Sharad Pawar से छिन गई NCP, अब आगे क्या होगा? - instathreads

Sharad Pawar से छिन गई NCP, अब आगे क्या होगा?

जय हिंद दर्शकों मैं हूं जितेंद्र दीक्षित
फोर पीएम महाराष्ट्र में आपका स्वागत है
दर्शकों महाराष्ट्र की राजनीति में फिर एक
बार हड़कंप बच गया है चुनाव आयोग ने

आखिरकार इस बात का फैसला कर दिया कि असली
एनसीपी किसकी है और यह फैसला आया है अजीत
पवार के पक्ष में जी हां पिछले साल जब
बगावत हुई थी एनसीपी में और अजीत पवार

अपने साथ एक घड़ा लेकर राज्य की सत्ताधारी
बीजेपी और शिंदे गुट के साथ में मिल गए थे
और सरकार में शामिल हो गए थे तो उसके बाद
शरद पवार गुट की ओर से चुनाव आयोग में

चैलेंज किया गया था कि जिस तरह से बगावत
हुई है वह गलत है और दोनों ही पक्षों ने
चुनाव आयोग के सामने अपने असली होने का
दावा किया था और साथ ही चुनाव चिन्ह पर भी

अपना दावा पेश किया था तो कई महीनों से
सुनवाई चल रही थी और कल शाम को इस बारे
में आदेश आ गया और आदेश में चुनाव आयोग ने
स्पष्ट किया कि जो पार्टी का चुनाव चिन्ह
है घड़ी वो और साथ में पार्टी का आधिकारिक

नाम राष्ट्रवादी कांग्रेस यह अजीत पवार
गुट के पास रहेगा और दूसरी तरफ शरत पवार
को निर्देश दिया कि आज दोपहर को 3 बजे तक
आप बताएं कोई तीन विकल्प दे कि आपके चुनाव

चिन्ह क्या हो सकते हैं और आपकी पार्टी का
नाम क्या हो सकता है यह जल्दबाजी इसलिए हो
रही है क्योंकि महाराष्ट्र में राज्यसभा
की छह सीटों के लिए चुनाव होने वाले हैं

तो उसके पहले चुनाव आयोग ने कहा है कि आप
यह तय कर द कि आपकी पार्टी का नाम क्या
होगा और चुनाव चिन्ह क्या होगा
चुनाव आयोग के इस फैसले का महाराष्ट्र में

अलग-अलग खेमे से अलग-अलग जो है
प्रतिक्रिया आ रही है एक तरफ जहां पर
सत्ताधारी पक्ष खुश है महायुति की ओर से
जहां इस फैसले का स्वागत किया गया है तो
वही दूसरी तरफ जो महाविकास

व आयोग
की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा किया है और यह
कहा है कि किस तरह से बीजेपी ने सत्ताधारी
पार्टी ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल करके
शरद पवार से उनकी पार्टी को छीन

लिया
आज इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया का जो निर्णय
आया
है पवार साहब के उपस्थित होते हुए
भी पार्टी का सिंबल और पार्टी का नाम
दोनों इलेक्शन कमीशन ने अजत पवार गुट को

दिए है इसकी मैं कड़ी आलोचना करता हूं हम
सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
और लड़ेंगे जिस तरीके से उद्धव ठाकरे साहब
का भी पार्टी और सिंबल दोनों सिंकोट को दे
दिया बिल्कुल उसी तरह

यह हमारी भी पार्टी और सिंबल अजत ब गुट को
दिया है हम लड़ेंगे और
जीतेंगे वाह चुनाव आयोग वाह क्या निर्णय
देते हैं आप पहले आपने कहा कि शिवसेना
पार्टी एकनाथ शिंदे की है चुनाव चिन्ह

धनुष बाण एकनाथ शिंदे का है अभी-अभी आपने
कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अजीत
पवार की है और जो उनका घड़ी का चुनाव
चिन्ह है अजीत पवार का है मतलब दोनों ही

फैसलों में आपने कितनी सच्चाई प्रकट की है
देश की जनता के सामने आ गया पूरे देश को
पता है कि शिवसेना आदरणीय उद्धव ठाकरे जी
की
है जबरदस्ती धोखे से छल

से छीन लिया गया
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार जी
ने बनाई 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस
पार्टी की कांग्रेस पार्टी के साथ सरकार
चली जिसमें अजीत दादा पवार मंत्री बने

