Supreme Court on Electoral Bond - How Will it impact democracy? | BJP | PM MODI | OPPOSITION PARTIES - instathreads

Supreme Court on Electoral Bond – How Will it impact democracy? | BJP | PM MODI | OPPOSITION PARTIES

मोदी सरकार को अब तक का सबसे बड़ा झटका
दिया है आप शायद ये सुनकर हैरान होंगे
क्योंकि हम मोदी सरकार के बारे में बातचीत
कर रहे हैं और बात कर रहे हैं इलेक्टोरल

बंड को लेकर जी हां वो इलेक्टोरल बॉन्ड जो
2017 में मोदी सरकार ने सत्ता में आने के
बाद कानून बनाया था और यह कहने की कोशिश
की थी कि दरअसल इलेक्टोरल बंड की जो स्कीम

है वो चुनावी प्रक्रिया में जो काला धन
आता है उस पर रोक लगाएगी इससे चुनावी
प्रक्रिया में जो धन देने की जो प्रक्रिया
है उसमें ट्रांसपेरेंसी रहेगी और लोगों को

अ जो है वह किसी गफलत में नहीं रहना
पड़ेगा लेकिन इलेक्टोरल बॉन्ड पहले दिन से
ही भारी विवाद का सबब बन गया था क्योंकि

यह आरोप लगाया गया था कि दरअसल यह जो तमाम
बड़े-बड़े कॉरपोरेशंस हैं तमाम बड़े-बड़े
जो उद्योगपति हैं वो राजनीतिक दलों को तो
पैसा देंगे बॉन्ड खरीद के स्टेट बैंक ऑफ
इंडिया से बन खरीद के लेकिन जनता को यह

पता नहीं चल पाएगा कि दरअसल फंड किस कंपनी
ने किस पार्टी को दिया है और यही सबसे
बड़ा मुद्दा था और इसी मुद्दे को लेकर
सुप्रीम कोर्ट में इसको चुनौती दी गई और

चुनौती देने पर अब सुप्रीम कोर्ट की पांच
जजेस की खंडपीठ
ने बहु बहुमत से नहीं बल्कि सर्वा मनिति
से आम राय से यूनानिमिटी
स्कीम मोदी सरकार लेकर आई थी यह स्कीम

असंवैधानिक है गलत है लिहाजा इसको फौरन
रद्द किया जाए जी हां फरन रद्द किया जाए
जो लोग चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखते हैं
जो लगातार खबरों पर नजर डालते हैं उनको इस
बात का अंदाजा है कि बहुत बड़ा हिस्सा दो

तिहाई से ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड सिर्फ
भारतीय जनता पार्टी को मिल रहे थे और जो
दूसरी पॉलिटिकल पार्टीज थी उनको पीनट्स या
बहुत छोटे-छोटे हिस्से मिल रहे थे जिससे

यह भी आरोप लग रहा था कि दरअसल जो तमाम
बड़े-बड़े उद्योगपति हैं या कॉरपोरेशंस है
यह सरकार से फायदे को ले के लिए सरकार से
फायदा लेने के लिए सिर्फ सरकार सरकारी

पार्टी यानी बीजेपी को ही चंदा दे रहे थे
इलेक्टोरल बंड के माध्यम से तो इसी प
करेंगे चर्चा और बातचीत लेकिन सबसे पहले
आपको बता देते हैं कि दरअसल सुप्रीम कोर्ट

ने चुनावी बॉन्ड या इलेक्टोरल बॉन्ड को
लेकर क्या आपत्ति की है और क्या उनकी अपनी
अ अपनी राय है
सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि
इलेक्टोरल बॉन्ड की स्कीम असंवैधानिक है

उन्होंने यह भी कहा है कि आ आरटीआई कानून
का उल्लंघन है यानी जनता को यह जानने का
हक
है कि किस पार्टी को किस उद्योगपति ने
कितना पैसा दिया हम आपको बता दें कि पहले

जो स्कीम थी वो दूसरी तरीके की थी 200 हज
से ज्यादा अगर किसी पॉलिटिकल पार्टी को
कोई आदमी देता या कंपनी देती थी तो उसका
नाम देना जरूरी था यानी 20000 से ज्यादा

