Kahani Kursi Ki: Kisan Andolan का नया रूप, Sambhu Border टू रेल रोको अभियान | Farmer Protest Update - instathreads

Kahani Kursi Ki: Kisan Andolan का नया रूप, Sambhu Border टू रेल रोको अभियान | Farmer Protest Update

कानी कुर्सी की मैं बात करते हैं किसान
आंदोलन के पार्ट टू की अभी भी किसान शंभू
बॉर्डर पर यानी पंजाब और हरियाणा के
बॉर्डर पर डटे हुए हैं और हरियाणा के जरिए

दिल्ली आने की जिद्द पर आमादा है लेकिन आज
थोड़ा इनका आप कह सकते हैं कि रूप बदला
हुआ है अभी तक सड़क पर चल रहा था बवाल अब
रेल की पटरी पर पहुंच गया तस्वीरें देखिए

जरा आज रेल रोख आंदोलन किया गया है किसान
संगठनों की तरफ से और इसमें कई जगहों पर
जो है रेल खासकर पंजाब में रेलवे ट्रैक
बाधित करके रेल का रेल की आवाजाही जो है

रोकने की कोशिश की गई और वो रोकी गई है तो
ये आप देख रहे हैं तो ये धीरे-धीरे जो है
इसका स्वरूप बदलता भी जा रहा है और बढ़ता
भी जा रहा है लेकिन आज तीसरे दौर की
बातचीत होनी है केंद्रीय मंत्रियों और

किसान नेताओं के बीच में उम्मीद की जा रही
है कि इससे कोई हल निकलेगा लेकिन ऐसा क्या
ऑफर कर देगी सरकार जो पिछली दो वार्ताओं
में नहीं किया होगा और ये किसान नेता मान

जाएंगे या यह किसान नेता आज अचानक क्यों
झुक जाएंगे क्यों अचानक इनको सरकार की
बातों में कोई तर्क दिखाई देने लगेगा ये
समझ ये अभी फिलहाल नहीं कहा जा सकता
उम्मीद की जा सकती है कि आज जब ये लोग

बैठेंगे तो कोई बीच का रास्ता निकाल लेंगे
सरकार की तरफ से एक बात बिल्कुल स्पष्ट है
दो बातें बल्कि एक बात तो यह कि ये जो
एमएसपी पर गारंटी की बात कही जा रही है यह
उस स्वरूप में तो नहीं हो सकता जैसा किसान

चाहते हैं बातचीत के जरिए कोई बीच का
रास्ता निकाला जा सकता है दूसरा किसानों
की यह जिद कि वह दिल्ली आएंगे और दिल्ली
आकर के आंदोलन अपना करेंगे यहां मोर्चा
देंगे और यहां केंद्र से बात करेंगे यह

नहीं होगा बातचीत उसी तरीके से होगी जिस
तरीके से होती आई है इसके लिए सरकार
किसानों के दरवाजे पर जाने के लिए तैयार
है लेकिन यह नहीं हो सकता कि किसान अपने

ट्रैक्टर और पूरे जत्थे लेकर के आएंगे
ट्रैक्टर ट्रॉली हजारों और वो दिल्ली एक
बार फिर से बाधित कर देंगे बॉर्डर फिर से
दिल्ली के जाम कर देंगे जैसा 3 साल पहले

किया था तो ये बातें दो बातें बिल्कुल
स्पष्ट हैं आज बातचीत में क्या होता है ये
आपको पता चल जाएगा शाम तक लेकिन इस बीच जो
इस इस इस आंदोलन के किरदार निकल के आ रहे
हैं उसके बारे में हमको बात करनी चाहिए

हमने आपको कल ही बता दिया था कि इस बार ये
प्योर पंजाब की किसान संगठनों का आंदोलन
है इसमें हरियाणा के यूपी की या किसी और
स्टेट के किसान संगठन नहीं जुड़े हुए हैं

