Rahul Entry In UP : उधर यूपी में राहुल की इन्ट्री..इधर दिल्ली का वार ! - instathreads

Rahul Entry In UP : उधर यूपी में राहुल की इन्ट्री..इधर दिल्ली का वार !

दोस्तों नमस्कार कांग्रेस के पास गवाने के
लिए कुछ भी नहीं है लेकिन बीजेपी के पास
गवाने के लिए सब कुछ है क्योंकि बीजेपी के
पीछे दाव इस देश के भीतर के हर उस संस्थान
का हर उस नौकर शाह का हर उस पुलिस प्रशासन

का हर उस मीडिया संपादक या मीडिया
प्रतिष्ठान के मालिकों का और कॉरपोरेट का
लगा हुआ है जो यह मानकर चल रही है कि अब
मोदी सरकार के साथ ही खड़े रहना है तो फिर
इस खड़े होने का मतलब 2024 की दिशा में

बढ़ते हुए कदम जो चुनाव के मद्देनजर है
उसमें किसी भी हालत में कांग्रेस को एक
कदम भी आगे बढ़ने नहीं देना है और आज
राहुल गांधी की यात्रा की एंट्री जब तय थी

कि आज उत्तर प्रदेश में एंट्री हो रही है
और इस उत्तर प्रदेश की राजनीतिक हवा अगर
इस यात्रा के जरिए प्रभावित हो गई तो फिर
2000 24 की तस्वीर बदल सकती है व्यापक तौर

पर बदल सकती है लेकिन राहुल गांधी की
एंट्री शाम 4:30 बजे और सुबह ही खबर आई कि
दरअसल कांग्रेस का अकाउंट फ्रीज कर दिया
गया है यानी इस देश के भीतर में विपक्ष की
राजनीति को फ्रीज करने के लिए जो भी
पाइपलाइन पैसे की थी फंडिंग की थी उस पर

रोक लगाने का काम एडी और सीबीआई ने बखूबी
किया है इस देश के तकरीबन 11 550
बिजनेसमैन हो इंडस्ट्रियलिस्ट हो बड़े
पैसे वाले लोग हो जो कि गैर बीजेपी शासित

राज्यों में वहां की सरकार को फंडिंग कर
रहे थे उनको दबाव में लिया नकेल कसी उनको
गिरफ्तार किया और यह वाकई 1150 लोगों की
एक लंबी लिस्ट है चाहे वह एक वक्त तेलंगना
के हो चाहे बंगाल के हो चाहे छत्तीसगढ़ के

हो चाहे राजस्थान के हो चाहे तमिलनाडु के
हो चाहे कर्नाटक के हो यानी हर उस राज्य
में जहां बीजेपी नहीं वहां के तमाम रईसों
को डराया गया अपने दायरे में लिया गया और

उसके बाद नकेल कसी गई लेकिन पहली बार इनकम
टैक्स डिपार्टमेंट भी आज सक्रिय दिखाई
दिया हालांकि यह सक्रियता दो दिन पहले की
है जब नोटिस पहला भेजा गया यह कहते हुए कि
अब फ्रीज किया जा रहा है आपका अकाउंट उससे

पहले कोई नोटिस नहीं आया था 19 के चुनाव
से लेकर आज तक के चुनाव में आपने कभी ना
यह सुना होगा ना यह समझा होगा कि विपक्ष
के राजनीतिक दल के अकाउंट को इनकम टैक्स
डिपार्टमेंट फ्रीज कर दे यह कहकर कि आप पर
215 करोड़ का एरियर

है भारत के राजनीतिक इतिहास में सब कुछ
पहली बार हो रहा है अकाउंट फ्रीज किया गया
काफी शोर मचा उसके बाद कहा गया कि हम
फ्रीज को हटा आते हैं अगले बुधवार तक
सुनवाई तब करेंगे लेकिन 115 करोड़ रुपए
आपके अकाउंट में हमेशा रहने

चाहिए अन्यथा इसे फ्रीज माना जाएगा यानी
इतना पैसा तो आप निकाल ही नहीं सकते हैं
इसी दौर में उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी
की एंट्री और एंट्री के साथ वहां उमड़ा
हुआ जन

 