का डोनेशन या फंड अगर कोई किसी को देता था
तो उसके बारे में लोगों को जानकारी देना
जरूरी था ले इलेक्टोरल बंड के आने के बाद
यह प्रक्रिया पूरी तरीके से रुक गई इसीलिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार के पक्ष
में कुई प्रोको जैसी स्थिति पता चलती है
और कालाधन रोकने के और भी विकल्प है सिर्फ
इस विकल्प प चर्चा क्यों की जा रही है और

क्यों कहा जा रहा है इसके साथ-साथ सुप्रीम
कोर्ट ने ये भी स्पष्ट तौर पर कहा है कि
एसबीआई यानी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जो
इलेक्टोरल बॉन्ड इशू करती थी वो इसको
बेचना बंद कर दे और 12 अप्रैल 2019 से अब

तक बेचे गए बड का बरा एसबीआई
दे इस पूरे मसले पर इस महत्त्वपूर्ण सवाल
पर हम बातचीत करेंगे हमारे साथ है देश के
बहुत ही वरिष्ठ पत्रकार बहुत ही वरिष्ठ

संपादक और भारत में इतना अनुभवी पत्रकार
शायद ही कोई होगा श्रवण जी हमारे साथ
मौजूद है श जी आपका बहुत बहुत स्वागत है
हमारे इस विशेष कार्यक्रम में सुप्रीम

कोर्ट की इस इस फैसले पर आपकी पहली
टिप्पणी क्या
है देखिए ये मैं मानता हूं कि जो लड़ाई इस
समय चल रही है देश में लोकतंत्र की

स्थापना
की यह
उसमें न्यायपालिका की तरफ से सबसे बड़ी
आहुति
है जिसको अंग्रेजी में कह सकते हैं कि द
बिगेस्ट कंट्रीब्यूशन द जुडिशरी है एवर
मेड ड्यूरिंग द लास्ट 10

इयर्स यह 204 के चुनाव के
पहले चुनावी भ्रष्टाचार की रीड की हड्डी
पर
प्रहार जी आपको याद होगा दर्शकों को भी
याद है

कि 2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव
में जीत दर्ज कराने के लिए 2016 के नवंबर
में नोटबंदी की और
उसने समाजवादी पार्टी और बीएसपी की पूरी
की

पूरी ताकत को खत्म कर दिया
था लड़ नहीं पाए
थे यह जो किया है सुप्रीम कोर्ट
ने अद्भुत काम अद्भुत काम इस माने में
किया है जो प्रशांत भूषण ने कहा है कि देश
में इलेक्टोरल डेमोक्रेसी की स्थापना

रिस्टोर
किया सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों बिलकिस
बानों के मामले में बहुत ही जबरदस्त
फैसला और लोगों को कुछ उम्मीदें बधाई थी

जी लोगों ने कहा था
कि ये टोकन जेस्चर भी हो सकता है क्योंकि
बड़े फैसले आना बाकी

है इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है आशुतोष जी
जी पांच जजों की बेंच ने यूनानिमिटी

आपने भी बताया है कि य लेटिव ऑफ राइट टू
इंफॉर्मेशन
जी अब आप बताइए उसके परिणाम क्या
होंगे दो चीजों
के एसबीआई को कहा गया है कि वह तुरंत

प्रभाव से बंद
करे दूसरा यह कहा गया है कि सारी डिटेल्स
एसबीआई 6 मार्च से
तक अप्रैल 19 से 19 2019 से लगाकर इस 6
मार्च तक की पूरी
डिटेल इलेक्शन कमीशन को उपलब्ध

करा और इलेक्शन कमीशन उसको पब्लिक
करे आप
सोचिए यह सबसे बड़ा एक्सपोजर
है पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा एक्सपोजर
होगा जी कि इस हुकूमत को कौन ककन

लोग इस हुकूमत के लिए कौन ककन लोग रक्तदान
कर
रहे ब्लड
ट्रांसफ्यूजन और उसमें पैसा कहां से आरहा
है सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनलिमिटेड
फाइनेंसिंग
आर्बिट

आप क्या समझते हैं कि
यह आपको कोई नजर आया कोई एक भी
[संगीत]
बयान सरकार की तरफ
से भारतीय जनता पार्टी की तरफ से किय
स्वागत किया

हो यह बहुत ही अद्भुत काम
हुआ देश की जनता को पता पड़ेगा कि भारतीय
जनता पार्टी को इतना चंदा कहां से मिलता
है और सारे दूसरे पॉलिटिकल पार्टी को जो
कुल मिलाकर चंदा मिलता है वह भी भारतीय