उसमें भी दो प्रमुख नाम हैं जो सामने आ
रहे हैं पूरे आंदोलन का मोर्चा दो नेताओं
ने संभाला हुआ है सरवन सिंह पंढेर और
जगजीत सिंह दलेवाल पंढेर किसान मजदूर
संघर्ष कमेटी के महासचिव हैं सतनाम सिंह

पन्नू ने किसान संघर्ष समिति से अलग होकर
2007 में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी बनाई
थी जिसमें पंढेर एक अहम भूमिका निभाते रहे
हैं उनके संगठन के एक बड़े उन्हें संगठन

के एक बड़े चेहरे के तौर पर देखा जाता है
पिछले किसान आंदोलन में पंढेर पर दिल्ली
हिंसा भड़काने का भी आरोप लगा था इससे
पहले वह भाकी उग्रह के साथ जुड़े रहे

किसान आंदोलन की बागडोर को संभालने वाले
दूसरे बड़े किसान नेता है जगजीत सिंह
दलेवाल इनका स्टेटमेंट मैं आपको भी पहले
सुनाऊंगा साल 2022 में इनके नेतृत्व में
पंजाब में बड़ा किसान आंदोलन हो चुका है

और किसानों की आवाज को बुलंद करने के लिए
उस वक्त इन्होंने भूख हड़ताल भी की थी
लेकिन यही जो शख्स है जगजीत सिंह दलेवाल
इनका एक वीडियो कल से लगातार वायरल है और

इस वीडियो में क्या कह रहे हैं कि साफ साफ
कह रहा है मोदी का ग्राफ राम मंदिर के बाद
बहुत चढ़ गया है समय बहुत कम है चुनाव में
अब यह ग्राफ हमको नीचे लाना है तोय जो
आंदोलन हो रहा है ये किसानों की मांगे

मनवाने के लिए हो रहा है या मोदी का ग्राफ
गिराने के लिए हो रहा है सुनिए जगजीत सिंह
दलेवाल की
बात मोदी दा ग्राफ बहुत मंदर दे करके ऊपर
चढ़ व नुकसान व ग्राफ डाउन आ सक है मैं

बहुत बारी पि कर बहुत बारी लो क
मौका बड़ा थोड़ा है ग्राफ उ बड़ा दिन सा
कोले थोड़ की थोड़े दिना विच ग्राफ
कर देखिए कल जब से य किसान आंदोलन शुरू
हुआ एक बात लोग पूछ रहे थे व यह कह रहे थे

कि चुनाव से दो महीना पहले इस किसान
आंदोलन की जरूरत क्यों चुनाव हो जाने दो
चुनाव में यह सरकार आएगी तो तब इससे बात
करना दूसरी सरकार आएगी तो उससे बात करना

चुनाव से दो महीना पहले क्यों ये आंदोलन
हो रहा था इसका जवाब शायद दलेवाल जी ने
कुछ दे दिया मोदी का ग्राफ गिराना है
हर्षवर्धन जी देखिए पहली बात तो यह कि

दल्ले वाल जी के साथ भी इस बार दूसरे
किसान नेता नहीं आए मतलब आमतौर पे यह नहीं
होता है हमने तो नहीं देखा भले वह आपस में
लड़ते झगड़ते रहे इनके पास लोग बहुत
ज्यादा नहीं होते हैं और हज 2000 4000 लोग

यह सच मैं बता रहा हूं पता नहीं कई बार
आश्चर्य होता है क्योंकि कोई इस तरह से
आतंक करने लगे अराजकता करने लगे तो वो
बड़ा दिखने लगता है वरना हर जिले में ऐसे

नेता है जिनके पीछे दो 4 हजार लोग आप कहिए
तो खड़ हो जाएंगे डीएम ऑफिस रोज घेते रहते
हैं वह दिल्ली में चर्चा की वजह नहीं बनता
उनके ऊपर क्योंकि किसान वाला ठप्पा नहीं

