Yogi का बदला, बदल गई Delhi | - instathreads

Yogi का बदला, बदल गई Delhi |

दोस्तों नमस्कार
उत्तर प्रदेश की राजनीति दिल्ली की
राजनीति से कुछ इस तरह से जुड़ी हुई है
जिसे कहते हैं कि लव एंड हेट रिलेशनशिप कि
मोहब्बत भी है और साथ-साथ नफरत भी है नफरत

शब्द थोड़ा सा ज्यादा तीखा हो जाएगा
क्योंकि यहां पर जरूरत ज्यादा है नफरत और
मोहब्बत के इस रिश्ते के बीच की जरूरत ऐसी
है कि इसने कई ऐसे फैसलों को अभी फिलहाल

टाल दिया है जिसके कयास बड़ी जोरदार तरीके
से लगाए जा रहे थे तमाम चर्चाएं हो रही थी
कि योगी आदित्यनाथ को दिल्ली बुलाया जा
सकता है यहां तक कि अमित शाह ने जो उत्तर

प्रदेश के नेताओं को बुलाकर बैठक की थी
उसमें योगी आदित्यनाथ को यह ऑफर भी दिया
गया था कि वह दिल्ली आ जाए लेकिन योगी
आदित्यनाथ कहां किसी की मानने वाले हैं

उन्होंने इस ऑफर को मना कर दिया था इसी के
चलते अभी तक वो उत्तर प्रदेश के
मुख्यमंत्री बने हुए हैं लेकिन कब तक ऐसा
होगा इस पर भी बड़ा सवाल है दरअसल जब यह
पूरी बातचीत हुई यह मीटिंग हुई और उसके

बाद उन्होंने इस ऑफर को मना कर दिया जैसा
कि पहले भी कई बार हो चुका है कि दिल्ली
के कई फरमान जारी हुए लेकिन उत्तर प्रदेश
ने उसे खारिज कर दिया यह तस्वीरें अक्सर

देखने को मिलती रही हैं योगी आदित्यनाथ एक
ऐसी स्थिति बन चुके हैं दिल्ली के लिए
जिसे ना वह हटा सकते हैं ना ही गले लगा
सकते हैं लेकिन योगी आदित्यनाथ अपने अंदाज
में चल रहे हैं हाल ही में आपने देखा कि

अयोध्या में प्रभु राम की प्राण प्रतिष्ठा
के समारोह में योगी आदित्यनाथ कैमरे से
कहीं दूर दिखाई दिए दूर क्या कैमरे के
फ्रेम में दिखाई नहीं दिए यहां पर जो पूरा
शोबिज था वह सिर्फ और एक सिर्फ एक व्यक्ति

के लिए था और वह है प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी हालांकि प्राण प्रतिष्ठा की पूरी
प्रक्रिया तमाम कई दिनों से कई लोगों
द्वारा की जा रही थी लेकिन प्राण प्रति
प्रतिष्ठा के नाम का पूरा क्रेडिट जो है

वह मोदी जी को मिला है ऐसे में योगी
आदित्यनाथ अंदर ही अंदर कहीं ना कहीं केलस
करर रह गए कि भगवा धारण करने के बाद भी
गोरखपुर पीठ मठ के महंत होने के बाद भी

उन्हें इसका कोई ऐसा बड़ा सौभाग्य या
क्रेडिट नहीं मिल पाया है लेकिन योगी
आदित्यनाथ शांत हैं उनकी खामोशी को एक
बड़ा इशारा समझिए वह जान रहे हैं कि उनके

साथ क्या हुआ है और इस खामोशी के बाद वह
क्या करेंगे यह भी एक बड़ी बात है लेकिन
योगी आदित्यनाथ कब तक बचेंगे यह भी एक
बड़ा सवाल है दर असल दिल्ली इस वक्त उत्तर

