News Ki Pathshala|Sushant Sinha: शंभू बॉर्डर पर एक्शन के बाद सरकार-किसानों की बातचीत में क्या निकला? - instathreads

News Ki Pathshala|Sushant Sinha: शंभू बॉर्डर पर एक्शन के बाद सरकार-किसानों की बातचीत में क्या निकला?

किसानों के नाम पर फिर से एक नए आंदोलन की
आग लगाई जा रही है पिछले दो दिन से किसान
के नाम पर जो कुछ भी हो रहा है बस वो देख
तो पूरा देश रहा है कि यह किसान कर सकते

हैं क्या जो देश भर में चल रहा है और इसकी
टाइमिंग भी देखिए यह सब तब हो रहा है जब
लोकसभा चुनाव करीब है और चुनाव से ठीक
पहले कुछ लोग माहौल बना रहे हैं जो माहौल

किसी आंदोलन के समय किसान आंदोलन के समय
बनाया गया था वैसा ही माहौल इस बार फिर
बनाया जा रहा है पिछली बार के की तरह इस
बार भी कुछ किसान संगठन कई दिनों का राशन
पानी लेकर दिल्ली में डेरा डालने के लिए
उतर गए हैं बॉस कई दिनों का दो दिन से

हजारों की संख्या में किसान संगठन से
जुड़े लोग पंजाब हरियाणा के शंभू बॉर्डर
पर डट गए हैं यह किसान पंजाब से हरियाणा
और हरियाणा से दिल्ली की तरफ कूछ करना

चाहते हैं लेकिन कानून व्यवस्था को बनाए
रखने के लिए हरियाणा पुलिस ने भी आंदोलन
कर रहे लोगों को पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर
ही रोक दिया कहां आगे जा रहे हैं बहुस अभी
रुकिए उन्हें आगे नहीं बढ़ने दे रही

हरियाणा की पुलिस इसकी वजह से दूसरे दिन
भी शंभू बॉर्डर पर बड़ा बवाल देखने को
मिला किसान की किसानों की भीड़ को रोकने
के लिए पुलिस की तरफ से ड्रोन से आंसू गैस
के गोले दागे गए वाटर कैनन की मदद से भीड़
को आगे बढ़ने से रोकना पड़ा और इन्हें

किसान कहू या आंदोलनकारी आप खुद तय कर
लीजिए लेकिन शंभू बॉर्डर पर जो दिन भर
घमासान मचा रहा उन तस्वीरों को देखिएगा

तभी तय कर पाइए कि इन्ह क्या बुलाया जाना
चाहिए देखिए जरा शंभू बॉर्डर से
तस्वीरें देखिए एक और ये आसू गैस का गोला
दागा गया है धुआ देख सकते हैं आप धुए का
गुबार उठ रहा है दूसरा यह दूसरा गोला आया

ये तीसरा गोला आया यह
चौथा ये चार गोले महज दो से तीन सेकंड में
यहां पर दागे गए पांचवा गोला आ गया है
पांचवा आसू गैस का गोला कल के जैसा जो
मंजर था वो फिलहाल यहां पर दिखाई दे रहा

है और किसान लगातार डटे हुए
हैं किसान संगठनों के तेवर देखकर यही लग
रहा है कि व इन आंसू गैस और वाटर कैनन से
रुकने वाले नहीं है बस वह हर हाल में

जो सारे किसान संगठन है वह पुलिस से भी
सीधे टकरा रहे हैं मतलब आप देखिए सीधे
पुलिस से इनका टकराव चल रहा है जिन ड्रोन
के जरिए पुलिस आंदोलन करने वाली भीड़ पर

नजर रख रही है उस ड्रोन को भटकाने और
गिराने के लिए यह जो आंदोलन कर रहे हैं
लोग यह पतंग उड़ा रहे हैं ताकि पतंग से
टकराकर ड्रोन जो है वो अपनी दिशा भटक जाए
और ड्रोन के जरिए जो आंसू गैस के गोले

चलाए जा रहे हैं उसे नाकाम कर दिया जाए आप
सोचिए कितना शातिर दिमाग लगा रहे हैं इसके
अलावा किसान संगठन के लोग अपने साथ भी
अपने साथ वाटर टैंकर भी लेकर आए ताकि आंसू
गैस के असर को कम किया जा सके मतलब इतना

