Shambhu Border | किसान आंदोलन हुआ बेकाबू | 40-50 सीटों पर जबरदस्त इम्पैक्ट | - instathreads

Shambhu Border | किसान आंदोलन हुआ बेकाबू | 40-50 सीटों पर जबरदस्त इम्पैक्ट |

नमस्कार

मेरे मंच पर
आपका
स्वागत दोस्तों प्रधानमंत्री मोदी विदेश
में हैं और इधर राजधानी दिल्ली में कोई
फैसला लेने वाला मंत्री नेता नहीं फैसला
लेने वाला और दूसरी तरफ किसान आंदोलन

किसान आंदोलन जो सड़कों पर उतर आया है
बेकाबू होता जा रहा है दो दिन पहले तक
जहां हजारों की भीड़ थी आज यह संख्या आज
यह गिनती किसानों की बागी किसानों की
गिनती लाख से पार जा रही है और अगर यह
गिनती बढ़ती

गई और बातचीत में कोई हल नहीं निकला सरकार
और किसानों के बीच में कोई सलूशन नहीं
निकला डेडलॉक बरकरार
रहा तो क्या पिछली बार की तरह ही जो उग्र
आंदोलन है जो ठीक चुनाव के मुहाने पर हो

रहा है क्या यह मोदी जी के लिए एक बार फिर
गले की हड्डी बनने जा रहा है क्या एक बड़ी
मुसीबत बनने जा रहा है मोदी जी के लिए यह
आंदोलन अब दोस्तों आने वाले दिनों में अगर

यह जो आंदोलन है अगर यह आंदोलन है यह
बढ़ता चला जाता है और दिल्ली की तरफ इसका
रुख रहता है तो फिर क्या यह जो किसान और
जाट बेल्ट है दिल्ली के चारों तरफ आप कह
सकते हैं उत्तराखंड का कुछ हिस्सा पश्चिमी
उत्तर प्रदेश का

हिस्सा पंजाब हरियाणा राजस्थान का कुछ
हिस्सा यहां तक कि मध्य प्रदेश तक ये जो
पूरी बेल्ट किसानों की बेल्ट है जहां जाट
बाहुल्य क्षेत्र है और यही जाट जो है सबसे
ज्यादा आगे बढ़कर आंसू गैस के गोलों का

सामना कर रहे हैं अगर यह आंदोलन बढ़ता है
तो क्या इस बेल्ट में य जो बेल्ट आप
दिल्ली के चारों तरफ देख रहे हैं किसान
बेल्ट जो बीजेपी का आप गढ़ कह सकते हैं
2014 में 19 में जहां मोदी जी ने स्वीप

किया
था कि फिर 40 50 लोकसभा की सीटों पर यह
आंदोलन अगर यूं ही बेकाबू रहा तो क्या
इंपैक्ट करेगा और यह बीजेपी के लिए बड़ी
मुसीबत होगी जो आज की तारीख में एक एक सीट
के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है और

सबसे बड़ा सवाल द बिग क्वेश्चन बिग
क्वेश्चन यह है कि क्या अंतता आखिरकार में
मोदी को किसानों के आगे झुकना पड़ेगा क्या
अनन दाताओं के आगे मोदी जी को झुकना

पड़ेगा सरेंडर करना पड़ेगा बैकफुट पर जाना
पड़ेगा और अगर वो बैकफुट पर नहीं गए अगर
वोह झुके नहीं चुनाव के ठीक मुहाने पर
जहां चुनाव सर पर हो और मोदी जी अपने

मिजाज के मुताबिक वो जो एक डिक्टेटर उनके
अंदर छुपा जल्दी किसी का कहना मानते नहीं
अगर वह अड़ गए जैसे पिछली बार अड़ गए थे
700 से ज्यादा किसान शहीद हुए थे लेकिन
मोदी अड़े रहे जब तक यूपी का चुनाव नहीं

आया अगर मोदी नहीं
झुके देन व्हाट्स गोइंग टू हैपन फिर क्या
होने जा रहा है 2024 के फाइनल में क्या हो
सकता है कितना असर डाल सकता है यह
आंदोलन बड़ा सवाल इस तरह की पोजीशन में भी
हमारा मन कर रहा है कि हम वार्ता नहीं

