Supreme Court ने चुनावी बॉन्ड योजना को कहा असंवैधानिक, क्या है Electoral Bond? | - instathreads

Supreme Court ने चुनावी बॉन्ड योजना को कहा असंवैधानिक, क्या है Electoral Bond? |

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना की
वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर
गुरुवार को अपना फैसला सुना दिया सुप्रीम
कोर्ट ने चुनावी बंड योजना को असंवैधानिक

करार देते हुए इस पर रोक लगा दी है सीजेआई
ने एक मत से फैसला देते हुए कहा कि एसबीआई
को 12 अप्रैल 2019 से जानकारी सार्वजनिक
करनी होगी एसबीआई को यह जानकारी ईसी को
देनी होगी और चुनाव आयोग इस जानकारी को

साझा करेगा बता दें कि पिछले साल सुप्रीम
कोर्ट के पास कई याचिकाएं पहुंची जिसमें
चुनावी ब योजना की वैधता को चुनौती दी गई

थी इसी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला
सुनाया है सवाल क्या है चुनावी बॉन्ड
चुनावी बंड प्रणाली को साल 2017 में एक
वित्त विधेयक के माध्यम से पेश किया गया
था जिसे साल 2018 में लागू किया गया यह

दाता की गुमनामी बनाए रखते हुए पंजीकृत
राजनीतिक दलों को दान देने के लिए
व्यक्तियों और संस्थाओं हेतु एक साधन के
रूप में काम करता है केवल वे राजनीतिक दल
जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा
29a के तहत पंजीकृत है जिन्होंने पिछले आम

चुनाव में लोकसभा या विधानसभा के लिए डाले
गए वोटों में से कम से कम 1 पर वोट हासिल
किए हो वही चुनावी बॉन्ड हासिल करने के
पात्र हैं सवाल क्यों इसका मामला सुप्रीम
कोर्ट में गया पहले चुनावी बॉन्ड के जरिए

सियासी दलों तक जो धन आता था वह उसे गुप्त
रख सकते थे लेकिन पिछले दिनों इस पर विवाद
हुआ मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा इसके
बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया अब सुप्रीम

कोर्ट ने कहा है कि सभी राज नीतिक दलों को
इलेक्शन कमीशन के समक्ष इलेक्टोरल बंड्स
की जानकारी देनी होगी इसके साथ दलों को
बैंक डिटेल्स भी देनी होंगी अदालत ने कहा
कि राजनीतिक दल आयोग को एक सील बंद लिफाफे
में सारी जानकारी देंगे लेकिन यह मामला

केवल यही नहीं थमा बल्कि इस पूरे चुनावी
बॉन्ड स्कीम की वैधता को ही चुनौती दी गई
सवाल क्या इसकी कोई जानकारी किसी को दी
जाती है नहीं इसमें यही आपत्ति थी कि

चुनावी बंड के जरिए कौन पैसा जमा कर रहा
है कितना पैसा जमा कर रहा रहा है और किस
पार्टी के लिए जमा कर रहा है यह सूचना
जाहिर होती ही नहीं थी इस पर आरटीआई लगाने
पर यह कहा जाता था कि यह सूचना नागरिकों

को सार्वजनिक नहीं की जा सकती कई सियासी
दल भी इसकी पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठा
रहे थे सवाल यह कैसे जारी होते हैं क्या
इनका कोई तय समय है साल 2018 में इसके
शुरू होने के बाद हर साल करीब दो बार इसको

जारी किया जाता है अक्टूबर महीने की शुरू
में 11वें इलेक्टोरल बॉन्ड यानी चुनावी
बॉन्ड जारी किए गए शुरू में उन्हें लेकर
जहां ठंडा रुख दिखा था वहीं इस साल
चुनावों से पहले तक उनकी अच्छी खरीद हुई

सवाल इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए अब तक कितना
धन जुटाया जा चुका है इलेक्टोरल बॉन्ड के
जरिए अब तक
5851 करोड़ जुटाए जा चुके हैं पिछले साल

मई माह में 822 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड
खरीदे गए जनवरी से लेकर मई 2019 तक भारतीय
स्टेट बैंक की विभिन्न शाखाओं के जरिए ₹
794 के बॉन्ड खरीदे गए जबकि इससे पहले साल
2018 में 000 की बॉन्ड खरीदी हुई थी सवाल

क्यों बनाया गया था चुनावी बॉन्ड चुनावी
बॉन्ड को केंद्र सरकार ने चुनाव में
राजनीतिक दलों के चंदे का ब्यौरा रखने के
लिए बनाया था केंद्र की तरफ से कहा गया था
कि यह चंदे की पारदर्शिता के लिए है

चुनावी बंड के तहत हर राजनीतिक दल को दी
गई जाने वाली पाई पाई का हिसाब बैंक से
होगा सवाल कहां मिलते हैं यह बॉन्ड चुनावी
बॉन्ड योजना को अंग्रेजी में इलेक्टोरल