इतनी तैयारी है बॉस कि अपना वाटर टैंकर
लाए हैं कि आंसू गैस चले गए इधर से पानी
फेंक गैस खत्म प्रदर्शन कर रहे किसान अपने

साथ पानी की बोतल गीले कपड़े लेकर चल रहे
हैं और जैसे ही ड्रोन से आंसू गैस के गो
गोले को गिराया जाता है उस पर गीला कपड़ा
डालकर उसके असर को यह लोग कम कर देते हैं
आपको पंजाब हरियाणा के शंभू बॉर्डर से एक

रिपोर्ट दिखाता हूं आप देखिए बॉस यह यह
आपको लग रहा है कि वाकई नॉर्मल सामान्य
किसान है जो यहां पर पहुंचे हुए हैं जिस
तरह की चीजें य कर रहे हैं आप देखिए एक
बार मैं अपने कैमरामैन साथी को रिक्वेस्ट

करता हूं कि ड्रोन दिखाया जाए ड्रोन आ रहा
है यह वही ड्रोन है जिससे टियर गैस शेल
मारे जाते हैं और लगातार यहां से किसान
आगे बढ़ रहे हैं यब के जो किसान नेता है
वोह अपील कर रहे हैं यह देखिए यह देखिए यह

जो विजुअल दिखा रहे हैं कि कैसे ड्रोन को
काइट की हेल्प से ड्रोन को फेंकने की
कोशिश की जा रही है ये मैं अपने कैमरामैन
साथी को लगातार ये पिक्चर दिखाई जाए
क्योंकि कहीं ना कहीं ड्रोन वापस लेकर

जाना पड़ा क्योंकि काइट से ड्रोन को गिरा
की कोशिश की जा रही
है आंदोलन करने वाले किसान संगठन पहले से
ही बड़े आंदोलन की तैयारी करके सड़क पर
उतरे हैं वे अपने साथ 800 ट्रोली में 6

महीने का राशन लेकर आए हैं यानी कि
उन्होंने आंदोलन को बड़ा करने का पूरा
इंतजाम किया हुआ है और इसका सीधा मतलब यह
है कि यह आंदोलन लोकसभा चुनाव के दौरान भी
चल सकता है और आंदोलन की आड़ में राजनीति

भी चल सकती है किसान आंदोलन की जो
तस्वीरें आ रही है उसे देखकर तो यही लग
रहा है कि आंदोलन और उ हो सकता है क्योंकि
शंभू बॉर्डर पर मौजूद हमारे संवाददाता जो

इस आंदोलन को कवर कर रहे हैं उन्होंने भी
बताया कि शंभू बॉर्डर पर ऐसे हालात है कि
कई बार प्रदर्शन करने वाले किसान किसान
नेताओं की नहीं सुन रहे बॉस आज तो वहां पर
एक पत्रकार का माथा फाड़ दिया इन लोगों ने

बुरी तरह से पीटा है उसको और बाद में कुछ
किसान नेताओं ने माफी माफी मांग ली लेकिन
यह जो हो रहा है यह कितना भयानक है आप
सोचिए पत्रकार कवर कर रहे हैं रिपोर्टिंग
कर रहे हैं तो उन पर हमले शुरू हो गए इस

तरह के
हालात किसान नेताओं को बार-बार उन्हें
शांत करने की अपील करनी पड़ रही है और ऐसा
दावा है कि शंभू बॉर्डर पर अभी करीब 5000

किसान डटे हुए हैं किसान आंदोलन के पहले
ही दिन जो बवाल हुआ उसमें करीब 100
प्रदर्शनकारी किसान घायल हुए दूसरी तरफ दो
डीएसपी समेत पुलिसकर्मी और पैरामिलिट्री
के जवान घायल हुए किसानों का आरोप है कि

पुलिस उनके खिलाफ बहुत सख्त कार्रवाई कर
रही है और उनसे ऐसा बर्ताव नहीं होना
चाहिए वहीं हरियाणा पुलिस का कहना है कि
बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़ने
की कोशिश कर रहे हैं वो ह ह पुलिस पर

