Modi के सिस्टम की सारी कलई खोल दी इस जज ने | मुसीबत में Amit Shah | Deepak Sharma | - instathreads

Modi के सिस्टम की सारी कलई खोल दी इस जज ने | मुसीबत में Amit Shah | Deepak Sharma |

नमस्कार  मेरे य मंच पर
आपका
स्वागत दोस्तों 76 बरस के आजाद हिंदुस्तान
में पहली बार फॉर द फर्स्ट टाइम इन
इंडिपेंडेंट इंडिया एक राज्य सरकार पर एक

स्टेट गवर्नमेंट पर सीधे-सीधे इल्जाम लगाए
कि वह दुष्कर्म यों के साथ हथियारों के
साथ खड़ी हुई है और यही नहीं इस सरकार ने
इस राज्य सरकार ने इन हत्यारों को इन हरों

को फ्रॉड तरीके से जेल से बाहर निकाला
यानी इनकी रिहाई कराई अब इत्तफाक यह है कि
यह जो राज्य सरकार है य गुजरात सरकार है
स्टेट गवर्नमेंट ऑफ गुजरात और इत्तफाक यह
भी है कि यह जो राज्य सरकार है इन दो

साहिबान के हाथ में जो लगाम है सरकार की व
इन दो साहिबान के हाथ में नरेंद्र मोदी और
अमित
शाह अब यह भी इत्तफाक है कि जब यह बिलकिस
बानो की घटना यह जो भयानक हादसा है जिसमें

दुष्कर्म हुआ हत्याएं हुई बेदर्दी के साथ
2002 गुजरात में उस वक्त अब यह भी
इत्तेफाक है कि यह जो साहब हैं तब गुजरात
के मुख्यमंत्री थे इनके मुख्यमंत्री के
दौर

में यह घटना हुई दुष्कर्म की हत्याओं की
और यह भी इत्तेफाक है अजीब इत्तेफाक है कि
जब यह हत्यारे छोड़े रिहा किए
गए उस वक्त जो देश के गृह मंत्री थे गृह
मंत्री हैं वह यह साहब 2022 में अमित शाह

इनके मंत्रालय के आदेशों के आधार पर ही यह
हत्यारे जेल से बाहर लाए गए अब दोस्तों आज
बात सिर्फ बिलकिस बानू के इस बेइंतहा दर्द
की नहीं करूंगा मैं आज बात मैं दरअसल उस

सिस्टम की करना चाहता हूं जो आज की तारीख
में मोदी और शाह के हाथ में वो सिस्टम
जहां हत्यारे रिहा किए जाते हैं और
हथियारों को जहां मंच पर हीरो बनाया जाता
है मैं उस सिस्टम पर आऊंगा उसकी परते

खोलूंगा लेकिन मैं सबसे पहले जिक्र करना
चाहता हूं इस महिला का इस महिला जज का
जिसकी हिम्मत को सलाम है सलूट है बीवी नाग
रत्ना जस्टिस बीवी नाग रत्ना और इन्होंने

आज बड़ी हिम्मत करके जिस तरह से फैसला
दिया है जिस तरह से चोरी पकड़ी है रंगे
हाथ या यूं कहे जिस तरह से राज्य सरकार की
धज्जियां उड़ा द इनको सलूट है और इस महिला
जस्टिस के साथ-साथ बीवी नाग रत्ना के

साथ-साथ
जस्टिस उज्जवल बुहान जो है जो उनके साथी
जस थे इनको भी सलूट है जिन्होंने इस दौर
में इतनी हिम्मत दिखाई यह फैसला देने में
उस दौर में जहां सारा सिस्टम अदालतें
कॉरपोरेट मीडिया नौकरशाही सब कुछ जहां इन

दोनों के हाथ में है उस दौर में इन दोनों
जजों ने वाकई हिम्मत दिखाई
है अब दोस्तों मैं सीधे सवाल पर आता हूं
मोदी के सिस्टम पर सवाल जो आज के दौर में

गोती मीडिया सवाल उठाने से घबराती है मैं
उसी सवाल पर आ रहा हूं सवाल नंबर एक मेरा
यह है कि यह जो 11 दरिंदे थे ये जो दरिंदे
थे जिनको जेल से छोड़ा गया किया गया और
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि फ्रॉड था वो

यह जो रिहाई हुई क्या यह रिहाई के पीछे
इलेक्शन का गेम था क्योंकि अगस्त में जब
रिहाई हुई उसके बाद गुजरात में चुनाव थे
बड़े क्रुशल चुनाव थे क्या इन हत्यारों के
जरिए जिस तरह से बीएचपी ने आरएसएस ने