बॉन्ड स्कीम नाम से जाना जाता है है यह
भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से
मिलते हैं जिन 29 शाखाओं से बॉन्ड्स खरीदे
जा सकते हैं वह नई दिल्ली गांधीनगर

चंडीगढ़ बेंगलुरु हैदराबाद भुवनेश्वर
भोपाल मुंबई जयपुर लखनऊ चेन्नई कोलकाता और
गुहावती समेत कई शहरों में है सवाल कौन
खरीद सकता है और किस कीमत में आते हैं इसे
कोई भी खरीद सकता है इन बंड्स को भारत का
कोई भी नागरिक कंपनी या संस्था चुनावी
चंदे के लिए खरीद सकती है यह बॉन्ड 1000

100001 लाख और 1 करोड़ रप तक के हो सकते
हैं देश का कोई भी नागरिक किसी भी
राजनीतिक पार्टी को चंदा देना चाहता है तो
उसे एसबीआई से चुनावी बॉन्ड खरीदने होंगे
वो बॉन्ड खरीद कर किसी भी पार्टी को दे

सकेगा सवाल इसे कौन जारी करता है सरकार की
ओर से आरबीआई यह बॉन्ड्स जारी करता है दान
देने वाला बैंक से बॉन्ड खरीद कर किसी भी
पार्टी को दे सकता है फिर राजनीतिक पार्टी
अपने खाते में बॉन्ड भुना सकेगी बॉन्ड से

पता नहीं चलेगा कि चंदा किसने दिया ये
बॉन्ड जब बैंक जारी करता है तो इसको लेने
की अवधि 15 दिनों की होती है सवाल क्या
चुनावी बॉन्ड खरीदने वाले को कोई फायदा

होता है चुनावी बॉन्ड खरीद कर किसी पार्टी
को देने से बॉन्ड खरीदने वाले को कोई
फायदा नहीं होगा ना ही इस पैसे का कोई
रिटर्न है यह अमाउंट पॉलिटिकल पार्टियों
को दिए जाने वाले दान की तरह है इससे एटी

जीजी एटी जीजीबी के तहत इनकम टैक्स में
छूट मिलती है सवाल क्या इस बंड का पैसा
खरीदने वाले को वापस मिलता है चुनावी बंड
एक तरह की रसीद होती है इसमें चंदा देने

आप जिस पार्टी को चंदा देना चाहते हैं
उसका नाम लिखते हैं इस बॉन्ड का पैसा
संबंधित राजनीतिक दल को मिलता है इस बॉन्ड
पर कोई रिटर्न नहीं मिलता अलबत्ता आप इस
बॉन्ड को बैंक को वापस कर सकते हैं और
अपना पैसा वापस ले सकते हैं लेकिन उसकी एक

अवधि तय होती है सवाल इसमें चुनौतियां
क्या हैं चुनावी बॉन्ड राजनीतिक दलों को
दी जाने वाली दान राशि है जो दान दाताओं
और प्राप्त कर्ताओं की पहचान को गुमना
रखती है व जानने के अधिकार से समझौता कर
सकते हैं जो संविधान के अनुच्छेद 19 के

अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के
अधिकार का हिस्सा है दानदाता के डाटा तक
सरकारी पहुंच के चलते गुमनामी से समझौता
किया जा सकता है इसका तात्पर्य यह है कि
सत्ता में मौजूद सरकार इस जानकारी का लाभ

उठा सकती है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष
चुनावों को बाधित कर सकता है घोर पूंजीवाद
और काले धन के उपयोग का खतरा घोर पूंजीवाद
एक आर्थिक प्रणाली है जो व्यापारियों और

सरकारी अधिकारियों के बीच घनिष्ठ
पारस्परिक रूप से लाभप्रद संबंधों की ओर
बढ़ाती है कॉर्पोरेट संस्थाओं के लिए
पारदर्शिता और दान सीमा के संबंध में कई

 

खामियां है कंपनी अधिनियम 2013 के अनुसार
कोई कंपनी तभी राजनीतिक योगदान दे सकती है
जब उसका पिछले तीन वित्तीय वर्षों का
शुद्ध औसत लाभ 7.5 हो लेकिन यह धारा हटा
दी गई है जिससे शेल कंपनियों के जरिए

राजनीतिक फंडिंग में काले धन के योगदान को
लेकर चिंता बढ़ गई
है सवाल अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले
में ने क्या कहा है स्टेट बैंक चुनावी बंड
बेचना बंद करें यह चुनावी बंड योजना बंद
की जाती है इसकी पूरी जानकारी वर्ष 2019

स्टेट बैंक को अपनी वेबसाइट पर जाहिर करनी
होगी यह वोटर का अधिकार है कि वह जाने कि
चुनावी बॉन्ड में कहां से पैसा आया और
किसने लगाया इसकी जानकारी नहीं देना सूचना
अधिकारों का भी उल्लंघन है इस टॉपिक पर
आपका क्या कहना है

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