पूरे भारत को पता है पूरे महाराष्ट्र को
पता है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी
शरद पवार जी की है कुछ लोग उनमें से टूटकर
गए हैं लेकिन वाह चुनाव आयोग वाह आपने कह

दिया कि यह पार्टी अजीत पवार की है यह
चुनाव सजीत पवार का है कोई बात नहीं यह
निर्णय हम सबको पहले से पता था आप और कर
भी क्या सकते हैं जो आपके आला कमान ऊपर
बैठे हैं जो आदेश आपको देते हैं आप वही

मानते हैं नाम आपका चुनाव आयोग है लेकिन
आप काम करते हैं सरकार के
आधीन कोई बात नहीं आदरणीय सुप्रीम कोर्ट
का दरवाजा अभी खुला है जैसे हम सुप्रीम
कोर्ट गए हैं वैसे आदरणीय पवार साहब भी
जाएंगे

लेकिन इस देश में अब लोकतंत्र बचा नहीं हम
नहीं आदरणीय सुप्रीम कोर्ट कह रहे हैं और
सुप्रीम
कोर्ट फैसला जरूर देंगे थोड़ा समय लगेगा
लेकिन शिवसेना को भी न्याय मिलेगा

राष्ट्रवादी को भी न्याय मिलेगा और भारतीय
जनता पार्टी के अहंकार का अंत होगा ठीक
इसी तरह से बीते साल शिवसेना में भी फूट
के बाद जो असली शिवसेना होने का अधिकार जो
है व वो दे दिया गया था एकनाथ शिंदे गुट

को जिन बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना बनाई
थी वो ठाकरे परिवार ही शिवसेना से बाहर हो
गया और शिवसेना का आधिकारिक नाम और जो
चुनाव चिन्ह था धनुष बाण का वो एकनाथ
शिंदे को दे दिया गया और कुछ उसी पैटर्न

पर अब चुनाव आयोग ने एनसीपी के मामले में
भी अपना फैसला सुनाया है एनसीपी ने अपने
फैसले का आधार बनाया है संख्या बल को
एनसीपी का कहना है चुनाव आयोग ने अपने

फैसले का आधार बना है संख्या बल को चुनाव
आयोग का कहना है कि जो संख्या बल है
तमाम जो सांसद है तमाम जो अलग अलग राज्यों
में विधायक हैं उनकी संख्या अजीत पवार गुट
की तरफ ज्यादा है और शरद पवार इस मामले

में कमजोर पड़ गए और इसीलिए क्योंकि
लोकतंत्र में बहुमत का महत्व होता है और
ऐसे में अजीत पवार गुट को पार्टी और चुनाव
चिन्ह मिल गया तो जो चुनाव आयोग ने आंकड़े
दिए हैं उसके

मुताबिक महाराष्ट्र में जितने
भी एमएलए हैं मतलब उनमें
से 41 कुल जो 2019 में चुनाव हुए थे तो
उनमें 54 एमएलए जो है चुनकर आए थे
राष्ट्रवादी कांग्रेस के और उनमें से 41

एमएलए ने अजीत पवार गुट के पक्ष में अपना
फी डेविट दिया और 15 ने शरद पवार गुट के
पक्ष में इनम से चुनाव आयोग ने एक बात
स्पष्ट की कि पांच एमएलए ऐसे हैं
जिन्होंने कि दोनों ही पक्षों में अपने

हलफनामे दिए हैं जो खुद को शरद पवार गुटका
भी बता रहे थे और अजीत पवार गुटका भी बता
रहे
थे फिर इसके अलावा जो ये तो महाराष्ट्र के
विधानसभा की बात हुई नागालैंड के जो सात
विधायक हैं उन्होंने अजीत पवार के पक्ष

में अपना हलफनामा दिया झारखंड के एक
विधायक ने अजीत पवार के पक्ष में अपना
हलफनामा दिया केरल के जो दो विधायक है
उन्होंने शरद पवार के के पक्ष में अपना

हलफनामा दिया था अगर लोकसभा के सांसदों की
बात करें तो दो सांसदों ने अजीत पवार के
के पक्ष में अपना हलफनामा दिया जबकि चार
ने शरद पवार के पक्ष में लेकिन इनमें से

एक सांसद ऐसा है चुनाव आयोग ने स्पष्ट
किया जिसने की दोनों गुटों के पक्ष में
हलफनामा दिया है फिर राज्यसभा के एक सांसद
ने अजीत पवार के गुट में हलफनामा दिया और
तीन सांसदों ने शरद पवार के गुट में अगर

