Modi ने 10 साल में देश को इतना पीछे पहुंचा दिया, आंख खोल के देख लीजिए ये...... - instathreads

Modi ने 10 साल में देश को इतना पीछे पहुंचा दिया, आंख खोल के देख लीजिए ये……

नमस्कार

लेकर आया हूं आपका
अपना कार्यक्रम डायरेक्ट
हिट किसानों का आंदोलन अपने जगह पर राहुल
गांधी की यात्रा बिहार
में प्रधानमंत्री जी आज अपनी गारंटी की
फिर गारंटी दोहराते हुए हरियाणा

में इन सभी आपद हपी में एक खबर जिसने
डायरेक्ट हिट किया नरेंद्र मोदी जी के उस
वाइट पेपर को जो पार्लियामेंट के अंतिम
17वी लोकसभा के सदन में बैठक में जो आखिरी
दिन में उन्होंने

लाया जहां
2000 14 से 24 और
2000 के पहले 14 के पहले के 10 साल और बाद
में अपने 10 साल मनमोहन सिंह के 10 साल और
मोदी के स साल में कंपेयर किया और मनमोहन
सिंह जी के सरकार पर आरोप लगाया कि
उन्होंने देश का सत्यानाश किया

मोदी जी जगह-जगह अपनी उपलब्धियां गिनते
हैं लेकिन वास्तविक स्थिति क्या
है यह गवर्नमेंट के अपने यानी आरबीआई के
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अपने कंज्यूमर
कॉन्फिडेंशियल सर्वे प जो बात उभर के
आई वह कुछ और ही दशा बताती है और यदि यह
सच्चाई

है तो फिर सरकार को इस पर सोचना
होगा सबसे
पहले जो कॉन्फिडेंशियल सर्वे है जो
कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे कॉन्फिडेंशियल
नहीं कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे उपभोक्ता
विश्वास जो है इकोनॉमी में या अपने अर्थ

आर्थिक नीतियों में उसके अनुसार जो लाया
तो आरबीआई का जो निचोड़ निकलता है वह यह
कहता है कि 64
प्र लोग यह सोचते
हैं कि
पिछले मोदी जी के 10 साल 2014 से जो मोदी
जी के 10 साल

है वह मनमोहन सिंह के 10 साल से बहुत
ही
आर्थिक
स्थिति खराब हुई है 64 प्र लोग मानते हैं
इकोनॉमिक सिचुएशन डिटो टेड या आर्थिक

स्थिति देश की और खराब हुई है
मनमोहन सिंह के 10 साल के तुलना में
नरेंद्र मोदी के इन 10 सालों में आरबीआई
की सर्वे
करती 35

प्र लोग यह कहते हैं कि 2014 से 2024 तक
कि तुलना यदि हम 2000 उसके पहले मनमोहन
सिंह के सरकार के तुलना में
करें तो यह
स्थिति वस्ट है बहुत ही गंभीर है

बहुत बुरी तरह
से आर्थिक रूप से देश पिछड़ा गया पिछड़
गया है य 35 प्र लोग कहते हैं और 64 प्र
लोग कहते
हैं कि
सिचुएशन गट टोटे खराब हुई और बहुत ज्यादा

खराब हुई गंभीर रूप से खराब हुई 35 लोग
प्रतिशत मांग थे या 100 प्रत में कोई नहीं
ऐसा मानने वाला की आर्थिक स्थिति उनकी
कंज्यूमर की जो देश की आर्थिक स्थिति मा
उनके परचेसिंग पावर के हिसाब से देखा

जाए तो स्थिति खराब
हुई और यही कोई रिफ्लेक्शन इंडिया टुडे के
सी वोटर के सर्वे में भी आता है इन
अनइंप्लॉयमेंट बेरोजगारी
पर जो सर्वे है वो यह मानता है कि 31 प्र
सी वोटर य मानता है कि मोदी के कार्यकाल
में बेरोजगारी

बढ़ी अब यदि
उस सर्वे के डिटेल में जाऊ तो आपको
आश्चर्य होगा 54 प्र आधी आबादी से ज्यादा
54 प्रति लोग एक मानते

