Hemant Soren ने क्यों ठुकरा दी डील ? | गुजरात लॉबी का आखिरी ऑफर क्या था ? | - instathreads

Hemant Soren ने क्यों ठुकरा दी डील ? | गुजरात लॉबी का आखिरी ऑफर क्या था ? |

नमस्कार  मेरे
ंचवट को एक्सेप्ट कर लेगा वो अजीत पवार हो
जाएगा वोह एकनाथ शिंदे हो जाएगा उसकी
सरकार बनी रहेगी उसके सारे दाग धुल जाएंगे
जैसे दर्जन भर नेता है चाहे वो छगन भुजबल
हो चाहे प्रफुल पटेल हो चाहे वो सुवेंदु

अधिकारी हो एक लंबी फेहरिस्त है नारायण
राने लेकिन जिसने डील को मना कर दिया
जिसने मोदी को नो कह दिया या जो मोदी के
आगे झुका
नहीं आखिर में उसको जेल जाना ही होगा आखिर

में उसका विकेट गिरा ही देगी गुजरात लबी
और क्या ठीक ऐसा ही आज रांची में हुआ क्या
रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सुरेन जी हां
आदिवासी चीफ मिनिस्टर जिनका विकेट आज
गिराया है मोदी ने क्या
वो मोदी के ऑफर को बारबार ठुकरा रहे थे और
आखिरी ऑफर आखिरी ऑफर जो था आखिरी विंडो कब
खुली थी आखिरी खिड़की कब खुली थी क्या 20

तारीख को खुली थी एक तरफ इंटोन हो रहा था
और एक तरफ डील हो रही थी एक तरफ ऑफर दिया
जा रहा
था लोकतंत्र अब ऑफर और डील से चलता है और
जहां बहुत कुछ ईडी तय करती है एक तरफ ईडी
होती है दूसरी तरफ डील चल रही होती है और

तीसरी तरफ ऑफर दिया जाता है आज इसी से
पर्दा उठाने जा रहा हूं अब वह लैंड डील
क्या थी वह जमीन का पुराना घोटाला क्या था
वह पुरानी फाइल क्या थी और किस तरह से एक
आरोपी को सरकारी कवा बना के हेमंत सुरेन

की घेराबंदी की गई जैसे मनीष सिसोदिया की
घेराबंदी हुई या फिर संजय सिंह की
घेराबंदी हुई जिस तरह से मुलजिम को सरकारी
गवाह बनाती है ईटी और फिर शिकार पर शिकंजा
कसती है उस पर मैं बाद में आऊंगा उस डील
पर बाद में

आऊंगा बड़ी बात ये भी है कि हेमंत सुरेन
के बाद क्या अब यह मैसेज ममता बनर्जी को
है ममता बनर्जी को है कि आप इंडिया एलाइंस
से बाहर जाइए जिस तरह से ईडी का शिकंजा

नीतीश कुमार के आदमियों पर कसा था और एक
मैसेज दिया गया था कि या तो फिर ईडी
जेडीयू के सारे ठेकेदारों को चाहे वो
गब्बू सिंह हो कारू सिंह हो ललन सिंह के

आदमी हो या वित्त मंत्री विजय चौधरी के
आदमी हो या तो ये जेल जाएंगे या नितीश जी
आप इंडिया एलायस छोड़ के आ जाए और आखिर
में बुजुर्ग नीतीश कुमार अपनी आखिरी पारी
खेलते हुए कहीं ना कहीं झुक गए मोदी के

आगे सवाल यह है कि अब ममता बनर्जी के पास
क्या विकल्प है क्या उनको भी इंडिया लाइन
से बाहर जाना पड़ेगा हेमंत सुरेन के विकेट
गिरने के बाद क्या अब केजरीवाल को भी

मैसेज दिया जा रहा है कि या तो इंडिया
लाइंस छोड़ दीजिए जैसे पंजाब में आपने
गठबंधन तोड़ा है दिल्ली में भी आप
तोड़िए वरना आपका भी हाल वही होगा जो

हेमंत सोरेन का हुआ है और यह मैसेज क्या
आदित्य ठाकरे से लेकर तेजस्वी यादव को भी
दिया जा रहा है इस पर भी बाद में आऊंगा
पहले बात करते हैं उस डील की जिस डील को