सैलाब यह दर असल चंदौली का नौबतपुर का
इलाका है जो बिहार के सासाराम के बाद
एंट्री चंदौली में होती है
राहुल गांधी कल बनारस में होंगे उसके बाद

भदोई में होंगे उसके बाद अमेठी में होंगे
फिर राय बरेली में होंगे फिर कानपुर में
होंगे उसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के
भीतर होंगे सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश
में तकरीबन 800 किलोमीटर की यह यात्रा जो

13 जिलों को पार करेगी क्या इससे दिल्ली
घबरा रही है और जहां-जहां यह यात्रा गई
वहां वहां व्यवधान क्या इसीलिए पैदा किया
गया कि वाकई राजनीतिक तौर पर कांग्रेस
चाहे सबसे कमजोर है लेकिन लोगों के जहन

में यह सवाल होना चाहिए कि इस कांग्रेस के
पीछे खड़े होने का कोई अर्थ नहीं है
क्योंकि यह चुनाव हार चुकी है राजनीतिक
तौर पर एक तरफ राहुल गांधी की एंट्री और
दूसरी तरफ अकाउंट का फ्रीज

होना यह दरअसल राजनीतिक मशक्कत नहीं है
बल्कि एक तीखी लड़ाई की शुरुआत है जो अब
इस उत्तर प्रदेश में शुरू हो चली है
क्योंकि राहुल गांधी ने एंट्री जबकी और

वहां उमड़े जन सैलाब हमें लगता है उसकी एक
तस्वीर आपको देखनी
चाहिए
यह बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा है जहां

उमड़े जन सैलाब के सामने राहुल गांधी ने
इस बात का जिक्र नहीं किया कि कांग्रेस का
अकाउंट फ्रीज क्यों किया गया उनका सवाल
बहुत सीधा था कि दरअसल हमारी ताकत पैसा
नहीं हमारी ताकत जनता है और दरअसल इसी
जनता से क्या दिल्ली के भीतर एक घबराहट है

क्योंकि अगर दृश्य पहला यह है तो एक दूसरा
दृश्य भी इस दौर में देश के भीतर जनता का
किसान आंदोलन से निकल रहा है और किसान
आंदोलन हरियाणा के बॉर्डर पर ना घुसाए
इसके लिए पूरी फौज तैनात है जो इतने आंसू
गैस के गोले बरसा रही है जो इससे पहले कभी

आपने देखे नहीं होंगे लेकिन दूसरा दृश्य
ये बतलाता है कि जिस वक्त प्रधानमंत्री
हरियाणा के रेवाड़ी में थे और रेवाड़ी में
वह वहां के एम्स की नीव डाल रहे थे यह
कहते हुए कि जब यह बन जाएगा तो इसका
लोकार्पण करने मैं ही

आऊंगा उसी
वक्त उसी वक्त जो शंभू बॉर्डर है जो कि
अंबाला के नजदीक का बॉर्डर है जो हरियाणा
और पंजाब को जोड़ता है वहां का एक दृश्य
देख लीजिए यह दृश्य हैरान करने वाला है

क्योंकि इतनी बड़ी तादाद में आंसू गैस के
गोले जो छोड़े जा रहे थे और लग ऐसे रहा था
कोई जैसे युद्ध का मैदान है और किसान
अफरातफरी में इधर से उधर भाग रहे थे इस
दृश्य को
देखिए
आ जाओ आ जाओ मेरे वीर आ जाओ मेरे
वर

चेरा अपने
लो तो क्या यह जमीन की ऐसी धड़कने हैं जो
दिल्ली को डरा रही है और डरती हुई दिल्ली
एक साथ कई मोर्चों पर अपने आप को अब खड़ा
पा रही है या डगमगा रही है क्योंकि
किसानों को लेकर जिन बातों का जिक्र दो
वरस तीन वरस पहले हो रहा था उन्हीं बातों

का जिक्र इस दौर में भी हो रहा है लेकिन
सरकार समझौता करने को तैयार नहीं या सरकार
को लग रहा है कि वह जिस कॉर्पोरेट पूंजी
के आसरे इस देश की अर्थव्यवस्था को संभाले