होता है तो इसलिए प्रशासन भी उनसे थोड़ा
कड़ाई से निपट है कानून व्यवस्था के तौर
पर निपट है इनसे कानून व्यवस्था के तौर पर
नहीं निपट रहा है हरियाणा पुलिस के कितने

जवान वह चले गए अस्पतालों में कितने को
चेहरे पर चोट आ गई शायद हो सकता है आजीवन
चेहरे पर दाग लग जाए कितने लोगों को दूसरी
जगहों पर चोट आई वो लोगों को नहीं दिख रहा

है अब जब इस तरह के बयान आते हैं जगजीत
सिंह दलेवाल अगर यह कह रहे हैं कि हम
नरेंद्र मोदी का ग्राफ नीचे ला लाना चाहते
हैं तो कई बार यह लगता है क्या आप जनता के

आदेश के खिलाफ अराजकता करना चाहते हैं और
तब यह सवाल भी खड़े होते हैं कि जो
माओवादी कर रहे हैं नक्सली कर रहे हैं या
जो देश के दूसरे हिस्सों में ऐसे लोग कर

रहे हैं उनसे आप कितना अलग हैं उनसे आप
कितना अलग हैं और यहां आप ध्यान से देखिए
तो कोई भी इनकी जितनी मांगे हैं उन मांगों
को आप देखेंगे तो आधार हीन होती है हर

दूसरे दिन बदलती है और मैं फिर से कह रहा
हूं पहली बार है कोई सरकार कि उसके टॉप के
मिनिस्टर्स वहां जा रहे हैं उनसे बात करने
जहां वो खड़े हैं यानी चंडीगढ़ जा रहे हैं

वो बार-बार वो चाहते तो अमृतसर और कहीं भी
और चले जाते यहां तो प्रतिनिधि मंडल आता
था चार-पांच लोगों का किसी भी आंदोलन में
और वो नॉर्थ ब्लॉक साउथ ब्लॉक या किसी

होटल में बैठकर बात होती थी तो सरकार
संवेदनशील है इस सरकार ने किसानों के लिए
जितना कुछ किया है और मैं फिर से कह रहा

हूं ये कोई मतलब जिसको कहते हैं कि सरकारी
स्कीम वाला मसला नहीं किसानों के जीवन के
लिहाज से वो सारी बातें खोल भूलकर

अगर दल्ले वाल जी ये कह रहे हैं तो इसमें
पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा दिखता है साफ-साफ
साजिश दिखती है और फिर इस बात से भी इंकार
नहीं किया जा सकता कि इसमें और पीछे से

बड़े लोग शामिल हो इंटरनेशनल कंस्पिरेशन
का भी हिस्सा हो पुनीत परींजा हमारे साथी

पुनीत जगजीत सिंह दिल्लीवाल तो खुलकर कह
रहे हैं मोदी का ग्राफ बहुत चढ़ गया राम
मंदिर बनने के बाद उसका ग्राफ डाउन करना
है हमारे पास समय बहुत कम है किसानों को
खड़ा कर दिया पुलिस वालों के सामने और
उनसे कहा कि तुम्हारे लिए एमएसपी लेने के

लिए जा रहे हैं और खुद मीडिया को बता रहे
हैं कि हमें तो मोदी को डाउन करना
है जी बिल्कुल बिल्कुल इस तरह के जो बयान
सामने आए उसके बाद से लगातार जो है एक मैं
कहूं तो पंजाब की क्या देश की सियासत भी

काफी गर्म हुई है क्योंकि लगातार यह सवाल
उठ रही थी कि आखिरकार दो दो महीने रह गए
हैं अभी कोड ऑफ कंडक्ट को महज 70-80 दिन
बचे उससे पहले इस तरह के आंदोलन की क्या

