Indian Hidden Treasures_भारत के रहस्यमयी खजाने_Lost Treasure in India - instathreads

Indian Hidden Treasures_भारत के रहस्यमयी खजाने_Lost Treasure in India

खजाने की तलाश जोरों पर थी उम्मीद थी कि
आज कुछ ना कुछ तो हाथ लग ही जाएगा खुदाई
कर रहे छह दोस्तों ने तो मन ही मन यह भी
सोच लिया था कि दौलत पाने के बाद कैसे

अपने सपनों को पूरा करना है तैसी मा के
करीब खुदाई हो चुकी थी कि अचानक उनमें से
एक जिसका नाम लक्ष्मण था उसने महसूस किया
कि मानो किसी ने उसे पीछे से धक्का दिया

हो उसने झटके से पीछे मुड़कर देखा लेकिन
पास कोई नहीं था किसी अनजानी शक्ति के डर
से वो अपने साथियों को पुकारता तभी उसका
एक साथी अचानक हवा में उछलकर जमीन पर गिरा
और गिरते ही दम तोड़ दिया बाकी साथियों को
भी कुछ ऐसा ही महसूस हुआ जैसे कोई उन्हें

उठा उठाकर पटकने की कोशिश कर रहा हो सभी
गिरते पड़ते वहां से भागने लगे लक्ष्मण ने
भी जान बचाकर भागने की कोशिश की लेकिन ऐसा
लगा कि मानो सुजानी शक्ति ने उसे अपने
बाजुओं में दबोच लिया हो और उसे जान से
मार देना चाहता हो वो जमीन पर गिरा और
बेहोश हो गया जब उसे होश आया तो वहां का

पूरा दृश्य ही बदल चुका था उसने देखा कि
वो पुलिस और भीड़ से घिरा हुआ है पता चला
कुछ दूरी पर उसके एक और साथी की लाश पाई
गई है खजाने की तलाश की ये कहानी ना तो तो
काल्पनिक है और ना ही दादा-दादी के जमाने

की कोई सुना सुनाया किस्सा है दरअसल महज
तीन-चार साल पहले घटी यह घटना मध्य प्रदेश
के भिंड की है जिसकी जानकारी पुलिस को
लक्ष्मण नाम के व्यक्ति ने होश में आने पर
दी थी खजाने के तलाश से जुड़ी ऐसी ना जाने

कितनी ही कहानियां हैं जो वर्षों से सुनाई
जाती रही है जिनमें किसी देवीय शक्ति भूत
प्रेत या सांपों द्वारा जमीन में गड़े धन
की रक्षा की बात बताई जाती है खजाने की
आशंका होने के बावजूद अगर उसकी तलाश की जा
रही है तो इसके पीछे ऐसी कहानियों के
अलावा ईश्वर की नाराजगी और प्रलय होने

जैसी घटनाओं का डर भी है जिसकी वजह से ही
आम इंसान से लेकर प्रशासन तक खजाने की
तलाश से बचता रहा है और कहीं कोशिश भी की
गई तो सही मैप के अभाव में सिवा नाकामी के
कुछ भी हासिल नहीं हो सका देश में आज भी

ऐसे कई खजाने मौजूद हैं लेकिन वहां तक
पहुंचने का रास्ता ना पता होने से उन पर
रहस्य आज भी बरकरार है इस सब्जेक्ट पर बने
हमारे पिछले वीडियो को आपने काफी पसंद
किया था और दूसरे पार्ट की भी डिमांड की

थी तो लीजिए एक बार फिर से हाजिर हैं हम
भारत के कुछ और तिलस्मी खजानो के रहस्य व
कहानियों के साथ इसलिए बने रहे हमारे साथ
इस वीडियो में शुरू से से अंत तक नमस्कार
मेरा नाम है अनुराग सूर्यवंशी और आप देख

