Shambhu Border | किसानों ने बंद कर दी 'दलाल नेताओं' की एंट्री - instathreads

Shambhu Border | किसानों ने बंद कर दी ‘दलाल नेताओं’ की एंट्री

नमस्कार  मेरे मंच पर
आपका स्वागत
है दोस्तों मुसीबत जब आती है तो फिर चारों
तरफ से आती है और मोदी जी के साथ आजकल कुछ
ऐसा ही हो रहा है सबसे बड़ी मुसीबत

इलेक्टोरल बंड है जहां पर सुप्रीम कोर्ट
ने मोदी के सबसे बड़े चुनावी चंदे
प्रोजेक्ट को खारिज कर दिया और उधर एक और
बड़ी मुसीबत छाती पर देश का किसान सवार है
और इससे बड़ी मुसीबत कि सर पर

देश का फाइनल है चुनाव है और इन सबके बीच
जो मुसीबत धीरे धीरे धीरे विकराल रूप ले
रही है वह है सड़कों पर उतरा किसान जिसकी
संख्या शंभू बॉर्डर पर हरियाणा में पंजाब
में धीरे धीरे-धीरे हजार से लाखों में

तब्दील हो रही यह जो संख्या है जिसको ऑफर
करने के लिए मोदी जी के पास फिलहाल कोई
फार्मूला नहीं यह आंदोलन कहीं ना
कहीं मोदी जी के लिए गले की एक बड़ी फांस
बनता जा रहा है एक ऐसी स्थिति जहां मोदी
जी को

 

खुद रास्ता नहीं देख रहा अब मोदी जी के
लिए जो सबसे बड़ी मुसीबत है या यूं कहे कि
यह जो किसान का मामला है इसमें जो सबसे
बड़ा पेच है जहां सरकार फंस गई है मोदी जी
के गले की फांस है जहां वो यह है कि मोदी
जी दरअसल कुछ शर्तें तो मान रहे हैं

किसानों की कुछ शर्तें मानने को तैयार
नहीं
और किसान चाहता है कि 100 फीसद शर्तें
मानी जाए
100% और मोदी जी 100% के लिए गारंटी देने
को तैयार नहीं तो मोदी जी चाहते हैं कि
किसी तरह से मामला थोड़ा टलता चला जाए

चुनाव तक इसको टाला जाए और उधर जो किसान
है वो बेसब्र हुआ जा रहा है किसान का जैसे
धीरज टूट रहा हो और इसीलिए रोज जो आंसू
गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं चाहे वो
ड्रोन से छोड़े जा रहे हो या बंदूक से
छोड़े जा रहे हो या फिर लाठी चार्ज हो रही

हो या फिर रबर बुलेट चलाए जा रहे हो किसान
को इसका कोई असर नहीं भीड़ बढ़ती जा रही
है और वह दिल्ली कूज करना चाहता है कटीले
तारों को बाधक लहू लवान होकर वह दिल्ली

कूछ करके मोदी का गिराव चाहता है अब इसमें
दोस्तों दो बड़ी बातें हैं दो बड़ी बातें
यूं कहे कि नट शेल में दो ऐसी बातें हैं
जो कहीं ना कहीं फांस बन गई है किसान और
सरकार की बातचीत में पहली चीज है एसपी
मिनिमम सपोर्ट प्राइस यानी किसानों को

उनकी फसल का बेहतर दाम देना मोदी जी
एमएसपी के लिए तैयार नहीं है जो भी कारण
हो फिर कभी मैं डिस्कस करूंगा मोदी जी
एमएसपी को टालते आ रहे हैं और एमएसपी पर
उन्होंने जो फाइल थी वह दो साल से अपनी

अलमारी में बंद कर रखी किसान य भाप रहा है
वह चाहता है कि एमएसपी पर सरकार रिटेन
गारंटी दे लीगल गारंटी दे कि हम एमएसपी
देंगे दूसरी ू चीज मोदी चाहते हैं कि भाई
एक कमेटी बने किसान कह रहा है कि बहुत