हुए हैं या आने वाले वक्त में कहीं उससे
ज्यादा लाभ पाकर उसे संभालना है तो उस परे
समझौता कैसे किया जा सकता है और वहीं
दूसरी तरफ राहुल गांधी जिन बातों का जिक्र

अब उत्तर प्रदेश में कर रहे हैं और उत्तर
प्रदेश में घुसने से पहले उनके साथ जब
तेजस्वी यादव नजर आए जो बकायदा ड्राइविंग
सीट पर बैठे हुए थे और वहां से वह जीप
चलाते हुए राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश की

सीमा तक लेकर आए उसने एक मैसेज तो दे दिया
कि इस देश के भीतर की दो धाराओं में सत्ता
कहां पर खड़ी है और विपक्ष कहां पर खड़ा
और विपक्ष की एकजुटता इस दौर में सड़क पर
ही होगी और सड़क अगर एकजुट होने लगे तो

फिर सरकार के लिए मुश्किल होगी क्योंकि अब
सामने उत्तर प्रदेश के वह तमाम जिले हैं
जो एक-एक करके सामने आने वाले हैं और
महत्त्वपूर्ण है तो कल राहुल गांधी बनारस

में मौजूद होंगे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी की पार्लियामेंट्री कंसीट एंसी
है अब सवाल कोई भी कर सकता है क्या बनारस
के भीतर लोगों का हुजूम अगर इसी तरीके से
उमड़ पड़ा तो दिल्ली की धड़कने कहीं और तो

नहीं बढ़ जाएगी तब उसके सामने अगला सवाल
क्या होगा और यहीं से यह सवाल अब बड़ा हो
चला है जो आज हुआ अकाउंट फ्रीज करने के
साथ उसने मैसेज दे दिया कि राहुल गांधी की

यात्रा को रोकना जरूरी है या व्यवधान
डालना जरूरी है या जब जब यात्रा किसी
तरीके से राजनीति मुद्दों को प्रभावित कर
रही हो उस वक्त
व्यवधान होना चाहिए और ऐसा व्यवधान जो
लोगों का ध्यान उसी दिशा में ले जाए और

शायद यही वजह है कि आज दिल्ली के भीतर जब
यूथ कांग्रेस के तमाम लड़के निकल कर आए और
जिस तरीके से उनके भीतर का आक्रोश था और
दूसरी तरफ राहुल गांधी बहुत सौम्य तरीके

से जिन मुद्दों को उठा रहे थे इन दोनों को
गौर करने की चीजें हैं इन दोनों को जरा
सिलसिलेवार तरीके से देखिए और समझ
क्योंकि यह पहला दृश्य दिल्ली का है जहां
यूथ कांग्रेस के लड़के सड़क पर थे हम

लोगों को
परसों यह जानकारी मिली कि जो चेक हम लोग
इशू कर रहे
हैं वह बैंक्स उस चेक को ऑनर नहीं कर रहे
हैं उसके ऊपर जब हम लोगों ने आगे छानबीन
करी तो हमें बताया
गया

कि देश
की मुख्य अपोजिशन पार्टी के सारे अकाउंट
फ्रीज कर दिए
गए कांग्रेस पार्टी के अकाउंट्स
पर तालाबंदी हो गई
है कांग्रेस पार्टी के अकाउंट फ्रीज कर
दिए गए हैं हमारे देश में लोकतंत्र पर

तालाबंदी हो गई
है और यह कांग्रेस पार्टी के अकाउंट फ्रीज
नहीं हुए हैं हमारे देश में
डेमोक्रेसी फ्रीज
हुई
जो यह जो किस तरीके का तानाशाही सरकार है
कार्यकर्ता के साथ जो कर रहा है जब तकने
का नहीं है तब तक लड़ाई लड़ेंगे इनका मकसद

क्लियर है साफ है भ जोड़ यात्रा को रुकना
चाहता है कांग्रे पार्टी को कमजोर करना
चाहते है अपो पार्टी को दरअसल जिस
राजनीतिक लड़ाई की दिशा में 2024 के
लोकसभा चुनाव बढ़ रहे हैं उसमें इस तरीके
से यूथ कांग्रेस या युवा कांग्रेस के