इस आदिवासी नेता ने ठुकरा दिया और कहीं ना
कहीं अमित शाह को बुरा लगा उन्हें शायद इस
बात का इल्म नहीं था कि इतना बड़ा
ऑफर भी एक आदिवासी ठुकरा सकता

है दोस्तो इस डील पर तो मैं आ ही रहा हूं
लेकिन यहां पर मैं एक चीज क्लेरिफाई करना
चाहूंगा दरअसल डील दो थी एक न्यू डील और
एक ओल्ड डील ओल्ड डील साल भर पहले से चल

रही थी जो कहीं ना कहीं टूट गई थी क्योंकि
झुके नहीं थे हेमंत सुरेन और जो नई डील थी
ये कुछ महीने पहले शुरू की गई जब इंडिया
अलायंस ने तेजी पकड़नी शुरू की तब से

बार-बार प्रेशर डाला जा रहा था और बीजेपी
के एक नेता रांची में उनकी मुलाकात हुई और
इस मुलाकात में उन्होंने सीधे मैसेज दिया
कि अगर आप इंडिया एलाइंस से अगर झारखंड
मुक्ति मोर्चा अगर हेमंत सुरेन इंडिया

अलायंस से बाहर आ जाते हैं इंडिया अलायंस
को छोड़ देते हैं अलग चुनाव लड़ते हैं या
एनडीए के साथ आते हैं तो यह जो फाइल है
ईडी की ये वैसे ही बंद होगी जैसे अजीत
पंवार की फाइल बंद हो गई जैसे प्रफुल पटेल

की फाइलें बंद है जैसे छगन बुझब की फाइलें
बंद हैं जैसे सुवेंदु अधिकारी की फाइल यह
फाइल वैसे ही बंद हो जाएगी अगर आप इंडिया
अलायंस को छोड़ दें और फिर जब 20 तारीख को

20 तारीख को आज की पूछताछ से पहले जो
पिछली पूछता थी कई समंस के बाद उस पूछताछ
से पहले यह विंडो खुली हुई थी ऑफर की उस
दिन भी यह ऑफर दिया जा रहा था उनको

सुबह-सुबह कि अभी भी वक्त है अभी भी यह
जांच यहां पर रुक सकती इस स्टेज पर भी यह
जांच रुक सकती ईडी की टीम अभी भी वापस जा
सकती है अभी भी वह फाइलें लैंड डील की बंद

हो सकती हैं आप फिर से विचार करें क्या आप
इंडिया अलायंस छोड़ना चाहेंगे और अगर आप
छोड़ेंगे तो जितने भी जांच है जितने भी
आरोप है सब बंद हो जाएंगे लेकिन फिर ऐसा

लोग कहते हैं जानकार कहते हैं कि हेमंत
सुरेन ने इस 20 तारीख से पहले एक मीटिंग
करी और उस मीटिंग में उन्होंने अपने सारे
विधायकों को बुलाया और उनसे कहा कि यह

हमारे ऊपर प्रेशर है कि वह हमें जेल भी
भेज सकते हैं हम पर चार्जशीट भी हो सकती
है हमें गिरफ्तार भी किया जा सकता है
लेकिन एक ऑफर है यहां पर और ऑफर बड़ा

 

गोल्डन ऑफर है गोल्डन ऑफर यह है कि अगर हम
यह अलायंस छोड़ दे और अगर खुद अपनी सरकार
बनाए कांग्रेस को छोड़ दे अगर बीजेपी हमें
सपोर्ट भी कर सकती है अगर हम इंडिया
एलाइंस छोड़े एनडीए के साथ आए या इवन हम
अलग भी

लड़े झारखंड में लोकसभा का चुनाव तो यह
जांच यह फाइल अभी भी बंद हो सकती लेकिन
दोस्तों यहां पर एक आदिवासी टेंपर मेंट
होता है जैसे किसानों का टेंपर मेंट होता
है या फिर आप कह मराठा जो आपने आंदोलन

देखा अभी रिजर्वेशन का उनका जो था या
जाटों का रिजर्वेशन का आंदोलन था ये जो एक
तरह का माइंडसेट होता है आदिवासियों का वो
माइंडसेट जो बहुमत में है झारखंड मुक्ति