कमेटियां बन चुकी है अब गले तक पानी आ गया
अब हमें कमेटी नहीं चाहिए आप सिर्फ एक
लाइन का ऑर्डर
करें तो मोदी कमेटी चाहते हैं किसान कमेटी

नहीं चाहते हैं और इसी और शायद यही वजह है
कि मुझे लगता है कि यह आंदोलन एक विकराल
रूप लेने जा रहा है और मैंने पहले भी कहा
था फिर दोहरा रहा हूं ये सारा आंदोलन
उत्तर भारत में केंद्रित

राजस्थान का हिस्सा है उसमें पंजाब का
हिस्सा है उसमें हरियाणा है कुछ हिस्सा आप
इसमें हिमाचल का मान सकते हैं उत्तराखंड
का मान सकते हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश की

जाट बल्ट है और कुछ हिस्सा टच कर रहा है
मध्य प्रदेश से अगर इनको आप लोकसभा की
सीटों में कन्वर्ट करें 40 50 सीटें ऐसी
हैं जहां पिछली बार मोदी स्वीप किए थे
लेकिन यह आंदोलन य जो किसानों का आंदोलन

है ये अगर बढ़ता गया यह चिंगारी अगर आग
बनी 40 50 सीटें मोदी जी की फंस सकती है
इट्स अ बिग
इशू अब दोस्तों मोदी जी की क्या रणनीति है
और किसानों की क्या रणनीति है और ये जो
टकराव है यह बढ़ते बढ़ते कहां तक पहुंचेगा

इसकी इंतिहा क्या है इसको जानना बहुत
जरूरी है क्योंकि 20224 के फाइनल के ठीक
मुहाने पर यह युद्ध हो रहा है किसान
वर्सेस सरकार फार्मर्स वर्सेस मोदी कह
लीजिए आप आज मैंने दो एक्सपर्ट से बात की

दो एक्सपर्ट्स है और अलग-अलग बातचीत हुई
है एक साहब इंटीरियर में थे किसानों के
बहुत बड़े नेता हैं जो बातचीत में शामिल
थे जो मंत्रियों से बातचीत कर रहे थे मैं
उनसे पूछूंगा कि समोसा और चाय के आगे
बातचीत क्यों नहीं बढ़ रही वो उनसे

पूछूंगा किसान है ठेट भाषा में बात करेंगे
किसानी के और एक साहब हैं चौधरी
पुष्पेंद्र सिंह ये एक्चुअली फार्मर्स के
जितने इश्यूज हैं उसके एक्सपर्ट हैं आप कह

सकते हैं सरकार को भी समझते हैं किसानों
को भी समझते हैं और एक पूरे पर्सपेक्टिव
में यह आपको सही बात बताएंगे अंदर की बात
क्या है कि मोदी क्या करने जा रहे हैं और
क्या मोदी उलझते तो नहीं जा रहे हैं और
मोदी की स्ट्रेटजी क्या है मोदी के माइंड

में क्या चल रहा है पहले चलते हैं चौधरी
पुष्पेंद्र जी के पास और उनसे समझते हैं
मोदी के माइंड में क्या चल रहा है मैं एक
आपसे जानना चाह रहा था आप पूरी तरह से इस
समस्या में इशू में भीतर तक उतरे हुए क्या

मोदी सरकार
एमएसपी देने जा रही है किसानों को और अगर
नहीं देने जा रही एमएसपी तो मोदी सरकार की
स्ट्रेटेजी आपको क्या लगती
है देखिए मोदी सरकार पहले से ही एमएसपी की
लीगल गारंटी देने के लिए गंभीर नहीं लग

रही
मुझे दो साल इन्होंने एक कमेटी बना कर के
जो है इसको अटका लटकाने और भटकाने का काम
किया अब भी जो तीन बैठकें हुई है उसमें
केवल ये कमेटी बनाने की बात करते हैं कि