प्रदेश पर नजर लगाए बैठी है राम मंदिर के
समारोह के दौरान कितने काम किस तरह से हुए
कितने सवाल उठे इस सब की पूरी रिपोर्ट
दिल्ली के पास है और दिल्ली इस वक्त उत्तर

प्रदेश की पूरी रिपोर्ट अपने साथ लिए बैठी
है कि आखिरकार किस तरह से उत्तर प्रदेश
सरकार जो है वह दिल्ली की कितनी मदद कर
रही रही है दिल्ली का मतलब आप समझ रहे हो
ना दिल्ली का मतलब प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी से है और साथ ही साथ अमित शाह से है
अमित शाह किसी तरह से यह चाहते हैं कि
योगी आदित्यनाथ जो हैं वह उनके कंट्रोल
में आ जाए लेकिन योगी आदित्यनाथ भी हटी

हैं उन्होंने भी ठान रखी है कि किसी के
कंट्रोल में आए ना आए इनके कंट्रोल में तो
कतई नहीं आएंगे इसलिए योगी आदित्यनाथ इस
वक्त लखनऊ को पकड़ कर बैठे हैं क्योंकि

उन्हें मालूम है कि 2024 का चुनाव अब ठीक
सामने है 2024 का यह जो चुनाव है महज चार
महीने में जिस तरह से पूरी तस्वीर साफ हो
जाएगी उसके बाद योगी आदित्यनाथ अपनी आगे

की रणनीति तय करने वाले हैं लेकिन तब तक
के लिए दिल्ली ने भी यह सोच लिया है कि
शांत रहे इस वक्त योगी आदित्यनाथ को
छेड़ना उनके लिए मुश्किल पैदा कर सकता

है क्योंकि इस वक्त दिल्ली के लिए जरूरी
है कि उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 70
का आंकड़ा वो जरूर पार करें और 70 के
आंकड़े को पार करने के लिए जरूरी है कि वह

वहां के सूबे के मुख्यमंत्री जो हैं उनसे
कोई भी पंगा कम से कम ना ले अभी दिल्ली ने
तय किया है कि कुछ वक्त के लिए वह शांत
रहेगी 6 महीने के बाद एक बार फिर अगर

स्थितियां दिल्ली के कब्जे में रहती हैं
तो फिर वह उत्तर प्रदेश पर एक बड़ा विचार
करेगी एक बड़ा फैसला लेगी और यह फैसला कुछ
इस तरह का होगा जिसके बाद उत्तर प्रदेश की
पूरी की पूरी तस्वीर बदल

जाएगी उत्तर प्रदेश में फिर से बीजेपी
कितनी सरकार बना पाएगी या फिर यह मौका
किसी और को मिलेगा या फिर योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री के पद के पास ही रहेंगे ऐसी

पूरी तमाम तैयारियां जो हैं वह दिल्ली ने
कर ली हैं दिल्ली यह फैसला अब टाल कर बैठी
है कुछ वक्त के लिए उन्होंने योगी
आदित्यनाथ को नहीं छेड़ने का मन बना लिया
है लेकिन बावजूद इसके प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी की कैमरा प्रेम को लेकर के
जो कसक इस वक्त चुबी है योगी आदित्यनाथ
में व भी कम नहीं है लगातार उन्हें इस
स्थिति का सामना करना पड़ रहा है कि कैसे

प्रशासन शासन को लगाकर जो तस्वीर उन्होंने
बनाई उससे वह खुद गायब रहे या यह कहे कि
उन्हें उसमें आने नहीं दिया गया ऐसे में
योगी आदित्यनाथ य जानते हैं कि ताकत बहुत

बड़ी चीज है जो उनके पास है तो लेकिन
उन्हें वह अधूरी महसूस हो रही है ऐसे में
दिल्ली आकर के बड़ी ताकत को हाथ में लेने
की उनकी कोशिश रहने वाली है लेकिन वह इतना
आसान नहीं है क्योंकि अब उनका पूरा सामना