जरूरत है अचानक से ऐसा क्या हो गया
क्योंकि 3 साल से सब खामोश बैठे हुए थे
अचानक से ऐसा क्या हुआ कि एमएसपी पर
गारंटी चाहिए लगातार दो बार की बात वार्ता

हुई पहले कहा गया पहली जब वार्ता हुई थी 8
तारीख को उसमें कहा गया कि बातचीत बनती
हुई नजर आ रही है सब कुछ ठीक है उसके बाद
जब अगली बैठक हुई तो उसमें कहा गया कि

एमएसपी और जो कर्ज माफी है उसको लेकर बात
अटक गई है हम दिल्ली कूज करेंगे 13 तारीख
को तो अब ये सवाल जरूर खड़ा होने लगा है
और जाहिर तौर पर जिस तरह से आज रेल रोकी

गई है टोल प्लाजा फ्री करा दिए गए हैं
धीरे-धीरे जो आंदोलन का दायरा है सौरव वो
भी लगातार बढ़ता जा रहा है तो आज का जरा
एक अपडेट भी दर्शकों को दे दीजिए शंभू

बॉर्डर पर क्या शांति है आज क्योंकि अ कई
जो दूसरे नेता हैं वो कह रहे थे कि हम
वहां पर आज बैठेंगे हम आगे बढ़ने की कोशिश
नहीं करेंगे लेकिन रे रेल रोकने हैं फिर

आज आपने बताया टोल प्लाजा भी फ्री कर द कर
दिए बिल्कुल बिल्कुल टोल प्लाजा बिल्कुल
सारे पंजाब में आज फ्री कर दिए गए है और
ये डल्ले वाल और जो सन सिंह पंधे है उनके
ग्रुप के द्वारा नहीं किया जा रहा है ये

बाकी जो किसान नेता हैं जैसे रावाल हो
ग्रहा हो उनकी तरफ से यह ऐलान किया गया है
क्योंकि वो भी अपने आप को किसानों के साथ
खड़ा होता दिखाई देना चाहते हैं भली वो इस

आंदोलन में पार्टिसिपेट नहीं कर रहे लेकिन
उनके पास भी एक मजबूरी है कि वो किस तरह
से इस आंदोलन से अलग रखते हुए फिर भी अपने
आप को किसानों के साथ जोड़ कर दिखाए और

यही उनकी मजबूरी है कि आज उन्होंने रेल
रोको और टोल प्लाजा जो है वो बंद करने का
ऐलान किया है लेकिन इस शंभू बॉर्डर पर वो

उनके साथ नहीं है हालांकि शंभू बॉर्डर पर
आज शांति बनी हुई है जिस तरह से हमेशा
वहां पर धूम धड़ाके की आवाज आती थी आज
सुबह से ऐसी नौबत तो फिलहाल नहीं आई है
हां यूथ जरूर बॉर्डर के पास जाते हैं और

वो वापस आ जाते हैं अब उनके हाथ में पत्थर
नहीं है कि वो सुरक्षा बलों को ललकार रहे
हैं इस तरह की कोई स्थिति नहीं है आज पूरी
तर से शांति जो है वहां पर बनी हुई है ठीक

है पुनीत अब मतलब किसान नेताओं के बीच में
भी एक होड़ दिखाई दे रही है ये दो नेता जो
है सरवंत सिंह पंढेर और ये जगजीत सिंह
दलेवाल ये शंभू बॉर्डर पर किसानों को लेकर
के आए हुए हैं तो बाकी जो किसान नेता

उन्होंने कहा हम पीछे क्यों रहे उन्होंने
किसी ने रेल रोक दिए किसी ने टोल प्लाजा
फ्री करा दिया देखिए बड़ा शक तो साफ तौर
से पैदा होता है कि इस वक्त क्यों और

दूसरी यह भी बातें जैसे अभी जो इनके नेता
बोल भी रहे थे देखिए ऐसा इनके आंदोलन से
ऐसा लग रहा है सिर्फ किसान जो है वो पंजाब
और हरियाणा में ही है और खास तौर से पंजाब

