Supreme Court ने Electoral Bonds पर ban लगा Modi Sarkar का बैंड बजा दिया! - instathreads

Supreme Court ने Electoral Bonds पर ban लगा Modi Sarkar का बैंड बजा दिया!

नमस्कार मैं हूं प्रवीण गौतम सत्ताधारी
पार्टी और उद्योगपतियों के गठजोड़ को जोर
का झटका देते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने
इलेक्टोरल बड योजना पर रोक लगा दी जिसके
बाद सुब्रमण्यम स्वामी जैसे नेता पीएम

मोदी का इस्तीफा मांग रहे हैं चीफ जस्टिस
डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच
जजों की बेंच ने क्या फैसला सुनाया यह आगे
आपको बताएंगे पहले बताते हैं कि इलेक्टोरल

बड योजना थी क्या जिसका सबसे ज्यादा फायदा
बीजेपी को मिला है इस योजना में ऐसे क्या
प्रावधान
है इलेक्टोरल बंड योजना मोदी सरकार 2018
में लेकर आई इस योजना के तहत कोई भी

व्यक्ति या कंपनी 000 से 1 करोड़ तक का
बंड एसबीआई की ब्रांच से खरीद सकता है
इलेक्टोरल बॉन्ड में पेई की डिटेल नहीं
होती है यानी किसने पैसा दिया इसकी

जानकारी सार्वजनिक नहीं होती है बॉन्ड का
वैलिडिटी पीरियड 15 दिनों का होता है जिसे
राजनीतिक दल 15 दिन के भीतर भुना सकते हैं
केवल उन राजनीतिक दलों को इससे फंडिंग मिल

सकती है जिन्हें पिछले लोकसभा या विधानसभा
चुनाव में कम से कम 1 फीसद वोट मिला हो तो
इस तरह के प्रावधान इस योजना में किए गए
थे अब तक 6 साल में 11000 करोड़ से ज्यादा

का राजनीतिक चंदा इलेक्टरल बंड योजना के
माध्यम से तमाम राजनीतिक दलों को मिला
लेकिन सबसे ज्यादा फायदा मिला बीजेपी को
50 फी से भी ज्यादा अकेले बीजेपी ने इस

योजना के माध्यम से चंदा जुटाया 6500
करोड़ से ज्यादा का चंदा अकेले बीजेपी को
मिला
जबकि कांग्रेस को करीब 1100 करोड़ से कुछ
ज्यादा चंदा मिला है तो कितना बड़ा अंतर

है पहले नंबर की पार्टी और दूसरे नंबर की
पार्टी में तो सुप्रीम कोर्ट ने अब इस
योजना पर रोक लगा दी है विपक्षी दल इसका
विरोध कर रहे थे और यह आरोप लगा रहे थे कि
सत्ता और उद्योगपतियों का गठजोड़ चल रहा

है इस योजना के माध्यम से और विपक्ष को
कमजोर किया जा रहा है सुप्रीम कोर्ट ने अब
इस पर क्या फैसला सुनाया है और क्या कहा
है सुप्रीम कोर्ट ने ने चुनावी बंड योजना

को असंवैधानिक बताते हुए रोक लगाई है और
कहा है कि यह सूचना के अधिकार और
अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है
क्योंकि आम आदमी को यह जानकारी नहीं होती

कि राजनीतिक दलों को चंदा कौन दे रहा है
और इसमें यह भी सुप्रीम कोर्ट ने एक
टिप्पणी की थी पिछली सुनवाई में कि यह
करप्शन को भी बढ़ावा देता है सरकार को तो

पता होता है कि चंदा कहां से आ रहा है
इसमें सत्ता और उद्योगपति मिलकर एक गठजोड़
चला सकते हैं जब आप किसी से मोटा चंदा
लेते हैं तो फिर आप जो कांट्रैक्ट वगैरह

देते हैं उसमें पारदर्शिता नहीं रह पाती
है आगे सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा सुप्रीम
कोर्ट ने आदेश दिया है एसबीआई को कि
इलेक्शन कमीशन को पूरी जानकारी आपको तीन