छोड़ेंगे अगर केंद्र कोई हल करे तो हम हल
करने के लिए तैयार हैर तो उधर से गोले आए
हैं हां गोली आती है कोई बात नहीं हम खाना
भी खिलाएंगे गोलियां भी खाएंगे आज ये पहली
सरकार है जो रास्ते रोक रोक नहीं रही

रास्तों पर किल्ले गटवा री है ऐसा तो
अंग्रेजों ने भी नहीं किया बिहार से
सैकड़ों की संख्या में किसान आज सुबह
दिल्ली पहुंच चुके हैं और मध्य प्रदेश में
आपको मालूम होगा कि जो भोपाल में किसान

गिरफ्तार हुए थे उनको कल जेल में उज्जैन
भेजा गया अब दोस्तों मोदी जी के जो दो
प्रतिनिधि हैं या दो नुमाइंदे आप कह सकते
हैं कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष कोयल और देश के

कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा यह जो दो नेता
हैं मोदी जी की तरफ से किसानों से लगातार
संपर्क में बातचीत होती है फिर रुक जाती
है कभी टूट जाती है और किसानों ने यहां तक
कह दिया है कि हम आपकी चाय में और समोसे

में कतई इंटरेस्टेड नहीं है हमको हमारी
गारंटी दीजिए एमएसपी की गारंटी दीजिए
एमएसपी पर कानून लेकर आइए कर्जे माफ करिए
और भी बहुत से उनकी मांगे हैं उन मांगों

को पूरा करके हमको एक लीगल ऑर्डर दीजिए एक
हमें हमारे साथ एक करार
करिए चाय समोसा नहीं अब सवाल इस बात का है
कि गारंटी तो मोदी जी ही दे सकते हैं या
फिर थोड़ा बहुत अमित शाह कुछ कर सकते हैं

सवाल इस बात का है कि तय मोदी जी को करना
है कि यह डेडलॉक को तोड़ना है या नहीं
तोड़ना है उनको झुकना है नहीं झुकना है
सरेंडर करना है नहीं नहीं सरेंडर करना है

तय मोदी जी को ही अल्टीमेटली करना मैं इस
बड़ी खबर पर आऊंगा मैं आऊंगा बड़ी खबर पर
लेकिन मैं एक चीज आपके सामने रखना चाह रहा
हूं कि मोदी जी अभी शुरुआत दौर में ही इस

पूरे आंदोलन के प्रथम चरण में ही इस बार
मात खा चुके हैं उनके एक बहुत बड़े प्लान
पर पानी फिर चुका है और ये जो प्लान ऐसा
है जो कहीं ना कहीं बीजेपी के लिए मोदी जी

के लिए एक सेटबैक है मिसाल के तौर पर ये
जो आंदोलन है दोस्तों दो महीने पहले से ही
किसान अल्टीमेटम दे रहे थे यानी जब
पार्लियामेंट चल रही थी तभी उन्होंने
अल्टीमेटम दे दिया था कि आप जल्द से जल्द

कानून बनाएं इस पर आप जल्द से जल्द हमारी
वो मांगे पूरी करें
लेकिन मोदी जी तो मोदी जी हैं उन्होंने
बिल्कुल अनसुना किया बल्कि उसको काउंटर
करने के

लिए उन्होंने तीन फैसले लिए और तीन फैसले
क्या ते उन्होंने देश का सर्वोच्च सम्मान
जो भारत रत्न वह चौधरी चरण सिंह साहब को
दे दिया किसानों के मसीहा और देश के
जानेमाने कृषि वैज्ञानिक जो हरित क्रांति

लेकर आए थे एम एस स्वामीनाथन इनको भी भारत
रं दे दिया किसी तरह से जो किसान है उनको
खुश किया जा सके और जो जाट बेल्ट है
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उसकी जो पार्टी
है चौधरी चरण सिंह की आरएलडी उसके जो नेता