में ही ऐसा मत बोलिएगा बहुत गालियां
पड़ेंगी सोशल मीडिया पर आप अब मैं ये बोल
रहा हूं मध्य प्रदेश का किसान तो मुझे
नहीं दिख रहा कि एजीटेशन में शामिल है

उत्तर प्रदेश के ज्यादातर किसान नहीं है
मैं सिर्फ यही थोड़ा फसलें उगाते हैं
फसलें तो साउथ इंडिया भी उगाता है फसलें
तो बाकी लोग भी उगाते हैं तो सारे किसान

तो ऐसे नहीं है कि वो आके यहां बैठ गए हैं
कि चलिए अब ये करें और देखिए जो लोकतंत्र
है उसमें तरीका होता है अगर ये यह कहते कि
अच्छा जो पार्टी हमारी मांगे ये मानेगी हम

इन चुनावों में चुनाव तो आने वाले हैं इन
चुनावों में उनको वोट करेंगे तो बात समझ
में आती है आप जाके वहां पर पत्थरबाजी

करेंगे आप वहां जाके सड़कें रोकेंगे आप
रेल रोकेंगे और वह भी जब चुनाव आने वाला
है इससे पहले तो शक तो पैदा हो गई आपकी
मंशा जी तो इसमें तो कोई शक छोड़ा ही नहीं
है दलेवाल जी ने साफ कहा मोदी का ग्राफ

हमको डाउन करना है मतलब अच्छा ये तो अब या
तो ये पॉलिटिकल आदमी होते अब ये ये हमसे
पूछेंगे तो ये तो कहेंगे मैं तो किसान
नेता हूं तो फिर ये इनसे को कोई नेता ही

कलवा रहा है कोई पार्टी खड़ी है इनके पीछे
इसका मतलब यही तो मतलब निकाले जिस बात का
शक्क था उसके ऊपर जगदी सिंह डल्ले वाला ने
मोह लगा दिए कि प्रधानमंत्री मोदी का

ग्राफ बढ़ गया है उसे कम करना है इसका
मतलब बहुत साफ-साफ है कि इस किसान जो
आंदोलन की बात कर रहे हैं इसका मकसद
किसानों का भला करना नहीं है सरकार से कोई

वार्ता नहीं करना है अराजकता फैलाना है
केंद्र सरकार को बदनाम करना है और चुनाव
तक यह माहौल बनाना है कि प्रधानमंत्री
मोदी की किसान विरोधी छवि बने जिससे
विपक्ष को फायदा हो और ये तो तय था कि जब

पिछली बार जब इनका आंदोलन चला था उस समय
जिस तरह की हरकतें हुई थी जैसे ता का
माहौल क्रिएट कर दिया गया था लाल किले पर
जिस तरीके से हुआ था सबने देखा अब उसके

बाद ये पार्ट टू लेकर आए चुनाव के 60 दिन
पहले इसका माहौल बनेगा पंजाब के अंदर और
पूरे देश के अंदर सरकार की छवि खराब होगी
मुझे लग रहा है कल जिस तरीके से कनाडा के

जो झंडे और बाकी सब चीजें आई थी ये बताता
है कि इस आंदोलन के पीछे कौन लोग फंडिंग
कर रहे हैं किसका राजनीतिक स्वार्थ है कौन

चाहता है कि देश की केंद्र सरकार की छवि
खराब हो मोदी की छवि खराब हो देश दुनिया
के अंदर और किस तरीके से विपक्ष जो चाहता
है कि चुनाव के पहले प्रधानमंत्री मोदी की

सरकार को स्थिर किया जाए उसके लिए लोग ये
उनके हाथ के खिलौना बन रहे है मुझे कल से
एक एक व्यक्ति जो है और ट्रेंड कर रहा है
इसी आंदोलन के के सिलसिले में लेकिन वो