रहे हैं नार
टीवी वीडियो की शुरुआत करते हैं निजामो के
शहर हैदराबाद में मौजूद ऐतिहासिक चार
मीनार से दावा किया जाता है कि चार मीनार
और गोल कुंडा को जोड़ने वाली रहस्यमय
सुरंग में एक बहुत बड़ा खजाना छुपा है इस
सुरंग का निर्माण सुल्तान मोहम्मद कुली
कुतब शाह ने अपने शाही परिवार के लिए

करवाया था जिसके निर्माण के पीछे एक
दिलचस्प कहानी छिपी हुई है सलामी शताब्दी
के अंतिम सालों में प्लेग महामारी ने
भयावह रूप ले लिया था यह वही दौर था जब
निजामो की राजधानी हैदराबाद ना होकर

गोलकुंडा हुआ करती थी लेकिन जैसे ही प्लेग
महामारी से मुक्ति मिली तो कुली कुतुब शाह
ने अपनी राजधानी हैदराबाद शिफ्ट करने का
फैसला कर लिया कहा जाता है कि कुली कुतुब

शाह ने प्लेग महामारी के दौरान दुआ मांगी
थी और नजात मिलने पर मस्जिद भी बनाने का
वादा किया था जिसके बाद साल 1591 में चार
मीनार बनकर तैयार हुआ और इसकी पहली मंजिल
पर कुली कुतुब शाह ने अपने वादे के
मुताबिक मस्जिद भी बनवाई इतिहास आकारों के

मुताबिक 400 सालों से अधिक पुरानी इस
ऐतिहासिक इमारत के नीचे एक रहस्यमय सुरंग
भी मौजूद है दरअसल इस गुप्त सुरंग के
निर्माण के पीछे मकसद यह था कि अगर कभी

कोई खतरा जैसी बात होती है तो निजाम और
उनका शाही परिवार इस स्वरंग के रास्ते से
बचकर निकल सके हालांकि बाद में स्वरंग में
कुछ गुप्त तहखाने बनवाए गए जिसमें लूटपाट

से बचने के लिए सोने चांदी के सिक्कों
सहित कीमती रत्न और आभूषण छुपाए गए ऐसा
माना जाता है कि ये सभी चीजें आज भी सुरंग
में खजाने के रूप में मौजूद हैं टाइम्स ऑफ
इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 1936

में नगरपालिका द्वारा यहां के निजाम रहे
मीर उस्मान अली को चार मिनार से जुड़े
खजाने की एक रिपोर्ट भी सौंपी गई थी लेकिन
उन्होंने इसमें कोई भी इंटरेस्ट नहीं

दिखाया दरअसल सुरंग का पता लगाने के लिए
खुदाई कराई गई और तकरीबन 10 फीट खुदाई के
बाद काफी बड़े-बड़े ग्रेनाइट स्लैब मिले
इनको हटाने के बाद एक सुरंग भी मिला जो 15
फीट चौड़ा था इसके बाद अन्य कई जगहों पर

भी खुदाई हुई जिसकी पॉजिटिव रिपोर्ट्स भी
निजाम को सौंपी गई लेकिन निजाम पर उनका
कोई असर नहीं हुआ मीडिया रिपोर्ट्स के
मुताबिक साल 1962 में भी इस जगह का बड़े
पैमाने पर सर्वेक्षण किया गया था जिसमें

बताया गया था कि गोलकोंडा और चार मिनार के
बीच बनी स्वरंग शाही परिवार के निकलने के
लिए बनवाया गया था इसलिए पॉसिबल है कि
इसमें रहस्यमई खजाने भी रखे गए हो देखा
जाए तो आज भी चार मीनार का खजाना एक रहस्य
बना हुआ है जिस पर से पर्दा उठना बहुत

जरूरी
है चार मीनार की सुरंग ही नहीं हैदराबाद
में एक और खजाना भी है जिसे हैदराबाद के
आखिरी निजाम रहे मीर उस्मान अली का बताया
जाता है साल 1911 में जब मीर उस्मान अली