जो है उन लोगों के साथ है जो कि इस ताकत
को चलाने में बनाने में छीनने में इनसे कई
गुना ज्यादा महारत हासिल कर चुके हैं और
इसे साबित भी कर चुके हैं ऐसे में योगी
आदित्यनाथ भी इस वक्त शांत है वो जानते

हैं कि इस वक्त उनका चुप रहना और उत्तर
प्रदेश
में अंदर ही अंदर देश के समीकरण को कैसे
मैनेज करना है और किस चाल से क्या चलना है
यह देखना होगा क्योंकि मैं आपको बता दूं
कि किस तरह केशव प्रसाद मौर्या अपना चुनाव

हारे और किस तरह से और भी कई दिग्गज अपना
चुनाव हारे यहां तक कि अगर हम बात करें
बनारस में जब चुनाव हो रहे थे खास तौर से
विधानसभा चुनाव की अगर हम बात करें उस
वक्त में कैसे वहां पर भी बीजेपी को अच्छी

खासी मशक्कत करनी पड़ी ऐसे में आपके लिए
यह इशारा काफी है समझने को कि योगी
आदित्यनाथ दिल्ली की अंदर खाने तो कम से
कम कोई मदद नहीं करते रहे हैं और अपने
प्रतिद्वंदी को भी उनके गढ़ में हराने में

उन्हें महारत हासिल हो रही है योगी
आदित्यनाथ जिस तरह से एक-एक करके चाल चल
रहे हैं उसका अंदाजा दिल्ली को पूरी तरह
से है दिल्ली जानती है कि किस तरह से अगली
चाल को चलना है ऐसे में योगी आदित्यनाथ का

दिल्ली बुलाने का फैसला कुछ वक्त के लिए
टाल देना ही दिल्ली के लिए बेहतर हो गया
है शायद इसीलिए उन्होंने इस फैसले को लेने
में ज्यादा जरा भी देरी नहीं ली है सर यह
उत्तर प्रदेश की जो राजनीति है बारबार

दिल्ली के साथ एक कसक सी महसूस करती है
लेकिन योगी आदित्यनाथ जो कि लगातार सूबे
में पकड़ बनाए हुए हैं कि उन्हे वहां से
कोई ना हिला सके लेकिन 2024 के बाद कितना
टिक पाएंगे वो उत्तर प्रदेश

में देखिए टिकना तो उन्हें अभी भी नहीं
चाहिए था
ये उनका जोड़ तोड़ है और थोड़ा सा गुजरात
ी अभी उनका जो वस्त्र है और उत्तर प्रदेश
में आरएसएस द्वारा मुझे याद है बहुत अच्छी

तरीके से कि वो प्रधान साब को मनोज सिना
को मुख्यमंत्री लगभग बना दिया गया था
लेकिन तभी योगी जी ने फोन किया मोहन भागवत
को और मोहन भागवत ने एक सीट मांगी आरएसएस

बना दिया मुख्यमंत्री तो यह वैसे जिस ढंग
से मोदी पैराशूट से आए ये भी पैराशूट से
ही आए लाक उन्होने सांसद का चुनाव लड़ा
लेकिन एक चीज है कि ये ठेट स्वभाव के है

और अखल बन जाते हैं कई बार जो राजनीति में
फ्लेक्सिटी होती है ना वो इनको जो है समझ
में नहीं आती उन्हे यह समझ में आना चाहिए
मैं योगी जी के लिए बोल रहा हूं य तो
गुजरात काभी अमित शाह और मोदी लोग तो एक

तानाशाह की तरह बिहेवियर करते ही है लेकिन
कम से कम प्रांतीय नेताओं को शिवराज सिंह
चौहान को मैं बोल सकता हूं कि इतना
फ्लेक्सिबल होना चाहिए कि वहां से अगर कुछ

कहा जाए तो वो माना जाना चाहिए मैं एक दो
उदाहरण नीता जी आपको दे रहा हूं सबसे पहले
टकरा हट योगी और मोदी में कहां से शुरू
हुई योगी को मतलब मोदी जी ने य केंद्र
सरकार से जो उनके निकटतम व्यक्ति थे

