Supreme Court के फैसले से Modi सरकार को तगड़ा झटका - instathreads

Supreme Court के फैसले से Modi सरकार को तगड़ा झटका

नमस्कार
नेटवर्क आपके और मेरे पास अगर कहीं से 20
2 हजार रप आ
जाए तो इनकम टैक्स मेरी और आपकी जान निकाल
देगा पूछेगा कि यह 00 आपको दिए

किसने एक पत्रकार थे कप्पन आपको याद होगा
उत्तर प्रदेश में एक दलित लड़की की
बलात्कार की कोशिशों के बाद हत्या कर दी
गई थी उसकी रिपोर्टिंग करने

आए खाते में 45000 कहीं से आ गए थे और इस
ग्राउंड पर दो साल तक जेल काटनी पड़ गई
उनको कि 4000 कहां से
आ यह सारे नियम इस देश की कमजोर जनता के
लिए लागू है कि खाते में रुपए कहां से आए
यह आप

बताइए लेकिन देश के नेता को यह छूट है कि
अगर वह पार्टी के खाते में हजारों करोड़
रुप इकट्ठे कर ले तो कोई पूछेगा नहीं उनसे
कि नेता जी आपके खाते में यह पैसे कहां से
आए लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने सर्जिकल
स्ट्राइक कर दी

है पिछले कुछ दिनों पर आप सोशल मीडिया पर
देख रहे होंगे कुछ फैसले ऐसे आए थे जिसमें
लोगों को लगा कि यह सरकार के पक्ष में है
तो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस चंद चूर

पर भी लोग सवाल करने लगे
थे जबकि सब यह मान रहे थे शुरुआत के दौर
में चंद्र चूर्ण एक ऐसे सुप्रीम कोर्ट के
जज आए हैं जो सुप्रीम कोर्ट की दशा और

दिशा दोनों बदल
देंगे लेकिन फिर सुप्रीम कोर्ट के चीफ
जस्टिस पर भी सवाल उठने
लगे लेकिन आज चंद चूर ने बता दिया आज चंद

चूर ने साबित कर दिया कि आखिर में उनकी
स्थिति क्या है वह कितने मजबूत सुप्रीम
कोर्ट के जज
है उन्होंने आज इलेक्ट्रोल बोर्ड बंड
जिसके जरिए

सरकार हजारों करोड़ रुपए इकट्ठा करती थी
और कभी बताती नहीं थी कि यह पैसा कहां से
आया है उसको खत्म कर दिया मैं आजको आपको
आज तक की वेबसाइट पर आई खबर पूरी पढ़कर

सुनाता हूं जिससे आपको समझ आए कि आज हुआ
क्या लोकसभा चुनाव से पहले यह भारतीय जनता
पार्टी को इतना बड़ा झटका लगा
है कि भारतीय जनता पार्टी इससे ओवर पाएगी
इसकी संभावना बहुत कम लग रही

है लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इलेक्टोरल
बंड्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा
फैसला सुना दिया सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी
बंड स्कीम को अवैध करार देते हुए उस पर
रोक लगा दी कोर्ट ने कहा इलेक्ट्रॉल बॉन्ड

सूचना के अधिकार का उल
वोटर्स को पार्टियों के फंडिंग के बारे
में जानने का पूरा अधिकार है और सबसे बड़ी
बात अदालत ने बंड खरीदने वालों की लिस्ट
सार्वजनिक करने की का आदेश दे

दिया यह ऐसा आदेश है कि भारतीय जनता
पार्टी के नेताओं को कपकपी चढ़ जाएगी अगर
प्रधानमंत्री अबू धाबी में और अमत शाह
कहीं और है और जेपी नड्डा कहीं और है तो

आज वह खाना नहीं खा पाएंगे यह इतना सखत
आदेश है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकों
को यह जानने का अधिकार है कि सरकार के पास
पैसा कहां से आता है और कहां जाता है

कोर्ट ने माना कि गुमनाम चुनावी बंड सूचना
के अधिकार और अनुच्छेद 19 एक ए का उल्लंघन
है चंचर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि
इलेक्टोरल बंड के अलावा भी काले धन रोकने
के और भी तरीके हैं अदालत ने कहा

इलेक्टोरल बंड की गोपनीयता जानने के
अधिकार के खिलाफ है राजनीतिक दलों की
फंडिंग के बारे में जानकारी होने से लोगों
को मताधिकार का इस्तेमाल करने में और
स्पष्ट बात मिल जाती

है स्टेट बैंक और राजनीतिक दलों द्वारा इन
कैश कराए गए चुनावी बांड का विवरण भी
प्रस्तुत करना होगा आप लाइन सुनिए सुप्रीम
कोर्ट ने स्टेट बैंक से कहा है कि जो

इलेक्ट्रोल ब फिर लिए
गए उनके राजनीतिक दलों ने जो इन कैश कराए
उनकी सारी डिटेल हमको
चाहिए वहीं इन कैश कराए गए इलेक्टरल बंड
की राशि खरीदार के खाते में वापस करनी

होगी सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड योजना
को पूरी तरह असंवैधानिक करार देते हुए
इसकी वैधता को रद्द कर दिया शीष अदालत ने
अपने फैसले में माना के इलेक्ट्रोल बंड की

गोपनीयता सूचना के अधिकार का सीधा-सीधा
उल्लंघन
है चंद चूर ने कहा चुनावी बंड मौलिक
अधिकारों का उल्लंघन करता है और यह ब्लैक
मनी पर अंकुश लगाने का एकमात्र तरीका नहीं

है उन्होंने बैंकों को तत्काल चुनावी बंड
की बिक्री बंद करने का आदेश दिया सुप्रीम
कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक को निर्देश
दिया कि साल पहले इलेक्टोरल बंड स्कीम

शुरू होने के बाद उसने किस पार्टी को
कितने चुनावी बंड जारी किए हैं इसकी
जानकारी दी
जाए कम से कम मैं नहीं समझ सकता था मैं

सपने में नहीं सोच सकता था कि भारत का कोई
चीफ जस्टिस यह आदेश दे देगा कि 5 साल पहले
जब यह इलेक्टोरल बंड शुरू हुए किस पार्टी
को कितने चुनावी बंड जारी किए गए यह बताया

जाए और अब अगर सरकार कोई दाए बाए का
रास्ता नहीं निकालती है संसद का विशेष
सत्र नहीं बुलाती है कोई अधिनियम पास नहीं
कराती है कोई अध्यादेश नहीं लाती है अगर

यह जानकारी मिल गई तो मैं दावा करता हूं
आप में से बहुत बड़ी संख्या में लोग
भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं देंगे

लाइन सुन लीजिए अगर यह पता चल गया
कि किस पार्टी को कितना पैसा दिया गया यह
बताया जाए बहुत सारे लोग भारतीय जनता
पार्टी को पैसा नहीं

देंगे इस इलेक्ट्रॉल बंड के जरिए राजनीतिक
दलों को बीफ की सप्लाई करने वाले जानवरों
को मारने वाले तस्कर स्
मंगलर उद्योगपति सबने बेतहाशा पैसे

दि भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी
पार्टी ऐसी ही नहीं बन
गई बाकी पार्टियों के पास खाने पीने के
पैसे नहीं बचे और भारतीय जनता पार्टी के

पास इतने पैसे आ गए कि उसने अपने देश के
हर जिले में अपने ऑफिस बनाने का फैसला कर
दिया सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसकी
जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जाए स्टेट

बैंक को चुनावी बंड के माध्यम से राजनीतिक
दलों के प्राप्त चंदे का विवरण तीन हफ्ते
के अंदर चुनाव आयोग को देना होगा अब सवाल
यह है कि राजनीत एसबीआई जो है व चुनाव
आयोग को तो दे दीगी तीन हफ्ते में लेकिन