बीजेपी ने इनके गलों में माला डाली क्या
कम्युनल पोलराइजेशन क्या सांप्रदायिक
ध्रुवीकरण किया गया और एक रिहाई की जो
टाइमिंग थी वो कहीं ना कहीं इलेक्शन से

जुड़ रही थी इलेक्शन के खेल से जुड़ रही
थी और सवाल नंबर दो इन दरिंदों की
दुष्कर्म यों की रिहाई के
पीछे दिल्ली में गृह मंत्रालय जी हां वह
गृह मंत्रालय जिसके बिग बॉस अमित शाह है

क्या उसकी एक अहम भूमिका है क्या उसकी
भूमिका है जिस पर गोदी मीडिया चुप
है अब दोस्तों देश के मौजूदा सिस्टम को
समझने के लिए या यूं कहूं मोदी जी के

सिस्टम को समझने के लिए मुझे लगता है ये
कहानी आपको समझना जरूरी है और इससे आपको
एक अंदाजा हो जाएगा कि मोदी जी का सिस्टम
ऑपरेट कैसे करता है तो बात शुरू करते हैं
अमित शाह के मंत्रालय से वो मंत्रालय
जिसके आदेश के आधार पर यह रिहाई मुमकिन

हुई है तो बात 2022 की और 2022 में देश
में आजादी के 75 बरस मनाए जा रहे थे और
मोदी जी ने उसको नाम दिया आजादी का अमृत
महा उत्सव अब इस अमृत महोत्सव में अमित
शाह साहब ने 10 जून 2022 को तारीख नोट

करिए 10 जून 2022 को अमित शाह ने चिट्ठी
लिखी देश के सभी मुख्यमंत्रियों को और
चिट्ठी में कहा कि भाई अगर आपके प्रदेश
में कोई कैदी है जो आपको लगता है अनुशासित

है उस पर जुर्म थोड़े कम हैं तो आप उनको
रिलीज कर सकते हैं एक लिस्ट भेजिए और अगर
कोई केस सीबीआई का है या एनआईए का है
जिसमें देश की कें एजेंसी शामिल है आप
मुझे चिट्ठी भेजिए और मैं उनको रिलीज कर

सकता हूं लेकिन यहां पर अमित शाह ने एक
शर्त रख दी उन्होंने कहा कि वह कैदी वह
सजायाफ्ता
वह
कन्विसिटी डिस्पैच करती तो कुछ ही दिन बाद
28 जून को गुजरा गु सरकार ने गुजरात सरकार
ने अमित शाह के मंत्रालय में एक चिट्ठी
भेजी और कहा कि साहब ये जो 11 कैदी हैं

बिलकिस बानों के जो बड़े अनुशासित हैं और
हमारे गोधरा जेल में बंद हैं और सीबीआई के
केस में यह
पर 10 अगस्त को 10 अगस्त को आप कह सकते
हैं कि गुजरात सरकार ने अमित शाह के
मंत्रालय के आदेश के आधार पर अप्रूवल के
आधार पर इन 11 कैदियों को रिहा कर दिया

उसके बाद फूलमाला जो आपने देखी उनके गले
में डाली गई फिर तो पूरा गुजरात में उत्सव
बनने लगा यह जो आप कह सकते हैं दुष्कर्मी
थे यह रातों रात नायक बना दिए

गए अब दोस्तों अगर इस पूरे मामले को आप
गौर से देखेंगे तो कहीं ना कहीं गृह
मंत्रालय की जो भूमिका
है संदे के घेरे में सवालों के घेरे में
और शायद द हिंदू अखबार ने सबसे पहले इस पर
खबर लिखी और आज विपक्ष ने भी इस मुद्दे को

उठाया कि गृह मंत्रालय ने गृह मंत्रालय ने
जब एक आदेश दे दिया था अमित शाह ने जब
आदेश दे दिया था कि दुराचार के मामले में
दुष्कर्म के मामले में संगीन मामले में
किसी भी कैदी की रिहाई नहीं

होगी तो फिर बिलकिस बानो का जो हादसा था
जो इतनी भयानक घटना थी वारदात थी वो फिर
किस तरह की वारदात थी क्या वो जेब काटने
की वारदात थी क्या फिर वो एक छोटी सी चोरी
की वारदात थी वो क्या वारदात थी जिसमें

दुष्कर्म हुआ जिसमें हत्याएं
हुई मल्टीपल क्राइम हुआ हिनस क्राइम हुआ
ऐसे अपराध में ऐसे जगन्य अपराध में फिर
कैसे अप्रूवल होम मिनिस्ट्री ने दे दिया
उसी होम मिनिस्ट्री ने जिसने दो महीने