हैं जैन चौधरी जो अब तक इंडिया लाइंस में
थे जो समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश के
दोस्त बताए जाते हैं उनको मोदी जी ने तोड़
लिया यह उनका प्लानिंग था लेकिन हुआ क्या

कि ये तीन बड़े फैसले लेने के बाद जैसे
मोदी जी के सारे प्लान पर पानी फिर गया ये
जो आंदोलन है इसने आज की तारीख में जयंत

चौधरी को भी हाशे पर खड़ा कर दिया जैन
चौधरी को समझ नहीं आ रहा है कि मोदी जी की
गोद में बैठे या किसानों की तरफ लौटे जाए
तो जाए क यह जैन चौधरी की स्थिति है और
यही स्थिति बाकी नेताओं की आरएलडी में और

जो स्वामीनाथन है हां जिनको भारत रन दिया
उनकी बिटिया ने उनकी बेटी ने तो यहां तक
कह दिया कि किस तरह का सम्मान है आप
किसानों पर आंसू गैस के गोले दाग रहे हैं
रबर बुलेट दाग रहे हैं आप उनकी शर्तें

क्यों नहीं मान रहे मेरे पिताजी की जो जो
जो रिपोर्ट थी उसको लागू क्यों नहीं कर
रहे तो एक तरफ स्वामीनाथन की बेटी सवाल
उठा रही है और दूसरी तरफ किसान और जाट जैन
चौधरी को घर रहे हैं कुल मिलाकर मोदी जी

के इरादों पर चुनाव से ठीक पहले जैसे कोई
बिजली गिर गई हो अब इसमें कोई शक नहीं
दोस्तों कि कहीं ना कहीं मुसीबत में तो
गुजरात लॉबी है मोदी जी हैं शाह साहब है
फैसला लेना बड़ा फैसला लेना है उनको लेकिन

मैं अपने बुनियादी सवाल पर ल रहा हूं कि
अगर यह आंदोलन बेकाबू होता है अगर यह
आंदोलन दिल्ली की तरफ बढ़ता है डेडलॉक
रहता है इसमें तो क्या 40 50 सीटों पर
इसका असर होगा क्या ये सीधे-सीधे बीजेपी

के प्रोस्पेक्ट्स को इंपैक्ट कर सकता है
क्या इसके अंदर वो पोटेंशियल है इस आंदोलन
य जो सड़कों पर आंदोलन उतर के आ गया है और
कल से आज
तक 700 से 800 ड्रोन से यह जो आंसू गैस के

गोले छोड़े जा रहे हैं रबर बुलेट चलाई जा
रही हैं रास्तों पर कीले बिछाई जा रही हैं
क्या यह एक तरह से डिस्परेयूनिया
और ये जो पार्ट टू है बड़ी बारीकी से फॉलो
कर रहे हैं ज्यादा समय नहीं लेंगे टाइगर
के पास चलते हैं अगर यह किसानों का आंदोलन

दिल्ली की तरफ बढ़ता है और इसमें कोई हल
नहीं निकलता तो आपको क्या लग रहा है
कि कितनी सीटों पर असर डाल सकता है चुनाव
होने जा रहे हैं सर पर चुनाव है कितनी

सीटों पर कहां कहा असर डाल सकता है चुनाव
देखिए 40 से 50 50 सीटों के आसपास सीट है
आप उत्तर प्रदेश ले लीजिए राजस्थान
हरियाणा पंजाब पार्ट ऑफ मध्य
प्रदेश ये तो वो डायरेक्ट
उत्तराखंड वो डायरेक्ट हिमाचल भी है थोड़ा

ये डायरेक्ट इंपैक्ट है इनडायरेक्ट
इंपैक्ट महाराष्ट्र में मिलेगा इ
इनडायरेक्ट इंपैक्ट तो आपको तमिलनाडु भी
मिलेगा वहा का भी किसान आंदोलन अन पर बैठा
है देखिए वहा से किसान आ नहीं सकता
ट्रैक्टर लेके

अपना उत्तर प्रदेश का किसान इतना सदन नहीं
है कि वो ट्रैक्टर लेकर आए पंजाब जैसे
किसानों के के साथ किसानों के लिए और
पंजाब तो संघर्ष की भूमि रही है जब जब इस