को गद्दी मिली तब उनके राज्य में खज ने की
स्थिति काफी खराब थी बाद में मीर उस्मान
अली ने अपने 37 साल के शासन में ना केवल
खजाने को भरा बल्कि खुद की संपत्ति भी
बनाई जिसमें से एक था किंग कोठी पैलेस इस

पैलेस में उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा
हिस्सा गुजारा था कहा जाता है कि निजाम ने
अपने बेश कीमती खजाने को इसी पैलेस के

नीचे बने तहखाने में छुपा करके रखवाया था
इस खजाने में माणिक हीरे मोती नीलम और
अन्य कीमती पत्थर थे जो सोने और चांदी के
आभूषण में खूबसूरती से जड़े हुए थे हो

सकता है कि आज के दौर में ऐसी बातें
काल्पनिक लगे लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है
इसका अंदाजा आप साल 2008 में फो नाइ जीन
की एक रिपोर्ट से लगा सकते हैं जिसमें मीर
उस्मान अली को करीब 210 अरब डॉलर की
प्रॉपर्टी के साथ वर्ल्ड के ऑल टाइम
रिचेस्ट पर्सन में पांचवें नंबर पर रखा

गया है इसके अलावा टाइम पत्रिका ने भी
उन्हें साल 1937 में दुनिया का सबसे अमीर
व्यक्ति कहा था हालांकि एक सच ये भी है कि
उनकी प्रॉपर्टी का सही आंकड़ा आज भी किसी
के पास नहीं है मीर उस्मान अली को लेकर एक

और बात जो सबसे ज्यादा चर्चित है वो ये है
कि भारत चीन युद्ध के दौरान उन्होंने भारत
सरकार को पाच टन सोना देकर मदद की थी इसके
अलावा भी कई सामाजिक कार्यों में उन्होंने
रुपयों गोल्ड और जमीनों का दान किया है

मगर उस्मान अली के खजाने का अंदाजा आप इसी
से लगा सकते हैं कि आजादी के बाद हैदराबाद
पर कब्जे के समय भारत सरकार ने उनके
करोड़ों रुपए जर्प कर लिए थे बावजूद इसके
उनकी दौलत में कोई कमी नहीं हुई थी खास
बात कि निजाम के मरने के बाद भी उनके

खजानो के बारे में आज तक कुछ पता नहीं चल
सका
है भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो रहस्यमई
खजानो के साथ-साथ खुद भी रहस्यों से भरे
हुए हैं और उनमें से एक है कोल्हापुर का
महालक्ष्मी मंदिर इस मंदिर की सबसे बड़ी

खासियत या कहे रहस्य यह है कि इसके खंभों
को आज तक कोई गिन नहीं सका है कहा जाता है
कि इस मंदिर में भी बेशकीमती खजाना छिपा
हुआ है हालांकि इस खजाने को बड़ी सुरक्षा

के बीच कभी-कभी खोला जाता है और इसके
सिक्कों और आभूषणों आद की गिनती की जाती
है कुछ साल पहले जब इस मंदिर के खजाने को
खोला गया तो यहां सोने चांदी और हीरों के
ऐसे आभूषण सामने आए जिनकी कीमत मार्केट के
हिसाब से अरबों रुपए में है इससे पहले

मंदिर के खजाने को 1962 में खोला गया था
इस मंदिर के खजाने का इतिहास जानने से
पहले आइए मंदिर के रहस्यों को भी जान लेते

हैं दरअसल कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर
का इतिहास काफी पुराना है मंदिर के बाहर
लगे शिलालेख से पता चलता है कि इसका
निर्माण 1800 साल पहले शाली वाहन घराने के
राजा कर्ण देव ने करवाया था बाद में मंदिर

के अहाते में समय-समय पर मंदिरों का
निर्माण होता रहा जिनकी गिनती लगभग 30-35
की संख्या में है खजाने के अलावा इस मंदिर
को लेकर जिस रहस्य की बात की जाती है वो
इस मंदिर में स्थित खंभे दरअसल इन खंभों