लड़कों का सड़क पर उतरना शायद एक डायवर्जन
हो सकता है एक भटकाव हो सकता है क्योंकि
राजनीतिक लड़ाई तो इस देश के भीतर में
लोकतंत्र को अपनी हथेली में समेट कर रखने
की है सीबीआई ईडी या आईटी नहीं अगर एक

लंबी कतार को समझे तो सुप्रीम कोर्ट ने
क्या कहा कल सुप्रीम कोर्ट ने एक मैसेज
दिया उसने कहा कि इस देश के भीतर के
फाइनेंस मिनिस्टर एक नियम बनाते हैं उस पर
सहमति इस देश के रिजर्व बैंक की होती है

वह मोहर लगा देती है उसके बाद चुनाव आयोग
उसको हरी झंडी दिखलाता है और सुप्रीम
कोर्ट जब उसे परखता है तो कहता है यह
अनकंस्टीट्यूशनल है तो क्या सरकार के तमाम

वह काम जो उसको राजनीतिक सत्ता में बरकरार
रखते हैं वह अनकंस्टीट्यूशनल चल रहे हैं
और कांग्रेस इसमें भटक जा रही है कि दरअसल
देखिए आज आपको सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज

कर दिया उसने भी कहा कि यह गैर कानूनी है
अनकंस्टीट्यूशनल है लेकिन एक क्षण के लिए
बीजेपी की उस सत्ता को परखने की कोशिश
कीजिए कि उसकी राजनीतिक सत्ता बरकरार रहे

तो उसने किसकिस पायदान पर इस देश के भीतर
में असन कार्य को किया और सुप्रीम कोर्ट
ने कहा कि आप असंवैधानिक काम कर रहे हैं
बावजूद इसके काम चल रहा
है महाराष्ट्र में सरकार का गिरना और

सरकार का बनना राज्यपाल की भूमिका सुप्रीम
कोर्ट ने क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने कहा
यह असंवैधानिक है फिर भी महाराष्ट्र में
सरकार एकनाथ शिंदे की चल रही है पेगासस का
मामला जासूसी का मामला है और जासूसी नहीं
होनी चाहिए सुप्रीम कोर्ट में यही बात तो

आई सामने कि लोगों के मौलिक अधिकार हैं
उनके अपने जीने के तरीके हैं और उसमें आप
सेंध लगा रहे हैं जासूसी कर रहे हैं यह
अनकंस्टीट्यूशनल है असंवैधानिक है सुप्रीम
कोर्ट ने कहा सरकार फिर भी चल पड़ी इसी
दौर के भीतर अगर आप ध्यान दीजिएगा तो

चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर क्या था
कि अगर सरकार ही नियुक्त करेगी तो यह तो
पूरे तरीके से असंवैधानिक होगा वह एक
स्वायत संस्था है वह चुनाव कराती है लेकिन
इसके बावजूद

भी अगर प्रधानमंत्री ही नियुक्त करेंगे तो
फिर इसके मतलब मायने क्या रहेंगे लेकिन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा संवैधानिक है लेकिन
रिजल्ट क्या निकला कुछ नहीं संसद की ताकत
के साथ प्रधानमंत्री को वह ताकत मिल गई कि

वह चुनाव आयुक्त को नियुक्त कर सकते हैं
अडानी कांड में किस तरीके से शुरुआत में
बात उभरी थी कि लगभग 12 लाख करोड़ रुपए जो
शेयर बाजार में डूब गए उसकी जिम्मेदारी
कौन लेगा और यह पैसा किसका है क्या इस देश
के भीतर में अनकंस्टीट्यूशनल तरीके से गैर

कानूनी तरीके से ब्लैक को वाइट करके
मैनिपुलेशन करके यह सारे काम हो रहे हैं
पूरा अनकंस्टीट्यूशनल मामला है लेकिन हुआ
क्या राफेल की डील को भी याद कर लीजिए उस
दौर में जब कहा गया कि देखिए किसी दूसरे

देश के साथ इस देश के रक्षा मंत्री नहीं
बल्कि प्रधानमंत्री खुद जाकर डील करते हैं
और पुरानी रकम और नई रकम का खेल जब शुरू
होता है और मामला सुप्रीम कोर्ट में आता
तो सुप्रीम कोर्ट में आखिरी डायलॉग सरकार