पहले तीन महीने पहले चिट्ठी लिखी थी कि हम
दुराचार के मामले में हम संगीन मामले में
किसी को रिहाई नहीं देंगे और शायद आज यही
सबसे बड़ा सवाल है जो अमित शाह जी के अमित
शाह के मंत्रालय पर एक बड़ा सवाल खड़ा

करता है और विपक्ष भी इस सवाल को उठा रहा
है यह अलग बात है कि गोदी मीडिया इस सवाल
पर खामोश है यह दस्तावेज है किसका है
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया मिनिस्ट्री ऑफ होम
अफेयर्स
गिविंग सक्शन एंड कंक्रेंस
सक्शन एंड कंकर फॉर द प्रीमेच्योर रिलीज

ऑफ 11 नेम्स टूथ 4
11 इन महानुभावों का नाम
है आप पर्दे के पीछे छुप कहां रहे हैं आप
मुंह कहां छुपा रहे हैं भाग क रहे हैं अब

दोस्तो सवाल सिर्फ बिलकिस बानो का नहीं है
जहां सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही जबरदस्त
आदेश में बहुत हिम्मत वाले आदेश में जहां
गुजरा रात सरकार को कटघरे में खड़ा कर
दिया सवाल सिर्फ बिल्किस बानो तक का नहीं

है सवाल है कि क्या इस देश में मोदी जी का
सिस्टम ऐसे ही चल रहा है जहां जहां बीजेपी
का इवॉल्वमेंट है क्या सिस्टम ऐसे ही लचर
हो जाता है झुक जाता है कानून के कोई

मायने नहीं रहते कानून ताक पर रख दिया
जाता है मिसाल के तौर पर अगर आप ब्रज भूषण
साहब का केस देखिए अब यह जो सांसद है
बाहुबली सांसद जिन पर दुष्कर्म के आरोप है
और यह आरोप इस देश में ओलंपिक खिलाड़ियों

ने लगाए थे चैंपियन बेटियों ने आरोप लगाए
थे वो धरने पर बैठ गई
थी पहलवानों ने सन्यास ले लिया बेटियों ने
अपने मेडल वापस कर दिए किसी ने पद्मश्री
वापस कर दी लेकिन ब्रिज भूषण जेल नहीं गए

क्योंकि उत्तर प्रदेश में चार सीटें
बीजेपी को इनकी बदौलत मिलती तो चार सीटों
के लिए या यूं कहे दो तीन सीटों के

लिए महिलाओं को महिलाओं की शुद्ध नहीं ली
मोदी जी ने चैंपियन बेटियों की शोध नहीं
ली बेटियों ने सन्यास ले लिया लेकिन यह जो
बाहुबली है इसका बाल माका नहीं हुआ ऐसे

अगर आप एक केस और देखें बीएचयू का हाल
फिलहाल का जहां पर एक हमारी बेटी जो
आईआईटीए है बड़ी आप कह सकते हैं सुपर
इंटेलिजेंट बेटी आईआईटीए बीएचयू आईआईटी
में कैंपस में कैंपस के अंदर तीन लड़कों
ने सामूहिक दुष्कर्म किया कपड़े उतारे

वीडियो बनाया ब्लैकमेल किया लड़कों की
शिनाख्त भी हो गई और यूनिवर्सिटी में
कैंपस में धरने चलते रहे और वह जो तीनों
लड़के थे व जो आरोपी थे जिनकी सीसीटीवी

फुटेज में तस्वीरें आ गई थी वो लड़के
कैंपेन करते रहे मध्य प्रदेश में बीजेपी
के लिए कैंपेन करते रहे और बाद में पता
लगा कि मोदी जी के बनारस की कंसीट एंसी

में वह बीजेपी आईटी सेल के पदाधिकारी थे
ऑफिस बरर से की ऑफिशियल थे वो और एक महीने
बाद जब सीसीटीवी फुटेज लीक होने लगी और
कांग्रेस को और समाजवादी पार्टी को बनारस
में पता लग गया भनक लग

गई तो कहीं और ज्यादा बेज्जती ना हो जाए
साहब की इसलिए पुलिस ने फिर पकड़ के जेल
भेजाब जेल में सजा मिलती नहीं मिलती य मैं
आप पर छोड़ता हूं या समय पर छोड़ता हूं
बहरहाल यह बात सिर्फ बीएचयू की या ब्रिज