हैं कि रोजगार के फ्रंट पर बेरोजगारी की
स्थिति बहुत सीरियस हो गई है वेरी सीरियस
17 प्र य कहते हैं कि सीरियस हो गई है यह
17 और 74 मिलके ही 71 प्र होते हैं जो
कहते हैं कि सीरियस है
12 प्र लोग कहते हैं कि हमें उससे कोई

लेना देना
नहीं
पाच लोग कहते हैं कि इतनी सीरियस नहीं 5
और 4 प्र लोग कहते हैं कि नहीं नहीं
बेरोजगारी की कोई समस्या है ही
नहीं तो कुल मिला केर यदि यह दो कंज्यूमर

सर्वे में आपको सामने
रखूं एक सर्वे बेरोजगारी का सी वोटर का
सर्वे जिसमें बेरोजगारी अ एलमेंट का यदि
मैं सेक्टर देखूं तो 71 प्र लोग कहते कि
बेरोजगारी बढ़ी

है
सरकार ने तो 2019 के बाद स्टेटस्ट रिलीज
करना ही बंद कर दिए इस वजह से दो लोगों ने
बड़े सीनियर लोगों ने इस्तीफा भी दिया था
सरकार आंकड़े ही नहीं देती और आंकड़े अपने
हिसाब से देती है जब उनको सूट होता है

उससे मैं बढ़ती
है जैसे नीति आयोग का एक आंकड़ा कि 25000
25 करोड़ लोग गरीब के ऊपर
आए मल्टी डायमेंशन पॉवर्टी
इंडेक्स और मल्टी डायमेंशन जो इंडेक्स
था वो जिन तीन चीजों प था वो तीन चीजों

में कोविड के दो सालों में स्थिति भयावह
थी लेकिन कोविड के दो साल का डाटा उनके
पास नहीं था तो कोविड के पहले वाला डाटा
ही जोड़ के उसी को रिपीट करके
जैसा बिजली का बिल रीडिंग लेने आता है

रीडिंग नहीं आया तो एवरेज बिली ठोक देता
है और बाद में अगले रीडिंग में वह जमा
माइनस प्लस होता
है वैसी स्थिति सरकार ने की और फिर आकड़ों
के साथ कलाबाजी करके करते हैं कि 25 करोड़
लोग गरीबी रेखा के ऊपर आ गए 25 करोड़ लोग

गरीबी के ऊपर कैसे आ सकते हैं जब देश के
64 प्र लोग
देश की आर्थिक स्थिति खराब हो गई यह कहते
हैं 10 साल की तुलना में मनमोहन सिंह के
और 35 लोग तो कहते कि बहुत ज्यादा खराब

हुई देश की आर्थिक स्थिति खराब हो गई एक
सर्वे कहता है कि अनइंप्लॉयमेंट
71 प्र कहते कि बहुत ज्यादा बढ़ी है बहुत
सीरियस इशू
है जब बेरोजगारी का इशू सीरियस हो 71 प्र

लोग कहते हो ज 65 प्र लोग कहते हो कि बहुत
ज्यादा आर्थिक स्थिति खराब है
मतलब आर्थिक स्थिति खराब है और 35 प्र
कहते बहुत ज्यादा खराब
है ऐसे में यह दावे
करना कि
सरकार ने नई उपलब्धियां लाई 1947 में

सरकार कहां जाएगी और मनमोहन सिंह की सरकार
ने रेल कर दिया था कई पैरामीटर से कई
बिजनेस जर्नल्स ने बाद में मनमोहन सिंह और
मोदी सरकार की तुलना के आंकड़े दिए

बैंकिंग से लेकर तमाम सेक्टर के और मनमोहन
सिंह के आंकड़े कई सुपीरियर कई अच्छी तरह
से इकोनॉमी को रिफ्लेक्ट करते हैं यदि हम
भारत प कर्जा करें तो 54 लाख करोड़ वहां
था 205 लाख करोड़ अब है एक कर्जे पर ब्याज
भी देना होता