अब हम एक कमेटी बना देंगे हमें एक्सपर्ट
से राय लेनी पड़ेगी हमें राज्यों से पूछना
पड़ेगा हमें अपना बजट देखना पड़ेगा इस तरह
की गोल मोल बातें कर रहे हैं वास्तविक जो

मुझे इनकी चाल लग रही है वो ये है कि अभी
दो तीन हफ्ते बाद आचार संहिता जो है लागू
होने वाली है अब इन्होंने चौथे राउंड की
वार्ता रख दी परसों की यानी 18 तारीख की

तो इसी तरीके से यह कोशिश कर रहे हैं कि
धीरे धीरे धीरे धीरे आचार संहिता तक इसको
ले जाए और उसके बाद हाथ खड़े कर दें कि
साहब देखिए देश में चुनाव घोषित हो चुका

है आचार संहिता लग चुकी है अब हम कुछ नहीं
कर सकते लीगली तो ये इनकी रणनीति मुझे अभी
तक मालूम पड़ रही है कि किसानों को थका दे
और फिर आचार्य संहिता का बहाना करके इस पर
कुछ ना करें जी जी अगर यह एमएसपी अगर यह
बहाना करते हैं तो 18 तारीख के बाद या जब

भी आचार संहिता लगती है क्या धीरे-धीरे
बाकी जो किसान यूनियन है हरियाणा में
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजस्थान में
पंजाब में क्या धीरे-धीरे अब किसान एक हो
रहा है क्योंकि एमएसपी किसान के लिए एक

तरह से उनके जीवन का सबसे बड़ा ऑक्सीजन
देखिए एसकेएम का जो संयुक्त किसान मोर्चा
है उसके एक बहुत बड़े गुट ने इस आंदोलन की
कॉल बेशक दी हो लेकिन अब धीरे-धीरे सारे
गुट जो है इसमें शामिल होते चले जा रही

हैं इसमें टिक साहब ने कल एक मीटिंग बुलाई
हुई है सिसौली में मुजफ्फरनगर में इसी
तरीके से जो नाम सिंह चोनी गुट है हरियाणा
में जो बहुत ज्यादा एक्टिव रहते हैं
उन्होंने जो है आज भी जो टोल प्लाजा फ्री
करने का काम किया उसके बाद ट्रैक्टर परेड

कल करेंगे उसके बाद मीटिंग कर रहे हैं तो
यह भी शामिल हो रहे हैं कल आपने देखा के
पंजाब के जो बहुत बड़ा एक गुट है किसान
यूनियन का ही उग्र उन्होंने रेल रो को
किया तो धीरे धीरे सारे गुट जो है उह
इसमें एकत्रित होते चले जा रहे हैं और यह

विशाल पिछली बार के से भी ज्यादा विशाल
आंदोलन य खड़ा हो जाएगा यदि इस पर कोई
निर्णय सरकार ने नहीं लिया नहीं लिया मतलब
आपको लगता है बहुत बड़ा एक आंदोलन ये होने
जा रहा है वन ऑफ द बिगेस्ट मूमेंट
बिल्कुल बहुत बड़ा आंदोलन होगा और इसमें

मैं बता दूं इस बार यह अपनी ही जाल में फस
गए
हैं तो चौधरी पुष्प सिंह को आपने सुना जो
कह रहे हैं कि मोदी की रणनीति है कि मामले
को टालते चले जाओ आगे बढ़ाते चले जाओ
चुनाव तक ले जाओ या कुल कर मोदी अभी तक

डिसाइड नहीं कर पा रहे और मुझे लगता है
अगले 72 घंटे में मोदी जी को फैसला तो
लेना पड़ेगा 40 50 सीटों की बात है देखना
होगा झुकते हैं नहीं झुकते हैं अब चलते
हैं संभल संभल चलते हैं पश्चिमी उत्तर
प्रदेश और वहां पर सीधे लाइव होंगे हमारे
साथ चौधरी हरपाल जी हरपाल जी थोड़ा सा ठेट

