UP Politics: Swami Prasad Maurya के बाद Pallavi Patel ने Akhilesh Yadav को बुरा फंसा दिया ! - instathreads

UP Politics: Swami Prasad Maurya के बाद Pallavi Patel ने Akhilesh Yadav को बुरा फंसा दिया !

लोकसभा चुनाव से पहले सपा की मुसीबतें कम
होने का नाम नहीं ले रही हैं एक तरफ जहां
मंगलवार को स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा के
महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था तो वहीं

अब पल्लवी पटेल ने भी सपा की मुसीबतें
बढ़ा दी सपा के लिए राज्यसभा का चुनाव
सिरदर्द बन गया है दरअसल पल्लवी पटेल सपा
के राज्यसभा प्रत्याशियों से नाराज है
उनका कहना है कि यह जय बच्चन और आलोक रंजन

पीडीए नहीं है उन्होंने कहा कि आप दलित
मुसलमान और पिछड़े का वोट लेते हैं तो
ईमानदारी से प्रतिनिधित्व दीजिए जमीनी तौर
पर पीड़ को दिखाना हो देखिए पलवी पटेल ने
और क्या कुछ कहा है कोई पिछड़ी महिला

क्यों नहीं हो सकती कोई दलित महिला क्यों
नहीं हो सकती कोई अल्प संख्या का मुसलमान
महिला क्यों नहीं हो सकती अगर आज आप देखें
तो मुसलमान समाज से ज्यादा कौन है जो 100%
प्रतिबद्धता के साथ समाजवादी पार्टी का

वोट बैंक बना हुआ है और बीजेपी के खिलाफ
उनका लगातार साथ दे रहा है तो क्या जब
मौका है उनको प्रतिनिधित्व नहीं मिलना
चाहिए देखिए हमने प्रयास किया था लेकिन यह

बात भी सच है कि माननीय अखिलेश यादव जी की
व्यस्तता बहुत ज्यादा है तो इस दौरान बहुत
क्लियर कट बात हमारी नहीं हो पाई लेकिन जब
यह नाम सामने आए तो मेरा यह मानना है कि

यह पीडीए नहीं है अगर हम पीडीए का नारा दे
रहे हैं तो पिछड़े दलित अल्पसंख्यक
मुसलमान समाज को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए
देखिए मैं पीडीए में जो पिछड़ा दलित
अल्पसंख्यक समाज है उसके उसको प्रतिनिधि

ना दिए जाने के खिलाफ और इस धोखाधड़ी के
खिलाफ हूं मैं इस धोखाधड़ी में शामिल नहीं
हूंग देखिए मिशन बहुत बड़ा है मिशन अगर
पीडीए है तो उसको आगे लाने के लिए हमें

दिखाना होगा जमीनी तौर पर हम सिर्फ उनको
वोट बैंक की तरह या उनको क्षेत्रों में
रगड़ने के लिए और लड़ने के लिए नहीं छोड़
सकते जब मौका है कि आप इन लोगों को आगे
बढ़ा सकते हैं तो सबसे पहले उनको

प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए सिर्फ बात इतनी
सी है देखिए मेरी ऐसी किसी से बात तो नहीं
हुई लेकिन मैं यह आवाहन जरूर करूंगी कि
चाहे कांग्रेस हो चाहे समाजवादी पार्टी हो

चाहे बसपा हो इन सभी संगठनों में जो भी
गैरत मंद लोग हैं और जो इस विचारधारा में
पीडीए में विश्वास रखते हैं उनको इस धोखे
के खिलाफ आकर के प्रतिकार करना चाहिए

देखिए अभी वर्तमान जो बात हम कर रहे हैं
वह नैतिकता और ईमानदारी की बात है और रही
बात गठबंधन की तो गठबंधन का नेतृत्व और जो
निर्णय होगा वह राजमाता कृष्णा पटेल जी ही
करेंगी देखिए हम विपक्ष में थे हैं और

रहेंगे हमारी लड़ाई मुद्दों पर है और बहुत
ही क्लियर कट है विचारधारा की हम लगातार ल
रहे और आगे भी लड़ेंगे देखिए स्वामी
प्रसाद मौर्या जी से लगातार मेरा संपर्क

बना हुआ है और सामाजिक न्याय की लड़ाई
लड़ने वाले एक बहुत ही कद्दावर नेता है व
और समाजवादी पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव
पद पर होते हुए भी पार्टी के लिए काम करते
हुए भी अगर पार्टी के ही लोग उनके ऊपर

अनर्गल बयानबाजी करेंगे यहां तक कि उनको
विक्षिप्त तक अगर बोल दिया गया है तो मैं
समझती हूं कि जो कद है उनका आहत होना उनका
स्वाभाविक है और हमें इस इस बात पर जो है
लगाम लगानी होगी स्टॉप लगाना होगा कि अगर

हमारे पार्टी का कोई ऑफिस बेरर है पद पर
है और उसका एक बहुत बड़ा कद है और समाज
में एक प्रतिष्ठा है तो उनके खिलाफ जो
अनर्गल बयानबाजी है उस परे स्टॉप क्यों
नहीं लग रहा है कौन करवा रहा है इसको तो

हमें क्या सिर्फ सवर्णों का ही वोट चाहिए
हम पीडीए का नारा दे रहे हैं और पिछड़े
दलित हमारे मुसलमान समाज के जो नेता हैं
उन परे टी कीी टिपड़ी हो रही है उस परे

कोई लगाम नहीं है यह होना चाहिए पार्टी
में देखिए समाजवादी पार्टी अहम में भी है
और वहम में भी है और उनको यह बहुत अच्छे
से समझना होगा कि वह खुद कह रहे हैं कि

पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक हमको वोट देता आया
है आपको वोट देता आया है इसीलिए आप उनकी
भागीदारी को किनारे करके उनको लूटने का
काम कर रहे हैं आप भागीदारी सुनिश्चित

करिए क्योंकि आप उनका वोट क्लेम कर रहे
हैं भागीदारी सुनिश्चित करेंगे तो आगे और
बड़े-बड़े मंजर आएंगे हम लोग देखेंगे
स्वतंत्र है वो एक्शन लेने के लिए मैं
एक्शन से नहीं डरती ईमान की राजनीति करती

हूं जो सही है वो कहूंगी पीडीए हमारा नारा
है और आपके पास तीन राज्यसभा सीटें हैं तो
कहां है पिछ पिछड़ा कहां है
मुसलमान यह होना चाहिए ना ऐसा थोड़ी ना

होगा कि पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक जो है वह
सड़कों पर मरे वहां गिट्टे आपका झंडा और
बैनर उठाए और जब आगे जाने की बात आए तो
प्रतिनिधि कोई और लेकर चला जाए और हम

बाध्य हो कि हम उनको वोट करें वैसे माना
जा रहा है कि सपा की तीन सीटों पर
उम्मीदवारों का जीतना तय है लेकिन अब जिस
तरह से पार्टी के भीतर से आवाजें उठ रही

उसने सपा के उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी
है तो वहीं दूसरी तरफ अगर भाजपा या किसी
स्वतंत्र उम्मीदवार ने खेल किया तो अखिलेश
यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं तो देखना
होगा क्या कुछ होता है तब तक के लिए बने
रहिए 4 पीएम के
साथ

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