Jayant Chaudhary पर Godi Media ने चलाई फेक न्यूज, बुरा फंसी भाजपा! - instathreads

Jayant Chaudhary पर Godi Media ने चलाई फेक न्यूज, बुरा फंसी भाजपा!

4 पीएम न्यूज़ नेटवर्क में दोस्तों आपका
स्वागत है मैं हूं आपके साथ राशिद जहीर
उत्तर प्रदेश से सबसे बड़ी खबर कल से यह
चल रही है कि जैन चौधरी एनडीए में चले गए

अखिलेश यादव को छोड़ गए और इंडिया को बहुत
बड़ा यानी कि इंडिया गठबंधन को बहुत बड़ा
धज लगा है अखिलेश यादव का बयान भी आया है
हमने आपको बताया भी है उन्होंने कहा वो
बड़े समझदार व्यक्ति हैं पढ़े लिखे

व्यक्ति हैं और किसानों के दर्द लेने वाले
व्यक्ति वो कहीं नहीं जाएंगे लेकिन उनकी
तरफ से को खंडन भी नहीं आया है कल से मेन
स्ट्रीम मीडिया का चैनल चीख चीख के यह कह

रहे है कि इंडिया गठबंधन को सबसे बड़ा धज
नीतीश कुमार के बाद जैन चौधरी के रूप में
लग गया है लेकिन जैन चौधरी की तरफ से अभी
तक हमारे पास कोई ऐसा ऐसी चीज नहीं आई है

कि जिसे यह कहा जाए कि साहब हम यह कह दें
कि वह खत्म हो जाएगा जैन चौधरी चले जाएंगे
जैन चौधरी वो लाठियां भूल जाएंगे जो
लाठियां लगी थी खैर बात यह है कि जैन

चौधरी अगर चले गए हैं तो क्या इसमें
अखिलेश यादव गठबंधन की कोई ढिलाई है और
उनके जाने से क्या वजह समीकरण बनते हैं और
दूसरी बात यह कि अगर वह रहते तो कितना
ज्यादा फायदा पहुंचता देखो दोस्तों ऐसा है

नीतीश कुमार के जाने से तो इसमें कोई
दोराई नहीं कि बिहार के अंदर जो 3035 या
3025 सीटों का नुकसान महसूस हो रहा था
भारतीय जनता पार्टी को उसमें कुछ कमी आएगी

इतना नुकसान अब नहीं होगा लेकिन जैन चौधरी
जो हैं दो या तीन सीटों पे फर्क डालते हैं
चार सीटों के बारे में बताया जा रहा है कि
उनको ऑफर की जा रही है जबकि सात सीटें जो

हैं वो अखिलेश यादव दे चुके हैं उनको बता
चुके हैं लेकिन मुजफ्फरनगर की एक सीट है
उत्तर प्रदेश में उसके ऊपर अखिलेश यादव
इतने ज्यादा जाने शायद उसको सेफाई सीट समझ

बैठे थे भाई जब ये यहां के लोकल छत्र में
जब तक इनको आप आगे नहीं करेंगे गठबंधन में
कैसे जान पड़ जाएगी अभी तक तो अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी और बाकी तमाम दल कांग्रेस

आई को यह कहते थे कि व ज्यादा ध्यान नहीं
दे रहे गठबंधन पर हमको लिफ्ट नहीं मिल पा
रही है और अब ये छोटे-छोटे दल अखिलेश यादव
से नाराज हो रहे हैं अगर तो सवाल तो बनता
क्यों आप दो-चार सीटों की वजह से जैन

चौधरी जैसा जो वेस्ट यूपी चार वेस्ट यूपी
में चार-पांच सीटों पर फर्क डालता है उसको
नाराज क्यों करे दे रहे हैं भारतीय जनता
पार्टी तो अपनी कोई भी संभावना छोड़ती ही

नहीं है वो लगी हुई है अब मैं आपको
दर्शकों थोड़ा सा बता दूं कि ये जो जाट
समुदाय से आते हैं जैन चौधरी ये जाट बेल्ट
है ये चार-पांच शहरों में शामली कैराना

मुजफ्फरनगर मथुरा और यह जो तमाम जगह हैं
यह वाकई य जाट समुदाय का वोट निर्णायक
होता है लेकिन 2017 में और 2022 में मालूम
है आपको किसान आंदोलन होने के बावजूद भी

जाट समुदाय का वोट ज्यादातर बीजेपी पे गया
है अजीत सिंह हार चुके हैं जैन सिंह खुद
हार चुके हैं 2019 में वजह क्या रही वजह
यह है कि जाड़ समुदाय पिछले 30-35 साल से

भारतीय जनता पार्टी को वोट दे रहा है तो
कुछ ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है लेकिन
फिर भी एक डेढ़ लाख वोट जो है हर सीट पर
तीन-चार सीट पर जैन चौधरी की वजह से

