Lalu Yadav ने बढ़ाई मोदी की टेंशन, बिहार में शुरू हुआ नया खेल - instathreads

Lalu Yadav ने बढ़ाई मोदी की टेंशन, बिहार में शुरू हुआ नया खेल

कहा जाता है कि सियासत
संभावनाओं का खेल है राजनीति संभावनाओं का
खेल है लेकिन बिहार की राजनीति में
संभावनाएं कुछ जल्दी ही पनप जाती है और आज
जो सियासी संभावना पनपती हुई दिखाई दे रही

है या आज जो सियासी संभावना पनपी है उससे
भारतीय जनता पार्टी की नींद उड़ जाएगी या
उड़ गई होगी जो तस्वीर आज बिहार विधानसभा
परिसर में दिखी है उसने भारतीय जनता

पार्टी को चिंता में जरूर डाल दिया होगा
एक तो नीतीश कुमार की फितरत पाला बदलने की
इस बात की कोई गारंटी नहीं कि नीतीश कुमार
अब भारतीय जनता पार्टी के साथ ही रहेंगे
अब पाला नहीं बदलेंगे और तब भी गारंटी

नहीं जब नीतीश कुमार खुद ही यह कह रहे हो
कि अब बहुत इधर-उधर हो गया दो बार इधर-उधर
हम चले गए थे अब इधर-उधर नहीं होंगे नीतीश
कुमार ने तो यह कम कहा है कि दो बार इधर

उधर हो गए थे अब नहीं होंगे नीतीश कुमार
ने तो कहा था मर जाएंगे लेकिन उनके साथ
नहीं जाएंगे नीतीश कुमार ने कहा था मिट्टी
में मिल जाएंगे लेकिन उनके साथ नहीं
जाएंगे तो नीतीश कुमार के इधर उधर होने की

कोई गारंटी नहीं है और मोदी की गारंटी
वाले बीजेपी के साथ जाने पर भी यह गारंटी
नहीं नीतीश कुमार पाला नहीं बदलेंगे बल्कि
नीतीश कुमार ने पाला बदले बदलने के संकेत

दे दिए हैं और इतनी जल्दी संकेत दे देंगे
नीतीश कुमार यह तो भारतीय जनता पार्टी ने
भी नहीं सोचा
होगा मेरे सामने वह जो विधानसभा

अंदर जो खेल चला
है और उसके बाद आज की जो तस्वीर है तो फिर
यह बात कही जा सकती है कि यह सब कुछ इतना
जल्दी हो जाएगा कौन सोच सकता है
अब सवाल है कि आप पूछेंगे ऐसा क्या हो गया

आपके जहन में सवाल होगा कि ऐसा क्या हो
गया जिसकी वजह से हम इस तरह की बात कर रहे
हैं माफ कीजिएगा भूमिका थोड़ी लंबी हो गई
नीतीश कुमार के बारे में बात कर रहे थे

बिहार के पॉलिटिकल ड्रामे पर बात कर रहे
थे और बिहार में आने वाले दिनों में
सियासत की जो संभावनाएं हैं और जिन नई
संभावनाओं ने जन्म लिया है हम उस पर बात
कर रहे थे इसलिए भूमिका लंबी हो गई बात

दरअसल यह है कि लालू और नीतीश कुमार की
मुलाकात हुई है आज बिहार विधानसभा के
परिसर में मुलाकात होना कोई आम कोई हैरानी
वाली बात नहीं है कोई अचरज वाली बात नहीं
है लेकिन जिस तरीके से मुलाकात हुई है

उसके सियासी मायने हैं भले कोई यकीन करें
ना करें और गलती से भी आप इस मुलाकात को
हल्के में लेने की कोशिश मत कीजिएगा जिस
तरह की मुलाकात है और जिस तरह से यह

मुलाकात है उसके राजनीतिक मा है उसका अपना
एक राजनीतिक मतलब है और यह मुलाकात और इस
तरह की मुलाकात झटका है भारतीय जनता
पार्टी के