मोर्चा वो झुकने को तैयार नहीं था और सारे
विधायकों ने कहा कि अंजाम जो कुछ हो हेमंत
जी अब आगे
बढ़ी और 20 तारीख को ही यह फैसला हो गया

था हालांकि 20 तारीख की गिरफ्तारी इसलिए
नहीं हुई क्योंकि 22 तारीख को अयोध्या का
राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा थी अब
दोस्तों ऐसा नहीं है कि हेमंत सुरेन पर

पिछले दो-तीन महीने में ही अमित शाह ने या
मोदी जी ने शिकंजा कसया ईडी पीछे छोड़ दी
ऐसा नहीं है दरअसल हेमंत सुरेन को तोड़ने
की जो कोशिश है षड्यंत्र है साजिश है य

पिछले डेढ़ दो साल से चल रहे थी हेमंत
सुरेन को भी ऑफर दिया गया कि आप कांग्रेस
छोड़ दीजिए आप हमारे साथ सरकार बनाइए और
यह मैसेज दिया गया जब मोदी जी बाबूलाल
मरांडी ये जो साहब है बाबूलाल मरांडी ये

पहले बीजेपी में थे फिर बीजेपी से चले गए
फिर बीजेपी में मोदी जी इनको मना के लौटा
के लाए तो बाबूलाल मरांडी को चाहते थे कि
छ महीने बाबूलाल मरांडी चीफ मिनिस्टर रहे

छ महीने हेमंत सुरेन रहे हेमंत सुरेन
मानने को तैयार नहीं थे फिर यह ऑफर बसंत
को दिया गया जो उनके छोटे भाई हैं जिनकी
बनती नहीं है कि भाई बसंत जी आप आ जाइए और

इस कशमकश में जो संख्या बल है जो हाउस की
जो स्ट्रेंथ है मैं चाहता हूं एक नजर उस
परे आप देखें तो फिर मैं आगे बढ़ता हूं इस
डील पर पुरानी डील पर जिसको समझना बहुत

जरूरी है 81 का हाउस है इस 81 की विधानसभा
में बहुमत में हेमंत सुरेन है इंडिया के
पास 49 विधायक हैं झारखंड मुक्ति मोर्चा
के पास 29 हैं कांग्रेस के पास 16 है बाकी

एक एक बाकी पार्टियों के पास है एनडीए अगर
आप देखें तो एनडीए के पास 31 विधायक हैं
बीजेपी के पास 25 तो बीजेपी फिलहाल सरकार
बनाने की स्थिति में नहीं जब तक कोई मेजर
ऑपरेशन तो बहरहाल गुजरात लॉबी इस नतीजे पर

पहुंची कि अगर झार खंड मुक्ति मोर्चा को
ही तोड़ दिया जाए जैसे शिवसेना तोड़ी या
एनसीपी को तोड़ी अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा
को तोड़ा जाए तो बात बन सकती है और तब

ऑपरेशन लोटस झारखंड में शुरू हुआ लेकिन
मैंने कहा ना आदिवासी पार्टी है किसान
मजदूर पार्टी है व झुकने को तैयार नहीं आप

कह सकते हैं जिद्दी लोग हो सकते हैं झुकना
उनके आप कह सकते हैं कि उनके चरित्र में
नहीं तो झारखंड मुक्ति मोर्चा को तोड़ने
की कोशिश

हुई लेकिन गुजरात लॉबी को कुछ हाथ नहीं
लगा और फिर कोशिश हुई कांग्रेस को तोड़ने
की और जब कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश हुई
तो सफलता मिल चुकी थी डील हो चुकी थी पैसा
लिया दिया जा चुका था लेकिन एक फोन ने

पैसा भी पकड़वा या और सारी की सारी डील जो
गुवाहाटी से कंट्रोल हो रही थी दिल्ली
गुवाहाटी कोलकाता रांची ये जो डील चल रही
थी उसमें नकद पैसे भी पकड़े गए उसमें
विधायकों का बंटाधार भी हो गया कांग्रे ने

भी एक्शन लिया और आप कह सकते हैं कि
कांग्रेस भी टूटने से बच गई क्योंकि हेमंत
सुरेन कहीं ना कहीं सजक थे और व उनकी जो
इंटेलिजेंस थी स्टेट इंटेलिजेंस व इस डील