हफ्ते के अंदर देनी होगी कि किसने किसको
कितना चंदा दिया है और इलेक्शन कमीशन को
यह पूरी जानकारी वेबसाइट पर डालनी होगी
यानी देश की जनता को अब पता चल जाएगा कि

पिछले 6 साल में किस उद्योगपति ने किस
पार्टी को कितना चंदा दिया सुप्रीम कोर्ट
ने कहा कि यह आरटीआई के तहत भारत के
नागरिकों को जाने का अधिकार है तो उसके
बाद विपक्षी दली से लेकर क्या कहते हैं

राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी की
भ्रष्ट नीतियों का एक और सबूत आपके सामने
है भाजपा ने इलेक्टोरल बड को रिश्वत और
कमीशन का माध्यम बना लिया था आज इस बात पर

मोहर लग गई है तो यह राहुल गांधी आरोप लगा
रहे हैं कि उद्योगपतियों से रिश्वत का
माध्यम बना लिया था इसके बाद प्रियंका
चतुर्वेदी क्या कहती हैं प्रियंका
चतुर्वेदी ने एक आर्टिकल शेयर किया है द

हिंदू का इसमें बताया गया है कि जितने भी
हमारे देश में कॉर्पोरेट डोनेशन है उसका
90 फीस हिस्सा 20222 में बीजेपी को मिला
है आप सोचकर देखिए कि एक पार्टी को देश के
बड़े उद्योगपति 90 प्र चंदा देते हैं और

सिर्फ 10 प्र चंदा विपक्षी दलों को मिला
है तो इसकी वजह से एक पार्टी लगातार मजबूत
हो रही थी यह प्रियंका चतुर्वेद का कहना
है और सुब्रमण्यम स्वामी क्या कहते हैं

सुब्रमण्यम स्वामी कहते हैं कि इसके बाद
पीएम मोदी को इस्तीफा दे देना चाहिए
क्योंकि यह जो क्रेजी आइडिया था जो कि एक
बड़ा स्कैंडल है और इसकी वजह से बीजेपी को

सबसे ज्यादा फायदा हुआ और सुब्रमण्यम
स्वामी कहते हैं कि बीजेपी ने दावा किया
था कि यह करप्शन से लड़ने की लड़ाई है
इसमें आगे सुब्रमण्यम स्वामी कहते हैं कि

पार्टी की साख बचाने के लिए अब पीएम मोदी
को रिजा कर देना चाहिए यह सुब्रमण्य
स्वामी का कहना है कि यह पीएम मोदी का
क्रेजी आइडिया था दावा था कि इसे
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई मजबूत होगी

लेकिन सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह तो
आरटीआई के अधिकार का उल्लंघन है और इससे
रिश्वत को बढ़ावा मिलता है तो इसीलिए पीएम
मोदी को इस्तीफा दे देना चाहिए वहीं
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पब्लिक ने मोदी

सरकार को ट्रोल कर दिया और कहा जो ईडी
सीबीआई की रेड मारकर दूसरों की 510 करोड़
की फंडिंग पकड़ते थे आज सुप्रीम कोर्ट ने
रेड मारकर उनकी 5200 करोड़ की फंडिंग पकड़

ली मेरी दादी मुझे छिपकर पैसे देती थी तो
मैं खूब चॉकलेट चिप्स खाता था और मम्मी
डैडी और भाई यह सोचते कि फंडिंग कहां से आ
रही है फिर एक दिन मम्मी ने सुप्रीम कोर्ट

बनकर दादी से कहा जो भी दीजिए सबके सामने
दीजिए बस इतना ही है इलेक्टोरल बंड केस
इलेक्टोरल बंड वैसी ही योजना थी जैसे जब

आप किसी रिश्तेदारी में जाते हैं और वहां
से आने पर आपको आपकी मामी नानी या कोई और
मु ठी बंद करके पैसे देती हैं और आप इसकी
क्या जरूरत कहकर भी सीधे जेब में रख लेते