चुनाव आयुक्त जो है वह गांधी जी के तीन
बंदर की तरह है उन्हें मोदी जी के खिलाफ
ना को दिखाई देता है ना कुछ सुनाई पड़ता
है और ना कुछ वो बोलने के लिए तैयार है

उनकी आंख उनके कान और उनका मुंह मोदी जी
के लिए बंद रहता
है शीर्ष अदालत ने स्टेट बैंक को यह भी
निर्देश दिया कि चुनावी बंड से बड़ी
जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी पब्लिश

करें पांच जजों की संविधान पीट ने पिछले
साल 2 नवंबर को इस मामले में फैसला
सुरक्षित कर लिया था ये पांच जजों की बेंच
है 2 नवंबर को फैसला सुरक्षितता और लोग यह

भी कह रहे हैं य इतने दिनों तक सुरक्षित
रहा कि चुनाव से ठीक पहले एक सर्जिकल
स्ट्राइक पॉलिटिकल पार्टियों पर कर दी
जाए सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में

सीजीआई डी वाई चंद चूड़ के अलावा जस्टिस
संजीव खन्ना जस्टिस बी आर गवई जस्टिस जेवी
पारदी बाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल
थे एसबीआई को को राजनीतिक दौल द्वारा इन
कैश कराए गए चुनावी बंड का विवरण भी

प्रस्तुत करना होगा वही इन कैश नहीं कराए
गए इलेक्टरल बंड की राशि खरीदार के खाते
में वापस करनी होगी सुप्रीम कोर्ट ने कहा
चुनावी बंड के माध्यम से कॉर्पोरेट दान

दाताओं का भी जानकारी का खुलासा किया जाए
समझ गए ना तो कॉर्पोरेट है जिन्होंने
बीजेपी को मालामाल कर दिया उनका भी खुलासा
किया जाए और कंपनियों द राजनीतिक

पार्टियों को दिए जाने वाला चुनावी चंदा
पूरी तरह से लाभ के बदले लाभ पर आधारित
होता है मतलब कार्पोरेट पॉलिटिकल पार्टी
को पैसा दे रहा है और बदले में कार्पोरेट
के टैक्स में छूट मिल जाती है कारपोरेट का

जो पैसा लेकर भाग जाते हैं उनको छूट मिल
जाती
है एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला है जिसने भारतीय
जनता पार्टी की कमर तोड़ दी है आपको याद
हो 2017 के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी

और बहुजन समाज पार्टी को बर्बाद करने के
लिए अचानक नोटबंदी कर दी गई थी और नोटबंदी
का कारण यह था कि यह पॉलिटिकल पार्टियां
सपा और

बसपा किसी भी तरह से किसी भी रूप में पैसा
खर्च ना कर पाए हुआ भी यही था नोटबंदी के
दुष्परिणाम पूरे देश ने देखे थे और यह पता
चला था कि नोटबंदी से पहले भारतीय जनता

पार्टी के तमाम नेताओं ने पैसे ब्लैक मनी
वाले वाइट में कन्वर्ट कर लिए थे लेकिन आज
जो सुप्रीम कोर्ट ने कहा है भारतीय जनता
पार्टी के कार्यालय में सन्नाटा छा गया है
राहुल गांधी ने ट्वीट किया है और राहुल

गांधी ने कहा है नरेंद्र मोदि हों की
नरेंद्र मोदी की भ्रष्ट नीतियों का एक और
सबूत आपके सामने है भाजपा ने इलेक्ट्रोल
बंड को रिश्वत और कमीशन लेने का माध्यम

बना दिया था आज इस बात पर मोहर लग गई
राहुल गांधी ने तब भी विरोध किया था कि
इलेक्टोरल बन जो है इनको खत्म किया जाए
पॉलिटिकल पार्टियां जो भी चंदा लेती हैं

उनको सार्वजनिक किया जाए कि किस आदमी ने
कितना चंदा लिया लेकिन राजनीतिक दल भला यह
काम कर देते उनको तो इस चंदे के माध्यम से
ब्लैक मनी जुटाने होती है लिहाजा कभी भी

राहुल गांधी की बात नहीं मानी गई और आज
राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि नरेंद्र
मोदी की भ्रष्ट नीतियों का एक और सबूत
आपके सामने हैं भाजपा ने इलेक्टोरल बंड को

रिश्वत और कमीशन लेने का माध्यम बना दिया
था आज इस बात पर मोहर लग गई है जाने माने
अधिवक्ता है विवेक तनखा राज्यसभा के सांसद
उन्होंने कहा इस मुद्दे पर सु मुझे अत्यंत

खुशी हुई है कि आज सुप्रीम कोर्ट ने जो
इलेक्टोरल बंड की स्कीम है को स्ट्राइक
डाउन करके उस पर टोटल प्रतिबंध लगा दिया
है और डायरेक्शन दिया है इलेक्शन कमीशन ऑफ
इंडिया को कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सब

डिटेल लेकर अपने वेबसाइट पर इन कंपनीज के
डोनेशंस के बारे में पब्लिश करें यह
अत्यंत ही आवश्यक था प्रजा तंत्र को यह

खत्म करने वाली स्कीम थी एक पार्टी के हित
में थी अपोजिशन को क्रश करने के लिए थी और
जिस तरह से
एनोनिमस कॉरपोरेशंस पैसा डोनेट कर रहे थे

इसका मतलब यही था कि रूलिंग पार्टी को
बेनिफिट करने के लिए स्कीम बनाई गई थी
बहुत अच्छा हुआ प्रजातंत्र की यह जीत है
और मैं सुप्रीम कोर्ट को इस आवश्यक स्टेप
के लिए धन्यवाद देता हूं

बात बिल्कुल ठीक कह रहे हैं विवेक तनखा
जी इस बीच में हमारे साथ एक बहुत बहादुर
पत्रकार उत्तर प्रदेश के कई बड़े अखबारों
के संपादक रहे न्यूज इंडिया ग्रुप के समूह

संपादक रहे और बहुत बेबाक तरीके से बोलते
हैं अजय शुक्ला जी जुड़ गए हैं अजय शुक्ला
जी भारत के लोकतंत्र में इससे अच्छा फैसला
आप खुद अधिवक्ता हैं

इससे अच्छा फैसला नहीं हो सकता खुल गया
भ्रष्टाचार का खेल और जो आज यह मैं कहूंगा
सर्जिकल स्ट्राइक हुई है भारतीय जनता
पार्टी की इससे उभरने में बहुत समय लगेगा
चुनाव सिर पर है हजारों करोड़ ब्लैक मनी

खर्च होती है बड़े-बड़े जहाज चलते हैं
बड़ी-बड़ी रैलियां होती हैं क्या लगता है
आपको इस फैसले का बीजेपी पर क्या असर
पड़ेगा माइक अन म्यूट कर लीजिए अजय जी

माइक देख देख संजय जी पहले तो इसके लिए
बधाई देनी चाहिए राहुल गांधी को क्योंकि
राहुल गांधी इकलौते लीडर है जिन्होंने
2019 में ही इसको लेकर के कह दिया था उनका
ट्वीट देखिए कि उन्होंने और दिखाइएगा कम

से कम अपने दर्शकों को कि राहुल गांधी की
समझ कितनी ज्यादा है कि जो बात आज तमाम
सारे लोग सुप्रीम कोर्ट सब कह रहे हैं वह

राहुल गांधी ने 2019 में कह दिया तो सबसे
बड़ी बात यह है कि यह करप्शन का माध्यम
यह गलत तरीके से चुनाव को प्रभावित करने
का माध्यम है और यह तमाम सारे कानूनों का

उल्लंघन है और यह सारी चीजें आज सुप्रीम
कोर्ट ने जजमेंट किया निश्चित रूप से बहुत
सुखद है मैं समझता हूं यह और पहले होना
चाहिए था लेकिन मैं इसमें सबसे ज्यादा एक