भूषण की नहीं है और भी कई मामले हैं जहां
बीजेपी का इवॉल्वमेंट आता है वहां सिस्टम
या तो झुक जाता है कंप्रोमाइज कर लेता है
या फिर जिस तरह से यह 11 लोग जिनको रिहा
किया गया सुप्रीम कोर्ट कह रही है फ्रॉड
ऑर्डर्स पे आपने एक फ्रॉड तरीके से एक

राज्य सरकार ने फ्रॉड तरीके से इनको जेल
से बाहर निकाला बहरहाल देश में सिस्टम
क्या ऐसे ही चल रहा है मीडिया चुपे मेन
स्ट्रीम मीडिया चुप है बड़े न्यूज़ चैनल

चुप है बड़े अखबार चुप है चाहे अंग्रेजी
के हो चाहे हिंदी के हो अदालतें चुप हैं
एजेंसियां जो है इन्वेस्टिगेशन एजेंसियां
व खामोश है वह चुप है क्या सिस्टम ऐसे ही
चल रहा है मुझे लगता है एक सेकंड ओपिनियन

इसमें लेना चाहिए क्योंकि बहुत बड़ा सवाल
है आज देश किस तरह चल रहा है किस दिशा की
ओर बढ़ रहा है और मुझे लगता है कि अशोक
वानखेड़े टाइगर से बेहतर और बेबाक इस
मुद्दे पर शायद ही कोई बोल पाए चलते हैं
सीधे टाइगर के पास टाइगर मेरा पहला सवाल

है यह जो पूरा बिलकिस का मामला था और
इसमें जिस तरह से जो दुष्कर्म के जो कैदी
थे जो कनविक्ट थे इनको जिस तरह से रिलीज
किया गया और गृह मंत्रालय ने यानी अमित
शाह के मंत्रालय ने और गुजरात के

मुख्यमंत्री के बीच जिस तरह की बातचीत हुई
जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बहुत तलक
टिप्पणियां की आपको लगता है सारा खेल
गुजरात लॉबी के था और गुजरात में चुनाव हो

रहा था और चुनाव को लेकर एक ध्रुवीकरण हुआ
आपको लगता है सारा खेल कहीं ना कहीं
इलेक्शन को लेकर था बड़ा ये बड़ा गेम था
ये ये बड़ा गेम था और जब चीज सामने आई तो

इतनी नोनी चीज सामने आ क्या चुनाव जीतने
के लिए आप इतने निचले स्तर पर उतर सकते
हो सवाल यह है कि गृह मंत्रालय स्वयं जो
पत्र लिखता है राज्य को सर्कुलर निकालता
है उसके बाद मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से

पत्र लिखते हैं उसके बाद होम सेक्रेटरी
रिमाइंडर देते हैं और कहते हैं कि आजादी
के अमृत महोत्सव में कैदियों को हम छूट
देना चाहते हैं यदि केंद्रीय जाच एजेंसी
के तहत कोई कैदी सजा पाता है तो आप हमको

लिस्ट भेजिए हम उस पर विचार करेंगे तीन
लॉट में कै दि छोड़ने की बात होती है 15
अगस्त 26 जनवरी 2022 और फिर 15 अगस्त
2023 पहला लॉट 23 33 लोगों का छूट जाता है
लेकिन उस सर्कुलर में भी एक राइडर था कि

12 कैटेगरी ऐसी है जिनके कैदियों को माफी
दी नहीं जा सकती उसमें एक कैटेगरी महिलाओं
के साथ दुराचार की भी थी
दुष्कर्म की दुष्कर्म की दुराचार की यह

यदि है उसके बाद गुजरात गवर्नमेंट लिखता
है और तुरंत उनको परमिशन मिलती है मतलब 28
जून को लेटर गुजरात गवर्नमेंट परमिशन
मांगती है बिलकिस बान के लोगों को छोड़ने
के लिए और

जुलाई को परमिशन मिलती है 15 अगस्त को
रिहा होते हैं उसमें कैच है मैं थोड़ा 30
सेकंड लूंगा और जो आफे डेविट जो अफ डेविट
दिया है गुजरात गवर्नमेंट ने उने यह कहा
कि हमने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत
नहीं
छोड़ा हमने

2000 हमने 1992 के राज्य सरकार के पॉलिसी
के तहत छोड़ा हम मान लेते हैं चलो उसम भी
मानते हैं जब उनको परमिशन दी तो सीआरपीसी
की
सेक्शन 435 के तहत य परमिशन दी गई
435 का सेक्शन य कहता है स्टेट गवर्नमेंट