पथराव कर रहे हैं जिसके जवाब में हरियाणा
पुलिस ने वाटर कैनन और गैस का इस्तेमाल
किया ताकि स्थिति को कंट्रोल किया जा सके
मतलब पुलिस कह रही है कि हम अपनी तरफ से
कुछ नहीं कर रहे लेकिन जितना यह लोग उग्र
हो रहे हैं क्या करें कैसे रोके गोली तो

चलाएंगे नहीं वैसे तो सड़कों पर उतरे
किसानों का यह दावा है कि यह आंदोलन पूरी
तरह से नॉन पॉलिटिकल है पॉलिटिकल है और
उनका कांग्रेस के साथ कोई कनेक्शन भी नहीं
है ना ही वह कांग्रेस का समर्थन करते हैं

लेकिन पुलिस से टकराव में जो किसान घायल
हुए हैं राहुल गांधी ने कल उनसे बात भी की
राहुल गांधी ने कहा कि वो किसानों के साथ
है एक बार सुनिए क्या बात
हुई सत शकाल जी कहां चोट लगी आपको सर मेरे

एक आंख में और दोनों हाथों पर छर्रे लगे
हुए हैं गोलियो के
सर अच्छा पुलिस वालो ने मारे पुलिस वालों
ने डायरेक्ट गोली हिट की है

जी अच्छा आंख में तो नहीं लगी ना आंख में
सर डायरेक्ट एक छर्रा लगा हुआ है बाकी हाथ
दोनों हाथों प है जी अरे भाई आपकी आंख दिख
रहा है आपको ठीक से

नहीं नहीं डैमेज तो नहीं है सर ऊपर जो पलक
होती है उसके ऊपर ही चोट है बाकी आंख का
बचाई अभी डॉक्टर साहब आए नहीं है चेक होगा
अच्छा हां जी बचा है फिलहाल आका जी अच्छा
तो आपको आपको शरीर प छरे लगे हां हां जी

हां जी सर मेरे को मालूम है भी एक भीड़ को
या जम्मू कश्मीर में कहां है उसको बगाने
के लिए डायरेक्ट हिट गोली कहां पे की जाती
है ये कोई टेरा कोई मिलिटेंट नहीं है सर
ये अपने देश के किसान है

इस राजनीति के बीच किसान का यह प्रदर्शन
कल और उगने होने वाला है क्योंकि एक तरफ
प्रदर्शन करने वाले किसान सरकार को
अल्टीमेटम दे रहे हैं कि समाधान करिए नहीं
तो अ दिल्ली पूछ होकर रहेगा दूसरी तरफ

पंजाब के सबसे बड़े संगठन भारतीय किसान
यूनियन उग्र ने भी इस आंदोलन के समर्थन
करने का ऐलान किया है भारतीय किसान यूनियन
उग्र ने ऐलान किया है कि कल दोपहर 12:00
बजे से शाम 400 बजे सात जगहों पर रेल रोको
आंदोलन किया जाएगा

इस आंदोलन से अब तक दूर रहने वाले संयुक्त
किसान मोर्चा भी आंदोलन में उतरने के
संकेत दे रहे हैं पंजाब के जालंधर में
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान
संगठनों ने बैठक भी की है संयुक्त किसान

मोर्चा पहले ही 16 फरवरी को भारत बंद का
ऐलान कर चुका है और उसको लेकर बात भी हुई
थी किसान दिल्ली आने पर अड़े उन्हें रोकने
के लिए दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर धारा
144 लगानी पड़ी है सोचिए क्या हालात हो गए
दिल्ली के बॉर्डर पर पिछली बार जैसे हालात

ना बने और लोगों को परेशानी ना हो इसके
लिए दिल्ली के बॉर्डर पर कई लेयर की
बैरिकेडिंग तक करनी पड़ी दिल्ली के सिंघु
बॉर्डर टिकरी बॉर्डर गाजीपुर बॉर्डर की

तस्वीरें आपको दिखा रहा हूं वहां किस तरह
की बैरिकेडिंग की गई है तैयारी की गई है
आप खुद
देखिए जैसे आप दिल्ली के सिंघु बॉर्डर की

ड्रोन तस्वीरें देखिए इसमें दिख रहा है कि
दिल्ली में पुलिस ने पांच लेयर की
बैरिकेडिंग कर रखी इसमें पहली लेयर में
सीमेंट के स्लैब लगाए गए दूसरी लेयर में

