SHREE KALI KAVACH With Lyrics | शत्रुनाशक कालिका कवच | Powerful Kali Mantra | Chamunda Mantra - instathreads

SHREE KALI KAVACH With Lyrics | शत्रुनाशक कालिका कवच | Powerful Kali Mantra | Chamunda Mantra

[संगीत]

कैलाश शिखर सनम देव देवम

जगतगुरु शंकर परि प प्रक्ष पार्वती

परमेश्वरम पार्वती उवाच भगवन देव

देवेश देवा नाम भ गद प्रभु

प्रही मेंे महादेव गोपय चेद यदि हे प्रभु शत्रु नाम

येन ना शस्य दात मनो रक्षणम भवे परम ऐश्वर्य

तुलम लभ येन ही दत्व द भैरव उवा

वक्षा मते महादेवी सर्व धर्म विदा वरे

अदभुतम कवचम देव्या सर्व काम प्र

साधकम विशेषत शत्रु नाश सर्व रक्षा करम णा सर्वारिष्ट

प्रशमनम सर्वा भद्र विना शम सुखदम भोग दम

चैव वशीकरणम उत्तम शत्रु संघा शयम

याति भवंति व्याधि पीडिता दुखी नो जं चैव स्वाभि द्रोही स्त

था भोग मोक्ष प्रदम चव कालिका कवचम

पठत ओ अस्य श्री कालिका कवच

स्य भैरव ऋषि

अनुष्पला का देवता शत्रु

संहार जपे [संगीत]

विनियोग धय का महामाया

त्रिनेत्रम बहु रूपण चतुर्भुज लल

जीवाम पूर्ण चंद्र निभा नाम नीलोत्पल दल

शमाम शत्रु संघ विदारण नर मुंडम तथा खड़ गम कमलम च वम तथा

निर्भया रक्त वदनम दंश ट्राली खोर

रूपिणी साट हा सान नाम देवी सर्वदा च

दिगंबरी सवासन स्थिता कालि पुंड माला

विभूषित इति ध्यावा महाकालि

तत स्तु कवचम

[संगीत]

पठ ओम कालिका घोर रूपा सर्व काम प्रदा

शुभा सर्व देव स्तुतास

नाश करो तुम्हें ओम रिंग रिंग रूपण चैव

रांग रिंग राम रूपिणी तथा राम रिंग शोम

क्म स्वरूपा सा सदा शत्रु न

[संगीत] विदारीकंद

विमोचन ंग रूपिणी महाकाली रक्षा समान देवी सर्वदा

यया शंभो हतो दत्य निशुंभ

महासुर वैरीना शाय वंदे ता कालि काम शंकर

प्रिया ब्राह्मी शैवी वैष्णवी चवारा हि नार

सिंहिका कौमार्य च चामुंडा खा दंतु मम विधि

वश सुरेश्वरी घोर रूपा चं मुंड विनाशिनी

मुंड माला वतांग च सर्वत पातु माम सदा

रिंग रिंग रिंग काली के घोरे दं शव रुधिर

प्रिय रुधिर पूर्ण वक्त्र च रुधिर

अनावृत स्नी मम शत्रु न खा दय खा दय हिंस

हिंस मय मय भि भि छिंदी छिंदी

[संगीत]

उच्चाटन रिंग कालिका मदीय शत्रु समर्पयामि

स्वाहा ओ जय जय किरी किरी किटी किटी कट कट मदम

मदम मोह य मोह हर हर ममरी पुन ध्वंस ध्वंस

भक्ष भक्ष त्रय त्रोच दना चामुंडे स सर्व जनान राजन राज

पुरुष स्त्रियो मम वश कुरु कुरु तनु तनु धन्यम धनं मेशवा गजा

रत्नानि दिव्य कामिनी पुत्रा राज श्रीयम

देहि अम क्म क्म क् क्म क्

स्वाहा [संगीत]