दुख भी है मुझे कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन
महीने का वक्त दिया तीन महीना
मतलब आज हम जब बात कर रहे हैं तो 15 फरवरी
हो चुकी है

तो तीन महीने का मतलब यह हो गया मई के 15
मई तक हो गया अब 15 मई तक हो जाएगा तो
साहब सरकार नहीं तो 13 मई को बन जानी
है तो ऐसी स्थिति में यह चुनाव तो भारतीय
जनता पार्टी निपटा ही लेगी और इसके बाद

में चुनाव होगा कि नहीं होगा सुप्रीम
कोर्ट के कानून यो चलेंगे कि नहीं चलेंगे
और तमाम सारे सवाल आकर खड़े हो जाएंगे और
तब तक अभी सरकार के पास एक और जो रेमेडी
है कि इसके रिवीजन में चली जाए इसके लिए

इस पिटीशन फाइल कर ले और चीजें कर ले तो
वो सारी चीजें भी सामने खड़ी हैं बहरहाल
लेकिन एक चीज जरूर है यह बात जरूर साबित
करता है कि किस तरीके से सरकार ने एक

भ्रष्टाचार को जन्म दिया है और उस सरकार
ने भ्रष्टाचार के लिए वो सब कुछ किया है
जो अनैतिक माना जाता था
आप याद करिए 1977 का चुनाव श्रीमती इंदिरा
गांधी की के खिलाफ जो है चुनाव के खिलाफ

जो पिटीशन फाइल हुई थी उस पिटीशन में एक
ही चीज थी कि साहब जो उनके ओएसडी थे
उन्होंने इस्तीफा दे दिया था लेकिन
इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ था इसलिए चुनाव

अवैध है इसलिए चुनाव अवैध है क्योंकि उनकी
रैली में इंदिरा जी की सरकारी कर्मचारियों
ने बिजली का कनेक्शन जो था इसलिए साहब
अवैध है इसलिए अवैध है कि उन्होंने सत्ता
का दुरुपयोग किया अब आप सोचिए इस आधार पर

एक प्रधानमंत्री का चुनाव कैंसिल हो जाता
है आज प्रधानमंत्री की जितनी रैलिया होती
है सारी रैली का इंतजाम ही जो है सरकार
करती है सरकारी बस सरकारी गाड़ियां सरकारी

चीजें सब इस्तेमाल होता है सरकारी जहाज
इस्तेमाल होता है दूसरी तरफ आप देखिए
कि जिस तरीके से अ सरान की फौज लगती है आप
कल्पना कर सकते हैं तो यह दुरुपयोग का
मॉडल आप उस समय का याद करिए 100 जीपे

खरीदी थी कांग्रेस पार्टी ने और वह 100
जीपों के लिए डोनेशन दिया था जिस पूंजीपति
ने यह आरोप लगाया गया था कि उस पूंजीपति
के डोनेशन से खरीदी गई और यह जो है उसे

लाभ देने की मंसा थी इसलिए उन पर सीबीआई
का एफआईआर दर्ज की जा पार्टिया डोनेशन से
ही चलती स्वच्छता से डोनेशन था खुला
डोनेशन था आप उसको याद करिए श्रीमती गांधी
को गिरफ्तार किया गया था उस

मामले और कोर्ट ने फिर बाद में छोड़ा कि
यह कोई करप्शन नहीं लेकिन यह स्थिति हुई
थी आज वह सारी नैतिकता टूट चुकी नरेंद्र
मोदी सरकार में ना सिर्फ इन चीजों का

दुरुपयोग हुआ बल्कि धन का काला धन कैसे
कैसे इस्तेमाल किया जाए और क्या किया जाए
काला धन आया कहां से काला धन जो नोटबंदी
का और सारी चीजें की गई इसे क्यों राहुल
गांधी बारबार कहते हैं कि हिंदुस्तान का

अब तक का सबसे बड़ा
करप्शन क्योंकि वह काला धन जो कहती थी कि
काला धन है यही सरकार कहती थी नरेंद्र
मोदी ने ही खुद कहा था और साहब वो काला धन
तो कहीं निकला नहीं और जो आरबीआई की

रिपोर्ट है उसके मुताबिक सारा धन वाइट था
यानी जब काला धन था ही नहीं तो फिर यह
वाइट कैसे हो गया कैसे अमित शाह की उस
बैंक से सबसे ज्यादा रुपया जो मतलब किसने

गिना होगा कैसे होगा उस दिन बदल
गया इतने कर्मचारी भी नहीं थे तो अब यह सब
तमाम कमाल होते रहे मयूर भाई इस पर ज्यादा
हमसे बताएंगे और इसमें सबसे बड़ी चीज यह
है कि जिस तरीके का करप्शन यह देश के

खिलाफ करप्शन था क्योंकि यह काला धन कहीं
ना कहीं देश के बाहर देश के अंदर जिस
तरीके के किस वातावरण से आया इसको आप नहीं
बता सकते इस बात को या तो सरकार जानती है
एसबीआई जानती और इसीलिए सुप्रीम कोर्ट का

जजमेंट मायने रखता है क्योंकि उसने लोक
प्रतिनिधित्व कानून के तहत भी आने वाले
इसमें जो अमेंडमेंट किया गया था वो भी
अवैध हो गया और कंपनी एक्ट में किया गया

संशोधन वो भी अवैध हो गया और इसके साथ-साथ
अवैध हो गया जिस तरीके से उन्होंने आरटीआई
एक्ट की धारा का दुरुपयोग किया तो यह
बताता है एक बात बताइए हमारा संविधान क्या
कहता है संजय

जी फॉर द पीपल बाय द
पीपल और जब जनता के लिए है जनता का है तो
आप जनता को ही बताने में डर रहे हैं
पॉलिटिकल पार्टी क्या होती है जनता की
पार्टी होती है जो सरकार होती है वह क्या

होती है लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत
जनता का सेवक चुना जाता है और संविधान उसे
नौकर कहता है सेवक कहता है लोक सेवक कहता
है मतलब पब्लिक सर्वेंट कहता है गवर्नमेंट
सर्वेंट नहीं कहता आप देख लिए जो य सिविल

सर्विसेस के ऑफिसर है खुद को जाने क्या
क्या समझते हैं यह पब्लिक सर्वेंट है
गवर्नमेंट के सर्वेंट नहीं है पहले समझ ली
तो राष्ट्रपति से ले के सब जब सर्वेंट है
तो हमारा सर्वेंट ही अपने मालिक को नहीं

बताएगा कि हम क्या कर रहे हैं हम यह पैसा
कहां से ला रहे हैं कहां डाल रहे हैं
किसको इसका बेनिफिट दे रहे क्यों बजट संसद
में लाया जाता है सबसे चर्चा कराया जाता
है क्योंकि जनता के प्रतिनिधियों के जरिए

चूंकि सरकार चलती है तो पक्ष विपक्ष सबको
मुतमइन करना होता है कौन पैसा कहां से
आएगा कहां जाएगा क्या होगा क्या नहीं होगा
लेकिन
यदि किसी धन को आप यूं छिपाते हैं कि साहब

हम नहीं बताएंगे कि हमारे पास कहां से आया
क्यों नहीं बताएंगे
आपकी अपनी घर की बपौती नहीं है यह जहां से
भी आया इस देश के लोग कानून को वह करता है

प्रभावित करता है इसलिए बताना जरूरी इसलिए
बताना जरूरी है क्योंकि इसी के जरिए इस
देश का जनसेवक चुना जाना है और यह इसलिए
बताना जरूरी है क्योंकि इसी के जरिए
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करनी तो संजय जी

सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह सरकार हर
चीज पर पर्दा डालना चाहती है यह नहीं
चाहती है कि आप यह चर्चा करें वह नहीं
चाहती है कि इस पर कोई चर्चा करे कोई जाने
इसलिए यह सरकार हर चीज को कैद कर देना