बोलते हैं थोड़ा समझना पड़ेगा उन उनकी
बातों को वो दो बातें कह रहे हैं एक तो वो
बताएंगे आपको कि भाई यह समोसे और चाय से
बातचीत आगे क्यों नहीं बढ़ पा रही और
किसान नेता जो बातचीत कर रहे हैं उनको
मोदी जी की मंशा पर संदेह क्यों है शक
क्यों है मोदी जी पे मोदी की गारंटी पर शक

क्यों है दूसरा एक और बात कहेंगे वो
कहेंगे कि कुछ ऐसे नेता हैं जो सरकार की
तरफ से एंट्री लेते हैं और इस पूरे आंदोलन
को हाईजैक करते हैं तो ऐसे जो डीलर हैं
आंदोलन के हम इस बार उनको नहीं आने दे रहे
अब कौन है वो नेता जो डीलर बनक आते हैं और

इस पूरे आंदोलन को कहीं ना कहीं
कंप्रोमाइज करते
समझौता हो जाता है उनका भी आप नाम जानेंगे
बड़ी इंपॉर्टेंट बातचीत है संक्षेप में
बातचीत समझने की जरूरत है थोड़ा ध्यान
देकर सुनिए चौधरी साहब बहुत-बहुत स्वागत

है आपका इस प्रोग्राम में और मैं यह
दोस्तों को बताना चाहता हूं कि आप पहली
मीटिंग जो हुई उस मीटिंग में आप वाहिद
उत्तर प्रदेश के किसान नेता थे जो बैठे थे
आपके साथ बाकी किसान नेता थे दूसरी तरफ
सरकार की तरफ से पियूष गोयल बहुत ही

सीनियर मिनिस्टर मोदी के बहुत ही खास
मंत्री वो थे देश के कृषि मंत्री थे
अर्जुन मुंडा थे इसके अलावा नित्यानंद राय
जो अमित शाह के बहुत क्लोज है वो भी थे
तीन-तीन मंत्री थे आपकी घंटों बातचीत हुई
थी मैं बहुत ज्यादा डिटेल में नहीं जा रहा

मैं नहीं चाह रहा कि आप सारे सीक्रेट बाहर
कर दो मैं चौधरी साहब यह पूछने जा रहा हूं
आपसे कि आपको क्या लगता है कि मोदी सरकार
की मंशा मोदी सरकार की नियत आप लोगों को
एमएसपी देने की है या नहीं यह बताइए
मुझे मैं बड़ा स्पष्ट कर

दूं इस सरकार की मनसा इसकी
नियत किसानों को एमएसपी देने की नहीं है
मैं बात स्पष्ट कर दूं आपको क्यों क्योंकि
13 महीने जो आंदोलन चला उसमें भी लगातार
हमारी एमएस बैस हुई काफी बस हुई लगातार
बहस हमारी उसम लेकर और ये बारबार य कहते

रहे ये बड़ा इशू है ये बड़ा इशू है इसमें
तमाम स्टेट के लोग आते हैं कमेटी बनाएंगे
अब भी उन्होने यही कहा हम कमेटी बनाएंगे
हम कमेटी बनाएंगे हमने कमेटी चाहि आपकी

हमने गोयल जी को तीन प्रूफ दिए हमने एक तो
इनको वो लेटर
दिया जो नरेंद्र मोदी मुखमंत्री थे गुजरात
के उन्होंने एक कमेटी के चेयरमैन थे और
मनम को चिठी लिखी वो चिठी हमने प्रोवाइड
कराई इनको देखिए आपके मुख्यमंत्री है इस

मोदी जी साफ लिख रहे हैं मनमोहन सिंह जी
आपकी पार्टी आपकी सरकार लंबे टाइम से
एमएसपी त करती है किसानों के लिए लेकिन
किसान को एमस मिलती नहीं है इसलिए देश का
किसान बहुत पीछे चला जा र लि हमारा आपसे