कीमत क्योंकि इससे देश की सुरक्षा पर खतरा
होगा और सुनवाई के दौर में पूरा मामला
अनकंस्टीट्यूशनल जा रहा था कि कैसे यह सब
हो सकता है लेकिन जब देश की सुरक्षा का
सवाल तो सब कुछ ताक पर यानी एक तरफ
राजनीति अनकंस्टीट्यूशनल तरीके से चीजों

को चला रही है और सत्ता में बनी हुई है
दूसरी तरफ कांग्रेस जिसके पास गवाने के के
लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि इतनी कमजोर
कांग्रेस कभी नहीं थी तो अब अगर उसके
अकाउंट को फ्रीज किया जाता है और स्थिति

यह आती है कि आपके पास कोई पैसा आएगा नहीं
कोई चेक अप बुना ही नहीं पाएंगे और
राजनीति आपकी रोकने के लिए अगर इस दिशा
में सरकार बढ़ जाती है क्योंकि आईटी के
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के कोई अधिकारी इस

तरीके से इस देश की किसी पॉलिटिकल पार्टी
व अभी नेशनल पार्टी के अकाउंट को फ्रीज
करने का ऐलान नहीं कर सकता है राजनीतिक
तौर पर ही यह निर्णय संभव है तो जाहिर है
सरकार किस रूप में आगे बढ़ चुकी है और
कांग्रेस जिसके पास गवाने के लिए कुछ नहीं

है राजनीतिक तौर पर क्या इस दौर की
राजनीति के उस मर्म को वह नहीं समझ पा रही
है या अगर वह समझना चाह रही है तो उसमें
बिखराव आ जाए इसी दिशा में यह सारे निर्णय
इस दौर में लिए जा रहे हैं क्योंकि
राजनीति बड़ी तीखी हो चली है यह हो सकता

है इससे इनकार नहीं किया जा सकता है लेकिन
दूसरी तरफ बीजेपी जानती है प्रधानमंत्री
मोदी जानते हैं कि निशाने पर किसे लेना है
इसीलिए हमें लगता है कि इन तमाम मुद्दों
के बीच में दो बातें और साफ हो जाए एक तरफ
राहुल गांधी जो उत्तर प्रदेश में जैसे ही
एंट्री करते हैं वह सबसे बड़ा सवाल जानते

हैं उत्तर प्रदेश में अयोध्या में राम
मंदिर और राम मंदिर की हवा में इस देश के
भीतर वोटों का ध्रुवीकरण वह भी बीजेपी के
अनुकूल होगा लेकिन पहली बार अयोध्या का

जिक्र करकर राम मंदिर का जिक्र करके राहुल
गांधी इस मुद्दे को उठाते हैं कि क्या
आपने प्राण प्रतिष्ठा के दिन प्रधानमंत्री
को
देखा आपने तमाम बड़े कॉरपोरेट रईसों को
देखा इस देश के तमाम

कलाकारों अमिताभ बच्चन तक को देखा आपने
लेकिन आपने किसानों को नहीं देखा आपने
मजदूरों को नहीं देखा आपने हाशिए पर पड़े
हुए लोगों को नहीं देखा क्यों नहीं देखा
क्योंकि मीडिया इस दौर में उसी रंगत में

रंग चुका है है वह सवाल करेगा नहीं और
दिखाएगा वही जिसमें आप हाशिए पर हमेशा नजर
आए इससे पहले यह सवाल इस तरीके से कोई
उठाता नहीं था इस बार उठा रहा है लेकिन
दूसरी तरफ प्रधानमंत्री चौकन है वह जानते
समझते हैं निशाने पर कांग्रेस को लेते
रहना है इसीलिए रेवाड़ी की सभा हो या

टेलीविजन पर विकसित राष्ट्र की यात्रा का
चिंतन मनन हो जनता के बीच करने का जो पूरा
दृष्टिकोण है उसमें भी जिन बातों का जिक्र
है वह कांग्रेस को लेकर ही होता क्योंकि
राजनीति वही से सदे कीी ंद उड़ जाती