चाहती है यह इसकी नियत बकुल क रहे कि
सरकार छुपाना चाहती है कपिल सिबल का बयान
आया है सामने मैं सुनता हूं आपको कफ
सिपल बॉन्डिंग बिटवीन दोज हु फंडेड एंड द
पॉलिटिक्स ऑफ द कंट्री एंड आल्सो यू विल

गेट टू नो द क्विड प्रोको बिकॉज नोबडी
गिव्स दिस ह्यूज अमाउंट्स ऑफ मनी विदाउट अ
क्विट प्रोको राइट नोबडी वुड गिव एन
इलेक्टोरल बंड फॉर 10 लाख और 15 लाख इट
विल बी इन करोस राइट सो इफ यू इफ यू फंडेड

योर पॉलिटिकल पार्टी विथ 5 टू 6000 करोस
यू कैन इमेजिन
ओनली द
रिचड नट एंड दे मस्ट इन द प्रोसेस सम
फेव एट्स एक्ली व्ट द सुप्रीम कोर्ट से

नोबडी गिव दिस कांड ऑ मनी वि पसल प्रो ट
क्ड प्रो को समथि नीड टू बी
इन्वेस्टिगेटेड सो आई थ इन सेंस दिस
प्रोवाइड फर लेवल प्लेंग फील्ड इन
डेमोक्रेसी ट एंड इटल्स एक्सपो द बीजेपी ट

प हैप्स द बिगेस्ट द प्राइम मिनिस्टर
कीप्स ऑन सेइंग वेर इज द स्कैम वेर इज द
स्कैम वेयर इट इज नाउ मोदी जी राइट इन
फ्रंट ऑफ योर आइज योर स्कैम दिस गवर्नमेंट

स्कम द स्कैम दैट यू यूज फॉर द पर्पसस
ऑफ पॉलिटिकल एजमेंट द स्कम दैट यू यूज फॉर
द पर्पसस ऑफ ऑफ ऑफ पर्संग पीपल टू जॉइन यू
अपार्ट फ्रॉम द ईडी ए अपार्ट फ्रॉम द
सीबीआई बकुल ठीक कह रहे हैं बीच में दो

खास में हमारे साथ है गुजरात के फोर पीएम
के स्थानीय संपादक मयूर जानी हमारे साथ है
और धनंजय कुमार सिंह जी मुंबई के बहुत ही
जस्ट व मेरे साथ है कांग्रेस के प्रवक्ता

सुरेंद्र राजपूत का बयान सामने आ गया व
सुनते हैं स्पष्ट कर दिया कि भारतीय जनता
पार्टी गलत तरीके से असंवैधानिक तरीके से
इलेक्टोरल बंड के जरिए कहीं ना कहीं देश

के पूंजीपतियों से एक तरफा चंदा ले दे रही
थी या धन उगाई कर रही थी क्या सुप्रीम
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से इसकी पारदर्शिता
पर सवाल उठाए हैं और स्पष्ट रूप से इसको

टर्न डाउन किया है आज की डेट में भारतीय
जनता पार्टी को बताना पड़ेगा कि जब से
उन्होंने इलेक्टोरल बंड के जरिए पैसा लिया
है किसकिस से पैसा लिया कहां-कहां से पैसा

लिया और जो एक तरफा चुनाव में जो चंदा आ
रहा है वो कहां है और उसका उपयोग क्या है
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वागत योग्य
है और भारतीय जनता पार्टी की सरकार के
मुंह पर करारे तमाचे

जैसा बिल्कुल ठीक बात है एक ऐतिहासिक
फैसला है मयूर जानी यह तो बड़ा गड़बड़ कर
दिया सुप्रीम कोर्ट ने सब बताना पड़ेगा
बीजेपी को सबसे ज्यादा चंदा तो आप गुजरात

में है गुजरात के स्थानीय संपादक सबसे
ज्यादा चंदा तो लोग कह रहे गुजराती भाई
लोगों ने दिया होगा क्या होगा मयूर भाई सब
गुजराती भाई लोगों के सामने आ जाएगी बातें
माइक अन म्यूट कर

बताइए मेरे पास जो आंकड़ा है उसमें सबसे
ज्यादा अगर कहीं से ये दान मिला है भाजपा
को तो वो तो दिल्ली से मिला है वो 276
करोड़ के आसपास का

है और गुजरात से जो मिला है उसके बाद
दूसरे नंबर पर गुजरात है जहां पर गुजरात
से कुल पैसा गया है पॉलिटिकल पार्टीज को
दान में वो 160 करोड़ है जिसमें से 157

करोड़ रुप भाजपा मिला हुआ है गुजरात की
बात
करें तो पैसा तो मिल ही रहा है और जैसे
अभी को कपिल सिब्बल भी कह रहे थे बहुत सही
बात हैय आप भाई आपको कोई पैसा दे रहा है
तो कोई पैसा क्यों दे रहा

है और वह क्यों अपना नाम छुपाना चाहता है
सरकार की नीतियां जो बनती है उन नीतियों
में किसको सबसे ज्यादा फायदा मिलता
है कौन से कॉर्पोरेट है कौन से वो संस्थान

है जिसको फायदा मिल रहा है वाले पैसा देते
हैं फिर नीतिया भी बदलती है या तो बनती है
और फिर किसी को फायदा होता है अब वो वो जो
अगर नाम आप जो है खुले कर देंगे तो पता चल

जाएगा तो फिर यह जो उनकी जो यह ये क्लोज
डोर गेम है पूरी और लगातार यह कहते रहना
कि भ्रष्टाचार तो हमारा और भ्रष्टाचार का
तो दूर दूर तक का कोई नाता नहीं है यह सब
जो बातें करते रहते हैं फिर वहां से एक

रास्ता खुल जाता है और सुप्रीम ने तो कह
दिया कि वो तो इलेक्टरल ब से जो है अब
मतलब एब्सली आज सेही बंद कर दिया ना जो
मैं खबर देख रहा था वही खबर है एक तो
हिसाब देने के लिए बोला और कहा दूसरा कि

आप ले नहीं सकते इससे पैसा इस तरह से तो
यह एक बहुत बड़ा स्टेप है बहुत बड़ा एक
फैसला है सुप्रीम कोर्ट का अभी कुछ दिनों
से हम और आप और हमारे जसे जितने भी

पत्रकार हैं वह हम इस सोच में थे कि बात
भी करते थे हम जो उम्मीद थी हमको चीफ
जस्टिस साहब से वो शायद
वो पूरी होती दिखाई नहीं दे रही लेकिन यह

फैसला जो आया है तो इससे लगता है कि नहीं
ऐसा भी नहीं है कि बिल्कुल ना उम्मीद होना
चाहिए और
इससे गुजरात में तो देखिए यह है कि थोड़ा

गुजरात से जोड़ के इसको देख लू मैं गुजरात
का मैंने मॉडल देखा हुआ है गुजरात
में तो वैसे भी अलग-अलग तरीके से जो है वो
चंदा या डोनेशन लेने की प्रैक्टिस है
बीजेपी को वो धन संचय योजना करते हैं वो

अलग-अलग तरह की योजना का नाम दे देते हैं
और वो खुलेआम वो डोनेशन जो है वो ले लेते
हैं अगर
किसी एक जिले में कोई एक बड़ा कार्यक्रम

होना है तो उसका पूरा खर्च जो है वो
अलग-अलग वहां की इंडस्ट्री वालों से जो है
कलेक्टर कलेक्टर के द्वारा ही जो है
उसको मैनेज किया जाता है तो ये सब तो हम

परसों से देख रहे हैं लेकिन अब इसको बड़े
स्केल पे वो कर रहे थे नेशनल लेवल पे तो
अब वो बंद हुआ है तो बड़ी तकलीफ है
अब इसके मुझे मुझे मुझे देखना य है मुझे