थे अब राजनीतिक दल उन पैसों को ऐसे नहीं
रख पाएंगे उन्हें सारी डिटेल देनी होगी कि
यह पैसा कहां से आया है और किसने दिया है
अब तक जो भी पैसा राजनीतिक दलों ने बंद

मुट्ठी से लिया है अब एसबीआई उसकी सारी
डिटेल चुनाव आयोग को देगा और चुनाव आयोग
उसे अपनी वेबसाइट पर पब्लिश करेगा सीजीआई
डी वाई चंद्रचूर जी आज भी लोकतंत्र की
रखवाली कर रहे हैं देश को उनका धन्यवाद

करना चाहिए
हालांकि दोस्तों बीजेपी इस योजना का
लगातार बचाव करती आई है जबकि सुप्रीम
कोर्ट के अलावा चुनाव आयोग और आरबीआई ने
भी इलेक्टोरल बंड योजना का विरोध किया था
और कहा था कि इससे पारदर्शिता कम होगी

हालांकि बीजेपी का कहना था इससे
पारदर्शिता आएगी और उद्योगपतियों में एक
सुरक्षा का भाव आएगा बीजेपी का तर्क यह था
सरकार का तर्क यह था कि जब कोई उद्योगपति
किसी राजनीतिक दल को चंदा देता है मान

लीजिए किसी विपक्षी दल को चंदा दिया तो
फिर सरकार उसे बैर निकाल सकती है ऐसे में
इलेक्टोरल बड के माध्यम से अगर कोई
उद्योगपति चंदा देता है तो उसकी पहचान

छुपी रहेगी और सरकार को पता नहीं चलेगा
लेकिन पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने
इसे बचकाना बताते हुए कहा कि सरकार को तो
सब पता चल जाता है तमाम जांच एजेंसियां
सरकार के अंतर्गत आती हैं चंदा देने वाले

को भी अपनी आईटीआर में यह बताना होता है
कि कितना चंदा दिया तो सरकार को जब यह
मालूम होगा कि फला उद्योगपति ने इतना
राजनीतिक चंदा दिया है और मान लीजिए

सत्ताधारी पार्टी तक वह चंदा नहीं पहुंचता
है तो सरकार को यह भी पता चल जाएगा कि
चंदा विपक्षी दल को दिया गया है तो राज्य
सरकारें तो यह पता नहीं कर सकती क्योंकि

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट मोदी सरकार के
अंतर्गत आता है लेकिन मोदी सरकार तो सब
पता कर सकती है तो इससे सिर्फ सत्ताधारी
पार्टी को ज्यादा फायदा हो रहा था सूचनाएं

सिर्फ सत्ताधारी पार्टी तक एक्सेस कर पा
रही थी इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी
कहा कि जब आम आदमी को सूचना का अधिकार
हासिल है तो राजनीतिक दलों की सूचनाएं भी

पारदर्शी होनी चाहिए आम आदमी को पता होना
चाहिए कि किस राजनीतिक दल को कहां से
कितना चंदा मिला है अब देखना यह दिलचस्प
रहेगा कि तीन हफ्ते के अंदर सुप्रीम कोर्ट
के आदेश पर चुनाव आयोग अपनी वेबसाइट पर जब

यह आंकड़े डालेगा कि किस पार्टी को किस
उद्योगपति ने कितना चंदा दिया है तो जनता
विश्लेषण कर पाएगी कि बदले में सरकार ने
उन उद्योगपतियों को क्या फायदा दिया है

यानी सब कुछ प दर्शी हो जाएगा आप सुप्रीम
कोर्ट के ऐसे फैसले को लेकर क्या सोचते
हैं जहां विपक्षी दल इसका स्वागत कर रहे
हैं देखना यह होगा कि बीजेपी किस तरह का
बयान जारी करती है कमेंट बॉक्स में अपनी

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