कोई किसान नेता नहीं है वो है हरियाणा के
चीफ मिनिस्टर मनोहर लाल खट्टर खट्टर साहब
को बहुत सारे लोग जो कि जो समझते हैं कि
किसान आंदोलन जो है वो उचित नहीं है उनमें
उनको खट्टर साहब में हीरो दिखाई दे रहा है

य खट्टर ने संभाल लिया है खट्टर इस खट्टर
जी जो है इस बार इनको जो है कई अराजकता
नहीं करने देंगे और देखो पंजाब में तो
भगवंत सिंह मान ने जो है खुली खुली खुली

सड़क दे दी थी इनको रेड कारपेट दिया था
जाओ जहां तक जाना है तुमको खट्टर के खट्टर
का राज्य शुरू होते ही खट्टर साहब ने
पुलिस लगाई और रोका इनको देखिए मुझे लगता

है कि इस इस मामले में मनोहर लाल खट्टर जी
को पूरे नंबर देने चाहिए उनके साहस के लिए
उनके साथ हर उस व्यक्ति को खड़ा होना
चाहिए जो संविधान लोकतंत्र में यकीन रखता

है और एक बात आप समझिए अभी मैं रिपोर्ट्स
देख रहा था अभी जब ये आंदोलन बड़ा होगा तो
वो रिपोर्ट हर जगह आएगी और चलेगी भी हम उस
पर चर्चा करेंगे प्रतिदिन 100 करोड़ का

कारोबार वो खतरे में जा रहा है वो पानी
में जा रहा है पंजाब का किसान जो भी जो
सीजनल चीजें या जिसको हम जिसको कहते हैं
ना कि पेरिशेबल जो जिसको फूड आइटम है वोह

प्रोड्यूस कर रहा होगा जो दो दिन तीन दिन
चार दिन छ दिन में खराब हो जाती है वह सब
ट्रक में पड़े पड़े सड़ जाएगा हिमाचल से
जो सेब आना होगा दूसरी चीजें आनी होगी
दूसरे देश के दूसरे हिस्सों में नहीं आ

पाएगी मध्य प्रदेश से अभी एक किसान का कल
मेरे पास संदेश आया कि हमारा लहसुन तैयार
है देश भर में जाना है क्या हम किसान नहीं
है क्या क्या हमारी कोई मांग नहीं सुनेगा

क्या हमारा जो उत्पादन है वह सड़ जाए उसकी
चिंता किसी को नहीं है क्या और इसके आगे
सोचिए पंजाब में कोई कंपनी कारोबार लगाने
से डरेगी अगर हर साल दो साल पर ऐसे बंद हो

जाएगा तो उसका तो पूरा उद्योग धंधा चौपट
हो जाएगा किसके घर के बच्चों को नौकरी
नहीं मिलेगी पंजाबियों के घर के बच्चों को
नौकरी नहीं मिलेगी जो वैसे ही इमीग्रेशन

के लिए कनाडा के लिए लाइन लगाए हुए खड़े
हैं पहले से ही वहां की कोई अर्थव्यवस्था
नहीं रह गई है और उस अर्थव्यवस्था को इस
तरह के आंदोलन इस तरह के एनआर की अराजकता

और ज्यादा चौपट करती है और जब उसमें दल्ले
वाल जैसे लोग ये बोलते हैं हम तो ग्राफ
डाउन कर रहे हैं किसान कभी किसी का ग्राफ
डाउन या अप करने के लिए होता है किसान
सिर्फ खेती बढ़ाने के लिए पैदावार बढ़ाने

के लिए होता है वह सोचता है कि हमारा अनाज
देश के हर व्यक्ति का पेट भरे और देश में
समृद्धि लाए यह समृद्धि के खिलाफ काम करने
वाले लोग हैं खट्टर जी का हमने नाम लिया
जरा मनोहर लाल टट्टर की बात भी सुनिए आप

