Uddhav Thackeray ने एक बयान से मचाई सनसनी, Maharashtra से दिल्ली तक हड़कंप ! - instathreads

Uddhav Thackeray ने एक बयान से मचाई सनसनी, Maharashtra से दिल्ली तक हड़कंप !

जय हिंद दर्शकों मैं हूं जितेंद्र दीक्षित
फर पीएम महाराष्ट्र में आपका स्वागत है
दोस्तों इस वक्त उद्धव ठाकरे का एक बयान
महाराष्ट्र की सियासत में चर्चा का केंद्र

बना हुआ है उद्धव ठाकरे ने कहा कि
प्रधानमंत्री मोदी ना हमारे दुश्मन है ना
कभी दुश्मन
थे दरअसल उद्धव ठाकरे इस वक्त चुनावी
मुहिम पर निकले हुए हैं उन्होंने अपनी

चुनावी मुहीम बीती एक तारीख को शुरू कर दी
और इस वक्त कोंकण के दौरे पर है जहां रोज
वे तमाम सभाएं ले रहे हैं रैलियां कर रहे
हैं और ऐसी ही एक सभा उन्होंने बीती शाम

सावंतवाड़ी में की और वहां पर उन्होंने जो
बयान दिया उस पर अब राजनीतिक गलियारों में
खूब चर्चा हो रही है और सवाल उठाए जा रहे
हैं कि क्या उद्धव ठाकरे अब बीजेपी के साथ

सुलह करना चाहते हैं और इसके पीछे क्या
कारण यह है कि हाल के वक्त में केंद्रीय
एजेंसियों ने शिवसेना के ऊपर यानी कि
ठाकरे सेना के ऊपर काफी दबिश बनाई है और
उद्धव और आदित्य ठाक के खास लोगों को

पूछताछ के लिए लगातार बुलाया है और कुछ को
तो गिरफ्तार भी कर लिया है तो क्या उसी
दबाव के चक्कर में अब उद्धव ठाकरे बीजेपी
से सुलह करना चाहते हैं उद्धव ठाकरे ने
आखिर में कहा क्या उसका एक अंश मैं आपको

पढ़कर सुनाता हूं मराठी में व भाषण है
इसके लिए मैं आपको उसका हिंदी अनुवाद सुना
रहा हूं मैं मोदी जी को बताना चाहता हूं
कि आप कभी हमारे दुश्मन ना थे और आज भी
नहीं है हम आपके साथ थे शिवसेना आपके साथ
थी हमने पिछली बार एक साथ चुनावी मुहिम

चलाई थी आप पीएम बन सके
क्योंकि विनायक रावत जैसे हमारे सांसद
चुने गए लेकिन आपने खुद को हमसे अलग कर
दिया हमारा हिंदुत्व और भगवा धज आज भी
खड़ा

है तो यह उनके भाषण का हिस्सा है जिस पर
की महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में
चर्चा हो रही है और कयास लगाए जा रहे हैं
कि उद्धव ठाकरे अब दबाव में है और चाहते
हैं कि बीजेपी के साथ में सुलय हो

जाए लेकिन इसी भाषण में अगर आगे का हिस्सा
आप देखेंगे तो वहां पर उद्धव बीजेपी के
प्रति और मोदी के प्रति आक्रमक रुख अपनाते
हुए भी दिखते हैं अगले हिस्से में आगे वो
कहते
हैं हर साल हम गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

देते हैं एक दूसरे को लेकिन सत्ता में
मौजूद राक्षस फिर एक बार अगर चुने गए तो
हम गणतंत्र दिवस कभी नहीं देख पाएंगे वो
शाही दिवस
होगा फिर उन्होंने मोदी को भी टारगेट किया

और कहा कि मोदी जब भी महाराष्ट्र आते हैं
यहां के प्रोजेक्ट लेकर गुजरात चले जाते
हैं सिंधुदुर्ग पंडी प्रोजेक्ट भी गुजरात
चला गया है फिर
व बीजेपी पर सांप्रदायिकता फैलाने का भी

आरोप लगाते हैं और कहते हैं मुस्लिम हमारे
साथ आ रहे हैं क्योंकि हमारा हिंदुत्व
सांप्रदायिक आग नहीं लगाता जबकि बीजेपी का
हिंदुत्व घर चलाने वाला
है माफ कीजिए तो कुछ इस तरह का बयान उद्धव

ठाकरे का आया जहां एक तरफ
वो यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि मोदी
हमारे दुश्मन नहीं है तो दूसरी तरफ उनको
धमकाया भी जा रहा है उद्धव ठाकरे ने एक
सभा में यह भी बात कही कि हमारे साथ आज जो

कुछ भी हो रहा है जब हमारी सत्ता आएगी तो
ब्याज समेत उसका बदला लिया
जाएगा तो यह बयान है जिसकी वजह से तरह-तरह
के आकलन लगाए जा रहे हैं कयास लगाए जा रहे
हैं वैसे अगर शिवसेना बीजेपी के रिश्तों

की बात करें और खास करके जब से उद्धव
ठाकरे ने शिवसेना की बागडोर संभाली है तो
यह रिश्ते नरम गरम रहे हैं और इनकी शुरुआत
हुई 2014 से 2014 तक शिवसेना बीजेपी का

गठबंधन एकदम पुख्ता था 80 के दशक में यह
गठबंधन बनाया गया था हिंदुत्व के मुद्दे
को लेकर प्रमोद महाजन ने इसमें अहम भूमिका
भाई थी लेकिन 2014 के बाद से लगातार दोनों
के बीच में कटुता देखी गई यहां तक कि 2014