है सरकार बार-बार कहती है कि हमारे
टैक्सेस बढ़ रहे हैं अंध भक्त कहते हैं कि
भैया टैक्सेस बढ़ रहे हैं तो चिंता करने
की जरूरत नहीं जीएसटी बढ़ता है लेकिन
इसमें आईजीएसटी इंपोर्ट प ज्यादा होता

है स्टेट और सेंट्रल जीएसटी के बराब से
ज्यादा कई बार आईजीएसटी देता
है तो जिस देश का इंपोर्ट ज्यादा
है दूसरी और सरकार का आयात निर्यात का
घाटा भी फिर एक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

है जब आयात निरत का घाटा ऊपर पहुंचा हो जो
रुपया की कीमत नीचे आ रही
हो निर्यात कम और आयात ज्यादा हो
कंज्यूमर इंडेक्स सर्वे कहता है आपका
आरबीआई का कि देश की आर्थिक स्थिति बहुत

खराब
है इंडिया टीवी का सर्वे कहता है इंडिया
टुडे का सी वोटर का बेरोजगारी का 71 प्र
लोग कहते कि बेरोजगारी की स्थिति बड़ी है
तो फिर हुआ क्या है 10 साल में

अच्छा ये सरकारी आंकड़े ही नरेंद्र मोदी
जी को हिट कर रहे
हैं और इसीलिए कितना भी जोर से बोलिए
कितने भी ताकत से बोलिए विपक्ष को गाली
देते हुए बोलिए
या कुछ भी बोलिए जब आप य बोलते हो कि देश

सुपर पावर बनने जा रहा है तो लोग हसते हैं
143 करोड़ का देश
है
हमारी जब हम कहते कि हम देश विश्व की
तीसरी इकॉनमी पांचवी इकॉनमी बने है तीसरी
बनने जा रहे

हैं तो हम टर्नओवर के हिसाब से बड़ी बनने
जा रहे हैं प्रॉफिट के हिसाब से कहां
है हम बहुत गंभीर स्थिति में गंभीर रूप से
हमारी आर्थिक स्थिति बीमार है आर्थिक रूप
से देश गंभीर बीमार होते जा रहा
है टर्नओवर कंपनी का 5000 करोड़ है और

उसमें 500 करोड़ घाटा हो तो क्या कहेंगे
एक का पा करोड़ का टर्न ओवर है और एक
करोड़ प्रॉफिट है तो एक करोड़ प्रॉफिट
वाली कंपनी बड़ी मानी
जाएगी जो पहली तीन इकॉनमी है देश की जो
वर्तमान में है उनकी जनसंख्या भारत से

बहुत कम है बहुत बहुत कम है इसके बावजूद
उनकी इकोनॉमी बड़ी है क्योंकि उनके
एक्सपोर्ट ज्यादा है और इंपोर्ट कम है
उनका ट्रेड बैलेंस उनके फेवर में है और

हमारा ट्रेड बैलेंस हमारा बिल्कुल नेगेटिव
में है य कुछ बारका है आर्थिक नीतियों
की तो जो
लोग जिंदगी जी रहे हैं उन्हें मालूम है
महंगाई क्या होती है उन्हें पता है
पेट्रोल कितना महंगा हो गया उ
गस की रसोई कितना महंगा हो गया उन्हें पता

है कितने टैक्सेस की मार पड़ी है उन्हें
पता है बैंकिंग कितना डिफिकल्ट हो गया
है यह सारी चीजें जब आपको पता है फिर भी
जब देश के प्रधानमंत्री कहते हैं कि नहीं
मैंने बहुत अच्छा काम किया तो कई बार आदमी
विश्वास रखता है लेकिन सरकार के अपने
आंकड़े यदि यह कहते हैं तो स्थिति इससे भी

ज्यादा भयंकर भयानक हो सकती है इसलिए आज
आरबीआई की सर्वे
ने सीधा आरबीआई कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे

सीधा हिट करता है मोदी जी को तो आज के
डायरेक्ट हिट में इतना ही क्योंकि बहुत
सारी किसानों की खबरें चल रही है बहुत
सारी खबरें चल रही है

नमस्कार

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