग कुछ
वक्त के लिए जरूर जोश में आ जाते हैं

भावनाओं में बह जाते हैं लेकिन गाय बगाए
फिर से हमें समझ में आता है कि साहब इस
तरह से तो रोजी रोटी नहीं चलने वाली इस
तरह से तो समाज के आपस का जो तानाबाना है
वो नहीं चलने वाला और ये देश उस बिना उ

ताना बाने के चल भी नहीं सकता अगर फिर से
अभी चुनाव जीत जाते हैं नरेंद्र मोदी
बीजेपी आप देश को किस तरह बदलते हुए देख
रहे हैं विपक्ष की भूमिका क्या बचेगी कई

तो कयास इस तरह के लगाए जा रहे हैं कि
नेता जैसे अरविंद केजरीवाल राहुल गांधी यह
बड़ा मुश्किल होगा कि इन्हें जेल के बाहर
देखा जाए देखिए आजादी के आंदोलन में भी कई
बार जेल जाना पड़ा तो इससे थोड़ा कोई

घबराता है हम में से तो कोई नहीं घबराता
जाना है तो जाएंगे लेकिन इस देश को डूबने
से जरूर बचाए और मुझे भरोसा है वैसे तो
मैं नहीं मानता कि अगला इलेक्शन में ये

जीत रहे हैं मैं बिल्कुल नहीं मानता मैं
इस बात से सहमत नहीं हूं कि इनकी य डगर
आसान होगी आज नितिन गडकरी जी का भी हमने
कुछ वाक्य सुने अच्छे लगे सुनकर तो इनके
भीतर जो परेशानियां है वह सुनाई देने लग

गई है भीतर भारतीय जनता पार्टी के और संघ
के भी एक बहुत उहापोह हो रही वह भी समझते
हैं कि ना केवल यह देश खतरे में है वह भी
समझते हैं पूरी की पूरी भाजपा खतरे में है
दो लोग एक पार्टी को एक संगठन को एक

संविधान को एक देश को चुनाव आयोग को
एजेंसीज को मीडिया को सबको हाईजैक करके
बैठे वो किसको पसंद आएगा तीसरे को नहीं
पसंद आएगा आप मेरी बात कर रहे हैं इनकी
अपनी पार्टी में तीसरे को नहीं पसंद आ रहा

जो हो रहा है ये दो लोग जो कर रहे हैं
लेकिन हमने दुनिया भर में इस तरह के
उदाहरण देखे हैं कि लोकतंत्र को इस तरह से
काबू में करके एक पॉलिटिकल पार्टी या एक
नेता लगातार सत्ता में बना रह सकता है

हमने रूस से लेकर और टर्की से लेकर तमाम
तरह के भारत पूरे दुनिया के इतिहास में इस
तरह के उदाहरण है क्या आपको लगता है कि
भारत इस तरह की किसी संभावना या आशंका के

लिए तैयार हो रहा है यहां अनेकता बहुत है
यहां विविधता एं बहुत है इसीलिए तो य
विविधताओं से डरते हैं इसीलिए तो य सबको
यूनिफॉर्म करना चाहते हैं कि सब एक जैसे

हो जाओ सब एक तरह के कपड़े पहनो एक तरह का
खाना खाओ एक तरह की पूजा करो एक तरह के
भगवान को पूजो एक तरह की पार्टी को वोट दो
यह क्यों चाहते हैं एक भाषा में बात करो

क्योंकि इन विविधताओं की वजह से य आज तक
रुके हैं 100 साल से आरएसएस क्यों नहीं
सफल फल हुई इन विविधताओं की वजह से और यह
विविधता एं इनको इस में कामयाब नहीं होने
देंगी जो रूस में हुआ या टर्की में हुआ या

और कई देशों का आप उदाहरण दे रहे अब आखरी
सवाल आपसे एक के बाद एक अलायंस पार्टनर्स
भी छोड़ रहे हैं आपकी कांग्रेस में भी जिस
तरह के लोग पार्टी छोड़ के जा रहे हैं लोग
कह रहे हैं कि भाई डूबती हुई नाव है इसमें

चूहे सबसे पहले निकल जाते हैं चलिए चूहे
मान ले उन्हें या हाथी माने जो भी माने
क्या कहना है आपका उन पर मुझे उनके बदल
जाने का दुख नहीं
है मुझे अपनी यकीन पर हंसी आती है मुझे लग

राहुल गांधी को देखता हूं तो व लगता है कि
कितना अजीब सा उसकी जिंदगी का सफर है कि
इन लोगों पर जिन पर हम सब भरोसा करते हैं
वह जब भरोसा तोड़ते हैं तो बुरा लगता है
लेकिन मुझे लगता है इस सफर में कई लोग

छोड़कर जाएंगे कई नए लोग जुड़ भी रहे हैं
नौजवान आते हैं जुड़ रहे हैं इस बार मैं
पिछले छ आठ महीने से इस देश में बहुत
राज्यों में गया जिस तरह से नौजवान जुड़ना
चाहते हैं तो हो सकता है कि उनकी जगह

बनाने की आवश्यकता थी अच्छा है आने दीजिए
नए लोगों को और जाने दीजिए जिनको जाना है
ये टेस्ट है इस परीक्षा में सब सफल भी
नहीं होंगे हर एक व्यक्ति के बस की नहीं

होगी कि हर हफ्ते कोर्ट जाना पड़े जैसे कि
मुझे जाना पड़ता है या 50 घंटे ईडी को
झेलना जैसे राहुल जी ने झेला या सोनिया जी
ने झेला खड़गे साहब को इस उमर में ईडी ने

समन किया हमारे डीके शीव कुमार जी कितने
वक्त तक अंदर रहे चिदंबरम साहब कितने वक्त
तक अंदर आ सबका सब में वो माददा नहीं होता
है तो जिसमें माददा है वो लड़ेगा और अंत

तक लड़ेगा जिसमें माददा नहीं है आजादी के
वक्त एक नारा लगता था कि आजादी की इस
लड़ाई में दो तरह के लोग हैं जो मजबूत हैं
वह जंग में गए और बाकी सारे संघ में गए हम

तो जाने दीजिए बाकी जो मजबूत नहीं है उनको
बाकी संघ में जा रहे हैं बहुत-बहुत
शुक्रिया आपका पवन खेड़ा जी इस बातचीत के
लिए उम्मीद हम यह करते हैं कि भारत इस
चुनाव के बाद ऐसा ना हो कि वन पार्टी रूल

की तरफ आगे बढ़े एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर
पत्रकार होने के अलावा जो भारत के संविधान
में यकीन रखता है और भारत के लोकतांत्रिक
भविष्य में मेरा यकीन है मैं ये मानती हूं
कि मैं नहीं मेरी आने वाली पीढ़ी आप ही

लोकतांत्रिक भारत में रहे यही सबसे बेहतर
है उम्मीद हम ये करते हैं विपक्ष मजबूत बन
के उभरे अब इस चुनाव में और भारत का जो
आइडिया ऑफ इंडिया उसे हम बचा के रखेंगे एक

बात कहूं अ मजबूत होकर विपक्ष निकलेगा मैं
ये नहीं मानता एक मजबूत विपक्ष भाजपा में
आपको मिलेगा वाह और ये बात तो आपको माननी
पड़ेगी कि विपक्ष में जब होती है भाजपा तो
बहुत अ और सरकार में हम बेहतर होते हैं तो

शुक्रिया

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