जो इंटरेस्ट है जो रुचि है उस चीज में
संजय भाई कि सुप्रीम जो भी कहेगी इसको य
मानने वाले है नहीं अब वह क्या करेंगे अब
ऐसा कौन सा तिकड़म लाएंगे इसको इस इस
निर्णय

को को वो स्वीकार नहीं कर पाएंगे अब वो
क्या करेंगे लीगली या पता नहीं वो समझना
पड़ेगा वो देखना पड़ेगा मेरे लिए
इंटरेस्टिंग वो रहेगा देखना जी बकुल ठीक

बात है कि वो क्या अध्यादेश लाएंगे या
क्या बात करेंगे यह सामना आना जरूरी है
धनंजय जी बीच में राजनीतिक विश्लेषक अरुण
शर्मा जी मेरे साथ जुड़ गए हैं धनंजय जी

एक ऐतिहासिक फैसला दिया है सुप्रीम कोर्ट
ने क्या मानते हैं इस फैसले के परवेश में
यह तो बहुत सर्जिकल स्ट्राइक है भारतीय
जनता पार्टी के

ऊपर यह सर्जिकल स्ट्राइक नहीं है यह अभी
आधा दूरा फैसला बोलूंगा पूरा अभी तोय कहा
संवैधानिक है रोक लगनी चाहिए लेकिन जब कैश
फॉर जॉब में ईडी पूछने जाती है जब पूछने

जाती है कि आप जो है यह मनी लरिंग का केस
बन जाता यह जमीन बेची तो मनी लरिंग का केस
बन गया जब यह कहा जाता कि आप शराब
व्यापारियों को अने यह नीति बना कर के छूट

दे दिया और मनी लरिंग का केस बन जाता है
और जेल में उनको बंद कर दिया जाता है क्या
बीजेपी के शीर्ष नेताओं को जेल होगी सबसे
बड़ा सवाल यह है उनको जेल क्यों ना हो

इससे बड़ा भ्रष्टाचार तो हुआ नहीं न में
यह भ्रष्टाचार ऐसा भ्रष्टाचार है जिसको
कहते हैं कि आंख म करके दूध दूध में मक्खी
गिरी हुआ पी जाना क्या देश की जनता ऐसा

करेगी यह आए थे किस नाम प आए थे काला धन
खत्म करेंगे आए थे कि भ्रष्टाचार खत्म
करेंगे आए थे कि जो भ्रष्टाचार किया है
जिसने काला धन जमा किया है उस सबको हम जेल
में बंद करेंगे सबसे बड़े भ्रष्टाचारी तो

यही साबित हुए सुप्रीम कोर्ट ने भले फैसला
पूरी तरह सुनाया नहीं है अभी आधा है
असंवैधानिक जो का जो मयूर भाई कह रहे थे
यह क्या कहा गया कि असंवैधानिक है गलत है

इस पर रोक लगनी चाहिए चाहिए मतलब क्या
होता है तो तो कह देंगे कल कि नहीं ये जो
है अभी तो बहुमत उनके पास है बहुमत में आक
के वो संसद में पास कर देंगे अचानक

बुलाएंगे सेशन और पास कर दे कि भाई जो है
यह कोई असंवैधानिक नहीं है चंदा लेना
संवैधानिक है कर
देंगे तो आपके लिए सारे कानून संसद में

बैठ कर के बदल दो बना दो जिसे साहबान केस
में बदल दिया था उन्होंने राजीव ने वो
भ्रष्टाचार नहीं है क्या यह भयानक
भ्रष्टाचार है और इससे बड़ा भ्रष्टाचार
कुछ हो नहीं सकता जुर्माना क्या

लगाया आपने किसको कहा कि जो है क्या
बीजेपी पर जुर्माना लगाया सुप्रीम कोर्ट
ने लगाया जाना चाहिए कि भाई आपने इतना
भ्रष्टाचार किया है आप आपके जुर्माना

लगाया जाएगा आपके ट्रेजरर को जेल में बंद
किया जाएगा ईडी अभी जाए छापा मारे बीजेपी
के दफ्तरों में और आमतौर पर देखिए कि जब
भी कोई पुलिस में भी रिपोर्ट दर्ज होती है

तो आपके प्रदेश से से बुलडोजर निकलता है
और अ तो देश में बुलडोजर चलने लगा है
तुरंत बुलडोजर पहुंच के तोड़ देता है तो
क्या इलेक्टोरल बंड से जो बने हैं

बिल्डिंग है भाजपा की बड़े-बड़े दफ्तर बने
वो तोड़े जाएंगे सवाल यहां खड़ा होता है
और यह नागरिकों को यह पूछना चाहिए कि राम
के नाम पर जो तमाशा किया इन्होंने और कहा

कि सबसे बड़े नैतिक हम है सबसे बड़े
देशभक्त हम है सबसे बड़े जो
है ईमानदार हम है तो ये कौन सी ईमानदारी
है भाई और जो
अंबानी को जो अडानी को पैसे देने की बात
करते रहते हैं फेवर करने की बात करते हैं
राहुल

गांधी किसको नहीं दिखता है देश की जो
अनपढ़ जनता है या जिसको खाली राम मंदिर के
अलावा कुछ दिखता नहीं है भले उसको नहीं
दिखता होगा बाकी जो भी इस देश का पढ़ा

लिखा आदमी है थोड़ा बहुत भी उन सबको दिखता
है कि राम की आड़ में इन्होंने देश को
खोखला किया है लूटा है और तमाम तरीके के
अनाचार जो होते जितने तरीके के अनाचार है

वो तमाम अनाचार इन लोगों ने किए मेरा सवाल
यह है कि क्या इन सबको जेल होगी या नहीं
होगी
जी बात है आपका सवाल जायज है अरुण शर्मा
जी एक बहुत

बड़ा सर्जिकल स्ट्रैक मैं कहूंगा भारतीय
जनता पार्टी पर इलेक्टोरल ब बंद नया चंदा
नहीं चुनाव सिर पर है पैसा बहुत चाहिए
होगा आपका मत क्या

है
जी सर आपने एक कहावत सुनी
होगी अं पीछ कुत्ता
खाए यह भारतीय जनता पार्टी के ऊपर यह बड़ी
फिट बैठती

है क्योंकि हमारी जो सुप्रीम कोर्ट
है वह पहले यह देखती है कि भारतीय जनता
पार्टी और मोदी साहब को कैसे बचाया जाए
उसको बचाते हुए कैसे फैसला दिया

जाए एक मध्यम मार्ग चुन लिया जाता है
संदेश जनता में यह जाए कि सा सुप्रीम
कोर्ट बहुत एक्टिव है उन पर कोई आक्षेप ना
हो जैसे कि अभी धनंजय भाई ने कहा क्या उन

पर कोई जुर्माना लगाया गया सर मैं दावे से
बात करता हूं नहीं लगाया जाएगा रास्ता एक
नहीं 300 रास्ते उनके पास हैं यह डिसीजन
दिया ही इसीलिए गया है कि पहले रास्ता

चुना गया कि कैसे इस बहती गंगा में हाथ
धोना मैं बहुत बार आपके भी कह चुका कि
अपुष्ट समाचार है मेरे पास सोर्सेस है 18
हजार करोड़ रुपया बीजेपी के फंड में है
अनाधिकृत

जिसका कोई हिसाब नहीं जिसको हम नंबर दो का
पैसा कहते हैं और वह इस पैसे को तो
प्रोटेक्ट कर ही रही है अभी मैं कल रात को
एक न्यूज देख रहा था जिसमें यह बताया जा

रहा था कि जब शाह साहब ने नोटबंदी हुई तो
जो पैसा निकला था जो कोऑपरेटिव बैंक में
जमा कराया गया था उस केस का हुआ क्या उस
केस का कुछ नहीं हुआ कोई उसकी छानबीन नहीं