वही तो गेटवे ऑफ इंडिया था जहां से घुसते
थे लोग तो पंजाबियों ने तो कई आक्रमण
कर्ताओं को ठीक कर दिया 1907 का कांग्रेस
जहा असूर स्त नहीं होता था वो आंदोलन
देखिए अंग्रेजों के अंग्रेजों को घुटने

टिकवा दिए थे उस आंदोलन ने किसानों के
किसानों का ही आंदोलन है ना आज दुर्भाग्य
है देखिए एक सेकंड लूंगा मैं दीपक जी आज
दुर्भाग्य है क्या मजाक उड़ाते हैं यह देश

का आज अखबारों में विज्ञापन छपा है चौधरी
छोटू
सिंह जो हरियाणा के बहुत बड़े किसान नेता
थे उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि और आदरांजलि
अर्पित करने के फोटो है दो प्रधानमंत्री
और खट्टर के और यह उन्हीं चौधरी छोटू राम
के पोते परपोतो को आज गोलियां चला रहे हैं

उन्हीं के परिवार यह बात दे रहे आपने जयंत
चौधरी की बात बताऊ मैं आपको जयंत चौधरी ने
कहा था राज्यसभा बनने के जब जयंत चौधरी जब
बीजेपी में गए तो किसी ने कहा कि आपने तो
बहुत ट्वीट किए बीजेपी के खिलाफ उन्होंने

कहा मैं एक भी ट्वीट डिलीट नहीं
करूंगा क्योंकि तब मैं जिस पक्ष के साथ था
वो मेरा काम था मैं करता था आज मैं बीजेपी
के साथ हूं तो मैंने जो पहले ट्वीट किया
उसको मैं क्यों डिलीट

करूं लेकिन एक ट्वीट उन्होंने डिलीट किया
वो ट्वीट किसान एक जख्मी होता है बुरी तरह
से उसका फोटोग्राफ लगाकर उन्होंने ट्वीट
किया
था यदि भाजपा की किसान विरोधी
सरकार कोई भी किसान की औलाद होगी तो वह

तुरंत भाजपा से बाहर आ जाएगी क्योंकि अपने
किसान पर इतना अत्याचार कोई नहीं देख
पाएगा तो क्या आज किसान की औलाद को भाजपा
छोड़ने का आह्वान करने वाले जयन चौधरी आज
किसानों पर बरसने वाले ड्रोन किसानों पर

बरसने वाली रबड़ की
गोलियां क्या यह देख के अपने दादा और अपने
पिता को याद करते हुए भाजपा छोड़ के वापस
आएंगे क्या यह जो इंपैक्ट होने जा रहा है
यह जो इंपैक्ट बीजेपी के लिए नुकसान कर

सकता है क्या आपकी आरएसएस के कुछ नेताओं
से बात हो रही है या बीजेपी के कुछ नेताओं
से बात हो रही है या मोदी के जो चापलूस है
उनको छोड़कर जो बीजेपी के ठीकठाक ने नेता
है उनका क्या मानना है कि मोदी को झुकना
चाहिए कंप्रोमाइज करना चाहिए आंदोलन को

खत्म करना चाहिए या ऐसे
चने यदि वह आंदोलन दिल्ली के बॉर्डर पर
आकर बैठ जाते तो क्या
होता बैठ जाते बातचीत के लिए बुलाया जाता
एक अध्यादेश निकाल देते कि आप आए हमने
अध्यादेश निकाल

दिया कि अब एमएसपी लागू होगी
कानून खत्म करो बात को इसमें राज्य
सरकारों को पूछना पड़ेगा कमेटी बनेगी यह
बनेगा वह
बनेगा य कई चीज राज्य सरकारों को क्यों

इवॉल्व कर रहे हैं
आप 370 में तो राज्य सरकारों को इवॉल्व
नहीं किया था नोटबंदी में तो नहीं किया
था राज्य सरकारों को एमएसपी पर किसानों से
अनाज खरीदने का काम सरकार केंद्र सरकार
देती है तो पैसा भी देती

