Modi सरकार को झटका, CJI Chandrachud ने गुप्त चुनावी चंदे वाले Electoral Bond के फैसले में क्या कहा? - instathreads

Modi सरकार को झटका, CJI Chandrachud ने गुप्त चुनावी चंदे वाले Electoral Bond के फैसले में क्या कहा?

लोकसभा चुनाव के ऐलान से ठीक पहले
इलेक्टोरल बॉन्ड्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट
ने बड़ा फैसला सुनाया है सुप्रीम कोर्ट ने
चुनावी बॉन्ड स्कीम को अवैध करार देते हुए

उस पर रोक लगा दी है साथ ही 2018 में
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए
इलेक्टोरल बंड को असंवैधानिक करार दिया है
पहले आप जरा इलेक्टोरल बॉन्ड का मतलब समझ
लीजिए ताकि आपको फैसले की अहमियत और बड़ी

बातें समझने में आसानी हो 2018 में केंद्र
सरकार मार नरेंद्र मोदी की सरकार
इलेक्टोरल बॉन्ड लेकर आई इलेक्टोरल बॉन्ड
किसी गिफ्ट या वाउचर की तरह होता है सरकार

हर साल चार बार जनवरी अप्रैल जुलाई और
अक्टूबर में 10-10 दिन के लिए बॉन्ड जारी
करती है मूल्य होता है 1000 10000 10 लाख
या 1 करोड़ राजनीतिक पार्टियों को
₹2000000 करवाती हैं बॉन्ड भुना रही

पार्टियों को यह नहीं बताना होता कि उनके
पास यह बॉन्ड आया कहां से है दूसरी तरफ
एसबीआई को भी यह बताने के लिए बाध्य नहीं
किया जा सकता कि उसके यहां किसने कितने
बॉन्ड खरीदे यह इलेक्टोरल बॉन्ड के हिसाब

से जो केंद्र सरकार लेकर आई थी उसके हिसाब
से तय किए गए नियम कायदे कानून हैं अब
कोर्ट ने इसी इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक लगा
दी है और 2024 के चुनाव से पहले यह फैसला
काफी अहम हो गया श्रीजय चंद्र चूट की

अध्यक्ष वाली बेंच ने इस पर फैसला सुनाते
हुए कहा इलेक्टोरल बॉन्ड आरटीआई राइट टू
इंफॉर्मेशन यानी सूचना के अधिकार का
उल्लंघन करती है जनता के पास चुनावी
पार्टियों को मिलने वाली फंडिंग जानने का

पूरा अधिकार है कोर्ट ने कहा कि भारतीय
स्टेट बैंक यानी एसबीआई 2019 से अब तक
सारी इलेक्टोरल बंड की जानकारी तीन हफ्ते
के अंदर चुनाव आयोग को दे और चुनाव आयोग
इन सारी जानकारियों को अपनी आधिकारिक

वेबसाइट पर पब्लिश करें देखिए आज एक बहुत
ही महत्त्वपूर्ण फ फसला सुप्रीम कोर्ट ने
दिया जिसका कि बहुत लंबा असर होगा हमारी
पूरी चुनावी लोकतंत्र के ऊपर उन्होंने यह
इलेक्टरल बंड की स्कीम कंप्रिहेंसिवली

स्ट्राइक डाउन कर दी है यह कहते हुए कि
इसमें जो एनोनिमस एलिमेंट इन्होंने लाया
कि भाई किसी को पता नहीं लगे कि भई
इलेक्टोरल बंड किसने खरीदे और किसको दिए
यह बिल्कुल

हमारे जनता के सूचना के अधिकार के खिलाफ
है जो कि एक मौलिक अधिकार है जनता का
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बॉन्ड
जारी करने वाले बैंक तुरंत बंड जारी करना
बंद कर दे सीजीआई डीवाई चंद्रचूर ने कहा

कि नागरिकों को सरकार को जिम्मेदार ठहराने
का अधिकार है सूचना के अधिकार का
महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल राज्य
के मामलों तक ही सीमित नहीं है फैसला
सुनाने से पहले सीजीआई ने कहा था कि फैसला

एक है लेकिन दो तर्क लिखे गए हैं उन्होंने
कहा हम सर्वसम्मति से फैसले पर पहुंच
पहुंचे हैं दो राय है एक मेरी दूसरी
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की दोनों एक ही

निष्कर्ष पर पहुंचते हैं लेकिन तर्क में
थोड़ा अंतर है सीजीआई ने फैसला सुनाते हुए
कहा कि इलेक्टोरल बॉड के अलावा भी काले धन
को रोकने के दूसरे तरीके हैं राजनीतिक
दलों को मिलने वाली फंडिंग के बारे में