हुई किसी ने उस पर आक्षेप नहीं लगाया उस
बात को गोलमोल कर दिया गया और उसी पैसे से
460 दफ्तर बन चुके हैं बीजेपी के 270 ऑफिस
निर्माणाधीन है और दिल्ली में आरएसएस का
इतना बड़ा 10 मंजिला का ऑफिस बना वो कैसे

बना कौन से पैसे से बना किसका पैसा था कब
दिया कितना दिया क्यों दिया यह सब कारण
आपको नहीं पता चलेंगे उसका कारण यह है अभी
कल मोदी जी भाषण दे रहे थे मंदिर उद्घाटन
पर क्या कहा उन्होंने हमारा देश सर्व धर्म

संभाव की व्याख्या करता है सर्वजन हिताय
सर्वजन सुखाय की परिभाषा हम बोलते हैं हम
वासुदेव कुटुंब कं को मानते हैं सर एक
व्यक्ति कितना कपटी हो सक सता है कितना
छली हो सकता है और है वो मुझे तो समझ में

नहीं आती यहां पर कुछ और पार्लियामेंट में
कुछ और पार्लियामेंट से चार कदम बाहर आए
कुछ और मंच में बैठ गए बीजेपी के चुनावी
सभा में तो कुछ और महिलाओं में चले गए तो

इमोशनल कार्ड कहीं और चले गए बच्चों में
गए तो पेपरों की बात सर कितना कपट करोगे
कितना लोगों को बकू बनाओगे आप इस देश में
जब से वह यह कह चुके कि काला धन वापस आ

जाएगा कितना काला धन बढ़ गया सर कौन-कौन
से बैंकों में कितना कितना धन बढ़ा कभी
बताया उन्होंने कोई काला पैसा आया कहां है
लाला
रामदेव जो व्यक्ति 250 करोड़ में रुचि

सोया खरीद लेता है और उसकी कीमत आज 25 हज
करोड़ हो जाती है कैसे हो जाती है हमारा
व्यापार क्यों नहीं बढ़ता हमारी
ट्रांजेक्शन क नहीं बढ़ती एक व्यक्ति जो 8

हज प्रॉफिट करता है उनका पुत्र व कैसे
16 80 करोड़ रुपया कमा लेता है एक वर्ष
में कौन सी ट्रांजेक्शन करते हैं ये यह
कभी किसी ने पूछा उनसे किसी की हिम्मत हुई
क्या गोदी मीडिया इस तरह के प्रश्न करता

है और यह जो रोक लगाई गई है यह छंदम रोक
है मुझे इस रोक पर कोई विश्वास नहीं है यह
जो कहा गया है यह बीजेपी के पक्ष को ब व
करते हुए कहा गया है सर अगर मेरी बेटी की

शादी हो तो मैं तो एक वर्ष पहले खरीददारी
शुरू कर देता हूं जब वो 18 20 वर्ष की
होती है तब सामान बनाना शुरू कर देते हैं
दहेज बनाना शुरू कर देते हैं और आपको तो
इलेक्शन की डेट पता है तो आपने पैसा जो आप

बंड की बात कर रहे हैं वो तो बहुत पहले
इकट्ठा कर लिया होगा आज थोड़ी इकट्ठा होगा
वो तो सारी तैयारी हो चुकी क्योंकि अब
बाकी लोगों की तैयारी नहीं है उनको रोकना
है इसलिए इस तरह का सुप्रीम कोर्ट से

डिसीजन दिलवा दिया गया है सुप्रीम कोर्ट
ने दिया नहीं है यह डिसीजन और यह दिया
इसलिए है कि बाकी लोग उनके समकक्ष तैयारी
ना कर पाए उनको कंपटीशन में ना पछाड़ पाए

यह पॉलिटिकल गिमिक का एक रफ का पत्ता
साबित होगा यह कोई एक नहीं है नॉर्मल ताश
में भी चार पपलू होते हैं सर अभी तो एक
आया है अभी और आने वाले हैं आप देखते जाए

लोगों को बरमाना लोगों को बहका लोगों को
फुसलाना यही काम बीजेपी का रह गया है
कंस्ट्रक्शन वर्क कौन सा किया आपने आप
दावे करते हैं हवाई अड्डे बनाने के कितने
हवाई अड्डे बनाए कितने अडानी जी को सौंपे

किया क्या है आपने आपने किया है रेवड़ी
बांटने का काम लोगों को किसानों को छल का
काम महिला जो हमारी पहलवान थी उनसे से
बेईमानी करने का काम टेनी साहब को अवार्ड

देने का काम कुलदीप सिंघर को बचाने का काम
आपने किया है एक बेटी को रात को ढाई तीन
बजे जलाने का काम आपने मणिपुर में दो
मणिपुर कर दिए और बहनों की बेटियों की
इज्जत लुटवानी का काम आपने किया है तो यह

जो आया है अभी फैसला मैं सुप्रीम कोर्ट से
इत्तफाक नहीं रखता मेरा हक है कि मैं
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की छानबीन कर पाऊ
और यह निर्णय कर पाऊ नैतिकता के तौर पर कि
जो सुप्रीम कोर्ट से जनता अपेक्षा करती थी

वैसा निर्णय आया या नहीं आया या उस निर्णय
के अंदर कोई लूप होल दिया गया तो मेरा यह
विरोध है और जो फैसला आया है मैं उससे
सेटिस्फाइड नहीं हूं जी बिल्कुल ठीक है
अरुण जी इस बीच में राजस्थान के पूर्व

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भी बैठ सुन
देता मैंने कहा कि जो बंड निकले बंड ये
बहुत बड़ा स्कैंडल है स्कैंडल है देश का
आजादी के बाद का सबसे बड़ा स्कैंडल यह है
5000 से अधिक के

बंड किनसे क्या सौदे किए
गए उनके बदले में क्या बंड लिए गए हैं
क्या छूट दी गई है देश की विदेशी कंपनियों
को किसी को नहीं मालूम है

इतना बड़ा गेम हुआ है और 90 पर ज्यादा बंड
मिले बीजेपी को मिले हैं उससे वो खेल खेल
पूरे देश के अंदर चुनाव लड़ रहे हैं
खर्च कर रहे हैं डिंग कर रहे हैं सब कुछ

कर रहे हैं
और सारे जिलो में ऑफिस बना रहे हैं जमीन
लेले कर कहां से पैसा आ रहा है और बाकी
पार्ट ब्लॉक कर दिया तो फिर डेमोक्रेसी क
कैसे रहेगी जब

सभी पार्टियों
के फंडिंग को ब्लॉक कर दो देश के अंदर
खाली बीजेपी के पास बंड
आएंगे इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने इसका
विरोध

किया रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने विरोध किया
इसका लागू करते वक्त में तब भी लागू किया
गया और तो और इसको मनी बिल के रूप
में राज्यसभा में बेस नहीं हो जो मनी बिल

होता है उसकी बेस खाली लोकसभा में होती है
तो मनी बिल के रूप में इसको कन्वर्ट कर
दिया गया और खाली लोकसभा में पास करवा
दिया गया ना राज में बस होती

इसकी उसकी बजाय लोकसभा में बैस करके इसको
पास करवा दिया गया लागू करवा दिया गया और
तो और जो अभी खबर नहीं नहीं आई है कल
परसों प्रधानमंत्री के ऑफिस से जब

सेक्रेटरी फाइनेंस ने मना कर दिया कि यह
संभव नहीं है एक्स्ट्रा शश
देना चुनाव आ रहे थे कर्नाटक आ के उसके
पहले मना कर दिया बारबार इसकी जो डेट

फिक्स है उन्ही डेट में यह ब जारी होंगे
तो लिखित में आया कि नहीं प्रधानमंत्री
ऑफिस का आदेश है तब जाके फाने सेक्रेटरी
को और डेट बढ़ानी पड़ी है एक्स्ट्रा डेट

देना पड़े
है यह अशोक गहलोत का पुराना बयान है जो वह
बंड को लेकर कह रहे थे बीच हमारे साथ ब
सीनियर जर्नलिस्ट हमारे बड़े भाई और
शानदार किताब लिखी है बहुत अच्छा य चलाते