है जो करोड़ जिसका मैं बात कर रहा था जो
बंगाल के रोके
गए जी तो कुल मिला केर आपको एमएसपी को
कानून बना देना है सब उसको एंडोर्स करेंगे
कौन राज्य सरकार कहेगा किसानों के लिए

एमएसपी का कानून नहीं बनना चाहिए लेकिन
टाइगर
र मेरा सवाल जो है मेरा सवाल ये है बीजेपी
में इतनी खामोशी क्यों है राजनाथ जो किसान
नेता कहे जाते हैं किसान नेता राजनाथ सिंह
राजनाथ क्यों नहीं कुछ बोल पा रहे चुप

क्यों है राजनाथ उनको आगे बढ़ना चाहिए
2014 के बाद राजनाथ बोले कहां
है हर हर साल ट्रिप सल की गोली खा खा के
गला साफ करते लेकिन आवाज नहीं निकल
रही सारे एक्सपोज हो गए हैं सारे एक्सपोज
हो गए हैं नहीं

चलिए मैं समझ गया का अपना संघ का अपना एक
किसान मजदूर संघ है हां वो आगे नहीं आ रहा
वो भेजना चाहिए उसको एसोसिएशन को आगे आए
वो भी वो भी दुविधा में है करे तो क्या
करें वो भी वेट एंड वच कर रहा है अच्छा

चलिए चलिए टाइगर टाइगर टाइगर मान लिया
राजनाथ सिंह मोदी जी के लॉबी के नहीं है
उनकी बनती नहीं है तो राजनाथ अलग है चुप
है मोहन भागवत इतने दबाव में है कि उनका
किसान संघ कुछ नहीं कर पा रहा है लेकिन
गुजरात लॉबी के जो चाणक्य है मोदी जी के

जो चाणक्य है अमित शाह अमित शाह को तो आगे
बढ़ना चाहिए सत्यपाल मलिक तो कह रहे थे कि
अमित शाह मोदी से ज्यादा समझदार है ज्यादा
राजनीत समझते हैं तो अमित शाह क्यों नहीं
आगे बढ़ रहे उनको वो किसकी तरफ देख रहे
हैं मैंने यदि य मैं कहू तो बहुत गलत

स्टेटमेंट
होगा यदि बीजेपी 270 से नीचे आती है तो
अमित शाह के लिए भी तो अच्छी बात
है बीजेपी यि 270 से नीचे आती है तो अमित
शाह का भी नंबर लग सकता है प्राइम
मिनिस्टर पद के

लिए सभी जुगाड़ में
है नहीं मैं मैं मैं समझ गया अमित शाह म
आपको क्या लग रहा अमित शाह अपने अपने दिल
से कोई फैसला नहीं ले सकते अगर अमित शाह
को लग रहा है किय घर जल सकता है क्या वो
पानी की ले जा सते

बु मोदी का बिना मोदी के अमित शाह कुछ
नहीं है अमित शाह मोदी जी के नजदीक क्यों
है सिर्फ इसलिए कि मोदी जी को अच्छी तरह
से जानते हैं य मोदी जी ने यह त लिया कि
मैं किसानों को नहीं दूंगा एमएसपी
कानून तो फिर चाहे पार्टी डूब जाए चाहे
सरकार डूब जाए नहीं

दूंगा तो ऐसे में फूटे हुए घड़े पर पानी
डालने की बात है
समझाना देखो मोदी जी की कोई समझा नहीं
सकते क्योंकि मोदी जी सर्व ज्ञात
है मोदी जी से हा के हां मिलाने में ही
भड़ाई

है जी और बाकी ट्रोल सेना लगी हुई
है जो जय जयकार करती है कि नहीं नहीं यह
भी सही किया आपने यह भी सही किया
आप
जी तो अभी एक आरोप और लग रहा है कि चुनाव
नजदीक आते से किसान एक्टिव हो गए राजनीति
कर रहे राजनीतिक दलों के हाथ में खेल

रहे क्योंकि पिछली बार 13 महीने किसान
बैठा 700 लोग शहीद हुए 13 महीने का आंदोलन
दुनिया के सारे अखबारों ने लिखना शुरू कर
दिया विश्व के सारे मीडिया ने इसकी तवज्जो
लेना शुरू कर दी कि क्या हो रहा हैय लेकिन