जानकारी अगर लोगों को होगी तो उससे उनको
अपना मताधिकार यानी वोट करने का जो अधिकार
है उसका इस्तेमाल करने में स्पष्टता
मिलेगी इसलिए इलेक्टोरल बॉन्ड पर तुरंत

रोक लगाई जाए एसबीआई को तीन हफ्ते के अंदर
12 अप्रैल 2019 से लेकर अब तक की सारी
जानकारी सार्वजनिक करनी होगी कोर्ट के
अंदर क्या बड़ी बातें हुई और सीजीआई डीवाई
चंद्रचूड ने क्या-क्या कहा यह बता रहे हैं

इंडिया टुडे से हमारे सहयोगी संजय शर्मा
सुनिए कि तीन हफ्ते के भीतर यह जानकारी
इलेक्शन कमीशन को देगा और इलेक्शन कमीशन
इसे सार्वजनिक करेगा साझा करेगा इस सूचना
को यानी 12 अप्रैल 2019 से अ कितने लोगों

ने कितने बॉन्ड्स खरीदे कितने-कितने रुपए
के और किन-किन ने खरीदे और और किन-किन के
खाते में जमा करने के लिए किनको राजनीतिक
चंदा देने के लिए बॉन्ड खरीदे उन सारे
बंड्स पर वह जानकारी देनी होगी यानी

2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अप्रैल में
किन लोगों ने किन पार्टियों के लिए बंड्स
खरीदे हैं और कहां जमा किए हैं वह तमाम
जानकारियां यानी पिछले 5 साल की जानकारी

देनी पड़ेगी जिससे पता चलेगा कि आखिर
सरकार को समर्थन देने वाले आर्थिक समर्थन
देने वाले या बीजेपी को एनडीए को आर्थिक
समर्थन दे ने वाले लोग कौन हैं और इसके

बाद फिर आगे जो उसकी व्याख्या होगी वह तो
आप जान सकते हैं यह आर्थिक मामला जरूर है
कानूनी मामला जरूर है लेकिन इसकी व्याख्या
राजनीतिक आधार पर होगी और यह बताया जाएगा

कि किनको समर्थ किनको चंदा दिया गया और
उसका क्या काम कराया गया उनका तो यह तमाम
चीजें जिस समय सुनवाई चल रही थी उस समय भी
यह सारी चीजें वहां पर यह कहा गया था कि
जो कॉर्पोरेट कंपनियां चंदा देती हैं

राजनीतिक पार्टियों को उन लोगों को जो या
तो ऑलरेडी सत्ता में है या फिर जिनके
सत्ता में आने की संभावना है तो फिर बाद
में सत्ता में आने के बाद वह उनसे अपने

काम कराती हैं अब विचारों के मुकाबले
निर्णय की बात करनी चाहिए जिसमें निर्णय
साफ है कि पांचों जजों ने एक साथ मिलकर
इसे असंवैधानिक माना है और यह कहा है कि

काले धन का इस्तेमाल राजनीति में और चुनाव
में रोकने के लिए दूसरे विकल्प आजमाए 2018
में इलेक्टोरल बंड को लागू करने के पीछे
मोदी सरकार का मत था कि इससे राजनीतिक
फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी साफ सुथरा

धन आएगा इसमें व्यक्ति कॉरपोरेट और
संस्थाएं बॉन्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को
चंदे के रूप में देती थी और राजनीतिक दल
इस बॉन्ड को बैंक में भुना करर रकम हासिल

करते थे जैसा हमने आपको बताया भारतीय
स्टेट बैंक की 29 शाखाओं को इलेक्टोरल
बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने के लिए
अधिकृत किया गया था केंद्र सरकार ने इस

दावे के साथ बॉन्ड की शुरुआत की थी कि
इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता
ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और साफ सुथरा पैसा
आएगा लेकिन सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि

यह सूचना के अधिक के खिलाफ है उसका
उल्लंघन है अब इस पर आगे जो भी जानकारी और
अपडेट्स आएंगे हम आप तक पहुंचाते रहेंगे
लेकिन आपके सीजीआई के फैसले पर क्या राय
है आप जस्टिस डी वाय चंद्रचूड के कथन पर

क्या कहना चाहते हैं क्या राय रखते हैं
हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा यह
सारी जानकारी जुटाने में मदद की थी मेरे
साथी रवि सुमन ने मेरा नाम सोनल है देश
दुनिया के तमाम अपडेट्स के लिए
देखते रहिए
शुक्रिया

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