लिए नीतीश कुमार अछूत नहीं है बिहार की
सियासत में भाजपा का गठबंधन बीजेपी से
आरजेडी से नहीं हो सकता और आरजेडी का
गठबंधन बीजेपी से नहीं हो सकता नीतीश
कुमार का तो हो ही सकता है फिर आरजेडी से

अगर आरजेडी छोड़कर वह बीजेपी के साथ आ
सकते हैं तो बीजेपी छोड़कर आरजेडी के साथ
भी जा सकते हैं और आज इन्हीं संभावनाओं ने
जन्म लिया है इसी संभावना ने जन्म लिया है

लालू यादव और नीतीश कुमार आज आमने सामने
थे लालू यादव अपने राज्यसभा उम्मीदवारों
के नामांकन के लिए विधानसभा पहुंचे थे और
अपने आप में यह भी एक मैसेज है कि लालू
यादव किस तरह से एक्टिव हैं कि अपने

उम्मीदवारों को साथ लेकर वह खुद पहुंचते
हैं विधानसभा चाहते तो तेजस्वी यादव
पहुंचते तेज प्रताप यादव पहुंचते तेजस्वी
तेज प्रताप थे रावड़ी देवी थी लेकिन लालू

भी पहुंचे थे और जाहिर है विधानसभा का बजट
सत्र चल रहा है तो लालू यादव का सामना हो
गया नीतीश कुमार का या नीतीश कुमार का
सामना हो गया लालू यादव से और यह पहली

मुलाकात थी तब जब नीतीश कुमार ने आरजेडी
का साथ छोड़ा उसके बाद से आज लालू यादव
नीतीश कुमार पहली बार आमने सामने थे और
बहुत औपचारिक मुलाकात नहीं
थी बहुत गर्म जोशी के साथ नीतीश कुमार
लालू यादव से

मिले और लालू यादव भी जिस तरीके से नीतीश
कुमार से मिले ऐसा लगता है कोई तल्खी नहीं
है कोई नाराजगी नहीं है कोई करवा हट नहीं
है नीतीश कुमार के लिए और तब भी नहीं है

जब नीतीश कुमार ने गच्चा दिया और वह
इंडिया गठबंधन से एनडीए गठबंधन में आ गए
अगर कोई नाराजगी नहीं है और इस तरह से
गर्मजोशी वाली मुलाकात आगे भी होती रही तो
फिर भारतीय जनता पार्टी की चिंताएं तो

बहुत बढ़नी वाली बढ़ने वाली हैं और फिर
क्यों ना यह मानकर चला जाए कि भाजपा के
ग्रह नक्षत्र खराब है देखिए नीतीश कुमार
ने भले ही यह कह दिया हो कि अब इधर उधर

नहीं जाएंगे लेकिन नीतीश कुमार के साथ
दिक्कत क्या है और नीतीश कुमार की जरूरत
क्या है इसको भी समझने की जरूरत
है नीतीश कुमार को 43 का आंकड़ा और 45 है

2020 के विधानसभा चुनाव में व 43 सीट जीते
थे लेकिन एक लोजपा के विधायक उनके साथ आ
गए और एक बसपा के विधायक उनके साथ आ गए
जमा खान और राजकुमार सिंह राजकुमार सिंह

लोजपा के और खान बसपा के तो 45 की संख्या
हो गई लेकिन नीतीश कुमार को यह 45 का
आंकड़ा बहुत परेशान करता
है यह किसी टीज की तरह है नीतीश कुमार के

लिए और इसीलिए नीतीश कुमार इस संख्या को
दोगनी करना चाहते हैं नीतीश कुमार को 80
के आसपास विधायक चाहिए 80 से ज्यादा
विधायक
चाहिए नीतीश कुमार पहले की स्थिति में आना

चाहते हैं अगर 45 से संख्या कम हुई
विधानसभा चुनाव में तो वो जानते हैं कि
पार्टी की क्या हालत हो हो जाएगी और अभी
पार्टी की क्या हालत है यह अभी बताने की
जरूरत नहीं