का पीछा कर रही थी तो दो प्रयास हुए
झारखंड मुक्ति मोर्चा को तोड़ने की
कांग्रेस को तोड़ने की और कांग्रेस को
एकदम आप कह सकते हैं तोड़ने ही जा रहे थे
कि डील पकड़ी गई और यह पैसा बरामद हुआ

बहरहाल जब पुरानी डील नहीं बनी उसके बाद
ये नया जमीन घोटाला सामने आया और यह जो
जमीन घोटाला है बड़ा पुराना है मैं इसके
बहुत डिटेल में नहीं जाना चाह रहा हूं
क्योंकि इसमें एक डिफेंस डील थी उसको

बिचौलियों के जरिए किसी ने जमीन खरीदी ए
ने खरीदी बी को बेची बी ने खरीदी सी को
बेची उसी में कहीं ना कहीं एक अधिकारी जो

गिरफ्तार हुए थे उनको सरकारी गवाह बना
लिया गया जैसे शराब कांड में जो मुलजिम थे
उनको सरकारी गवाह बनाया गया और फिर गवाही
दिलाई गई संजय सिंह के खिलाफ या मनी
सिसोदिया के खिलाफ इसी तरह से इस केस में

भी सरकारी गवाह ने हां जो मुलजिम था उसको
सरकारी गवाह बनाया गया और सरकारी गवाह ने
फिर हेमंत सुरेन को घेरा जिसके बिना पर यह
सेकंड डील शुरू हुई है न्यू डील कह सकते

हैं और यह जो जमीन घोटाला था इसमें बहुत
ज्यादा साक्ष है नहीं जितना गोदी मीडिया
आपको बता रही है इसमें भी सिर्फ बयान है
गवाही है विटनेस के अकाउंट है वो गवाह जो
कहीं ना कहीं आरोपी

है आरोपी को सरकारी गवाह बना के शिकंजा
कसना यही ईडी कर रही है ज्यादातर केसेस
में और यही चीज हेमंत सोरेन के साथ की गई
और यहां भी जैसे मैंने कहा ऑफर उनको दिया

गया था लेकिन हेमंत सुरेन ने इस ऑफर को
ठुकरा कर जेल जाना बेहतर समझा और वह अकेले
दम पर चुनाव लड़ेंगे अब इसमें जो सबसे
बड़ी मुसीबत है गुजरात लॉबी के लिए वो यह
है कि जो पब्लिक सिंपैथी है

चाहे वह आदिवासियों की हो चाहे वह झारखंड
के निवासियों की हो वो हेमंत सोरेन के
स्वास है वो हेमंत सुरेन के साथ है
क्योंकि कहीं ना कहीं मोदी जी की टाइमिंग

में खोट है चुनाव से ठीक पहले वय चाल चल
रहे हैं अब दोस्तों असली सवाल कि हेमंत
सुरेन का विकेट लेने के बाद मैसेज क्या है
मैसेज क्या है इंडिया एलायस के बाकी

नेताओं को और मैसेज बहुत क्लियर है बहुत
स्पष्ट मैसेज है कि अगर आप इंडिया एलायंस
से बाहर नहीं आते हैं अगर आप इंडिया
एलायंस में बने रहते हैं अगर एक यूनाइटेड

अपोजिशन की तरह आप बीजेपी से लड़ेंगे तो
आपका हाल वही होगा जो रांची में आज हेमंत
सुरेन का हाल हुआ गद्दी छोड़नी पड़ेगी
इस्तीफा देना पड़ेगा जेल जाना पड़ेगा और

ये सबसे पहला मैसेज जो है वो अरविंद
केजरीवाल को है जिनका अभी इंटोन फिर से
होना है कि आप तय कर लीजिए कि आपको दिल्ली
में कांग्रेस के साथ इंडिया अलायंस के तौर

पर लड़ना है या आपको आम आदमी पार्टी अलग
लड़ना चाहती है अभी भी वक्त है आप अलग हो
जाइए अगर आप अलग होंगे तो शराब कांड में
जो भी फाइलें हैं बंद कर दी जाएंगी यही
मैसेज ममता बनर्जी को है कि अगर अपने