एमएलसी की बात करें तो एमएलसी ने अजीत
पवार के गुट में अपना हलफनामा दिया और चार
ने शरद पवार के गुट में के पक्ष में अपना
हलफनामा दिया तो यही संख्या बल के आधार पर
चुनाव आयोग ने अपना फैसला किया है वैसे जब

इस मामले की सुनवाई चल रही थी तो शरद पवार
गुट की ओर से इस बात का आरोप लगाया गया था
कि अजीत पवार गुट की ओर से कई फर्जी
एफिडेविट जो है वह दायर किए गए थे चुनाव
आयोग के सामने और धोखा धड़ी का इस्तेमाल

किया जा रहा था अजीत पवार गु की तरफ से
कई ऐसे लोगों के हलफनामे पेश किए गए शरद
पवार गुट का कहना था जो कि जीवित ही नहीं
थे या फिर जो एनसीपी में जिस तरह का कोई

पद नहीं था ऐसे पदों पर आसीन लोगों ने
अपने हलफनामे दिए थे कई हलफ नामों में
गड़बड़ियां थी लेकिन ऐसा लगता है कि चुनाव
आयोग ने अपना फैसला सुनाते वक्त इस आरोप

को दरकिनार कर दिया या इसको नजरअंदाज कर
दिया अब सवाल ये उठता है कि शरद पवार के
सामने विकल्प क्या है एक जो सीधे सधे तौर
पर जो विकल्प नजर आता है वो यह है कि
चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट

में चुनौती दी जाए तो यह बात शरद पवार गुट
की ओर से कह दी गई है सुप्रिया सुले ने
बयान दिया है कि इस फैसले को चुनौती दी
जाएगी सुप्रीम कोर्ट में इससे पहले जो
शिवसेना के ठाकरे गुट ने भी चुनाव आयोग के

फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और
उस पर अभी सुनवाई होनी बाकी है अब ऐसे में
सवाल उठता है कि अब जब चुनाव को दो महीने
ही बाकी हैं तो ऐसे में जब तक सुप्रीम

कोर्ट की सुनवाई होगी और तब तक फैसला आएगा
उस दौरान शरद पवार को किसी काम चलाव नाम
से और काम चलाओ चुनाव चिन्ह से ही चुनाव
लड़ना
पड़ेगा क्योंकि तब तक फैसला आते वक्त तो

काफी देर हो
जाएगी यहां पर इस बात का जिक्र करना जरूरी
है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस को शरद पवार
ने ही बनाया था 1999 में उन्होंने
कांग्रेस से बगावत की थी और उसके बाद

उन्होंने इस पार्टी को स्थापित किया था
बगावत के पीछे का कारण था सोनिया गांधी का
विदेशी मूल और पार्टी बनाते वक्त शरद पवार
ने यह कहा था कि उन्हें विदेशी मूल का
नेतृत्व जो है वोह स्वीकार्य नहीं है और
इसीलिए वह अलग हटकर यह पार्टी बना रहे हैं

और पार्टी को यह नाम दिए जाने के पीछे
राष्ट्रवादी कांग्रेस य नाम दिए जाने के
पीछे भी सोनिया गांधी का विदेशी मूल का ही
मुद्दा था कि एक राष्ट्रवादी कांग्रेस है
और यहां पर राष्ट्र के ही नेता

हैं दूसरी तरफ चर्चा का विषय यह भी है कि
शरद पवार को अपने सियासी करियर में यह
शायद सब से बड़ा झटका लगा है अब तक शरद
पवार की पहचान रही है कि वो दूसरों को
झटका देते आए हैं अपने सियासी

प्रतिद्वंदिता देते आए हैं लेकिन यहां पर
खुद उनके अपने भतीजे ने उनको झटका दे
दिया बात यह भी कही जा रही है कि पिछले
साल जिस तरह से शरद पवार ने अपना इस्तीफा

दिया था और चार दिन चले ड्रामे के बाद
वापस ले लिया था तो वो उनको नहीं करना
चाहिए था अगर वो अपने इस्तीफे पर कायम
रहते और पार्टी का नेतृत्व किसी को सौंप
देते तो शायद एनसीपी में फूट नहीं होती और

पार्टी आज बरकरार रहती तो खैर अब देखते
हैं सिलसिले में आगे क्या होता है हमारी
महाराष्ट्र की सियासी हलचल पर नजर बनी
रहेगी आप भी अपनी नजर बनाए रखें 4 पीएम
महाराष्ट्र पर और इस खबर पर आपका क्या
सोचना है कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें जय हिंद

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