है आप कांग्रेस की स्थिति देख रहे हैं
आपने हाल में ही कांग्रेस को सबक सिखाया
है लेकिन यह मानते ही
नहीं आज भी इनका एक ही एजेंडा है मोदी को
गाली
दो जो भी मोदी को जितनी ज्यादा गाली दे

सकता है उसे कांग्रेस उतना ही जोर से गले
लगाती है य विकसित भारत का नाम तक नहीं
लेते क्योंकि मोदी इसके लिए काम कर रहा है
यह मेड इन इंडिया से बचते हैं क्योंकि
मोदी इसे बढ़ावा देता है यह वोकल फॉर लोकल

नहीं बोलते क्योंकि मोदी इसके लिए आग्रह
करता है अब आप सोचिए प्रधानमंत्री विकसित
राष्ट्र का ऐलान कर रहे हैं निशाने पर
कांग्रेस को ले रहे हैं वह जानते हैं यह
लड़ाई बड़ी कठिन है क्योंकि इस दौर में
जनता के साथ अपनी उपलब्धियों को जोड़ना और

उसके साथ सरोकार बैठाकर चुनाव जीत जाना
शायद मुश्किल होगा क्योंकि जनता के साथ
सरोकार तो इस दौर में राहुल की यात्रा के
हो सकते हैं किसानों के आंदोलन के हो सकते
हैं इस देश के भीतर महंगाई और बेरोजगारी

के मुद्दे के हो सकते हैं लेकिन
प्रधानमंत्री इन सब बातों से अनभिज्ञ हो
ऐसा भी नहीं है वह जानते समझते हैं और सच
क्या है इस दौर का इस दौर का सबसे बड़ा सच
यह है कि जिस वक्त किसान भी एमएसपी की

मांग कर रहा है उसी वक्त भारत बाहर से
लगातार दाल मंगा रहा है यूनियन कंज्यूमर
अफेयर सेक्रेटरी रोहित कुमार हैं उनकी तरफ
से एक जानकारी दी गई कि ब्राजील से 3000

टन उड़द दाल इंपोर्ट किया जा रहा है और इस
वर्ष में 20000 टन और इंपोर्ट किया जाएगा
लेकिन सिर्फ उरद दल नहीं बल्कि अरहर यानी
तुअर दाल भी इंपोर्ट की जाएगी यह इंपोर्ट

का सिलसिला कोई नया नहीं है लेकिन जिस दौर
में इस देश के
भीतर अनाज की निर्भरता का जिक्र बार-बार
हो रहा हो और 5 किलो अनाज बाटने की शुरुआत
इस देश के भीतर में जो कोविड से हुई वह
2028 तक जारी रहेगी ऐसे

में नौकरशाह यह कहने से नहीं चूक रहे कि
दरअसल बाहर से सस्ता मिल जाएगा इस देश के
किसानों को अगर एमएसपी पर अनाज को
खरीदेंगे तो हमें महंगा मिलेगा यानी इस
देश की अपनी स्वावलंबन की परिस्थिति से
ज्यादा बेहतर है बाहर से अनाज को मंगा

लेना और अरहर तुवर उड़द और महसूर की मसूर
की दाल यह छह सात देशों से मंगाई जा रही
है ऑस्ट्रेलिया कनाडा रूस म्यानमार
मोजांबिक तंजानिया सूडान मलावी इन तमाम
जगहों से महंगाई जा रही है और दूसरा

हिस्सा यह भी है इस देश के भीतर का विकसित
रा होने की दिशा में अगर आप परखिए अग
पिछले इस फाइनेंशियल ईयर में इस वित्तीय
वर्ष में अप्रैल से
लेकर जनवरी तक जो एक्सपोर्ट इंपोर्ट का

घाटा है वह तकरीबन 17 लाख करोड़ से ज्यादा
का है हम लोगों ने जो एक्सपोर्ट किया वह
29 लाख करोड़ का किया और जो इंपोर्ट किया
वह 46 लाख करोड़ का किया कुछ ज्यादा उससे
पिछले ही महीने जो किया वह तकरीबन 3 लाख
करोड़ का एक्सपोर्ट किया और 45 लाख करोड़