में एक ऐसा तिलिस्म जुड़ा हुआ है जिसे
सुलझाने में विज्ञान भी नाकाम साबित हुआ
है मंदिर प्रशासन का दावा है कि आज तक इन
खंभों को कोई गिन नहीं सका है मंदिर
प्रशासन के मुताबिक कई बार लोगों ने
इन्हें गिनने की कोशिश की लेकिन जिसने भी

ऐसा किया उसके साथ कोई ना कोई अनहोनी घटना
देखने को मिली है यहां तक कि विज्ञान भी
इस रहस्य से पर्दा उठाने में नाकाम साबित
हुआ क्योंकि कई बार कैमरे की सहायता से भी
इन्हें काउंट करने का प्रयास किया जा चुका

है लेकिन हर बार नाकामी ही हासिल हुई है
मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि साल
में एक बार सूर्य की किरणें देवी की
प्रतिमा पर सीधे पड़ती हैं इतिहासकारों के
मुताबिक इस मंदिर में कोकड़ के राजाओं

चालुक्य वंश के राजाओं मुगल शासक आदल शाह
छत्रपति शिवाजी महाराज और उनकी मां
जीजाबाई तक ने चढ़ावा चढ़ाया है जो खजाने
में आज भी सुरक्षित है खजाने में भारी

मात्रा में सोने के सिक्कों का हार सोने
की जंजीर चांदी की तलवार सोने की बड़ी गधा
मां लक्ष्मी का स्वर्ण मुकुट श्री यंत्र
हार सोने की चड़िया सोने के घुंघरू हीरे
की कई मालाएं पेशवा काल और आदिल शाह के

शासनकाल के शाही जेवरात आदि मौजूद हैं इस
मंदिर का खजाना कितना विशाल है इसका
अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि पूरे 10
दिनों तक भारी सिक्योर टी के बीच सीसीटीवी
कैमरों की नगरानी में इस खजाने की गिनती

चली थी खास बात कि खजाने की गिनती के बाद
सभी आभूषणों का बीमा करवाया गया
था देखा जाए तो भारत के जितने भी प्राचीन
मंदिर हैं उनमें से ज्यादातर में खजाने
होने की बात कही गई है और इसी लिस्ट में

कर्नाटक का श्री मो कंबी का मंदिर भी आता
है यह मंदिर कर्नाटक के पश्चिमी घाट के
कोल्लूर के नीचे की तरफ है जिसके गुप्त
खजाने में अकूत दौलत मौजूद है लेकिन इसे
निकालने की किसी ने इसलिए कोशिश नहीं नहीं

की क्योंकि इस मंदिर की रक्षा स्वयं नाग
देवता कर रहे हैं मान्यता है कि इस खजाने
पर बुरी नजर डालने से संकट आ सकता है और
कुछ भी हो सकता है श्री मुखं का मंदिर
कर्नाटक के पश्चिमी घाट पर बने सबसे
पुराने मंदिर के रूप में जाना जाता है इस

मंदिर को बेडनर के नायक जिन्होंने शुरू
में विजयनगर साम्राज्य के अधीन शासन किया
था उन्होंने अपना राज्य मंदिर घोषित किया
और मूर्ति व गर्भगृह को बहुत सारे आभूषणों

से सम्मानित किया ऐसा माना जाता है कि
राजाओं ने यहां एक गुप्त रूप से बंद कमरे
में बहुत सारा खजाना छिपा दिया था इसस पर
एक सर की आकृति बनी हुई थी ऐसा माना जाता

है कि पहले के समय में जहां पर खजाना छिपा
होता था वहां पर पहचान के लिए कुछ विशेष
चिन्ह बने होते थे मंदिर के पुजारियों के
मुताबिक नाग का चिन्ह इस बात का संकेत
देता है कि मंदिर के नीचे बहुत बड़ा खजाना
है यह नाग मंदिर को भारी ताकतों से बचाता

