Prashant Bhushan - Electoral Bond -Democracy and Supreme Court | BJP। PM MODI | SBI BONDS - instathreads

Prashant Bhushan – Electoral Bond -Democracy and Supreme Court | BJP। PM MODI | SBI BONDS

तो प्रशांत जी यह जो आप लोगों की मुख्य
आपत्ति किस मसले को थी इलेक्टोरल बंड को
लेकर यही थी कि यह तो एनोनिमस आपने कर
दिया कि भाई कोई

जना कितने भी पैसे किसी भी पॉलिटिकल
पार्टी को इलेक्टोरल बंड के जरिए दे दे और
किसी को पता भी नहीं लगेगा इलेक्शन कमीशन
को भी नहीं पता लगेगा कि किसने पैसे य दे

दिए उस पॉलिटिकल पार्टी को या किस
पॉलिटिकल पार्टी को यानी कि इसके जरिए आप
घूस भी दे स
वही कंपनियां जिनको कांट्रैक्ट मिल रहे

हैं जो अपनी अपने हक में पॉलिसी बनवा रही
हैं वही कंपनियां इलेक्टोरल बंड के जरिए
घूस दे दे और किसी को पता भी नहीं लगेगा
कि भाई यह घूस दी गई है इस रूलिंग पार्टी

को अपने हक में फैसले करवाने के लिए अपने
हक में पॉलिसी बनवाने के लिए तो यह सब
आपत्तियां थी और यह हमारे सिटीजन का जो
मौलिक अधिकार है राट टू इंफॉर्मेशन का

देखिए राइट टू इंफॉर्मेशन सिर्फ कानून से
नहीं आया इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बोला
था ये मौलिक अधिकार है आर्टिकल 19 व ए का

हिस्सा है तो उस मौलिक अधिकार को डिफीट
करता है क्योंकि मौलिक अधिकार में यह
निहित है कि हमको पॉलिटिकल पार्टी की कहां
से फंडिंग हो रही है कौन फंडिंग कर रहा है
यह जानने का अधिकार

है आपको आपको क्या ये जो सुप्रीम कोर्ट का
फैसला है क्या आपको लगता है थोड़ा देर से
आया है क्योंकि अब चैलेंज इसको 2019 में
किया गया तकरीबन पा साल के बाद य फैसला

आया है हा हा देर से तो आया ही है बहुत
देर से आया इस बीच में इतनी सारे इतने
सारे पैसे इन लोगों ने ले लिए और अभी

सुप्रीम कोर्ट ने खैर यह तो बहुत अच्छा
किया कि यह बोल दिया है कि स्टेट बैंक ऑफ
इंडिया डिस्क्लोज

करे कौन से इलेक्टरल बंड किसने खरीदे और
किस पार्टी ने उनको एनकैश किया इससे काफी
कुछ पता पता लग जाएगा कि यह घूस के तौर पर
कहां कहां यह पैसे दिए
गए क्या ऐसा हो पाएगा आपको लगता

है देखिए मुझे तो लगता है कि सरकार पूरी
पुरजोर कोशिश करेगी इसको रोकने की हो सकता
है ऑर्डिनेंस वगैरह लाने की कोशिश करें यह
कि यह इंफॉर्मेशन बाहर ना आए क्योंकि इससे

बहुत सारे चीजें खुलेगी कि भाई किस तरह से
कंपनियों ने घूस दी अपने हक में फैसला
कराने के लिए या अपने हक में कांट्रैक्ट
लेने के लिए या पॉलिसी बनवाने के

लिए बहुत सारी चीजें खुलेगी
क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले भी दो तीन ऐसे
फैसले हुए जिस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले
को पार्लियामेंट में कानून बनाकर बदल दिया

गया है इसलिए य आपकी जो आशंका है वो अपने
आप में जायज आशंका है लेकिन यह जो प्रश्न

है कि इससे यह भी तो पता चलेगा कि तमाम जो
विपक्षी पार्टिया है उ उनको भी तो पैसे
मिले हैं उनको भी किए गए उनको किन लोगों

ने दिए हैं उनकी भी अपनी सरकारें है तो
उनका भी तो खुलासा होगा वो तो देखिए सरकार
के पास वैसे भीय इंफॉर्मेशन होती है
क्योंकि स्टेट बैंक के पास य इंफॉर्मेशन
होती है स्टेट बैंक से इलेक्टोरल बंड्स

खरीदे जाते हैं जो आदमी खरीदता है उसका
नाम दर्ज होता है उनके पास दिखाया नहीं
जाता लेकिन दर्ज तो होता है उसके बाद जो

पार्टी एनकैश करती है उन इलेक्टोरल बंड्स
को उसका भी पूरा बरा स्टेट बैंक के पास
होता है और स्टेट बैंक क्योंकि सरकारी
बैंक है सरकार के कंट्रोल में है तो सरकार

तो पता लगा ही सकती है कि किसको दिए गए
सवाल यह है कि दूसरे लोगों को नहीं पता
लगता अपोजिशन को नहीं पता लगता और आम आदमी
को नहीं पता लगता कि किसने इलेक्टोरल बंड
के जरिए कितने पैसे किस पार्टी को दे दिए

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