इफेक्ट डाल सकते थे लेकिन अखिलेश यादव
उतनी तेजी से सम्मान देने का काम कर रहे
हैं या नहीं कर रहे वो बात अलग है लेकिन
बताया यह जा रहा है कि मुजफ्फर नगर सीट पर

जैंत चौधरी का कुछ मामला बिगड़ गया और वो
भाजपा की तरफ जा रहे हैं अखिलेश जी का
बयान आया कि नहीं वो नहीं जाएंगे और बड़े
समझदार व्यक्ति हैं नीतीश कुमार भी बड़े
समझदार व्यक्ति हैं प्रशासन बाबू कहा जाता

था लेकिन जब बड़ी ताकतें आ जाती हैं तो
छोटे-छोटे जो ताकतें होती हैं ना वो उसमें
सम्मिलित हो जाती हैं नदियां कभी भी सम र
को अपने अंदर नहीं समेट है समंदर नदियों

को समेट लेता है लेकिन कुछ झरने होते हैं
जो बिल्कुल कहीं नहीं जाते हैं वह अपनी
साफ शफाफ अपनी स्वच्छता के लिए जाने जाते
हैं वह नेता कहां बचे हैं लेकिन बहरहाल

नीतीश के जाने के बाद तो किसी भी नेता से
उम्मीद करना गलत है लेकिन एक बात यह जरूर
है कि गठबंधन को जितना बड़ा झटका गोदी
मीडिया बता रहा है उतना बड़ा नहीं लगेगा

जयंत चौधरी के जाने के बावजूद भी यह सीटें
पहले भी भारतीय जनता पार्टी के मजबूत गढ़
थे और आज भी मजबूत गढ़ हैं लेकिन वो वाली
जो केमिस्ट्री किसी जमाने में चौधरी चरण

सिंह और मुलायम सिंह की हुआ करती थी वो
शायद अब नहीं है आपको बता दूं दर्शकों
मैंने अपने प्रोग्राम में भी बताया कि
चौधरी चरण सिंह ने ही सबसे पहले मुलायम

सिंह को विधान परिषद भेजा था और मुलायम
सिंह ने ही सबसे पहले उनकी प्रतिमा
विधानसभा में लगवाई थी तो कहने का मतलब ये
कि वो केमिस्ट्री नहीं मालूम लेकिन अखिलेश
यादव के लिए गठबंधन के लिए थोड़ा सा धज तो

जरूर है लेकिन फिर भी यहां पर भारतीय जनता
पार्टी का वेस्ट यूपी में गढ है और यहां
का जाट समुदाय पहले से ही भारतीय जनता
पार्टी को वोट देता है जैन चौधरी के जाने
से मैं कह रहा हूं ना कुछ सीटों प एक दो

डेढ लाख का फर्क तो जरूर पड़ेगा लेकिन ये
अपनी सीटें नहीं बचा पाए थे पहले लेकिन
फिर भी बेहतर य ये होता कि अखिलेश यादव
सबको साथ लेकर चलने का अगर काम करते पांच
की जगह सात मांग रहे हैं सात की जगह 10

मांग रहे हैं अपना एडजस्ट कर कर के उनको
जिताया जा सकता था तो ये अपने वोट में ही
एक कभी कांग्रेस समाजवादी का वोट खत्म कर
देती है कभी समाजवादी जो है लोकदल का वोट

खत्म अपने वोट के अंदर एक दूसरे को लेना
लेकिन भारत जनता पार्टी का वोट अभी तक
अपनी जगह तटस्थ है वो नहीं हिल रहा है
उसको नहीं काटा जा रहा है आप जो है ना

पिछड़ों में अल्पसंख्यकों में और जो है
आपने पीडीए बनाया था दलितों में इसमें
लोकल क्षेत्र आप निकालिए उनको टिकट दीजिए
बाकी अल्पसंख्यक तो कहीं जाएगा थोड़ी वो

तो आप ही के पास रहना है कहां जाएगा वो जो
भी भारतीय जनता पार्टी को हराता हुआ
दिखेगा वहां चला जाएगा तो 20 फी जो वोट है
अल्पसंख्यक होगा नाकस वोट वो तो आप ही की

तरफ जाना है अखिलेश जी लेकिन आप भारतीय
जनता पार्टी के उस पिछले वोट सद लगाने की
कोशिश करें जाटों के वोटों में बनियों के
वोटों में पंडितों के वोटों में सद लगाने

की कोशिश करें जो परंपरागत भारतीय जनता
पार्टी का होता जा रहा है बड़ी खबर जैंत
चौधरी के जाने की खबर है उनकी तरफ से अभी
तक खंडन तो आया नहीं है अलबत्ता मेस्ट्री

मीडिया बता रही है संभव है वो चले जाए
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