को कोई कैदियों के बारे में य स्टेट
गवर्नमेंट का सब्जेक्ट है कैदी लेकिन यदि
कोई छूट के लिए कोई परमिशन कोई विचाराधीन
कदी है तो उसकी परमिशन केंद्र सरकार से
चाहिए अब मुझे बताइए जो गृह मंत्रालय

आजादी के अमृत महोत्सव जैसे पवित्र समय
मेंही कैदियों को छोड़ते समय महिलाओं के
साथ दुराचार व्यभिचार करने वाले कैदियों
को नहीं छोड़ना चाहता है वो बिल्किस बानो
के उन व्यभिचार हों को कैसे परमिशन देता

है इस सेक्शन के
तहत इसके मायने यह है हाथी के दात दिखाने
के और खाने के अलग है क्योंकि बिलकिस
बानों के उन व्यभिचार हों को बाहर

लाकर उसका सम्मान करना था और समाज को एक
मैसेज देना था यदि मुस्लिम धर्म की महिला
के साथ कोई दुराचार करता है यदि मुस्लिम
मुस्लिमों का कोई बिल्कुल

खतम करता है उनको मुस्लिमों को नेस्तनाबूद
करता है ऐसे लोगों को हम हिंदू राष्ट्र के
तहत उनका स्वागत करते हैं उनको रिलीफ
दिलवा हैं यह एक बताने का प्रयास किया
चुनाव में यह ध्रुवीकरण

हुआ आप तो बड़ी सरप्राइजिंग बात कह रहे
हैं आप कह रहे हैं कि साहब इसमें अमित शाह
का खेल है इसमें गृह मंत्र मैं तो देख रहा
हूं कि मोदी जी तीन तलाक की बात करते हैं

मुस्लिम महिलाओं को अपनी बहन मानते हैं कि
मुस्लिम महिलाओं को हक दिलाऊंगा और
प्रधानमंत्री ने मोदी जी ने उत्तर प्रदेश
में भी कहा कि मुझे बड़ा फक्र है कि मेरी
मुस्लिम बहनों ने जब से मैंने तीन तलाक की

बात करी य मुझे वोट दे रही है तो कहां तो
मोदी जी मुस्लिम महिलाओं की बात कर रहे
हैं अच्छाई की बात कर रहे हैं कहां वो
महिला बिल ला रहे आरक्षण ला रहे हैं हर
जगह महिलाओं की बात कर रहे हैं और आप कह
रहे बिल केस बानो वाले मामले में कैदियों

को फेवर दे दिया गुजरात लॉबी ने मेरा
सिंपल क्वेश्चन है दीपक भाई सवाल मैं आपको
पूछ रहा हूं गृहमंत्री को पूछ रहा हूं
दर्शकों के सामने सवाल छोड़ रहा हूं जो

गृहमंत्री आजादी के अमृत महोत्सव में भी
कैदियों को छूट देते समय यह कहते हैं कि
व्या भिचारी हों को छूट नहीं
मिलेगी वह गुजरात गवर्नमेंट की उस पत्र पर
कैसे छूट दे देते हैं कहां गए

एथिक्स क्योंकि आपको वहा हिंदू मुसलमान
करना था जब आपको महिलाओं का मतदान लेना
होता है तो महिला शक्ति वंदन अधिनियम याद
जाता है ली मना या जाती

है लेकिन फिर महिला खिलाड़ियों का शारीरिक
शोषण करने वाला गुंडा खुलेआम घूमता है
उनका एफर तक नहीं लिखाया जाता यह दिल्ली
में सरकार के नाक के नीचे होता है केंद्र
सरकार के नाक यही दिल्ली पुलिस थी
जिन्होने आर दर्ज नहीं किया सर्वोच्च

न्यायालय के पास जाना
पड़ा कौन से महिलाओ के प्रति प्रेम कौन सी
लाडली
बहना क्या बीएचयू के अंदर एक आईआईटी की
लड़के के साथ हुआ दुराचार साम विचार और

उसके बाद क्या होता है चौथे दिन आदमी
चिन्हित होते हैं लेकिन एक महीने तक उनको
प्रचार के लिए छोड़ा जाता है मध्य प्रदेश
के चुनावी प्रचार के लिए आज भी उसका उनको
पुलिस ने अपनी कस्टडी में नहीं लिया है आज

भी व जुडिशल डिमांड कस्टडी में है क्या
मायने है इसके र र र यद व्यभिचारी एक बात
है दीपक भाई व्यभिचारी भ्रष्टाचारी
दुराचारी राष्ट्र द्रोही इनका धर्म नहीं
होता इनकी जाति नहीं