हरियाणा के
मुख्यमंत्री एक तरफ तो व आक्रमण आक्रमण
टाइप जैसा होता है ज कोई एक सेना आक्रमण
करने के लिए चलती है इस प्रकार का माहौल
बनाना और उसमें भी यानी ट्रैक्टर टॉली

जेसीबी हड ड्र और क्या क्या लेकर चलना और
एक एक साल का राशन लेकर चलो यानी य जो
आवान किया जाता तो इसके अंदर हमें
नागरिकों की सुरक्षा उनकी भी सुरक्षा

चाहिए नागरिकों को भी चाहिए इसलिए उनका जो
तरीका है उस तरीके पर ही आपत्ति है दिल्ली
जाने में आपत्ति नहीं है आखिर ट्रांसपोर्ट

पब्लिक ट्रांसपोर्ट है ट्रेन है या बसेस
है या अपने वाहन लोगों के उसम जाए लेकिन
ट्रैक्टर जो है नट मोड ऑफ ट्रांसपोर्ट यह
ट्रैक्टर जो होता है और जो इस प्रकार से

उसकी तैयारी करके जाना ये एक हमारा
एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट
है बात तो बहुत लॉजिकल की खटर साहब ने भाई
ट्रेन बस से जाओ कार से जाओ ट्रैक्टर लेकर
के क्यों जाना चाहते हो और जाओगे अगर

उसमें लाठी डंडा भी रखे हुए हो तो हम तो
रोकेंगे खट्टर साहब की भूमिका क्या कहना
है समीर जी मुझे लगता है खट्टर साहब ने जो
कहा बहुत सही कहा है लेकिन अगर ट्रैक्टर

नहीं लेके जाने देंगे तो जो उनको कर्तव्य
दिखाना है जो लास्ट टाइम कर्तव्य दिखाए थे
ट्रैक्टर की दम पर वो कैसे दिखा पाएंगे
सरकार तो कह रही है आप पैदल जाइए बसों से

जाइए बात कीजिए जहां जाना है आपको लेकिन
ट्रैक्टर ला इसलिए जा रहे हैं कि राशन रख
के जाएंगे छ महीने दिल्ली को बंधक बनाएंगे
दिल्ली के अंदर जहां इच्छा होगी वहां

फुटपाथ पे दुकान पे लाल किले पे ट्रैक्टर
चढ़ा देंगे तो मुझे लग रहा है कि इसके
पीछे का जो उद्देश्य है वो देश की जनता अब
समझ रही है धीरे-धीरे जनता को समझ में आ

रहा है कि ये किसानों का आंदोलन नहीं है
मुट्ठी भर लोगों का आंदोलन है जो पूरे देश
को और दिल्ली को बंदग बनाना चाहते हैं
किसान आंदोलन के आ में अब देश की जनता समझ

रही है किसान और किसानों की आड़ में जो
लोग इसको शह दे रहे हैं और जो उसका
नेतृत्व कर रहे हैं उनको जितने जल्दी है
समझ में आ जाए उतना अच्छा उनके हित के लिए
भी अच्छा होगा अब हरियाणा सरकार उन्हें

आगे आने देगी नहीं केंद्र सरकार उसके बाद
भी उनकी मंशा को जानते हुए भी कि इनका
मकसद क्या है केंद्र सरकार बात कर रही है
पहले भी बात कर चुकी है पा घंटे चंडीगढ़
में आज फिर उनसे बात करने चंडीगढ़ पहुंच

गई है मुझे लग रहा है केंद्र के धैर्य की
परीक्षा किसान कब तक लेते रहेंगे मुझे
लगता है केंद्र सरकार बात करेगी तो कोई ना
कोई समस्या का हल निकलना चाहिए देखिए शाम
तक क्या होता है जब ये बातचीत का तीसरा
दौर पूरा होगा किसानों और सरकार के बीच
में

Leave a Comment