इत्य तत कवचम दिव्यम कथित शंभु ना पुरा ये

पठति सदा तेशाम ध्रुवम नशत शत्र व

वैर प्रलयम याति व्याधि तावा भवंति

बल हीना पुत्र हिना शत्र वस्त स्य

सर्वदा सहस्त्र पठना सिद्धि कवच स्य भवे तदा तत् कार्याणि सिध

अंती यथा शंकर भाषित

स्मशाना रमादा चूर्ण कत

प्रयत्न त पादो केन

पिटवा तल्ली खेलो हसला कया भूम शत्रु हीन

रूपा उत्तरा शिर सस्था हस्तम दत्त वात

हदय कवचम तुम स्वयं पठ शत्र प्राण

प्रतिष्ठा कोरयान मंत्रण मंत्र वित हन दस्त्र

प्रहार शत्र गच्छ यम शयम जवल तंग

तापन भवंति चरिता भम प नवाम

पादन दद भवती ध्रुवम रीना श करम

प्रतम कवचम वश्य काकम

परमेश्वर यदम चैव पुत्र पुत्रा दि वृति दम

प्रभात समय चैव पूजा काले प्रयत्न तः सायं काल तथा

पाठात सर्व सिद्धि भवे ध्रुव शत्रु

[संगीत]

[संगीत] चाटमोला

श करम देवी सर्व संपत प्रदे शुभे सर्व देव स्तुत

देवी कालिके त्वा नमाम [संगीत]

हम कैलाश शिखर सिनम देव देवम जगत

गुरुम शंकर परि प प्रक्ष पार्वती

परमेश्वरम पार्वती उवाच

भगवन देव देवेश देवा नाम भ गद प्रभु प्रही में

महादेव गोपय चेद यदि हे प्रभु शत्रु णा

येन ना शस्य दात मनो रक्षणम भवे परम ऐश्वर्य

तुलम लभ येन दत्व भैरव

उवाच पक्षाम ते महादेवी सर्व धर्म विदा वरे

अदभुतम कवचम देव्या सर्व काम प्रसाद कम

विशेषत शत्रु नाश सर्व रक्षा करम णा

सर्वारिष्ट प्रशमनम सर्वा भद्र विना शम सुखदम भोग दम

चैव वशीकरणम उतम शत्रु संघा क्षयम

याति भवंति व्याधि पीड़िता दुखी नो च चव

स्वाभि नस्त था भोग मोक्ष प्रदम

चैव कालिका कवचम पठत ओम अस्य श्री कालिका कवच

स्य भैरव ऋषि

अनुष्पला का देवता शत्रु

सहारा जपे विनियोग [संगीत]

धय कालि महामाया त्रिनेत्रम बहु

रूपण चतुर्भुज लल जीवाम पूर्ण चंद्र निभा नाम नीलोत्पल दल

श्यामाम शत्रु संघ विदारण नर मुंडम तथा खड़ गम

कमलम च वम तथा निर्भया रक्त

वदनम दंश ाली घोर रूपण साट हा सान नाम देवी सर्वदा च

दिगंबरी शवासन स्थिता कालि मुंड माला

विभूषित इति ध्यावा महाकालि तत स्तु कवचम

[संगीत]