होती य हर धर्म और हर जाति में पाए जाते
हैं इसलिए यह अलग है आप यदि दुराचार में
भी धर्म का भेद करेंगे भ्रष्टाचारियों में
धर्म का भेद करेंगे व्यभिचार में

भ्रष्टाचार का विद करेंगे तो फिर आप सरकार
नहीं चला रहे टाइगर टाइगर एक मिनट अमित
शाह है जिनके पास इतनी जिम्मेदारियां है
मोदी जी के सारे काम करने हैं चुनाव

संभालना है उनको चाणक कहते हैं होम
मिनिस्ट्री के बहुत से काम देखते
तमाम कागज पत्थर फाइल आती रहती है अब वो
तो किसी अमित शाह के बाबू ने परमिशन दे दी
होगी अमित शाह कागज देखते होंगे किसी
बा गुजरात का मामला हो बिल्किस बानू जैसा

सेंसिटिव मामला हो जिससे पूरा मानव समाज
थरा गया
था हर देश में रंग ट खड़े हो गए थे लोगों
के एक परिवार मुस्लिम परिवार भाग रहा है

11 लोगों में से सात लोगों की उसके सामने
तलवारों से काट के हत्या की जाती है उसकी
छोटी बेटी को जमीन पर पटक के मार दिया
जाता है पाच महीने की व गर्भवती
उसके

साथ दुराचार किया जाता है सामूहिक आज भी
वो छह लोग उसके परिवार के जो भाग के गए
हैं आज तक लापता है क्या बचा एक पुरुष एक
छोटा बच्चा और इन व्यभिचार हों से पीड़ित

एक बिलकिस बानू उसके साथ न्याय हुआ देश
में मालूम होगा ये फाइल अमित शाह के टेबल
पर गई होगी आप ये कह रहे
100% इतना बड़ा
मामला गुजरात की कोई बात हो बाबू साइन करे

अरे क्या बात कर रहे
हैं गुजरात की हर चीज नाक के नीचे से जाती
है साहब के क्या चुनाव के लिए साहब नहीं
क्या चुनाव के लिए क्योंकि साहब आप बारबार

चाणक्य कहते मैं जुगाड़ू कहता हूं उनको
आपके चाक्य ने क चुनाव के चक्कर में फाइल
तो नहीं मांग भा गुजरात गवर्नमेंट से आप
फाइल दे दीजिए मैं अभी निकाल दूंगा बाकी
लोगों के साथ इनको भी क ये तो नहीं हुआ और
ये सवाल उठाने का अधिकार है जगह है मेरे

पास आपको लगता है कि कोई बहुत ही दिलेर जज
सुप्रीम कोर्ट में आ जाए जैसा कि हमारी 30
40 साल पहले जज होते थे जो इंदिरा गांधी

से टकरा जाते थे इस टाइप का कोई जज आ गया
जहां यह बिलकिस बानों का मामला अब आया कि
भाई फ्रॉड हुआ है या किस तरह से आपने परम
दे दी तो क्या अमित शाह पर संकट आ सकता है
नहीं आपको लगता है नहीं संकट इसलिए नहीं

आएगा क्योंकि कोर्ट के निर्णय को यह मानते
नहीं को के कोर्ट के स्ट्रक्चर को य हस
देते हस के टालते
हैं कोर्ट के स्ट्रक्चर और कोर्ट के
निर्णयों से इस्तीफा देने वाली नैतिकता अब

कहां कोर्ट ने सिर्फ हंकार भी भरा तो
लोगों ने इस्तीफा दे बैक पैक किए य तो
कोर्ट धक्का मार के निकालेंगे तो भी
निकलने को तैयार
नहीं यह दंभ है यह अहंकार

है 300 से ज्यादा लोकसभा में सीटों
का इसलिए कोर्ट ने इतना बड़ा डिसीजन दिया
शर्मसार सरकार
होती तो माफी मांगती क्या आपको पता है
सीबीआई

के कोर्ट ने भी
छूट के लिए मना किया
था
जी सुप्रीम कोर्ट से यह हाई कोर्ट और लोअर
कोर्ट की पप सुप्रीम कोर्ट छपा सीबी
सीबीआई टाइगर अगर मना कर रही थी कि भाई

इनको रिलीज मत करिए ये बड़े खुखार कहती है
बड़ा जघन्य कांड है तो फिर गृह मंत्रालय
ने सीबीआई की बात क्यों नहीं मानी यह तो
सेंट्रल एजेंसी है सीबीआई को चुनाव लड़ना
होता है क्या चुनाव जीतना और हारना सीबीआई
को नहीं गृहमंत्री को