मोदी जी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था जब
सतपाल मलिक बोलने गए कि भैया 700 लोग मर
गए हैं आप कृपा करके तीन कानून वापस ले तो
उन्होंने कहा मेरे लिए मरे हैं क्या तो तो
संवेदन हीनता की पराकाष्ठा हो अ मानवीयता

की पराकाष्ठा हो गई जब किसानों को यह पता
है यह तीन कानून वापस क्यों लिए गए
क्योंकि यूपी के चुनाव थे तो किसानों को
भी चाबी मिल गई चुनाव से ही डरते मोदी जी
किसानों के मरने से किसान दो साल पाच साल

भी पड़े रहे तो कोई फर्क नहीं पड़ता
उनको लेकिन चुनाव आते से फर्क पड़ता है तो
इसलिए 2024 के चुनाव के पहले उन्होंने
किया तो सारी समझदारी बीजेपी में ही है
किसानों में नहीं है ऐसा किसने कहा जी

दूसरी बात यदि किसान चुनाव का फायदा उठाते
हैं तो क्या आपने पांच पांच भारतर रत्न
रेवड़ जैसे बाटकर चुनावी खेम नहीं खेला
क्या अधूरे मंदिर में राम की प्रांत
प्रतिष्ठा करके आपने चुनावी खेल नहीं खेला

मतलब आप खेलो तो आपके लिए चुनावी खेल कर
सकते हो आप जब चाहे चुनाव के लिए कुछ भी
कर सकते हो और चुनाव में आपको यदि किसी
ने पकड़ लिया खाई में पकड़ लिया या दोनों

इसमें पकड़ लिया आपको लगता है कि नहीं
नहीं नहीं नहीं ये तो य अनैतिक काम कर रहे
हैं चुनाव को देखते हुए ब्लैकमेल कर रहे
हैं तो फिर आप क्या कर रहे हैं क्या जल्दी

थी भाई सुप्रीम कोर्ट ने कहा था राम मंदिर
बनाओ अधुरे राम मंदिर में प्राण प्रति करो
नहीं कहा
था जी फिर पाच पाच क्या चरण
सिंह से लेके करपुरी ठाकुर कितने दिन हो

गए करपुरी ठाकुर जी को आज याद आ गया इनको
क्योंकि नीतीश को चाहिए चुनाव आपको आज चरण
सिंह याद आ र है उसका ग्रैंड सन चाहिए
चुनाव आपको तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में
पैर रखना है नरसिंह राव

चाहिए किसानों को चुप करवाने के लिए
स्वामीनाथन
चाहिए और अपने कैडर को खुश करने के लिए
आडवानी जी चाहिए य पाच भारत रत्न बता रहा
हूं मैं

आपको नहीं तो स्वामीनाथन को करपुरी ठाकुर
को पिछले 10 साल में ही मिलना चाहिए
था जी कर ने ऐसा कौन सा काम किया पिछले
साल जो अभी मिल जाए उनको जी सम इतिहास रचा
वो इतिहास बन

गया गर आपकी बात में समझ गया कि राजनीति
करें भारत रत्न को लेकर तोव राजनीति नहीं
होती लेकिन किसान राम मंदिर को लेक करे तो
राजनीति नहीं है जी मैं समझ गया किसान
आंदोलन करे तो राजनीति से प्रेरित है जी
मैं समझ गया अंतिम सवाल पर आ रहा हूं ठीक

है आप कह रहे कि कई सीटों का नुकसान हो
सकता है इस आंदोलन में जिस तरह से कन्फेशन
हो रहा है सरकार भी झुकना नहीं चाहती
किसान भी नहीं झुकना चाहती और यंग लीडरशिप
है किसानों की इस बार पुराने दलाल हटा दिए
उन्होने आपको लगता है कि मोदी ही को फैसला