पठ ओम कालिका घोर रूपा सर्व काम प्रदा

शुभा सर्व देव स्तुतास शम करो तुम ओम रिंग रिंग रूपण जैव

रांग रिंग राम रूपिणी तथा राम रिम शोम शोम

स्वरूपा सा सदा शत्रु न वि दार ये श्री

रिंग एंग रूपिणी देवी भव बंध

विमोचन रुंग रूपिणी महाकाली

रक्षा समान देवी सर्वदा यया शंभो हतो दैत्य

निशुंभ महासुर वैरीना शाय वंदे ता कालि काम शंकर

प्रिया ब्राह्मी शैवी वैष्णवी चवारा ही नार सिंही का कौमार्य

द्र चामुंडा खादंस मम विधि

वश सुरेश्वरी घोर रूपा चं मुंड विनाशिनी

मुंड माला तांग च सर्वत पातु माम सदा रिंग

रिंग रिंग कालि के घोरे दं शव रुधिर प्रिय

रुधिर पूर्ण वक्रे च रुधिर

अनावृत स्नी मम शत्रु न खा दय

खाद्य हिंस हिंस मय मय भि भि छिंदी छिंदी

[संगीत] उच्चाटन

रांग रिंग कालिका मदीय शत्रु

समर्पयामी स्वाहा ओम जय जय किरी किरी किटी किटी कट कट मदम

मदम मोह य मोह य हर हर मम रिपन ध्वंस

ध्वंस भक्ष भक्ष ोट त्र यात धाना चामुंडे सर्व

जनान राजन राज पुरुष स्त्रियो मम वश कुरु

कुरु तनु तनु धन्यम धनं मेशवा गजा रत्नानि

दिव्य कामिनी पुत्रा राज श्रीयम देहि यम

क्म क्म क्म क्म क्म

[संगीत]

स्वाहा इत्य तत् कवचम दिव्यम कथित शंभु ना

पुरा ये पठति सदा तेशाम ध्रुवम नश शत्र व

वैर प्रलयम या व्याधि तावा भवंती ही बल हिना पुत्र हिना

शत्र वस्त स्य सर्वदा सहस्त्र पठना

सिद्धि कवच स्य भवे तदा तत् कार्याणि

सिध अंती यथा शंकर भाषित स्मशाना

मादाए चूर्ण कुवा प्रयत्न त पादो द केन

पिटवा तल्ली खेलो हसला कया भूम शत्रु हीन

रूपा अनुत्तरा शिर सस्था हस्तम

दवात हदय कवचम तुम स्वयं

शत्र प्राण प्रतिष्ठा तु कोरयान मंत्रण

मंत्र वित हन दस्त्र प्रहार शत्र गच्छ यम शयम जवल दंग

तापन भवंति चता भम नवाम

पादन तर भवती ध्रुवम वैरी नाश करम

प्रतम कवचम वश्य काकम

परमेश्वर यदम चव पुत्र पुत्रा दि वृद्धि

दम प्रभात समय चैव पूजा काले प्रयत्न त

सायंकाल तथा सर्व सिद्धि भवे

ध्रुवम शत्रु चटन याति देशा च वि चु तो भवे पश्चात किं

करमा पनोती सत्यम सत्यम

संचय शत्रु नाश करम देवी सर्व संपत प्रदे शुभे सर्व देव स्तुत

देवी कालिके तवाम नमाम [संगीत]

हम कैलाश शिख रा सिनम देव देवम

जगतगुरु शंकर परि प प्रक्ष पार्वती

परमेश्वरम पार्वती उवाच भगवन देव

देवेश देवा नाम भ गद प्रभु प्रही में

महादेव गोपय चेद यदि हे प्रभु शत्रु नाम

येन ना शस्य दात मनो रक्षणम भवे परम श्वर

तुलम लभ येन हि दत्व भैरव

उवाच वक्षा ते महादेवी सर्व धर्म विदा वरे

अदभुतम कवचम देव्या सर्व काम प्रसाद कम

विशेषत शत्रु नाश सर्व रक्षा करम णा सर्वारिष्ट

प्रशमनम सर्वा भद्र विना शम सुखदम भोग दम

चैव वशीकरणम उत्तम शत्रु संघा शयम

याति भवंति व्याधि पीड़िता दुखी नो

चैव स्वाभि द्रोही स्त था भोग मोक्ष प्रदम

चव कालिका कवचम पठत ओम अस्य श्री कालिका

कवच स्य भैरव ऋषि

अनुष्पला का देवता शत्रु संग

राथन [संगीत] होग

[संगीत] ध्यायतो बहु रूपण चतुर्भुज लल

जिवा पूर्ण चंद्र निभा नाम नीलोत्पल दल

श्यामाम शत्रु संघ विदारण

नर मुंडम तथा खड़ गम कमलम च वम

तथा निर्भया रक्त वदनम दंश ट्राली घोर

रूपिणी साट हा सान नाम देवी सर्वदा च

दिगंबरी सवासन स्थिता काली

पुंड माला विभूषित इति ध्यावा

महाकालि तत स्तु कवचम

[संगीत]