गृहम मंत्री के गृह राज्य में चुनाव
था आम आदमा आदमी पार्टी हुंकार भर चुकी थी
जी और इस बार एक रिकॉर्ड तोड़ जीत चाहिए
थी तो तरकश के सारे तीर निकलने थे तो यह
भी एक तीर

था इसका भी उपग अस्त्र का भी उपयोग करना
था इसलिए तुरंत उनको रिहा करके सिर्फ रिहा
ही नहीं हुई सर उनका सार्वजनिक रूप से
धड़ा स्वागत हुआ बीजेपी के तमाम नेता उस

मंच पर इन व्यभिचार हों का स्वागत कर रहे
हैं मानो कोई बहुत बड़ी लड़ाई जीत के आए
हैं कोई ओलंपिक में मेडल कमा के आए हैं ह
घाटी का युद्ध जीता है जूता है यह यह
दुर्भाग्य इस देश का इस देश का कि

व्यभिचारी और दुराचार हों का सन्मान होता
है और जो राष्ट्र का सम्मान बढ़ाने वाली
महिलाएं
हैं उनका उनके साथ दुराचार हो है और उनके
ऊपर पुलिस दमनकारी रवैए से टूट पड़ती है
यह सिर्फ 2014 के बाद के भारत में ही हो
सकता

हैर आपको लगता है कि चलिए तो ये तो 11
कैदी थे और बिलकिस बानों वाले मामले में
जो बहुत ही थरा देने वाला मामला है मुझे
लगता है कि कभी भी जब भी 100 साल का जुर्म

लिखा जाएगा उसमें बिलकिस बानों का केस
हमेशा ऊपर होगा क्योंकि वाकई बहुत ही थरा
देने वाली घटना थी बहुत ही कोल्ड ब्लडेड
थी लेकिन मैं देख रहा हूं कि जैसे ब्रिज
भूषण है उनके खिलाफ भी कोई कारवाई नहीं

हुई मुकदमा बस दर्ज किया जेल नहीं गए
ब्रिज भूषण और यह जो लड़के हैं बीएचयू के
जो प्रधानमंत्री के जो आईटी सेल था बनारस
में उसमें काम करते थे ऐसा लोग कहते हैं

आज कांग्रेस ने भी आरोप लगाया है यह लोग
चुनाव का प्रचार कर रहे थे यानी जब
इन्होंने वहां दुष्कर्म कर दिया उस बिटिया
के साथ दुष्कर्म किया उसको म्यूट किया
पूरे कैंपस में उसके वीडियो उतार ली उसको

ब्लैकमेल किया उसके बाद ये लड़के चुनाव कर
रहे थे राजस्थान
में मध्य प्रदेश सतना में मध्य प्रदेश में
थे राजस्थान में सब चुनाव प्रचार कर रहे
थे तो आपको लगता है कि ऐसे लोगों

को बचाने में जानबूझ के बचाया जाता है या
एक सॉफ्ट कॉर्नर है बीजेपी लीडरशिप का जो
बीजेपी से जुड़े लोग दीपक भाई एक तारीख को
बीएचयू का कांड हुआ
घिनौना चर तारीख को ये तीनों बच्चे बच्चे

क्या दुराचारी चिन्हित हो चुके थे तीनों
ट्रेस हो गए
थे लेकिन 22 दिसंबर तक पुलिस क्या करती
रही क्यों नहीं चला बुलडोजर किसी के किसी
के घर बुलडोजर क्यों नहीं

चला बाकी कोई फरार कैदी होता है इसी जगह
किसी और विशेष धन विशेष का होता तो उसके
घर में बुलडोजर चला
जाता हिंदू के बेटी के ऊपर हाथ डालने के
मायने अभी बताएंगे आपको योगी आदित्यनाथ
घर पर बुलडोजर चल रहा है उनके जी या

बुलडोजर भी नहीं चला या तो टेलीफोन भी
नहीं चला इधर से उधर 22 तारीख को आए उनको
अरेस्ट किया गया और तुरंत जुडिशल कस्टडी
में भेज दिया गया पुलिस को कड़ी नहीं
चाहिए

थी क्योंकि सम्मानजनक लोग है इनको मैं तो
कहता हूं कि य पकड़े जरूर गए सारे एविडेंस
होने के बाद भी क्या कोर्ट में केस स्टैंड
होगा कल यदि सरकारी वकील यही कहे कि या जय
पुलिस वाले यही कहे कि साहब हमने एविडेंस