आनंद वर्धन जी आनंद जी मैं मुझे लग रहा है
य भारतीय जनता पार्टी के ऊपर सर्जिकल
स्ट्राइक है इस तरह रोक लगना बड़ी बात है
आपकी क्या टिपड़ी

है माइक अन म्यूट कर लीजिएगा
प्लीज मैं अरुण जी की बात से इतना तो सहमत
हूं कि अगर
कभी सपने में भी आके यह पार्टी कुछ अच्छा

काम करेगी तो हमें तो भाई मैं भी सपने में
भी विश्वास नहीं करूंगा क्योंकि इनकी हर
चीज में कुछ ना कुछ चाल होती है कुछ ना ये
ये

शायद जो चेस में बोलते नहीं है व घोड़ा जो
ढाई ढाई वाला खाना चलता हैय सीधे चल ही
नहीं सकते तो वो तो नियत की बात है लेकिन
फिर भी मैं एक चीज यह कहूंगा कि शायद कुछ
चीजें कुछ चीजें और मैं इसको दूसरे ढंग से

देख रहा हूं चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया
चंद्रचूर साहब एक बड़ी अच्छी क्लीन स्लेट
लेकर आए थे फिर उनके ऊपर एक इस तरह के
आरोप लगने लगे कि वो अपने जो जजमेंट देते
हैं वो अमेरिका को ध्यान में रख के देते
हैं क्योंकि उसके बाद बहुत से लोगों का

ऐसा है कि यह शायद वही पढ़ने लिखाने
जाएंगे पढ़े लिखे आदमी माने जाते हैं
डॉक्टर डॉक्टरेट एलएलडी बोलते बड़े पढ़े
लिखे फिर कुछ ऐसे जजमेंट आए जहां पर हम सब
लोगों का

विश्वास मतलब सीजीआई के निष्पक्षता से उठ
गया था हम सब लोग का मैं इंक्लूडिंग
सार्वजनिक रूप से इसको कह रहा बहुत कम आया
था अब उसके बाद आप मालूम नहीं आपने देखा
कि नहीं देखा था इस देश के जो बड़े वो है
मतलब वकील और विद्वान है इसके चाहे वह फली

नरीमन हो चाहे रटन नरीमन हो और चाहे पूरी
मतलब पूरे वकील जो जमात है वो एक स्वर में
उसने बोला था कि जो चंद्रचूर साहब कर रहे
हैं वह कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ गलत है और

इस पर एक अरोड़ा साहब है सुप्रीम कोर्ट
बार एसशन के सेक्रेटरी रहे हैं उन्होंने
एक बहुत मतलब मेरे यहां उन्होंने मुझसे
बात की थी बहुत कड़े शब्दों में भरना की

थी अब ये उसकी वजह से है कि एक इको सिस्टम
में जैसे कभी-कभी हम लोगों को लगता है ना
हमारे बहुत से साथी आके कहते हैं अरे हम
लोग को कहने से क्या फायदा है कोई तो
सुनने वाला नहीं है हमारी रीच नहीं है

लेकिन ऐसा नहीं है नकार खाने में अगर दो
एक तूती नहीं अगर द ब तूती भी मिलकर बोलने
लगे तो कहीं ना कहीं आवाज तो जाती है वो
इको सिस्टम में जाता है और एक चीज मैं और

बता दू झूठ के पैर के अपने एक एक वो है
लेकिन सच अगर आप बोल रहे हैं तो कहीं ना
कहीं वो रेजोनेंस होता है और जो संजय जी
आपने अपने उसम कई बार इस चीज को किया है

आपने एक बार नहीं आपने कई बार कहा है कि
आप जब कहीं जाते हैं आप कहीं एयरपोर्ट पर
खड़े हैं किसी लाइन में खड़े हैं तो बहुत
से लोग आके आपको कहते हैं और वो आपके जाने
वाले नहीं है और शायद हम और आप जो काम कर

रहे हैं उसका पारिश्रमिक वही होता है
क्योंकि बाकी जो जो ये काम कर रहे हैं ये
काम नहीं करेंगे मजदूरी करेंगे सिर प बोझा
भी उठाएंगे तो इसमें दो रुप मिलता है
उसमें शायद पौने रुप मिल जाए तो यह कोई

पैसा नहीं है लेकिन वो जो वो जो
पारिश्रमिक आपको मिलता है जब आप एयरपोर्ट
पर किसी सार्वजनिक जगह पर जाते हैं और लोग
आपसे कहते हैं कि नहीं आपसे उम्मीद है तो
आपके साथ जिम्मेदारी और दोनों बढ़ता है

मैं इस एक्ट को थोड़ा इस इस उसके साथ देख
रहा हूं कि एक एक घनघोर बेमानी वाला एक्ट
हालांकि इसको बीजेपी सरकार पूरी तरह से
चाहेगी कि यह अगले दो चार पाच 10 घंटे से

ज्यादा इस पर डिस्कशन ना हो वो और चीजों
को लाना चाहेगी
उन्होंने अप ने जजमेंट में खुद कहा है कि
ये
तीन तीन एक्ट का वायलेशन करता है और राइट

टू इंफॉर्मेशन एक्ट का वायलेशन करता है ये
तीन एक्ट नहीं जब ये एक्ट आया था तो ये
इतना बड़ा गोरख धंधा था इसने हिंदुस्तान
के पांच एक्ट को चेंज किया था मैंने इसको
डॉक्टर छोकर जो है उनको बुलाया था इसमें

एक बड़े कला इसमें एक बड़े वो थे कमोडोर
लोकेश बत्रा उन्होंने बहुत काम किया है
इसमें नितिन सेठी ने हफिंगटन पोस्ट का अभी
भी गगल कर लीजिए छह अंकों में उन्होंने

इसम पूरी सीरीज एक एक कागज लेकर आए थे व
यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं कि यह पांच
इसमें कुल हिंदुस्तान के पांच एक्ट को
अमेंड किया गया था इस बेईमानी को लाने के

लिए यह बेईमानों का एक्ट हिंदुस्तान का
आरबीआई एक्ट 1934 को जिसमें सोवन पावर्स
है आरबीआई को उसको चेंज किया आईटी एक्ट ऑफ
1961 उसको चेंज किया आरपीआई
रिप्रेजेंटेटिव ऑफ पीपल्स एक्ट उसको चेंज

किया वो तो खुद ही कंपनी एक्ट को चेंज
किया और एफ सीआरए एक्ट ऑफ 1976 जो जो
विदेश से पैसा आता उसको भी चेंज किया इससे
पहले विदेशी कोई भी व्यक्ति विदेश से
विदेशी व्यक्ति हिंदुस्तान की किसी

पॉलिटिकल पार्टी को पैसा नहीं दे सकता
इससे पहले कंपनीज एक्ट में ये था कि अगर
कोई
कंपनी पिछले तीन साल से अपने प्रॉफिट का
75 पर से ज्यादा नहीं दे सकती है इन्होंने
अब कर दिया कि कोई कंपनी हो वो चाहे बम

बनाती हो और वो चाहे हथियार बनाती हो वो
चाहे लूट हो उसका कुछ भी काम हो वो
हिंदुस्तान में हो ईरान में हो तरान में
हो लंदन में हो कहीं की कोई भी कंपनी कुछ
भी पैसा इनको दे सकती है सारी रोख हट गई

जिसको कहते हैं टेरर मनी ड्रग मनी एनेशन
मनी ये सारी लॉबी हो गई कोई रोक चोक नहीं
थी कि आप आप लॉस मेकिंग है और इस तरह का
एक बहुत सी चीज मेरे साथ संदीप पांडे