सीमेंट के स्लैब के साथ कटीली तारें लगाई
गई तीसरी लेयर में पुलिस के बैरिकेडिंग है
चौथी लेयर में बड़े-बड़े कंटेनर सड़क पर
रखे गए हैं पांचवी लेयर में खुद
पैरामिलिट्री फोर्सेस के जवान

तैनात दिल्ली पुलिस ने तो अपने पक्के
इंतजाम कर रखे हैं लेकिन आप यह इंतजाम
देखिए सोचिए कि इसका मतलब पुलिस को भी पता
है कि अगर इतना इंतजाम नहीं किया तो यह जो
आंदोलन करने वाले लोग हैं यह किस लेवल का
की हिंसा कर सकते हैं आंदोलन के नाम पर

अराजकता नहीं चलेगी और किसी भी
प्रदर्शनकारी को दिल्ली नहीं आने दिया
जाएगा यह दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस
ने साफ कर दिया है लेकिन पंजाब में
केजरीवाल की सरकार है और किसान आंदोलन को

लेकर पंजाब और हरियाणा की सरकार
आमने-सामने हो गई किसानों पर ड्रोन से
आंसू गैस छोड़ने को लेकर भी टकराव चल रहा
है पंजाब सरकार ने इस बात पर ऐतराज जताया
है कि हरियाणा कैसे उनके इलाके में ड्रोन

उड़ा रहा है बॉस पंजाब के पटियाला डिप्टी
कमिश्नर ने हरियाणा में अंबाला डिप्टी
कमिश्नर को लेटर लिखकर कहा है कि वह अपने
ड्रोन शंभू बॉर्डर पर पंजाब के इलाके में
ना लाए इस पर आपत्ति जताते हुए हरियाणा के

गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि पंजाब यह
बर्ताव जो कर रहा है यह हैरान करने वाला
है वो किसान को रोक नहीं रहे हैं बल्कि
दिल्ली में तनाव का माहौल पैदा करना चाहते
हैं सुनिए एक

बार मुझे तो बहुत हैरानगोइथॉन्ग
और अमृतसर से यह जत्थे चले आपने रास्ते
में एक भी जगह रोकने की कोशिश नहीं की
इसका मतलब यह है कि आप दिल्ली को दहला
चाहते हो आप दिल्ली में दोबारा चाहते हो
कि लाल किले के

ऊपर अपमानित किया जाए दोबारा डांस किया
जाए उधर राहुल गांधी को किसानों के नए
आंदोलन में अपनी नई सियासी जमीन दिख रही
है इस बार किसान एमएसपी पर कानूनी गारंटी
की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और

इसी मुद्दे को लपक हुए राहुल गांधी ने
ऐलान कर दिया कि अब उनकी अगर उनकी सरकार
आई तो वह स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें
लागू कर देंगे एमएसपी की कानूनी गारंटी दे
देंगे क्योंकि उनको तो सत्ता में आना है
वोह कुछ भी बोल सकते हैं बाद में जो होगा

नहीं होगा वह किसने देखा है सुनिए एक बार
राहुल गांधी क्या कह रहे हैं फिर आगे की
बात बताता
हूं इंडिया की सरकार आएगी

तो हम एमएसपी की गारंटी हिंदुस्तान के
किसानों को देंगे जो स्वामीनाथन रिपोर्ट
में लिखा है व हम पूरा करके आपको दे
देंगे और यह हमारी शुरुआत

है हमारा मेनिफेस्टो बन रहा
है उसमें हमारा डिस्कशन चल रहा
है यह हमने आपको सिर्फ पहली बात बोली है
इसके आगे भी हम अपने मेनिफेस्टो में
किसानों के लिए मजदूरों के

लिए काम करने जा रहे हैं राहुल गांधी अब
यह वादा कर रहे हैं कि उनकी सरकार आई तो
स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफारिशें लागू
होंगी लेकिन जब कांग्रेस पार्टी खुद
केंद्र में सत्ता में थी तो स्वामीनाथन
रिपोर्ट के साथ उन्होंने क्या किया था मैं