इकट्ठा किए थे पता नहीं क रख दिए आपको पता
है छगन भुजबल के केस में क्या
हुआ छगन कु का केस जब ड़ी का कोर्ट में
आया तो वकील ने कहा कि साहब यह तो केस में
भूल चुका हूं मुझे कुछ भी याद नहीं इस केस
के मामले में और य फाइल मिल नहीं रही
है

क ला लास्ट क्वेन य जो जस्टिस है जस्टिस
बीवी नाग रत्ना और उज्जवल भुवन जिन्होंने
यह आज बहुत ही सख्त और तलक आदेश दिया और
कहा कि पूरा फ्रॉड एंट ऑपरेशन था और

गुजरात सरकार के लिए उसने कहा कि गुजरात
सरकार ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया
है मतलब इससे ज्यादा बेइज्जती किसी राज्य
सरकार की नहीं हो सकती और यह मोदी जी और

अमित शाह का होम स्टेट है उसकी सरकार जो
मोदी जी खुद चलाते हैं उसके लिए कहा कि यह
बहुत ही शर्मनाक घटना है दुरुपयोग हुआ है
आप आपको लगता है कि यह जो जज है दोनों ने
बड़ी हिम्मत दिखाई और संविधान का सम्मान

किया उन्होने कितना बड़ा फैसला दिया एक
मुस्लिम महिला जो बेचारी दरदर की ठोकरे खा
रही थी उसको इंसाफ दिया अगर यह जज ना होते
कोई और होता या थोड़ी हिम्मत ना कर पाते
मान लीजिए हिम्मत ना होती जज की बहुत से
जजों की हिम्मत नहीं हुई आज के दौर में

नहीं होती तो क्या यह जो केस था ये दबा
रहता क्या यह केस जो है यह ठंडे बस्ते में
चला जाता और हम लोग को पता ना लगता कि
क्या खेल हुआ था गृह मंत्रालय ने क्या खेल
किया गुजरात सरकार ने क्या खेल किया

गुजरात लबी ने क्या खेल किया य जो फ्रॉड
हुआ ये क्या दबा का दबा रह जाता अगर जज
हिम्मत ना दिखाते कोई और जज होता बिल्कुल

यकीन यकीनन कोई जज होता मतलब गोदी जज भी
हो गए हैं अभी गोदी मीडिया जसे गोदी जज जो
गोदी जज भी हो गए जुड़ी
में गोदी जज हा तो अगर कोई गोदी जज हो
क्या होता गोदी जज होते तो यह केस रफा दफा

होता 1992 के केस के तहत गुजरात गवर्नमेंट
को अधिकार है और उन्होंने इसका कानूनन
उपयोग किया इस पर फुल स्टॉप लगता यह गृह
मंत्रालय का जो घिनौना कांड है इसके पीछे

और इसके न्यू में गृह मंत्रालय
है आपके चानक है यह लोगों को सामने नहीं
आता आज कमम द का दूध पानी का पानी हो गया
है पानी का पानी हो एक सप्लीमेंटरी

क्वेश्चन अंतिम कमेंट चाहूंगा ये तो वो
मामले हैं टाइगर जो हमारी आंखों के सामने
आ जाते हैं कोई ईमानदार जज कोई फैसला सुना
देता है कोई ईमानदार गवाह खड़ा हो जाता है
अदालत में कोई ईमानदार बिरला कोई अधिकारी

है जो डॉक्यूमेंट लीक कर देता है तो ये तो
वो मामले हैं जो नजर में आ गए क्या आपको
लगता है ऐसे बहुत से मामले होंगे जो पर्दे
के पीछे खेल हो रहा होगा ऐसा आपको लगता है
इस सरकार में गणित अन गणित जो मामले हमारे
सामने आए हैं वो टिप ऑफ द आइसबर्ग है टिप

ऑफ द आ वो मात्र एक प्रतित है 99 प्र
चीजें अभी भी चद्दर के पीछे है खेल होते
हैं बड़े-बड़े खेल होते हैं जब आप अंदर तक
जाते हो तो पता पड़ता है कि खेल कितने हद
तक होते

हैं जी और शायद इसीलिए हर कीमत पर हर कीमत
पर ये सरकार वापस लौटना चाहती है सत्ता
में इसीलिए
शायद
बार पार अबकी बार 400 पार जय हो व्यभिचार

जय हो भ्रष्टाचार जय हो यह है टाइगर आप आए
टाइगर आप आए और जिस तरह से आपने चीजों को
सामने रखा तथ्यों को सामने रखा और मुझे
लगता है एक तो व जज थे जिन्होंने फैसला
दिया और एक आप एक एनालिस्ट थे

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