है तो पार्टी तब बचेगी जब साख बचेगी और
साख बढ़ेगी संख्या बढ़ेगी तो नीतीश कुमार
चाहते हैं कि आने वाले दिनों में जो
विधानसभा के चुनाव हो उसमें अब पता नहीं
इस साल होंगे इस समय से होंगे समय से
होंगे इसकी गुंजाइश कम है और इसी साल

होंगे तो जब भी होंगे नीतीश कुमार चाहते
हैं
कि उनके विधायकों की संख्या 80 या उससे
ज्यादा हो और तब जाकर वह गठबंधन में एक
मजबूत पोजीशन में होंगे यह बात जाहिर तौर

पर नीतीश कुमार को सालती होगी जब यह कहा
जाता होगा कि सीट 45 है तब भी वह
मुख्यमंत्री हैं इस तरह का तंज नीतीश
कुमार को बहुत चुपता होगा
इसीलिए नीतीश कुमार को जहां यह जरूरत पूरी
होती हुई दिखाई देगी आने वाले दिनों में

नीतीश कुमार उसी के साथ होंगे यह ब्रह्म
यह ब्रम पालने की जरूरत नहीं है यह
मुगालता पालने की जरूरत नहीं है कि नीतीश
कुमार और भारतीय जनता पार्टी की दोस्ती की
कोई एक्सपायरी डेट नहीं है इस दोस्ती की

भी एक्सपायरी डेट है और इस दोस्ती की भी
एक्सपायरी डेट आएगी आने वाले दिनों में
लालू नीतीश फिर दोस्त नहीं होंगे यह भी
कहना मुश्किल है और यह भी नहीं कहा जा
सकता दोस्त हो सकते हैं जिसके संकेत अभी

से मिलने शुरू हो गए हैं इतनी जल्दी मिलने
शुरू हो गए हैं और आज तो और जिस तरीके से
गर्मजोशी वाली मुलाकात हुई है और बिहार की
राजनीति का एक स्थापित सत्य तो यह है कि
नीतीश कुमार और लालू यादव ने मिलकर उतनी

सीटें 2015 के विधानसभा चुनाव में जीती है
जितनी की उम्मीद अभी नीतीश कुमार पाले हुए
हैं तो बिहार की राजनीति का एक स्थापित
सत्य नीतीश कुमार को लालू यादव की तरफ
मोड़ सकता है और दूसरी तरफ लालू यादव और

तेजस्वी यादव की जो रणनीति है वह भी इस
बात के संकेत देती है कि लालू यादव ने
नीतीश कुमार से भविष्य में दोस्ती का
विकल्प खुला रखा है तेजस्वी यादव ने सदन

में भाषण दिया नीतीश कुमार को लेकर कोई
ऐसी टिप्पणी नहीं की जो नीतीश कुमार को
बहुत चुप जाए बहुत बुरी लग जाए तेवर नरम
है आरजेडी नेताओं दूसरे नेताओं के तेवर

नीतीश कुमार को लेकर गर्म जरूर है लेकिन
तेजस्वी यादव के तेवर नरम है लालू यादव के
तेवर नरम है नीतीश कुमार को लेकर लालू
यादव
तो र पर भी एक्टिव रहते हैं सोशल मीडिया

पर भी एक्टिव रहते हैं लेकिन उन्होंने
नीतीश कुमार पर कोई हमला नहीं बोला है
उनका कोई बयान सामने नहीं आया वैसे भी और
आज भी जो जिस तरह की मुलाकात हुई है तो यह
सारी चीजें इस बात के संकेत है कि लालू

यादव तेजस्वी यादव की रणनीति यही है कि
नीतीश कुमार के साथ दोस्ती का विकल्प खुला
रखा जाए और फिर दूसरी तरफ नीतीश कुमार किस
तरह से मुस्कुराते हुए गले लग रहे हैं
लालू यादव के गले नहीं लगे लेकिन न पीठ पर
हाथ रखा और बहुत गर्म जोशी वाली मुलाकात

हुई तो जाहिर तौर पर यह सब भविष्य की
राजनीति के संकेत हैं और यह संकेत शुभ
संकेत भारतीय जनता पार्टी के लिए नहीं है
बहुत-बहुत
धन्यवाद

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