भतीजे अभिषेक बैनर्जी को बचाना है जेल
जाने से तो आप अलग चुनाव लड़ी और ममता
दीदी का कहीं ना कहीं सुर में सुर मिलता
हुआ दिख रहा है वो बार-बार ऐलान कर रही है
कि वो अकेले चुनाव लड़ेंगे वो इंडिया

एलायंस में तो हैं क्योंकि मुस्लिम वोट
चाहिए उनको इंडिया एलायंस में है लेकिन
लड़ेंगी अलग
एक तरफ मुसलमान भी चाहिए वोट 30 पर जो
बंगाल में और दूसरी तरफ अमित शाह की बात
भी माननी है यह ममता बैनर्जी का डर है अब

देखते हैं ममता बनर्जी डर से बाहर निकलती
है
नहीं नितीश कुमार नितीश कुमार के लिए लोग
ऐसा कहते
हैं कि लालू चाहते थे कि अपने बेटे को
मुख्यमंत्री बनाए और नितीश कुमार को

परेशान कर रहे थे कुछ कहते हैं कि इंडिया
एलायस ने उनकी सुनी नहीं राहुल गांधी उनका
फोन नहीं उठाते थे हकीकत यह है कि पहली
बैठक बैठक जब नीतीश कुमार ने 23 जून को

पटना में की और सारी यूनाइटेड अपोजिशन को
एक छतरी के नीचे लाए दो दिन पहले ही जो
जेडीयू के लोग थे उनके यहां ईडी ने छापे
मारी शुरू कर दी जो बड़े-बड़े ठेकेदार थे

बिहार के बड़े ठेकेदार खराब पति ठेकेदार
कारू सिंह गब्बू सिंह जैसे ठेकेदार ईडी का
छापा पड़ने लगा 19 जून को फिर पूरे जून के
महीने में फिर अगस्त के महीने में फिर
अक्टूबर

सितंबर और आखिरी जो बिजली गिरी वो जेडीयू
के एमएलसी पर गिरी जो सबसे आप कह सकते हैं
धना एमएलसी थे शाह साहब और जब इन पर बिजली
गिरी और इनके यहां से लाल डायरी मिली ईडी
को जिसमें कुछ कोड वर्ड थे जेडीयू के बारे

में भले ही नीतीश कुमार नहीं फस रहे थे
लेकिन नीतीश कुमार के जो बाराती थे नितीश
कुमार के जो आली मुआली थे उनके साथ जो
रहते थे मंत्री विधायक उन पर गाज गिरने

वाली थी और वही दबाव था दरअसल का प्रेशर
था जिसने नीतीश कुमार को मजबूर कर दिया
बीच मझधार में इंडिया एलाइंस छोड़ने का अब
दोस्तो य हकीकत है किय जो लैंड डील है
जिसकी फाइलें अभी हाल फिलहाल में खोली गई

किसी मुलजिम को सरकारी गवाह बनाया गया
उससे हेमंत सुरेन के खिलाफ गवाही दी गई उस
गवाही को सबूत बना लिया गया और उसी में आप
देख रहे हैं कि वही हाल किया हेमंत सोरेन

का जो मनीष सिसोदिया संजय सिंह का किया यह
कहानी इतनी ब्रीफ में नट शल में सवाल अब
ये है जो बिग क्वेश्चन है कि हेमंत सुरेन
जिस तरह से झुके नहीं या झुकने को तैयार
नहीं है क्या झारखंड का हर आदिवासी उनके

साथ खड़ा होगा और यह घमासान जो बीजेपी और
झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच में है य
तलवारें खींची हुई है जमीन
पर इसका असर मोदी जी को लाभ देगा या मोदी
जी को नुकसान करेगा जिद की लड़ाई मोदी जी

की तरफ से अगर जिद पर हेमंत सुरेन
थे तो जिद पर मोदी जी भी थे कि अगर डील
नहीं मानोगे तो जेल जाओगे बहरहाल देखते
हैं इस डील का फैसला क्या होता है फैसला

जो इस डील का होगा वो ईवीएम से बटन दबा के
होगा जनता ही फैसला करेगी बहरहाल ये आज का
वीडियो था आपको कैसा
लगा जरूर इस पर प्रतिक्रिया दीजिए और मैं
चाहूंगा कि अगर आपने इस चैनल को अभी तक

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