से ज्यादा का इंपोर्ट
किया हमारी अपने उत्पादन हमारा अपना
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर हमारे यहां अपना
रोजगार इन सब बातों का जिक्र कोई कर नहीं
रहा है और यही सवाल दिल्ली के कानों में
खटक लगा है कि राहुल गांधी दरअसल इस
यात्रा के जरिए उन बातों का जिक्र कर रहे

हैं जिन बातों से हमने इस दौर में पर्दा
डाल दिया था उस परे एक रेड कारपेट बिछा दी
थी अलग-अलग मुद्दों के आसरे और अपनी
उपलब्धियों के आसरे तो क्या डर इसी बात का
है और इसीलिए इस यात्रा तक को रोकने की
कोई प्लानिंग भी हो रही है क्योंकि

राजनीतिक तौर
पर जो कुछ स्टेक पर लगा हुआ है वह बीजेपी
के तमाम नेताओं भर का नहीं है सांसदों का
नहीं है इस देश के भीतर में कॉरपोरेट की
पूरी पूंजी हो इस देश के भीतर में
कॉन्स्टिट्यूशन इंस्टीट्यूशंस हो स्वायत

संस्थाएं हो नौकरशाही की नियुक्ति हो और
तो और इस पूरी प्रक्रिया के भीतर से जब आप
निकलिए तो आपके के जहन में दो सवाल और भी
होंगे क्या ऐसे में जजों की नियुक्ति को
भी सरकार प्रभावित कर रही है जैसे इलेक्शन
कमिश्नर की नियुक्ति उसने हाथ में ले ली

है हालांकि अभी कॉलेजियम है लेकिन दूसरा
सवाल यह भी है जो फैसले आते हैं और जिस
रूप में आते हैं सरकार इस बात से बेखौफ
क्यों है कि अगर अनकंस्टीट्यूशनल चीजें वो
लगातार एक के बाद एक करती रही जिसका जिक्र

सुप्रीम कोर्ट ने किया उसके बाद भी वह
बेखौफ क्यों है तो डर अब उत्तर प्रदेश में
यात्रा की एंट्री को लेकर है क्योंकि जिस
लकीर से चलना है इस यात्रा को उसके
अंतर्गत आने वाली जो 15 जनसभाएं होंगी वो

15 जनसभाएं उस 15 कंसीट में होनी है जहां
पर कांग्रेस के पास सिर्फ एक ही सीट
है अब सवाल यह है क्या वाकई राजनीतिक तौर
पर यात्रा का कोई प्रभाव है या राजनीतिक

तौर पर बीजेपी हर हाल में या मोदी शाह की
जोड़ी हर हाल में चाहती है कि उसे दो
तिहाई सीटों पर जीत मिले जिससे संसद के
भीतर कोई भी कानून बनाना उसके लिए आसान हो

जाए क्या वाकई यही दृष्टि है और उसमें
व्यवधान जनता के जागृत होना या जनता के
भीतर से उठते हुए सवालों को जनता के साथ
चुनावी रैलियों में पॉलिटिकल रैलियों में
यात्राओं में वह किसान के तौर पर हो

बेरोजगार के तौर पर यह मुद्दे उठने लगेंगे
तो उसके लिए परेशानी
है आखिर के दो तीन सवाल बड़े मायने हैं आज
का संदेश तो यही है कि यह दरअसल अकाउंट
फ्रीज करना और उत्तर प्रदेश में राहुल

गांधी की एंट्री का होना हरियाणा जाकर भी
प्रधानमंत्री का किसानों के बारे में
खामोशी बरत लेना और उसी वक्त वहां पर आंसू
गैस के गोले छोड़े जाना यह दृष्टिकोण
बतलाता है कि अब लड़ाई और तीखी होने वाली
है और तेज होने वाली है और कौन किस रूप

में किस तरीके से सत्ता के तमाम संस्थान
के जरिए चाले चली जाएंगी इसका सिर्फ
इंतजार कीजिए और हर
दिन एक नए धमाके का इंतजार कीजिए जो

पॉलिटिकल धमाका इस देश की राजनीति में
विपक्ष को और ज्यादा हाशिए पर ढकेल
देगा ऐसी तीखी लड़ाई इससे पहले कभी नहीं
थी बहुत-बहुत शुक्रिया बहुत-बहुत
शुक्रिया

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