आपको याद दिलाता हूं क्योंकि कहने में कुछ
नहीं जाता सत्ता लेनी है तो कुछ भी कह दो
लेकिन किया क्या था आपको याद रहे दिसंबर
2004 से अक्टूबर 2006 के बीच एमएस
स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन
ऑन फार्मर्स की कुल पांच रिपोर्ट सबमिट

हुई थी 2004 से 2014 तक कुल 10 साल
कांग्रेस की यूपीए की सरकार रही ले लेकिन
यह लोग 10 साल रिपोर्ट लागू नहीं किए
बॉस यूपीए सरकार के वक्त जब संसद में
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को को लागू

करने के लिए सवाल किया गया तो यूपीएस
सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों पर
अपना स्टैंड लिखित में बताया था और क्या
लिखित है पता है आपको लिखित में यूपीएफ
सरकार ने कहा था कि अप्रैल 2010 में

बीजेपी सांसद प्रकाश जावड़ेकर ने जब
राज्यसभा में कृषि मंत्रालय से सवाल पूछा
कि क्या फसल के मूल्य को लेकर सरकार ने
स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को मान
लिया है इस पर उस वक्त के कृषि राज्य

मंत्री के थॉमस ने कहा था कि अगर आयोग की
सिफारिशों को लागू कर दिया गया तो पूरा
मार्केट बर्बाद हो जाएगा हम आपको पहले भी
बता चुके हैं कि राहुल गांधी के लिए खुद

कांग्रेस राहुल गांधी खुद कांग्रेस के लिए
मुसीबत खड़ी कर देते हैं उन्होंने एमएसपी
पर कानून की गारंटी को देने का वादा कर
दिया और सेल्फ गोल किया क्योंकि साल
202021 में हुए किसान आंदोलन के दौरान भी

कांग्रेस ने सेल्फ गोल ही किया था पिछली
बार किसानों ने जो आंदोलन किया था उसमें
उनकी मांग थी कि मोदी सरकार तीनों कृषि
कानून रद्द करें इस पर कांग्रेस ने जमकर
राजनीति की कहा कि तीन किसान बिल का काले
कानून है जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव के
घोषणा पत्र में खुद कांग्रेस ने वही वादे
किए थे जो इन तीन कृषि कानूनों में मौजूद

थे कांग्रेस ने भी अपने मेनिफेस्टो में जो
एपीएमसी एक्ट है उसे हटाने और एग्रीकल्चर
प्रोडक्ट पर के लिए फ्री मार्केट की बात
कही थी और जो नरेंद्र मोदी तीनों कृषि
कानून लाए थे उसमें यही नियम थे लेकिन
चूंकि पॉलिटिक्स चल रही थी किसानों को का
वोट लेना था और इस कानून में लिखे होने के

बावजूद कि किसानों के लिए मार्केट को खोल
दिया जाएगा बिचौलियों को हटाने के नियम थे
इन कानूनों का विरोध किया कांग्रेस पार्टी
ने एमएसपी की कानूनी गारंटी मुमकिन नहीं
थी क्योंकि ऐसा होता तो आज कांग्रेस कब का
इसे लागू कर देती भाई यूपीए सरकार में कर

देते ये लोग लेकिन तब तो कह रहे थे कि यह
पॉसिबल नहीं है मार्केट बर्बाद हो
जाएगा क्यों नहीं किया अपनी सरकार के वक्त
लेकिन कांग्रेस को समझ में आ गया कि उनकी
सरकार में आना अ तो अभी मुश्किल ही लग रहा
है तो कुछ भी वादा कर दो आएंगे तो तब का

तब देखा जाएगा एमएसपी की कानूनी गारंटी
क्यों मुमकिन नहीं है आपको यह भी समझना
चाहिए 23 फसलों की एमएसपी पर खरीदारी के
लिए कुल खर्च 1 लाख करोड़ रुपए आने का
अनुमान है 17 लाख करोड़ रुपए यह रकम भारत

के कुल सालाना खर्च का लगभग 50 पर होगा आप
खुद सोचिए बॉस अगर फसल की खरीद पर ही
सरकार आधी जो उसकी कमाई है वह सारी आधी
रकम खर्च कर देगी तो भारत की अर्थव्यवस्था
का हाल क्या होगा कोई विकास के लिए पैसा