अरविंद कुमार शर्मा उनको भेजा कि भाई इनको
आप वहां रख लीजिए और अपने साथ मंत्री बना
लीजिए और एमएलसी बना के मंत्री बना लीजिए
लेकिन योगी जी ने साब मना कर दिया क्यों
मना कर दिया देखिए वो वो वक्त था जब उनको

लोगों ने चढ़ाया हुआ था दिमाग खराब था
उनका कि अब अगले प्रधानमंत्री आप ही है और
चढ़ाने वाले कौन थे आप भी उन्हे जानती मैं
भी जानता हूं मैं तो नाम भी दोहरा दे रहा
हूं अवनीश अवनीत कुमार

व मालनी अवस्थी जो गायिका है उनके पति
बड़े शालीन आदमी है और आईस अब तो रिटायर
हो गए वो और दूसरा नवनीत स जो सूचना सचिव
थे इन लोगों ने जो विज्ञापन के मैटर बनाए

थे अखबार के लिए ंड कंपनी ने तो इन
बिल्कुल सिद्ध कर दिया था मोदी जी के बाद
अब मोदी जी जाएंगे और उसके बाद आप ही
प्रधानमंत्री बनेंगे क्योंकि भगवाधारी
केवल आप ही है इस देश में और ये इन्होंने

मान लिया था तभी ये बड़ा रिड होकर बड़े ही
रूड होकर उन्होंने केंद्र के तमाम निर्णय
अस्वीकार करना तो अरविंद कुमार शर्मा और
खाली निर्णय नहीं स्वी वो किया निर्णय के

अलावा इन्होंने क्या किया आपको विनीता जी
थोड़ा याद दिला द टाइम मैगजीन में टाइम
मैगजीन में मैनिपुलेट करके योगी को कवर
पेज में लाया
इंडिया टूडे में मैनेज करके और और इसके कई

आए इसका हम लोगों ने सुना हम लोग के पास
हैके टे जो सूचना के उस समय के जो सचिव थे
उन्होंने किसी को बुला के बोला कि भाई
हमें किसी ना किसी तरीके से हेड टाइम में
हेड कवर पेज योगी

चाहिए तो यह सारी चीज टेप हुई और वायरल
हुई थी तो इन्होने पूरी तरीके से इंडिया ट
क सब जगह उन्होने नवनीत सगल ने इनको

बजट उत्तर प्रदेश की सरकार तो आप देखिए
विज्ञापन पर योगी ने कितना खर्च किया ये
आगे आपको पता चलेगा क्योंकि ये कब जाएंगे
इसके दिन करीब आ ग एक तो और बातें हुई ि
अधानी को कोई छेड़ दे ये जो है उनको

बर्दाश्त नहीं है मोदी जी को ये तो कतई
बर्दाश्त नहीं मुझे अचानक जब आप से अभी
बात हो रही है तो मुझे याद आया कि इन्होने
कई हजार करोड़ का अडानी का एक ऑर्डर था
बिजली ऑटोमेटिक बिजली मीटर का 00 रप का एक

मीटर रानी जी दे रहे थे उत्तर प्रदेश को
और वो ओके हो गया था लेकिन अचानक जाने
क्या बात हुई और एकदम योगी जी
ने जो उस समय सब हिन व की रिपोर्ट आई थी
उसम पूरा देश जो है अटानी के खिलाफ सोच

रहा था आज भी सोचता है उस समय योगी भी अनी
के सोने लगे देखिए कुछ पॉइंट है जो जो
बकुल मोदी जी के आज तक दिमाग में है
इन्होंने अडानी का ऑर्डर कैंसिल

किया जो लोग है वो पीएम घोषित करने के
इनके मूड में आ गए तो ये बहुत सारी चीजों
और और एक चीज आपको भी पता है और हम सब
लोगों को पता है कि गुजरात लाभी यानी मोदी
और अमित शाह का एक सबसे बड़ा एक एक काम
करने का तरीका क्या