अनुरोध है कि आप एमएसपी
गार्डी चौधरी साहब आप लोग की घंटों मीटिंग
चली थी बुरा मत मानिए वहां पर सिर्फ चाय
और समोसा और बिस्कुट और दालमोट ही चलता
रहा या कोई मतलब की बात हुई पीयूष गोयल से

या कृषि मंत्री से बहुत बहुत तगड़ी बहस
हुई बात बाक आउट क्यों करते बात हो गई
नहीं मानी वो तो हम चले आए हमने ठीक है
एमएसपी आप नहीं मानले फ हमारी बात का मतलब

क्या रह गया बहुत बात हुई और बड़ी बहस हुई
तो जब आप जब आप लोग उठने लगे मीटिंग से
उठने लगे तो मंत्रियों ने रोका नहीं कि
भैया बैठिए या उन्होने कोई गटी नहीं दी
मंत्री नहीं रोक रहे थे अधिकारी रोक थे
उनका अधिकारी एक एक अधिकारी आकर बात करता
था अलग अलग बात करता था आप मान जाइए ऐसा

है हमने कहा कोई मतलब नहीं है सीधी सीधी
बात है सरकार एक लाइन का आर्डर जारी कर दे
जो एमएसपी हम इस टाइम दे रहे हैं हमने
मैंने यहां तक पूछा मंत्री से मंत्री आप
बताओ ईमानदारी बताओ मंत्री जी हम गेहूं

पैदा करते हैं गेहूं का दाम आप क्या करते
हो मिनिमम सपोर्ट प्राइस न्यूनतम समर्थन
मूल 2
किलो मंत्री कोई भारत में गेहू नहीं खाता
लोग गेहूं के प्रोडक्ट खाते हैं आटा खाते
हैं और आटा हम नहीं तैयार करते आटा भारत

की फ्लोर मिल बनाती है ऑस्ट्रेलिया कंपनी
में आती है भारत क आती है वो आटा
एमआरपी बिकता है बाबा रामदेव की कंपनी का
आटा बिकता है एमआरपी
6 आटा आटा बगा पर लोग आटा खाते देश के

गरीब आदमी तो गेहूं की आप मिनिमम दो क्या
आप ये कह रहे हैं मैं दोस्तों को बता दूं
चौधरी साहब का यह कहना है कि जो गेहूं
पसीने से खून पसीने से जमीन में पानी डाल
के मेहनत करके जो गेहूं पैदा होता है वो

सस्ता बिकता है लेकिन राम देव का आटा
महंगा मिलता है तो आटे पर मुनाफा रामदेव
कमाए तो ठीक है लेकिन गेहूं का दाम सही ना
मिले इसके लिए मोदी तैयार नहीं चौधरी साहब
एक चीज और पूछना चाह रहे हैं आपको क्या

लगता है ईमानदारी से दिल पर हाथ रख के
बोलिए कि मोदी गारंटी देगा आपको या आपको
लगता हैय मोदी जी आपको टरका रहे हैं सिर्फ
समय समय जो है टाइम पास हो रहा है आप आप
एक एक करके देखो आप आज ये स्थिति है

हर बस पर जितनी रोड में बस है भारत की सब
पर बोट लगा हुआ है मोदी
गारंटी हर खाद की दुकान पर मोदी
गारंटी हर हर कट आउट पर मोदी गारंटी हर
दफ्तर मोदी गारंटी पूरा भारत मोदी गारंटी

के पोस्टर पड़ा पड़ा तो हम ये सवाल करना
चाहते हैं यह गारंटी मोदी की थी मोदी ने
ही कहा था ये एमएसपी गर्डी का
लाऊंगा मोदी की थी और तीनों गारंटी हम
मांग रहे हैं आज मोदी से और किसान आज आ
रहे दिल्ली हम लोग दिल्ली आ रहे हैं तो

दिल्ली के बर्डर ऐसा सील कर दिए गया
हिंदुस्तान पाकिस्तान का बॉर्डर हो
हिंदुस्तान चायना का बॉर्डर हो चौधरी साहब
एक चीज बताइए इस बार जैसे आप है इसमें इस
पूरे आंदोलन में पंजाब से कुछ नेता है