जनता पार्टी को अकेले को मिलने वाले चंदे
से एक तिहाई से कम क्यों होता है जी और
ऐसा क्यों नहीं हुआ अतीत में कभी नहीं
हुआ यह जो मैं मानता हूं कि यह इसकी इस इस
नतीजे की

आवाज दूर तक सुनाई देगी क्योंकि यह पूरी
बेंच थी कांस्टिट्यूशन बेंच
थी इसमें कोई ऐसा कारण नहीं है कि वो
और ये जो सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला रोक
के रखा

था नवंबर के बाद से रिजर्व किया हुआ
था तो इसलिए अब इसमें सरकार के लिए कुछ
बचता नहीं है सवा सवा इसके की वो स्वागत
करें बिना विलंब किए वो जितना विलंब करेगी

सरकार या भारतीय जनता पार्टी सरकार का तो
कोई रोल है नहीं कांस्टीट्यूशनली ये चंदा
भारतीय जनता पार्टी को है इसलिए भारतीय
जनता पार्टी के जो नेता हैं उन लोगों

को तुरंत स्वागत करना चाहिए कहना चाहिए कि
ये बहुत डेमोक्रेसी के लिए बहुत अच्छा कदम
है वो जितनी देरी
करेंगे सुप्रीम कोर्ट की आलोचना
करेंगे उतना

लोगों के मन में शंकाएं
उत्पन्न जी य
जो ये जो इलेक्टोरल बंड की जो स्कीम थी
सरकार जब लेकर आ रही थी तो सरकार का य
कहना था कि दरअसल इससे जो ब्लैक मनी है
चुनावी प्रक्रिया में उस पर रोक लगेगी एक

तरीके की ट्रांसपेरेंसी आएगी क्या यह यह
कैमफ्लेज
था आप आप
सोचिए बहुत अच्छा सवाल है
आपका नोटबंदी करने के पीछे जो बुनियादी
तर्क दिया गया था वो क्या था हम नोटबंदी

के पीछे दिया गया था कि जो आतंकवादी घटनाए
हैं वो कम
होंगी काला
धन समाप्त होगा काला धन का प्रवाह विदेशों
से बंद हो
जाएगा और देश में गैर कानूनी गतिविधियां

रुक जाएंगे समाप्त हो
जाएंगे क्या हुआ उसमें हम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है अपने इस जो आज
ऐतिहासिक फैसला आया उस
में टेलिंग ब्लक मनी थ्रू इलेक्टरल बंड अन

जस्टिफाइड सुप्रीम कोर्ट ने कहा है
क्योंकि इस तरह के कोई
आंकड़े सरकार ने
अपने
में अपने सबमिशन में इलेक्टरल बंड्स के
जस्टिफिकेशन में सुप्रीम कोर्ट को अगर पेश
किए होते कि इलेक्टरल बंड्स के

जरिए इतना बड़ा इतना बड़ा काला धन जो है
वह हमने बाहर किया है असल में हुआ यह है
कि इलेक्टरल बांड की गोपनीयता के चलते
सारा काला धन सरकार को प्राप्त

हो यह जो जेटली साहब के जने
में आया था 2017 में बिल आया था 2018 से
यह लागू हुआ इलेक्टरल बंड का उसके पहले
200 हज से ऊपर जितनी भी राशि थी वह आपको
डिस्क्लोज करना

हो आज आप 20 करोड़ भी नहीं की भी जरूरत
नहीं और 2000 करोड़ भी आप
अगर किसी पार्टी को तो डिस्क्लोज करने की
जरूरत नहीं

है
आप चाहे तो देश के सारे चुनाव को खरीद
सकते हैं अगर ब अगर कायम है और आपको इतना
अ पैसा मिल रहा है तो देश का केवल एक
उद्योगपति ही पूरे देश के चुनाव में
फंडिंग कर सकता है इलेक्टरल बंड के
जरिए तो ये लोगों को इस बात की जानकारी
होना
चाहिए
कि यह हुआ क्या है आखिर ये ये जो साइलेंट
रिवोल्यूशन हुआ है देश
में इसके क्या परिणाम होने वाले
हैं और यह ब्लडलेस कु है सरकार के खिलाफ
जो

कटली इसको एजीक्यू किया है पांच जजों की
बेंच ने तो मैं ऐसा मानता हूं अ जी
कीय अब बात निकली है तो बहुत दूर तलक
जाएगी वाला मामला है

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