लेना है द लास्ट जजमेंट जो है वो मोदी का
होगा जो डिसीजन होगा वो अंतिम मोदी का
होगा क्या आपको लगता है कि अगर ये आंदोलन
बढ़ा तो मोदी झुकेंगे या कहीं ना कहीं
अहंकार हावी

है 2024 के पहले
झुकेंगे चुनाव के पहले
झुकेंगे मैं आपको बार-बार कह रहा हूं 272
के लाले पड़े भूल जाइए 370 400 का वर्क
है तो क्या माने मोदी फस गए हैं बुरी तरह

से किसान का दाव ही उल्टा पड़ गया उनको 13
तारीख को किसान आ रहे हैं यह दो पहले दो
महीने पहले से मालूम
था दो महीने पहले से डेट डिक्लेयर
थी लेकिन उन्होंने तीन पत्ते

खेले जाटों को अपने पास लाने के लिए चौधरी
चरण सिंह फिर उसके बाद जैन को अपने साथ ले
लिया वहा नाथन कर
लिया और एक मैसेज देने का कर लिया प्रयास
किया कि हम किसानों के बहुत नजदीक उनको यह
बताया गया कि जाटों का सबसे बड़ा नेता यदि

आपके पास हो तो जाट बिल्कुल साथ में
रहेंगे लेकिन जाट क्या करेंगे नेता एयर
कंडीशन में बैठा है और जाट बाहर लाट लट खा

रहे और जिस चरण सिंह को हम भगवान मानते
हैं मोदी जी की उनकी बराबरी करता है उनका
पोता वो कहता है मुझे मोदी जी चरण सिंह जी
के गुण दिखते हैं तो चरण सिंह जी ने कब

क्या या तो जयंत को पता ही नहीं अपने दादा
के बारे में शायद जयंत को ये गलत फहमी है
कि अपने दादा ने कभी किसानों पर गोलियां
चलाई अपने दादा ने कभी किसानों पर आंसू
गैस छोड़ा यह गलत फहमी है उनको किसी ने

समझा दिया होगा कि आपके दादा ने भी ऐसा ही
किया मोदी जी भी ऐसा ही कर रहे तो आपके
दादा के बराबर हो
गए मोदी जी मोदी जी के लिए मुसीबत है जी

नहीं फसे मोदी जी ने जन को
दिया भाजपा को भी भाजपा को
भी मोदी जी ने मोदी जी ने जयंत को फंसा
दिया है मोदी जी ने बीजेपी को फंसा दिया
है 4050 सीटें फंस गई हैं मोदी जी किसी और

को बातचीत करने का मौका नहीं देते खुद ही
उनको बातचीत करनी है लेकिन अभी वो यूएई
में है जहां लाल गलीचे बिछे हुए हैं कुल
मिलाकर फैसला मोदी को लेना है और टाइगर कह
रहे हैं कि यह दांव अगर किसानों का पड़

क्योंकि वैसे भी मोदी 272 नहीं छू रहे और
इसमें अगर 40 50 ना सही 152 सीटें भी फस
गई एक एक सीट इंपॉर्टेंट है देखना होगा
दोस्तों कि मोदी अब आने वाले समय में क्या

कैसे इसको रेस्पों करते हैं जब हिंदुस्तान
लौटते हैं और ये किसानों का आंदोलन क्या
दिल्ली तरफ आता है या कोई हल आता है नहीं
आता कुल मिलाकर राजनीति जो है कहीं ना
कहीं उबाल ले रही है चुनाव से पहले जहां

विपक्ष अगर हम पर कर द तो किसान खुद जनता
खुद सड़कों पर आ गई है एक बड़ा चेंज है ये
एक बड़ा आप कह सकते हैं राजनीतिक घटनाक्रम
जैसे तेजी से बदल रहा हो आने वाला समय
खासकर 1015 दिन बहुत इंपोर्टेंट होंगे

टाइगर हमारे साथ रहेंगे मेरी कोशिश होगी
कि मैं कुछ किसान नेताओं से भी बात करूं
जब वो दिल्ली की तरफ आते हैं टाइगर
बहुत-बहुत शुक्रिया यह पर्सपेक्टिव देने
का बहुत-बहुत धन्यवाद मेरे दोस्तों
को

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