या तो व आपको खत्म कर देंगे वसुंधरा राजे
बना देंगे या आपको रमन सिंह बना देंगे या
फिर 204 के लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर
प्रदेश में मुख्यमंत्री रहेंगे या उन्हें

दिल्ली बुला लिया जाएगा उनके कद को काटा
जा रहा है या बढ़ाया जा रहा है किस तरह की
तस्वीर इस दिख रही है सर देखिए 204 का
इलेक्शन तक तो इनको रखना मजबूरी इसलिए

रहेगी क्योंकि गुजरात ला भी बड़ी बड़ी
श्रूट है उसे पता है कि इस समय हम कहीं पर
भी विवाद करेंगे और खासकर 80 लोकसभा सीट
जो उत्तर प्रदेश में है और वहां पर ठाकुर
देखिए ऐसा नहीं है कि अमित शाह और मोदी

मिलकर योगी के पर काटने में लगे हैं लेकिन
एक खबर और भी है मोदी जी को और अमित शाह
को कि जो विधायकों में ठाकुर लोग है जो
राजपूत है जिनम प्रमुख इनके साथ हुए दो
तीन नाम मैं आपको बताऊ ज्यादा क्यों विचार

को तकलीफ दी जाए क्योंकि उनके पीछे भी
मोदी जी पड़ जाएंगे जैसे दया शंकर सिंह है
दया शंकर सिंह है दूसरे राजेश्वर सिंह है
लखनऊ से एमएल है है ना ये तमाम जो इनकी

प्रधानमंत्री का एलिमेंट बनाकर अपने आप को
आगे रख रहे हैं ये सारी बातें अमित शाह तक
है और जब अमित शाहने देखिए मैं आपको थोड़ा
जरूर बता रहा हूं 24 तक ही जा रहा हूं कि

24 पे जाने के पहले अमित शाह ने क्या किया
मोदी ने क्या किया वो नहीं अमित शाह ने
क्या किया दव फरंगी जो फर्स्ट थे
महाराष्ट्र में उनको सेकंड कर दिया नितिन

ककरी जो देश में सेकंड रहे होंगे उनको
थर्ड फोर्थ सि प हटा के रख दिया और
वसुंधरा राजे को ही एकदम खत्म कर दिया
शिवराज सिंह कुसवा को सिवाड़ा से एमपी
लड़ने प मजबूर कर दिया ऐसे जो उन्होंने जो

प्रधान मंत्री मोदी के बाद वे केवल अपना
नाम चाहते हैं अमित अमित शाह देखि यही
किया था उन्होने लाल अवानी ने लाल अवानी
अटल बिहारी वाजपेई के समय में
सिर्फ मंत्री थे और प्रधानमंत्री केवल अटल

बिहारी बाजपे थी तो उन्होने उनको भी लोगों
ने समझाया और अंत में उन्होने अटल बिहारी
बाजपे पर दबाव डाला और अपना नाम उप
प्रधानमंत्री के रू रू में करवाया तो हो

सकता है देखिए एक
चेंज अमित शाह चाहते हैं कि मोदी तो
प्रधानमंत्री है फिलहाल मैं उ
प्रधानमंत्री के रूप में एक्टिव हूं और
अगले प्रधानमंत्री के रूप में जितने भी

नाम है वो सब कट जाने चाहिए तो 2024
के एक चीज और मैं बता देता हूं आपको 24 के
संदर्भ में ही बता रहा हूं योगी जी ने
संजय शेर पुरिया और उसके अलावा नोडा में

एक रहने वाले अमित शाह के फंडर है इन दो
को इन्होंने ये काफी जो है हाई कमांड के
खिलाफ में काम करने की कोशिश की और अमित
शाह ने तो खुले आम हमने आपने देखा आपको भी
संकेत मिलते हैं ना हम सबको मिलते हैं की