बचेगा बॉस कि सरकार अपने पूरे बजट का आधा
पैसा सिर्फ एमएसपी पर खर्च कर देगी और ऐसा
भी नहीं है कि मोदी सरकार एमएसपी को लेकर
काम नहीं कर रही एमएसपी पर जितनी फसल की

खरीद मोदी सरकार में हुई है उतनी कभी नहीं
हुई आप खुद देखिए साल 201415 में
76140 लाख मेट्रिक टन की फसल जो है वोह
एमएसपी पर खरीदी गई जिसके लिए कुल ₹ 6000
करोड़ सरकार ने खर्च किए वहीं 20222 में
1022 लाख करोड़ 62 लाख मेट्रिक टन फसल जो

है वो एमएसपी पर खरीदी गई और इसके लिए दो
28 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए यानी करीब
एक करोड़ 60 लाख किसानों को एमएसपी पर
सरकार ने जो फसल खरीदी उसका फायदा
हुआ लेकिन आप यह कहे कि हम जो फसल उगाए सब
एमएसपी पर खरीदा आएगा और सरकार खरीदेगी तो

देश बर्बाद हो जाएगा भाई और इसके बावजूद
एमएसपी की कानूनी गारंटी के नाम पर बबाल
चल रहा है किसान के नाम पर धमकाया जा रहा
है दिल्ली आकर दबाव बनाने के लिए की

कोशिशें हो रही है और यह भी कहा जा रहा कि
खुद पीएम आकर बात
करें ऐसा नहीं है कि इन लोगों से कोई बात
नहीं हुई इन्हें समझाया गया इनसे बातचीत

भी की गई आगे भी इनसे बातचीत करने का पूरा
सरकार की मंशा है कृषि मंत्री अर्जुन
मुंडा क्या कह रहे हैं एक बार वह भी सुनिए
किसानों
के मुद्दे
पर सरकार संवेदनशील है और उसका समाधान
चाहती है
पर किसानों को यह समझना
पड़ेगा खास करके वैसे संगठन के नेतृत्व

करने वाले लोगों को कि जब भी इस तरह की
चीजें आती है तो इसके बारे में विधि अपनाई
जाती है और उसको यह ध्यान में रखा जाता है
कि इसके क्या-क्या

पक्ष है जिसको ध्यान में रखते हुए अब जैसे
एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है स्टेट
सब्जेक्ट में आप उस स्टेक होल्डर के बातों
को ध्यान में रखते हुए सहमति बनाते हुए
क्या कर सकते यही सोचना है ऐसे आंदोलन को

लेकर पिछली बार सवाल उठे थे और उस आंदोलन
के पीछे की राजनीतिक दल है ऐसा इकोसिस्टम
है जो मोदी विरोधी है इसको लेकर बातें हुई
थी इस बार जो किसान संगठन सड़कों पर उतरे
हैं वो तो दावा कर रहे हैं कि उनका

राजनीति से कोई लेना देना नहीं है लेकिन
जिस तरह से अराजक तत्व हावी दिख रहे हैं
जिस तरह से विदेश में बैठे भारत के दुश्मन
एक्टिव हो गए हैं उससे यह आंदोलन तो कुछ

और ही लग रहा है भारत के दुश्मन और विदेश
में बैठे खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह
पन्नू कैसे धमकी दे रहा है एक बार जरा
उसको सुनिए
दिल्ली दे कोलो मंगया आज तक कुछ नहीं

मिल फसला डिया जमीना डिया काब है
हिंदुस्तान द हिंदू हुकूमत दिल्ली तो चल
दी दिल्ली मल पनी है पंजाब दे किसानों ते
नौजवानों अब आप बताइए जो लोग खालिस्तान की
मांग करते हैं वह इस आंदोलन का समर्थन कर

रहे हैं और उसके बाद आंदोलन पर सवाल नहीं
उठेंगे तो क्या होगा हिंसा हो रही है किसी
का माथा फोड़ा जा रहा है जी पर हमले हो
रहे हैं और उसके बाद कहा जा रहा है कि भाई
यह आंदोलन राजनीतिक नहीं है और ठीक 2024
के चुनाव के पहले हो रहा

है सेम वही पैटर्न दिखता है जो पहले हुआ
था और इसीलिए सवाल खड़ा होगा कि यह सब
क्या चल रहा है

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