उन्होंने इस पर किया भी था कि यह जो आप
देखे थे ना जो लोग यहां से पैसा लेकर भागे
थे उसमें एक रिलेशनशिप है जो बैंक का पैसा
डूबा है वहां से ये देखिए ये बिल्कुल

स्कीम वो थी जो जो आप और हम जानते हैं ये
अब नाम क्या ले किसी का आप मुझे 00 दीजिए
र आपको और फिर मैं बाहर चला जाऊंगा तो ये
स्कीम एक एक पार्टी लेवल पर ऑर्गेनाइज हो
रही थी कि 10000 करोड़ 5000 कर बड़े

आदमियों के लिए थी हमारे आपके लिए नहीं थी
मतलब लाख दो लाख का हम और आप लोन क्या
लेंगे स्कूटर लोन ले लेंगे बहुत हो गया तो
कार का लोन ले लेंगे 10 लाख 20 लाख इस

ज्यादा की अपनी औकात नहीं ये लोन थी दो
चार हजार करोड़ का लोन लीजिए उसका एक
सर्टेन पैसा हमें पार्टी फंड में दे दीजिए
क्योंकि पूछा कुछ नहीं जाएगा और फिर आपको
हम सेव पैसे दे रहे हैं मस्ती में रहिए

अपना विदेश में जाइए रहिए पार्टी अटेंड
करिए सब जगह घूमिए फिरिए इंटरव्यू दीजिए
हम आपका कुछ करेंगे नहीं और यह पूरा एक
इको सिस्टम था और इसपे इस पर बहुत से वो

हो चुके हैं इसको मैं इसलिए इस बात को कह
रहा हूं यूएसए जिसको कहा जाता है वहां पर
ड से ज्यादा अगर कोई चंदा दे रहा है तो
उसके सारे डिटेल लिखे जाते हैं यूनाइटेड

किंगडम में साज पाउंड से ज्यादा यहां पर
है कि नहीं नहीं आप कई हजार करोड़ के भी
अगर दे देंगे तो आपसे कुछ पूछ जाएगा मैं
मैं जो अरुण जी कह रहे थे ये एक बार नहीं

यह पीएमओ से इसका क्या मतलब है भाई एक
स्कीम चल रही है एसबीआई पीएमओ एक बार नहीं
कम से कम चार पाच बार इंटरफेयर किया है
नहीं इसको फिर से खोलिए स्कीम ओरिजनली ये
थी हर

चार क्वार्टर है मतलब हर क्वार्टर में 10
द दिन के लिए एक विंडो खुलेगी और जिस साल
जनरल इलेक्शन होगा उस साल एक विंडो का व
थोड़ा नियाद बड़ी होगी 10 दिन की जगह शायद

20 या 25 दिन थी मुझ अब याद नहीं है जिस
साल विधानसभा चुनाव मतलब वो एक विंडो का
प्रोविजन था ये उसके अलावा भी जब
भाई दुनिया का नंबर दो कोई आदमी बनता है

जी उससे कहा जाएगा इधर की भेट क्या है
पंडित जी अगर आपको आप मंदिर जाते पंडित जी
एक्स्ट्रा दर्शन करा देते हैं ना जब भगवान
सोते भी रहते हैं तो पैसा लाओ अभी सब

दर्शन कराते हैं तो ये सारा गोरख धंधा था
मैं इस बात से मुझे बिल्कुल अरुण जी की
बात से मैं यह तो मानता हूं कि मतलब इससे
बीजेपी क्या करेगी इस पर कुछ भी कर सकती
है लेकिन मेरे हिसाब से लोकतंत्र को बचाने

की एक बड़ी कवायद है क्योंकि लोकतंत्र
क्या है लोकतंत्र यह है कि इस देश के
लोकतंत्र में हमारा वोट सबसे बड़ी उसकी
ताकत है और उसको उस वोट को प्रभावित करने

में इलेक्टोरल बंड बहुत हद तक प क्योंकि
अना शना पैसा आ रहा था किसी से कुछ पूछा
नहीं जा सकता था मुझे दूसरा यह लगता है कि
अब जो अगली कारवाई होगी वो इस पैसे वापसी
की भी अगर अगर आपने क्योंकि उन्होंने कहा

13 मार्च तक आप इसको ट्रांसपेरेंट करिए
किसने क्या पैसा दिया कहा दिया कैसे दिया
अब इनसे अगर यह गलत है जैसा कि सुप्रीम
कोर्ट कहता है तो इसका नेक्स्ट पार्ट यह

है कि इसको वापस कर सारी जगह से पैसा वापस
लिया जाता है आपके पिताजी के खेत खेत आपको
थ खेत बेज के थोड़ी दिया गया मैं अभी ना
ही कह रहा हूं इसके बाद कुछ कर देंगे

बिल्कुल ठीक बात है ी पवन खेड़ा जी का भी
एक बयान आया है वो सुनते हैं आज बहुत
महत्त्वपूर्ण
दिन है एक बहुत महत्त्वपूर्ण

जजमेंट आई है माननीय सर्वोच्च न्यायालय
द्वारा जो यह दर्शाती है कि जब भी अंधेरा
बहुत गहरा हो जाता है उम्मीद की एक किरण
कहीं ना कहीं से जरूर आती है और पूरे आंगन
को रोशन कर देती

आज माननीय सर्वोच्च न्यायालय से उम्मीद की
वह किरण हम सबको दिखाई दे रही जब से यह
इलेक्टोरल बंड
स्कीम 2017 में लाई गई थी उस वक्त वित्त

मंत्री माननीय अरुण जेटली जी ने इसका बहुत
बौद्ध करण करने की कोशिश की ही ट्राइड टू
इंटेलेक्चुलाइजेशन लट एंड जस्टिफाई इट
लेकिन हमने तब से उसका विरोध पुरजोर विरोध
हर मंच से बार-बार इस मंच से तो कई बार

करते रहे हमारी क्या आपत्तियां थी हमारी
आपत्तियां बहुत स्पष्ट थी कि यह अपारदर्शी
है इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा इससे
काला धन सफेद हो जाएगा इससे जो रूलिंग
पार्टी है जो सत्तारूढ दल है सारा लाभ

उसको मिलेगा और एक ऐसा अनकहा अनदेखा
रिश्ता स्थापित हो जाएगा सत्तारूढ़ दल का
और कंपनियों का जो कंपनियां इन इलेक्टोरल
बंड्स को खरीदेगी उनको क्या लाभ दिया

जाएगा यह तमाम सवाल हम इस मंच से बार-बार
उठाते
रहे सवाल जायज थे चिंता जायज थी क्योंकि
किस कंपनी ने किस पार्टी को कितना पैसा

दिया और क्यों दिया उसके अवज में उसको
क्या
मिला यह जानने का अधिकार इस देश के एक एक
वोटर को है एक एक पत्रकार को है एक एक
व्यक्ति को है भले वह किस पार्टी को वोट

देता है नहीं देता उससे कोई फर्क नहीं
पड़ता और उस अधिकार की रक्षा के लिए
कांग्रेस पार्टी तत्पर है इकलौती पार्टी
जो 2017 से लेकर आज तक लगातार इस मुद्दे
पर बहुत प्रबल आवाज में बोलती आई

है बिल्कुल ठीक बात है ये कह ही रहे थे
पवन खेड़ा बात भी सही है लेकिन तब भी एक
अच्छी शुरुआत मैं मानता हूं इसको एक पहर
आई बहुत-बहुत शुक्रिया आनंद जी मयूर जानी
जी अजय जी धनज जी अरुण जी आपने समय दिया
थैंक

यू तो आप सुन रहे थे सुप्रीम कोर्ट ने एक
ऐतिहासिक फैसला दिया है कहा है कि
इलेक्ट्रॉन बंड तत्काल बंद हो जनता को
जानने का अधिकार है कि पैसा पॉलिटिकल

पार्ट को किसने दिया ठीक बात है मेरे और
आपके जरा जरा से पैसे पर इनकम टैक्स पूछता
है

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