है यहां पर काफी मात्रा में श्रद्धालु आते
हैं और अपनी श्रद्धा अनुसार भीड़ चढ़ाते
हैं यहां के खजाने की बात तो छोड़ ही
दीजिए इस मंदिर की मूर्तियों पर ही 100

करोड़ से अधिक के गहने चढ़े हुए हैं सबसे
खास बात कि मंदिर की वार्षिक आय ₹ करोड़
है जबकि मंदिर के रखरखाव में लगभग 35
करोड़ से अधिक खर्च होता है और ये पैसे
कहां से आते हैं किसी को नहीं पता लोगों

का तो यह भी मानना है कि इस मंदिर में
कुबेर का खजाना छिपा हुआ है जिसकी रक्षा
एक नाग्य के द्वारा की जा रही है जो अंदर
मौजूद और अधिक खजानो का संकेत भी दे रहा

है भारत सोने की चिड़िया था और शायद लंबे
समय तक होता अगर नादिरशाह जैसे लुटेरे
इसकी धरती पर ना आते दरअसल अब हम जिस
खजाने की चर्चा करने वाले हैं वो ईरानी

आक्रमणकारी नादर शाह की लूट से ही जुड़ा
हुआ है साल 1739 में नादर शाह ने अपने
50000 सैनिकों के साथ दिल्ली में जमकर
लूटपाट की और 20 से 30 हज लोगों का
नरसंहार भी किया यह लूट कितनी बड़ी थी

इसका अंदाजा आप इसी बात से ही लगा सकते
हैं कि वापस जाते समय नादिर के खेमे की
लंबाई लगभग 150 मील थी जिसमें करोड़ों
सोने के सिक्के और हीरे जवाहरात से भरी
बोरियों के अलावा बेशकीमती पवित्र मयूर

सिंहासन भी था जो अब पाक तख्ते तौर के रूप
में ईरान में है तो वहीं कोहिनूर हीरा अब
ब्रिटिश घराने के राजमुकुट में है इतिहास
ार का मानना है कि नादिर शाह ने जितनी

लूटपाट की थी उसकी वैल्यू उस दौर में 70
करोड़ थी जो आज के हिसाब से 156 अरब डॉलर
यानी
1050000 करोड़ रुपए थी ये इतिहास की सबसे
बड़ी और भयावह लूट थी जिसने मुगल

साम्राज्य की जड़ें हिलाने के साथ-साथ
अंग्रेजों के लिए भारत की राह आसान कर दी
थी इस लूटपाट के बाद नादर शाह ने मुगल
बादशाह मोहम्मद शाह को सिंहासन से नहीं
हटाया बल्कि वापस लौटने से पहले उन्हें कई

उपहार भेंट की और अपने हाथों से उनके ताज
में कीमती जीवण सजाया जिसके बदले मुगल
बादशाह मोहम्मद शाह ने नादर शाह को तिब्बत

और कश्मीर से लेकर समुद्री सीमाओं तक सटे
सिंध के सभी पश्चिमी हिस्से तोहफे में दे
दिए इतिहासकारों के मुताबिक नादर शाह
द्वारा लूटा गया खजाना इतनी भारी मात्रा

में था कि उसे एक बार में ले जाना बेहद
कठिन था ऐसे में उनके सैनिकों ने इस खजाने
का एक हिस्सा हिंदू कुष पर्वत की किसी
गुफा में छुपा दिया था जिसका पता आज तक
नहीं लग पाया है वहीं यह भी बताया जाता है
कि ईरान वापस जाने के बाद नादिर शाह की एक

खास साथी अमर शाह ने उसकी हत्या कर दी थी
और खजाना लेकर गायब हो गया हालांकि कुछ
दिनों बाद उसने भी बीमारी के कारण तोड़
दिया और खजाने का राज बसराज बन कर के रह
गया माना जाता है कि अहमद शाह ने उस खजाने