लेकिन राकेश टिकैत को आप लोग क्यों नहीं
शामिल कर रहे राकेश टत को लेकर प्रॉब्लम
क्या है आप लोगों
को राकेश प्रम ये
है कि जितने मूवमेंट हुए अब
तक मैं रहा 2 सालन के
साथ अपनी पूरी जवानी हमने गुजारी ट साब के

बाद जितने आंदोलन हुए उस सम में डील
की सब में डील कीने कोई आंदोलन ऐसा नहीं
हुआ लास्ट में डील ना
की राकेश टिक तो पहलवानों के साथ भी बैठे
थे

ज पहलवानों का अंदन में हम भी
थे पहलवानों का अंदन में हम भी थे और यह
भी
थे जिस तरीके से पहलवानों का आंदोलन मैनेज
हुआ डल मगाए
गवार माल लिए ग अपने हाथ में ब रात को
महिला बचारी रात

रोकी उसके बाद अमित शह सेट ई और उनका
आंदोलन भेज
साब चौधरी साहब आप यह कहना चाह रहे हैं
अगर मैं मैं गलत बोल रहा हूं तो मुझे सही
कर दिया जागा मैं समझ रहा हूं आप यह कहना
चाह रहे हैं पहलवानों का मामला हो आपको यह

शक हैय जो टिकैत बंधु है राकेश टिकैत और
उनके भाई आपको लगता है वह सरकार के दबाव
में आ जाते हैं और फिर कहीं ना कहीं
आंदोलन जो है वह खत्म हो जाता आप यह कहना
चाह रहे

हैं नहीं दवा में नहीं सरकार ही अंड कराती
है आंदोलन में चेहरा बना के पेश करती फसला
कर लेती है उ य सरकार की प्लानिंग में
होता सब कुछ मैं एक और अहम सवाल पर आता
हूं मान लीजिए जिस आप खुद कह रहे हैं कि

भाई एमएसपी जो है वह मोदी शायद ही दे मोदी
जो है वह सिर्फ टाइम पास करना चाहते हैं
धीरे-धीरे चुनाव की तरफ यह देश बढ़ रहा है
तो मोदी टाइम पास करना चाहते अगर मोदी ने
आने वाली मीटिंग में एमएसपी की गारंटी

नहीं दी तो फिर अगला कदम आप लोगों का क्या
है
दीपक
जी हम तो जब तक एम नहीं मिलेगी तब तक
लड़ेंगे और पूरी ई लड़ेंगे गाव गाव जाएंगे
मीटिंग बनाएंगे और लेक्शन में भी हम लोग
से कहेंगे जो एमस हमारा इ होगा चुनाव का

मुद्दा होगा जो ए नहीं देगा उसके लाफ काम
करेंगे तो दोस्तों डेडलाइन है 18 तारीख और
मुझे लगता है इस 18 तारीख को अगर मोदी जी
ने माइंड बकअप नहीं किया अगर एमएसपी की
लिखित उन्होंने एश्योरेंस नहीं दी तो

मैंने पहले भी कहा कि यह जो चिंगारी है
इसे आग में बदलने में ज्यादा देर नहीं
लगेगी और ये जो किसान है जिसमें अब निहंग
भी आ गए हैं जाट भी आ गए हैं सारे नेता भी

आ गए हैं ट्रैक्टर ट्रॉली राशन पानी लेकर
अगले छ महीने तक का ये जो लाखों की संख्या
में किसान है ये क्या करने जा रहे हैं
क्या मोदी जी के लिए चुनाव की सबसे बड़ी

पास य आंदोलन बनने जा रहा है मुझे लगता है
आने वाले तीन दिन बहुत इंपॉर्टेंट है और
मैं चाहूंगा कि आप अगर राजनीति में चुनाव
में दिलचस्पी रखते हैं तो इन तीन दिन पर
नजर जरूर रखिएगा मैं भी आपके साथ हूं हर
अपडेट देता

नमस्कार

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