का जो विधानसभा का चुनाव था वो इन दोनों
पार्टियों ने अलग-अलग लड़ा और उन चुनाव के
नतीजे आने पर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी
बनकर उभरी लेकिन उसके पास पर्याप्त बहुमत
नहीं था मैजिक फिगर नहीं था कि वह अपनी

सरकार बना सके ऐसे में देवेंद्र फडणवीस ने
मुख्यमंत्री पद की शपथ तो ले ली लेकिन
सवाल था मैजिक फिगर का तो शरद पवार मदद के
लिए आ गए देवेंद्र फडणवीस की और उनके
विधायकों ने एनसीपी के विधायकों ने मतदान

के दौरान एक्सटन किया जब विश्वास मत के
दौरान तो मैजिक फिगर घट गया और फिर
देवेंद्र फडणवीस की सत्ता आ
गई इसके कुछ वक्त बाद पोस्ट पोल अलायंस हो
गया फिर बाद में शिवसेना भी साथ में जुड़
गई बीजेपी के चुनाव तो हालांकि अलग-अलग

लड़ा था लेकिन सत्ता में फिर साथ में आ गए
और फिर कुछ मंत्रीपद शिवसेना को दे दिए गए
लेकिन शिवसेना इससे संतुष्ट नहीं थी और
शिवसेना की ओर से लगातार फटन पर आरोप लगाए
जा रहे थे कि बड़े ही ऑटोक्रेटिक तरीके से

सरकार चला रहे थे और अपनी मनमानी कर रहे
थे शिवसेना के कोटे से जो मंत्री है उनको
कुछ करने नहीं दिया जा रहा था उनके साथ
भेदभाव हो रहा था उनको दबाया जा रहा था और
कुछ मंत्रियों ने तो यह भी ऐलान कर दिया

कि हम अपना इस्तीफा जो है अपनी जेब में
रखकर घूमते हैं जब भी कहेंगे तो हम
इस्तीफा दे
देंगे सामना में आए दिन

बीजेपी को टारगेट करते हुए फटन विस को
टारगेट करते हुए मोदी को टारगेट करते हुए
संपादकीय लिखे जा रहे
थे और एक नई तरह की राजनीति महाराष्ट्र

में देखने मिल रही थी कि एक तरफ शिवसेना
सत्ता में भी थी और खुद अपनी ही सरकार के
घटक दल को क्रिटिसाइज भी कर रही थी उसके
खिलाफ आक्रमक तेवर भी अपना रही थी तीखे
तेवर भी दिखा रही

थी तो सारा कुछ चला
29 की फरवरी
तक 19 फरवरी में हुआ यह कि अमित शाह मुंबई
आए और उन्होंने उद्धव ठाकरे के घर जाकर
उनसे मुलाकात की और फिर दोनों पार्टियों

में सुलय हो गई और यह तय हुआ कि उस साल
होने वाले लोकसभा और विधानसभा के चुनाव
साथ में लड़े
जाएंगे तो ऐसा ही हुआ लोकसभा चुनाव साथ
में लड़े गए यहां तक कि उद्धव ठाकरे जब

वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी अपना
नामांकन भरने के लिए गए तो उद्धव ठाकरे
वहां पर उनकी हौसला अफाई के लिए पहुंचे
थे
फिर विधानसभा के चुनाव लड़े गए और

विधानसभा के चुनाव में सफलता भी मिली
बीजेपी शिवसेना गठबंधन
को लेकिन नतीजे आने के बाद क्या हुआ वह हम
सब जानते हैं मुख्यमंत्री पद को लेकर
दोनों ही पार्टियों के बीच में झगड़ा हो

गया उद्धव ठाकरे ने कहा कि अमित शाह ने
वादा किया था कि आधे कार्यकाल के लिए
मुख्यमंत्री पद शिवसेना को मिलेगा सब कुछ
5050 में होगा लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने
उद्धव ठाकरे को झूठा बताया और कहा कि ऐसा

कोई वादा नहीं किया गया
था इस बात को लेकर दोनों पार्टियों में
झगड़ा हो गया उद्धव ठाकरे बीजेपी से अलग
हो गए और मौके पर चौका मरा शरद पवार ने
उन्होंने प्रस्ताव रख दिया कि शिवसेना और

कांग्रेस को साथ में लेकर एनसीपी सरकार
बना सकती है इन तीन पार्टियों की सरकार बन
सकती है पहले कांग्रेस तैयार नहीं हो रही
थी लेकिन आखिर में सोनिया गांधी को शरद
पवार ने मना लिया और फिर इन तीनों

पार्टियों की सरकार बन गई और इस गठबंधन को
नाम दिया गया महाविकास
आघाड़ा विकास
आघाड़ा का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी जून
2022 में शिवसेना में बगावत हो गई एकनाथ

शिंदे ने अलग बुट बना लिया और जिसकी वजह
से ठाकरे सरकार गिर गई 2023 में फिर
एनसीपी में भी बगावत हो गई और एक धड़ अजीत
पवार के नेतृत्व में राज्य की महायुति में
आ गया जो बीजेपी शिवसेना की सरकार थी

तो तब से लगातार हम देख रहे हैं कि
शिवसेना ने बड़े ही आक्रमक तेवर अपनाए थे
बीजेपी के प्रति और मोदी के प्रति लेकिन
अब कोकण दौरे के दौरान जिस तरह का बयान
उद्धव ठाकरे की तरफ से आया है उससे लोग यह

मतलब निकाल रहे हैं कि कहीं ना कहीं उद्धव
इस बात की गुंजाइश पैदा कर रहे हैं कि
बीजेपी के साथ उनकी सुलह हो सकती है तो
खैर इस सिलसिले में आगे जो कुछ भी होता है
हमारी उस पर नजर बनी रहेगी आप भी अपनी नजर
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