को किसी भुलभुलैया में छिपा दिया था जिसका
पता आज तक नहीं चल पाया
है अगले जिस खजाने की बात हम करने वाले
हैं वो उसी कोहिनूर हीरे से जुड़ा हुआ है

जिसे नादर शाह अपने साथ लूट करके ले गया
था दरअसल जिस खदान के गर्भ से कोहिनूर का
जन्म हुआ था वह खदान अपने आप में एक रहस्य
है हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के
कोल्लूर की कृष्णा नदी की जो हीरो के ख के

लिए सबसे खास जगह मानी जाती है हिंदू धर्म
को मानने वाले लोग कृष्णा नदी को एक
पवित्र नदी मानते हैं कभी गोलकुंडा राज्य
का रहाया भाग आज कृष्णा और गुंटूर जिले
में स्थित है बताया जाता है कि यहां

सदियों पहले से हीरे की एक बहुत बड़ी खेप
मौजूद है इस नदी के बारे में कहा जाता है
कि एक समय था जब ये नदी हीरे का प्रमुख
स्रोत थी और दुनिया के प्रत्येक 10 में से

सात हीरे इसी नदी से प्राप्त होते थे
कोहिनूर समेत दुनिया के सबसे बेहतरीन हीरो
का खनन भी कृष्णा नदी के किनारे कोल्लूर
में हुआ था कहा जाता है कि यहां इतने हीरे
हैं कि कृष्णा नदी के रेस से भी छोटे-छोटे

हीरे निकाले जा सकते हैं लेकिन देवी
प्रकोप के डर से यहां के हीरों पर कोई
अपनी कुदृष्टि नहीं डाल सकता है शायद
इसलिए कभी भी इस प्रकृतिक खजाने को भी
खोजने के लिए खास कोशिश नहीं की गई है

जिसकी वजह से इसका रहस्य भी आज भी बरकरार
है अंत में खजाने से जुड़ा एक फनी
इंसिडेंट सुनाता हूं जो लॉकडाउन के दौरान
एक मंदिर में घटा था जिसे सुनकर यकीनन
आपको काफी मजा आएगा दरअसल खजाने की खोज

में या कहे कि लालच में कुछ लड़कों ने
लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए एक 100 साल
पुराने मंदिर को ही खोद डाला चौकाने वाली
घटना कर्नाटक के हसन जिले की है जहां एक

ज्योतिषी के बताने पर कि मंदिर के गर्भगृह
में खजाना दबा हुआ है कुछ लड़कों ने इस
काम को अंजाम देने की कोशिश की इस काम में
पुजारी समेत सात लोग शामिल थे अब इसे
दैवीय चमत्कार कहिए या चोरों की बदकिस्मती

अगले ही दिन लॉकडाउन में ढील दे दी गई और
सवेरे सवेरे ही मंदिरों को खुलवा दिया गया
और जब मंदिर खुला तो अंदर का नजारा देख
किसी को भी यह समझते हुए देर नहीं लगी कि

वहां क्या चल रहा था फिर क्या हुआ आगे वही
हुआ जो होना था पुजारी की गवाही पर एक-एक
करके सभी चोर पकड़ लिए गए बेचार को खजाने
का गुप्त कमरा तो नहीं मिल सका लेकिन जेल
की कोटरी जरूर मिल गई दोस्तों भारत में

गुप्त खजानो और उनके रहस्यों की कहानियां
इतनी ज्यादा है कि उनकी गिनती करना
मुश्किल है कितने खजाने तो ऐसे भी होंगे
जिनके होने के राज को भी जानने वाले अब इस
दुनिया में नहीं है इसलिए कब कहां किसके

हाथ कौन सा गड़ा खजाना लग जाए या कोई नहीं
जानता हमें उम्मीद है कि आपको हमारी आज की
ये वीडियो जरूर पसंद आई होगी

नमस्कार

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