पठ ओम कालिका घोर रूपा सर्व काम प्रदा शुभ

सर्व देव स्ता देवी शत्रु नाश करो तुमहे

ओम रिंग रिंग रूपण चैव रांग रिंग राम

रूपिणी तथा राम रिंग शोम शोम स्वरूपा सा

सदा शत्रु न वि दार ये श्री रिंग एंग

रूपिणी देवी भव बंध विमोचन

ंग रूपिणी महाकाली रक्षा समान देवी

सर्वदा यया शंभो हतो दैत्य

निशुंभ महासुर वैरीना शाय वंदे ताम कालि काम शंकर

प्रिया ब्रमी शैवी वैष्णवी चवारा नार

सिंहिका कौ मर्र चामुंडा खा दंतु मम विधि

वश सुरेश्वरी घोर रूपा चं मुंड विनाशिनी

मुंड माला वतांग च सर्वत पातु माम सदा

रिंग रिंग रिंग काली के र दं शव रुधिर

प्रिय रुधिर पूर्ण वक्त्र च रुधिर

अनावृत स्तन मम शत्रु न खा दय खाद हिंस

हिंस मय मय भि भि छिंदी छिंदी

उच्चाटन द्रा वय शोष शोष स्वाहा रांग रिंग

कालिका मदीय शत्रु समर्पयामि

स्वाहा ओ जय जय किरी किरी किट किटी कट कट मदम मदम

मोह य मोह य हर हर मम रिपन ध्वंस ध्वंस

भक्ष भक्ष त्रोच त्रोच धाना चामुंडे सर्व जनान राज नो राज

पुरुष स्त्रियो मम वश कुरु कुरु तनु तनु धन्यम धनं मे स्वान

गजानन रत्नानि दिव्य कामिनी पुत्रा राज

श्रीयम देहि अक्षम क्म शीम क्षम क्म शोम

क् [संगीत]

स्वाहा इत्य तत् कवचम दिव्यम कथित शंभु ना

पुरा ये पठति सदा तेशाम ध्रुवम नशत शत्र

वैर प्रलयम याति व्याधि तावा भवंति ही बल

हिना पुत्र हिना शत्र वस्त स्य

सर्वदा सहस्त्र पठना सिद्धि कवच स्य भवे तदा तत् कार्याणि च

सिद्ध अंती यथा शंकर भाषित

स्मशाना र मादाए चूर्ण कृत्वा प्रयत्न तहा पादो द

केन पिटवा तल्ली खेलो हसला कया भूम शत्रु हीन

रूपा उत्तरा शिर सस्था हस्तम दत्त वात

कवचम तुम स्वयं पठ शत्र प्राण

प्रतिष्ठा कोरयान मंत्रण मंत्र वित न्या

दस्त्र प्रहार शत्र गच्छ यम शयम जवल तंग

तापन भवंति चरिता भम रवाम

पादन रिदो भवती ध्रुवम वैरी नाश करम

प्रक्त कवचम वश्य काकम

परमेश्वर यदम चैव पुत्र पुत्रा दि वृति दम

प्रभात समय चैव पूजा काले प्रयत्न

[संगीत] सायंकाल तथा पाठात सर्व सिद्धि भवे

ध्रुवम शत्रु जाटन याति

देशा विजु तो भवे पश्चात किं कमा पनोती

सत्यम सत्यम संशय शत्रु नाश करम देवी सर्व संपत प्रदे

शुभे सर्व देव स्तुत देवी कालिके तवाम

नमाम [संगीत]

हम

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