केशव मौर्या मुझे याद है बजेश पाठक दूसरे
उप मुखमंत्री है वो अयोध्या चलने के लिए
हेलीकॉप्टर लेकर इनके पास
गए केशव मौर्या के पास मगर केशव मौर्या
योगी के अगल बगल बैठने को नहीं तैयार केशव

मौर्य आपकी जानकारी के लिए मंत्र मंडल की
बैठकों में शामिल नहीं होते हैं और
अयोध्या भी नहीं है तो ये इन्होने एक
समानांतर में बोल रहा था गुजरात का या तो
आपके समानांतर व्यक्ति खड़ा कर देंगे या

आपको मिटा द तो इन सारी चीजों में रहे तो
204 जैसे ही आ रहा है तो
इनका जो इनके लोग है उनको टिकट नहीं मिल
रही है धीरे धीरे धीरे मोदी जी ने अगर तीन
प्रांत जीत लिए तो उनका कद बढ़ गया अब

दबाव डालने की स्थि में योगी नहीं है
इसलिए योगी को पता है जो उनके दो चार टिकट
उनको अ में मिल जाए तो वो मिल जाए और अब
हम वो भी समझ गए हमारी विदाई की बेला है
अब यहां यह समझ लीजिए चुनाव जीते या

हारे अगर मोदी जी जीतते हैं तो भी ये जाने
वाले कोई दूसरा आएगा सब आए ना दूसरे वो
साय आए मोहन यादव म दे में आए और शर्मा जी
आ गए राजस्थान में लोग बदल ही रहे हैं तो

योगी को क्यों रखेंगे जीतने के बाद तो
रखेंगे नहीं और जहां तक मेरा अपना ख्याल
है कि सरकार केंद्र में इंडिया एलायस की
आएगी और जब इंडिया एलायस की आएगी उस

समय मोदी मोदी के सामने योगी अपने आपको
महत्त्वपूर्ण सिद्ध करेंगे तो या तो चुनाव
के शुरुआत में ही इनको हटा दिया जा सकता
या फिर जैसे ही चुनाव खत्म हो चुनाव
परिणाम आए उसके पहले चुनाव का परिणाम आने

के पहले मुझे लगता है की योगी को हटा दिया
जाएगा और उनकी जगह केशव मर और बहाना एक य
है ओबीसी के वर्ग से आना चाहिए य राजत है
और अमित शाह ने बना लिया है अभी ओबीसी का

राहुल गांधी ने और नीतीश कुमार ने मैटर
उठाया है दे में अभी यहां से राजपूत
मुख्यमंत्री हटा के केशव मौर्य को बनाना
चाहिए मुख्यमंत्री अब ए दो या तीन मौके है

या तो नामांकन के बाद तो नहीं हटाएंगे
क्योंकि इनका वोट प्रभावित होगा और दूसरा
तो इलेक्शन होने के तुरंत बाद हटा देंगे
या परिणाम आने के बाद हटाएंगे मगर इनका
योगी जी की विदाई की

बरवेल य जाए बिल्कुल त है क्योंकि तरह से
योगी आदित्यनाथ पहले भी दिल्ली की मर्जी
के खिलाफ अपने कई काम करवाते रहे हैं ऐसे
आगे में कितने सक्सेसफुल हो पाएंगे उसमें

कद में थोड़ी सी गिरावट यहां पर चीजों में
आ रही है क्योंकि उनके सामने की लॉबी काफी
ज्यादा मजबूत हो रही है और अगर 204 में
दिल्ली ने देश में नंबर इकट्ठे कर लिए तो
शायद योगी आदित्यनाथ की ना चले लेकिन अगर

यहीं पर उत्तर प्रदेश में नंबर की अच्छा
गणित योगी आदित्यनाथ के हाथ में मिला तो
फिर उन्हें कोई दिल्ली रोक भी नहीं पाएगी
इसमें भी कोई दोराई नहीं है बहुत-बहुत
शुक्रिया सर थैंक यू सो मच और आप हमसे
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